🌼क्षमा करना🌼 -संसार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जिस में अपराध बोध न हो ,और जिसने कोई गलती न की हो । भगवान अपनी शरण में आने वाले हरेक व्यक्ति की रक्षा करता है । इसलिए भगवान के चित्र के सामने या मन में भगवान से शक्ति, और विल पावर बढ़ाने की कामना करें । -दूसरों के प्रति द्वेष, घृणा या स्वयं के प्रति ,अपराध बोध इस से हम स्वयं को ही हानि पहुंचाते हैं । -दूसरों से आहत हो कर हम स्वयं को अधिक अशांत करते हैं । -जब हम स्वयं अशांत होंगे तो अपने आस पास ,तथा विश्व में शांति स्थापन की बात कैसे कर सकते हैं ! -कुछ उंच पदों पर बैठी मनुष्यात्माएं बदले की भावना से काम करती हैं, वह आप की आवाज को दबा देगीं । आप ऐसों के प्रति भी कल्याण का भाव रखो । अपने सकारात्मक काम में लगे रहो । ऐसों को सरकार या भगवान समय आने पर सुधार देगा । वो तब तक मानसिक रूप से पीड़ित रहेगी चाहे उनकी कितनी ही आरतियाँ उतारी जा रही हों । याद रखो गॉड इज ट्रुथ । मन में निष्कपट भाव नहीं तो शांति नहीं आएगी चाहे कितने ही कोई आडम्बर रच ले । -ऐसी स्थिति से बचने के लिये आप अपने को पढ़ने में व्यस्त कर दो । -क्षमा करके भी प्राय व्यक्ति उन बातों को याद रखता है, जिस से मन अशांत रहता है । भूलना आसान नहीं है परंतु भूलने के सिवा कोई चारा नहीं है । -अन्याय करने वाले के सम्बंध में किसी से भी अप शब्द न कहें , उसके लिये अच्छा बोले । नहीं तो आप के अपशब्द उस तक पंहुचा दिये जायेंगे जिस से समस्या बढ़ जायेगी । -आप अच्छे काम करने में लगे रहो, उचित सहयोग देते रहो, ज़्यादा से ज्यादा ज्ञान अर्जित करने में लगे रहो, दोषी व्यक्ति को बदलने का यह सब से कारगार तरीका हैं। ओम शांति ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

🌼क्षमा करना🌼

-संसार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जिस में अपराध बोध न  हो ,और जिसने कोई गलती न  की हो ।  भगवान अपनी शरण में आने वाले  हरेक व्यक्ति की रक्षा  करता है ।  इसलिए  भगवान के चित्र के सामने  या मन में भगवान से शक्ति, और विल  पावर बढ़ाने की  कामना करें । 

-दूसरों के प्रति  द्वेष,  घृणा  या स्वयं के प्रति ,अपराध बोध इस से हम स्वयं को ही हानि पहुंचाते  हैं  । 

-दूसरों से आहत हो कर हम स्वयं को अधिक अशांत करते हैं । 

-जब हम स्वयं अशांत होंगे तो अपने आस पास  ,तथा विश्व में शांति स्थापन की बात कैसे  कर सकते हैं  !

-कुछ उंच  पदों पर बैठी मनुष्यात्माएं बदले की भावना  से काम  करती हैं, वह आप की आवाज को दबा  देगीं ।  आप ऐसों के प्रति भी कल्याण  का भाव  रखो ।  अपने सकारात्मक काम  में लगे रहो  ।  ऐसों को सरकार  या भगवान  समय आने पर सुधार  देगा । वो तब तक  मानसिक  रूप से पीड़ित रहेगी चाहे  उनकी कितनी ही आरतियाँ  उतारी  जा रही  हों ।  याद रखो गॉड  इज ट्रुथ ।  मन में निष्कपट भाव  नहीं तो शांति नहीं आएगी  चाहे कितने ही कोई आडम्बर रच ले । 

-ऐसी स्थिति से  बचने के लिये आप अपने को पढ़ने में व्यस्त कर दो ।

-क्षमा  करके भी प्राय  व्यक्ति उन बातों को याद रखता  है,  जिस से मन अशांत रहता  है । भूलना आसान नहीं है परंतु भूलने के सिवा  कोई चारा  नहीं है । 

