Ptliladhar Sharma ने यह पोस्ट की।

#मंत्र #महाभिषेक

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।। मोहिनी स्तोत्र ।। सर्वेन्द्रियाणां प्रवरं विष्णोरसं च मानसं तदेव कर्माणां वीजं तदुद्यव नमोस्तुते स्वयमालाहि भगवन् ज्ञान रूपा महेश्वर नमो ब्रह्म जगत्स्रष्टा तदुद्ाव नमोस्तुते ।।2।। सर्वाजित् जगज्जेता जीव जीव मनोहर रति विजरति स्वामिन् रतिप्रिय नमोस्तुते ।।3।। शश्वघोषि दधिष्टान योषित्प्राणाधिका प्रिया । योषिद्वाहन योषास्त्र योषिद्वन्द्यो नमोस्तुते ।।4।। प्रतिसाद्यकराशेष रूपाधार गुणाश्रय । सुगन्धिवातसचिव मधुमित्र नमोस्तुते ।।5।। शश्वधानिकृता धारस्त्री सन्दर्शन् वर्द्धन । विदग्धानां विहरिणां प्राणान्तक नमोस्तुते ।16।। अकरयायेषुतेनर्थस्तेषां ज्ञान विनाशनं । अनूहरूप भक्तेषु कृपासिन्धो नमोस्तुते, 17।1 तपस्विनां च तपसां विघ्नवीजावलीलया । मनः सकामं मुक्तानां कर्तुशशु नमोस्तुते ।।8।। तपसाध्याश्चाराध्याश्च सदैव पाञ्चभौतिकाः । पञ्चेन्द्रिय कृताधार पञ्चबाण नमोस्तुते ।191। मोहिनी सेव मुक्त्वातु मनसासाविधे: पुरः । विररमनम्रवक्रावभूवध्यानतप्रस ।।10।। उत्तुंमध्यन्दिनेकान्ते स्तोत्रमेतन्मनोहरं । पुरा दुर्वाससादत्तं मोहिन्यै गन्धामादेन ।।।1। स्तोत्रमेतन्महापुण्यं कामी भक्त्या यदा पठैत। अभीष्ठलभते नूनं निस्फलको भवेद् ध्रुवम् ।।12।। चेष्टा च कुरूते कामः कदाचिदपितं प्रियं । भवेदरोगी श्रीयुक्तः कामदेव समप्रभः ॥13।। इति सम्मोहनतन्त्रे मोहिनी स्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।

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