-अन्याय करने वाले  के सम्बंध में किसी से भी अप शब्द न  कहें ,  उसके लिये अच्छा बोले ।  नहीं तो आप के अपशब्द उस तक पंहुचा  दिये जायेंगे जिस से समस्या बढ़ जायेगी । 

-आप अच्छे काम करने में लगे रहो,   उचित सहयोग देते रहो,  ज़्यादा  से ज्यादा  ज्ञान अर्जित करने में लगे रहो,  दोषी व्यक्ति को बदलने का यह सब से कारगार  तरीका हैं। ओम शांति
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कामेंट्स

Rajpal singh Jan 19, 2021
jai shree krishna Radhe Radhe ji good night ji 🙏🙏🌷🌷🙏🙏

Ajit sinh Parmar Jan 19, 2021
जय जिनेद् र।धे र।धे शुभ र।त्रि र।धेकृषण आप हरहमेशकुशलरहो र।धेकृषण की कृपा दृष्टि आप पर हरहमेश बनी रहे जी 🎋🌹🎋🌹🎋🌹🎋🌹🎋🌹🎋🌹

🌻🌹 Preeti Jain 🌹🌻 Jan 19, 2021
* जय श्री राम *🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩💐💐🙏🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 " राम नाम बड़ा सुखदायी जो सुमिरै वो भवसागर तर जायी " " जय श्री राम जय बजरंगबली हनुमान " शुभ रात्रि वंदन जी 🙏 आप सदा स्वस्थ रहें खुश रहें सुरक्षित राहे जय श्री राम 🙏जय जिनेंद्र

Ramesh mathwas Jan 19, 2021
@preetijain1 meri Pyari Bdi Bahana Rain ji Jai Shri Ram ji Jai Shri Ram ji Baba Bholenath ji kripa Dristi aap par Hames Bni Rahe ji

rakesh dubey Jan 19, 2021
Jai shri ram🚩🚩 Jai shri radhe krishna ji🌷 GOOD night ji💐💐💐

Ragni Dhiwar Jan 19, 2021
🥀 शुभ रात्रि मेरी प्यारी बहन🥀आप सदैव प्रसन्न रहें आपका हर पल सुंदर व मंगलमय हो 🥀

bhagwan gupta Jan 19, 2021
dil se aashish chahte hai sakun apneaap aata hai fir prabhu ki photo samne rakhne ki jarurat hi nahi hoti esa koi vishay nahi jiska samadhan nahi visvas to karo us prabhu per asanti dhundne se bhi nahi milegi shubh ratri vandan

शान्ति पाठक Jan 19, 2021
🌷🙏जय श्री राधे कृष्णा जी🙏शुभ रात्रि प्यारी बहना जी🌷 आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय हो🌷ठाकुर जी की असीम कृपा आप व आपके परिवार पर सदैव बनी रहे 🌷आपका आनेवाला हर दिन हर पल खुशियों से परिपूर्ण रहे🌷जय जिनेन्द्र प्यारी बहन🌷🙏🌷

Rajesh Lakhani Jan 19, 2021
JAI SHREE KRISHNA RADHE RADHE SHUBH RATRI BEHENA THAKOR JI KI KRUPA AAP PER OR AAP KE PARIVAR PER SADA BANI RAHE AAP KA AANE WALA HAR PAL SHUBH OR MANGALMAYE HO AAP OR AAP KA PARIVAR SADA SWASTH RAHE SUKHI RAHE BEHENA JAI SHREE KRISHNA

R.S.PARMAR⚡JAY MAHAKAL Jan 19, 2021
💐🌸🌹 शुभ प्रभात स्नेह वंदन जी 🌹🌸💐 आप हर पल खुश रहे स्वास्थ रहे और सदैव मुस्कराते रहे और आप का दिन मंगलमय हो 🙏🚩 जय श्री राधे राधे 🚩🙏

Ajit sinh Parmar Jan 20, 2021
🌺गुड मॉर्निंग 🌺🎋 🎋🌺र।धेकृषण 🎋🌹🎋🌹🎋🌺🌺

Shah Mahesh Jan 20, 2021
🍀 💐જય શ્રી કૃષ્ણ 🍀 💐 good night 🌹🙏🏻

Rajesh Lakhani Jan 20, 2021
OM SHREE GANESHAY NMAH SHUBH PRABHAT BEHENA GANPATTI BAPPA KI KRUPA AAP PER OR AAP KE PARIVAR PER SADA BANI RAHE AAP KA DIN SHUBH OR MANGALMAYE HO AAP OR AAP KA PARIVAR SADA SWASTH RAHE SUKHI RAHE BEHENA PRANAM

sanjay Sharma Jan 20, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जय श्री सीताराम जय श्री गणेश ओम् गण गणपतए नमः शुभ प्रभात जी मेरी बहन आप कैसे हैं बहन आप सदा खुश रहिए और जीवन में सदैव कामयाबी के शिखर पर अग्रसर रहे ईश्वर मेरी बहन के साथ अपना आशीर्वाद सदैव बनाए रखना आप सदा स्वस्थ और प्रसन्न रहे

Ravi Kumar Taneja Jan 20, 2021
ऊँ वक्रतुंड महाकाय कोटि सूर्य समप्रभनिर्विघ्नम कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा 🌹🌸🌹 श्री गणपति महाराज की कृपा दृष्टि आप पर हमेशा बनी रहे आप का हर पल मंगलमय हो 🥀🌺🥀सुप्रभात वंदना जी🦚🦢🙏🌷🙏🌷🙏🦢🦚

लक्ष्मी नारायण ♥ एक बार भगवान नारायण लक्ष्मी जी को बोले, “लोगो में कितनी भक्ति बढ़ गयी है …. सब “नारायण नारायण” करते है!” ..तो लक्ष्मी जी बोली, “आप को पाने के लिए नहीं!:-) मेरे को पाने के लिए भक्ति बढ़ गयी है!” ..तो भगवान बोले, “लोग “लक्ष्मी लक्ष्मी” ऐसा जप थोड़े ही ना करते है!” ..तो माता लक्ष्मी बोली की , “विश्वास ना हो तो परीक्षा हो जाए!" 🙂 ..भगवान नारायण एक गाँव में ब्राम्हण का रूप लेकर गए…एक घर का दरवाजा खटखटाया…घर के यजमान ने दरवाजा खोल कर पूछा , “कहाँ के है?” तो भगवान बोले, “हम तुम्हारे नगर में भगवान का कथा कीर्तन करना चाहते है…” ..यजमान बोला, “ठीक है महाराज, जब तक कथा होगी आप मेरे घर में रहेना…” …गाँव के कुछ लोग इकठठा हो के सब तैय्यारी कर दी….पहेले दिन कुछ लोग आये…अब भगवान स्वयं कथा करते तो गर्दी बढ़ी! 2रे 3 रे दिन और भी भीड़ हो गयी….भगवान खुश हो गए..की कितनी भक्ति है लोगो में….! लक्ष्मी माता ने सोचा अब जाने जैसा है ! 🙂 ..लक्ष्मी माता ने बुढ्ढी माता का रूप लिया….और उस नगर में पहुंची…. एक महिला ताला बंद कर के कथा में जा रही थी की , माता पहुंची! बोली, “बेटी ज़रा पानी पिला दे!” तो वो महिला बोली,”माताजी , साढ़े 3 बजे है…मेरे को प्रवचन में जाना है!” ..लक्ष्मी माता बोली..”पिला दे बेटी थोडा पानी…बहोत प्यास लगी है..” तो वो महिला लोटा भर के पानी लायी….माता ने पिया और लोटा लौटाया तो सोने का हो गया था!! 🙂 ..महिला अचंबित हो गयी की लोटा दिया था तो स्टील का और वापस लिया तो सोने का! कैसे चमत्कारिक माता जी है!..अब तो वो महिला हाथा-जोड़ी करने लगे की , “माताजी आप को भूख भी लगी होगी ..खाना भी खा लीजिये..!” ये सोचे की खाना खाएगी तो थाली भी, कटोरी भी सोने की हो जाए!! माता लक्ष्मी बोली, “तुम जा बेटी, तेरा टाइम हो गया!” ..वो महिला प्रवचन में तो आई तो सही …लेकिन आस-पास की महिलाओं को सारी बात बतायी…. ..अब महिलायें वो बात सुनकर चालु सत्संग में से उठ के गयी !! दुसरे दिन से कथा में लोगो की संख्या कम हो गयी….तो भगवान ने पूछा की , “लोगो की संख्या कैसे कम हो गयी?” …. किसी ने कहा एक चमत्कारिक माताजी आई है नगर में… जिस के घर दूध पीती तो ग्लास सोने का हो जाता…. थाली में रोटी सब्जी खाती तो थाली सोने की हो जाती!… उस के कारण लोग प्रवचन में नहीं आते..” ..भगवान नारायण समझ गए की लक्ष्मी जी का आगमन हो चुका है! इतनी बात सुनते ही देखा की जो यजमान सेठ जी थे, वो भी उठ खड़े हो गए….. खिसक गए! ..पहुंचे माता लक्ष्मी जी के पास! बोले, “ माता मैं तो भगवान की कथा का आयोजन करता और लक्ष्मी जी माता आप ने मेरे घर को छोड़ दिया!” माता लक्ष्मी बोली, “तुम्हारे घर तो मैं सब से पहेले आनेवाली थी!लेकिन तुम्हारे घर में जिस कथाकार को ठहेराया है ना , वो चला जाए तो मैं अभी आऊं !” सेठ जी बोला, “बस इतनी सी बात!… अभी उन को धरम शाला में कमरा दिलवा देता हूँ!” ..जैसे ही महाराज कथा कर के घर आये तो सेठ जी बोला, “महाराज बिस्तरा बांधो!आप की व्यवस्था धरम शाला में कर दी है!!” महाराज बोले, “ अभी 2/3 दिन बचे है कथा के….. यही रहेने दो” सेठ बोला, “नहीं नहीं, जल्दी जाओ!मैं कुछ नहीं सुनने वाला!” ..इतने में लक्ष्मी जी आई , कहा की , “सेठ जी , आप थोड़ा बाहर जाओ… मैं इन से निबट लूँ!” 🙂 माता लक्ष्मी जी बोली, “प्रभु , अब तो मान गए?” 🙂 भगवान नारायण बोले, “हां लक्ष्मी तुम्हारा प्रभाव तो है, लेकिन एक बात तुम को भी मेरी माननी पड़ेगी की तुम तब आई, जब संत के रूप में मैं यहाँ आया!! संत जहां कथा करेंगे वहाँ लक्ष्मी तुम्हारा निवास जरुर होगा…!!” Apna Bana Ke Dekho ddtSposnsor2hed · तीनो लोकन से प्यारी राधा रानी हमारी राधा रानी हमारी राधा रानी हमारी

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👍🌹 राम राम दोस्तों 🌹👍 *दूसरा पहलू* ००००००००००००० एक समय संत प्रात: काल भ्रमण हेतू समुद्र के किनारे गए! समुद्र के किनारे उन्होने एक पुरुष को देखा जो एक स्त्री की गोद में सर रख कर सोया हुआ था । पास में शराब की खाली बोतल पड़ी हुई थी। संत बहुत दु:खी हुए! उन्होने ये विचार किया की ये मनुष्य कितना बेकार हैं! जो प्रात:काल शराब सेवन कर के स्त्री की गोदी में सर रख कर प्रेमालाप कर रहा हैं! थोड़ी देर बाद समुद्र से बचाओ, बचाओ की आवाज आई, संत नें देखा की एक मनुष्य समुद्र में डूब रहा हैं! मगर स्वयं को तैरना नहीं आने के कारण वो संत देखने के सिवाय कुछ नहीं कर सकते थे! स्त्री की गोद में सिर रख कर सोया हुआ व्यक्ति उठा और डूबने वाले को बचाने हेतू पानी में कूद गया! थोड़ी देर में उसने डूबने वाले को बचा लिया और किनारे ले आया! संत विचार में पड़ गए की इस व्यक्ति को बुरा कहें या भला! वो उसके पास गए और बोले भाई तूं कौन हैं और यहां क्या कर रहा हैं? उस व्यक्ति ने उत्तर दिया की में एक मछुआरा हूं और मछली मारनें का काम करता हूं.आज कई दिनों से समुद्र से मछली पकड़ कर प्रात: जल्दी यहां लौटा हूं। मेरी मां मुझे लेने के लिए आई थी और साथ में(घर में कोई दूसरा बर्तन नहीं होने पर)इस दारू की बोतल में पानी ले आई. कई दिनो की यात्रा से में थका हुआ था और भोर के सुहावने वातावरण में ये पानी पी कर थकान कम करने हेतू मां की गोदी में सिर रख कर ऐसे ही सो गया. संत की आंखों में आंसु आ गए की मैं कैसा मनुष्य हूं जो देखा उसके बारे में गलत विचार किया । जिसकी वास्तविकता अलग थी! दोस्तों............ *इसीलिए कहते हैं कानों सुना और आँखों देखा भी झूठ हो सकता है क्योंकि कई बार हम जो देखते हैं वो सच नहीं होता। उसका एक दूसरा पहलू भी हो सकता है,किसी के प्रति कोई निर्णय लेने से पहले सौ बार सोचो.* 👍🌹 जय श्री कृष्णा 🌹👍

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ओम नमः श्री लक्ष्मीनारायण 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏 *भक्त की दरिद्रता* ***************************** जगत−जननी पार्वती ने एक भूखे भक्त को श्मशान में चिता के अंगारों पर रोटी सेंकते देखा तो उनका कलेजा मुँह को आ गया। वह दौड़ी−दौड़ी ओघड़दानी शंकर के पास गयीं और कहने लगीं−”भगवन्! मुझे ऐसा लगता है कि आपका कठोर हृदय अपने अनन्य भक्तों की दुर्दशा देखकर भी नहीं पसीजता। कम−से−कम उनके लिए भोजन की उचित व्यवस्था तो कर ही देनी चाहिए। देखते नहीं वह बेचारा भर्तृहरि अपनी कई दिन की भूख मृतक को पिण्ड के दिये गये आटे की रोटियाँ बनाकर शान्त कर रहा है।” महादेव ने हँसते हुए कहा- “शुभे! ऐसे भक्तों के लिए मेरा द्वार सदैव खुला रहता है। पर वह आना ही कहाँ चाहते हैं यदि कोई वस्तु दी भी जाये तो उसे स्वीकार नहीं करते। कष्ट उठाते रहते हैं फिर ऐसी स्थिति में तुम्हीं बताओ मैं क्या करूं?” माँ भवानी अचरज से बोलीं- “तो क्या आपके भक्तों को उदरपूर्ति के लिए भोजन को आवश्यकता भी अनुभव नहीं होती?” श्री शिव जी ने कहा- “परीक्षा लेने की तो तुम्हारी पुरानी आदत है यदि विश्वास न हो तो तुम स्वयं ही जाकर क्यों न पूछ लो। परन्तु परीक्षा में सावधानी रखने की आवश्यकता है।” भगवान शंकर के आदेश की देर थी कि माँ पार्वती भिखारिन का छद्मवेश बनाकर भर्तृहरि के पास पहुँचीं और बोली- ”बेटा! मैं पिछले कई दिन से भूखी हूँ। क्या मुझे भी कुछ खाने को देगा?” “अवश्य" भर्तृहरि ने केवल चार रोटियाँ सेंकी थीं उनमें से दो बुढ़िया माता के हाथ पर रख दीं। शेष दो रोटियों को खाने के लिए आसन लगा कर खाने का उपक्रम करने लगे। भिखारिन ने दीन भाव से निवेदन किया- "बेटा! इन दो रोटियों से कैसे काम चलेगा? मैं अपने परिवार में अकेली नहीं हूँ एक बुड्ढा पति भी है उसे भी कई दिन से खाने को नहीं मिला है।” भर्तृहरि ने वे दोनों रोटियाँ भी भिखारिन के हाथ पर रख दीं। उन्हें बड़ा सन्तोष था कि इस भोजन से मुझसे भी अधिक भूखे प्राणियों का निर्वाह हो सकेगा। उन्होंने कमण्डल उठाकर पानी पिया। सन्तोष की साँस ली और वहाँ से उठकर जाने लगे। तभी आवाज सुनाई दी- "वत्स! तुम कहाँ जा रहे हो?" भर्तृहरि ने पीछे मुड़ कर देखा। माता पार्वती दर्शन देने के लिए पधारी हैं। माता बोलीं- "मैं तुम्हारी साधना से बहुत प्रसन्न हूँ। तुम्हें जो वरदान माँगना हो माँगो।" प्रणाम करते हुए भर्तृहरि ने कहा- "अभी तो अपनी और अपने पति की क्षुधा शाँत करने हेतु मुझसे रोटियाँ माँगकर ले गई थीं। जो स्वयं दूसरों के सम्मुख हाथ फैला कर अपना पेट भरता है वह क्या दे सकेगा। ऐसे भिखारी से मैं क्या माँगू।" पार्वती जी ने अपना असली स्वरूप दिखाया और कहा- "मैं सर्वशक्ति मान हूँ। तुम्हारी पर दुःख कातरता से बहुत प्रसन्न हूँ जो चाहो सो वर माँगो।" भर्तृहरि ने श्रद्धा पूर्वक जगदम्बा के चरणों में शिर झुकाया और कहा- "यदि आप प्रसन्न हैं तो यह वर दें कि जो कुछ मुझे मिले उसे दीन−दुखियों के लिए लगाता रहे और अभावग्रस्त स्थिति में बिना मन को विचलित किये शान्त पूर्वक रह सकूँ।" पार्वती जी 'एवमस्तु' कहकर भगवान् शिव के पास लौट गई। त्रिकालदर्शी शम्भु यह सब देख रहे थे उन्होंने मुसकराते हुए कहा- "भद्रे, मेरे भक्त इसलिए दरिद्र नहीं रहते कि उन्हें कुछ मिलता नहीं है। परंतु भक्ति के साथ जुड़ी उदारता उनसे "अधिकाधिक दान" कराती रहती हैं और वे खाली हाथ रहकर भी विपुल सम्पत्तिवानों से अधिक सन्तुष्ट बने रहते है।" हर-हर महादेव..!! >>>>>>>>>>>>>>>>>>> 11 >>>>>>>>>>>> प्रभु कृपा की महत्ता आज इस माया से भरे संसार में सत्कर्म करने की इच्छा किसी की नहीं होती है । सब अपनी वासनाओं / इन्द्रियों को पुष्ट करने में लगे रहते हैं । प्रभु कृपा होने पर ही जीव की सत्कर्म करने की इच्छा जागृत होती है । अतः प्रभु कृपा प्राप्त करने के लिए धर्म के मौलिक सिद्धांतो का अनुकरण करते हुए ब्रह्म को धारण करिये l >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> II जय श्रीहरिः II शरणागति क्या है ? शरणागति के 4 प्रकार है --- 1. जिह्वा से भगवान के नाम का जप- भगवान् के स्वरुप का चिंतन करते हुए उनके परम पावन नाम का नित्य निरंतर निष्काम भाव से परम श्रद्धापूर्वक जप करना तथा हर समय भगवान् की स्मृति रखना। 2. भगवान् की आज्ञाओं का पालन करना- श्रीमद्भगवद्गीता जैसे भगवान् के श्रीमुख के वचन, भगवत्प्राप्त महापुरुषों के वचन तथा महापुरुषों के आचरण के अनुसार कार्य करना। 3. सर्वस्व प्रभु के समर्पण कर देना-वास्तव मे तो सब कुछ है ही भगवान् का,क्योंकि न तो हम जन्म के समय कुछ साथ लाये और न जाते समय कुछ ले ही जायेंगे। भ्रम से जो अपनापन बना रखा है,उसे उठा देना है। 4 .भगवान् के प्रत्येक विधान मे परम प्रसन्न रहना-मनचाहा करते-करते तो बहुत-से जन्म व्यतीत कर दिए,अब तो ऐसा नही होना चाहिए।अब तो वही हो जो भगवान् चाहते है। भक्त भगवान् के विधानमात्र मे परम प्रसन्न रहता है फिर चाहे वह विधान मन,इंद्रिय और शरीर के प्रतिकूल हो या अनुकूल।I II ॐ नमो नारायणायः ी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, " जीवन का सत्य आत्मिक कल्याण है ना की भौतिक सुख !" ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, "सत्य वचन में प्रीति करले,सत्य वचन प्रभु वास। सत्य के साथ प्रभु चलते हैं, सत्य चले प्रभु साथ।। " ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, किसी भी गौशाला में जाकर गौ सेवा करे और गोरक्षा की आवाज को समाज में बुलंद करे !गौ माता के जीवन को किसी भी धर्म विशेष के लोगो से इतना खतरा नहीं है जितना काले अंग्रेजो से है जो गौ मांस का निर्यात बढ़ाने के लिए कसाई घरों को अंशदान ( सब्सिडी ) देती है ! इस प्रकार गौवंश समाप्त करने और खेतों से जैविक खाद को गायब कर यूरिआ को बढ़ावा देने का प्रयास सफल हो रहा है ! गौ माता को बचाये और देवताओं का आशीर्वाद एवं कृपा प्राप्त करे ! साथ ही अपने प्रारब्ध ( भाग्य ) में पुण्य संचित करे ! यह एक ऐसा पुण्य है जिससे इहलोक में देवताओ से सुख समृद्धि मिलती है एवं परलोक में स्वर्ग ! 🙏👏🌹🌲🌿🌹 इस घोर कलियुग में वही परिवार सुख पायेगा ! गौमाता को पहली रोटी देकर हरिनाम गुण गायेगा !! दया प्रेम सब जीवों पर करके सेवाभाव अपनायेगा ! गुरूजनों की आज्ञा मान माता पिता के चरण दबायेगा !! गीता रामायण भागवत के द्वारा सोये मन को जगाता हूँ ! भूखों को भोजन पानी देकर पशु पंक्षियों को चुगाता हूँ !! ईष्या,क्रोध ,आलस्य,वैमनष्यता ,बुराई का त्याग करे ! सेवा,प्रेम,करूणा,ममता,दया,क्षमा को अपनाये !! 🙏जय गौमाता जय गोपाल जय गुरूदेव🙏 निवेदन = यदि आप यह सोचते है की देवलोक गौशाला के लेखों को पढ़कर विचारों में " परिपक्वत्ता एवं सुन्दर प्रवृतियों " का आगमन होता है तो हमारे लेखो को दूसरे ग्रुप्स में पोस्ट्स / शेयर करे जिससे दूसरे वंचित रह रहे लोग भी पढ़ सके ! आपको बहुत ही पुण्य प्राप्त होगा ! *संकलित*

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*मौत का भय* दो उल्लू एक वृक्ष पर आ कर बैठे थे। एक ने अपने मुंह में सांप को दबोच रखा था। दूसरा उल्लू एक चूहा पकड़ लाया था। दोनों वृक्ष पर पास—पास बैठे थे —सांप ने चूहे को देखा तो वह यह भूल ही गया कि वह उल्लू के मुंह में है और मौत के करीब है, चूहे को देख कर उसके मुंह में लार बहने लगी। चूहे ने जैसे ही सांप को देखा वह कांपने लगा, जबकि दोनों ही मौत के मुंह मे बैठे हैं। दोनों उल्लू बड़े हैरान हुए। एक उल्लू ने दूसरे उल्लू से पूछा कि भाई, इसका कुछ राज समझे? दूसरे ने कहा, बिल्कुल समझ में आया। पहली बात तो यह है कि जीभ की इच्छा इतनी प्रबल है कि सामने मृत्यु खड़ी हो तो भी दिखाई नहीं पड़ती। दूसरी बात यह समझ में आयी कि भय मौत से भी बड़ा भय है। मौत सामने खड़ी है, उससे यह भयभीत नहीं है चूहा; लेकिन भय से भयभीत है कि कहीं सांप हमला न कर दे। *शिक्षा:-* हम भी मौत से भयभीत नहीं हैं, भय से ज्यादा भयभीत हैं। ऐसे ही जिह्वा का स्वाद इतना प्रगाढ़ है कि मौत चौबीस घंटे खड़ी है, फिर भी हमें दिखाई नहीं पड़ती है और हम अंधे होकर कुछ भी डकारते रहते हैं। *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*shree ganesha namah ji🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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Braj Kishor Dwivedi Feb 26, 2021

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