Jayshree Shah
Jayshree Shah Sep 14, 2017

जैनम् जयति शासनम्

जैनम् जयति शासनम्

स्वयં को देखो,
स्व को जानो :

जगत में आत्मा ही देखने योग्य है और वही दिखाने योग्य है।
बाहर का वैभव न देखने लायक है,
ना दिखाने लायक है।

अतीन्द्रिय निज आत्मा को जानिए।
मैं ज्ञान दर्शन स्वभावी आत्मा
कर्णेन्द्रीय से रहित हूँ।
जाननेवाले स्वभाव को देखो।
उसको चक्षुइन्द्रिय नही है।
जाननेवाला ज्ञायक, आत्म स्वभाव , ज्ञानस्वभाव ही है।
गंध के ज्ञान के लिए घ्रानेन्द्रीय की जरूरत नही है।
घ्राणइन्द्रिय रहित मैं हूँ।
अतीन्द्रिय ज्ञानमयआत्मा को
नाक नही है।
कान रहित, चक्षु रहित, नाक रहित, जिव्हा रहित मैं हूँ।
रसना इन्द्रिय रहित ऐसा अतीन्द्रिय स्वभावी मैं शुद्धात्माहूँ।

स्वयં को देखो।

ज्ञान रूपी आईने में ज्ञानमयात्मा
जानने में आता है, जानता है।स्परशनेंद्रिय से रहित है।
अशरीरी ज्ञानमय है।
शांतचित्त से समान अतीन्द्रिय स्वभाव की अनुभूती करते रहो।

स्वयં को देखो।

इन्द्रिये जड़ है, अचेतन है,
भिन्न - भिन्न स्वभाववाले है।
उसमें मेरे गुणधर्म नही है, उसे जानो।
मैं जड़ इन्द्रियों से, कर्णेद्रिय से,
भावेंद्रीय से भिन्न ऐसा अतीन्द्रिय केवलज्ञान स्वभावी परमात्मा हूँ।

स्वयં को देखो।

परम आनंद के कारणभूत ऐसा अतीन्द्रिय ज्ञान स्वभाव अनादि,
अनंत, सिद्ध और नित्य है।
उस में नित्य रत रहो।
इस ज्ञानमय आत्मा को जानने के लिए कान, आँख,जिव्हा और शरीररूपी पंचेन्द्रिय की जरूरत नही है।
मैं जानने वाला हूँ , जान रहा हूँ।
मैं स्पर्शइन्द्रिय से रहित हूँ।
नित्य स्वरूप में रत रहो।
ज्ञान मय ऐसे आत्म स्वरूप में रत रहो। विषयभोग में रति मत कर।
मैं सिद्ध, सिद्ध परमात्मा हूँ, जानो।
सिद्ध स्वरूप की अनुभूति करो।
इस शरीर की / कर्म की अवस्था
वो मेरा स्वरूप नही है।
मैं इस सर्व से पृथक भिन्न ज्ञान स्वभाव ऐसा सिद्ध स्वरूपी आत्मा हूँ।

स्व को जानो।
ज्ञानमय ऐसे सिद्ध स्वभाव की
अनुभूती करते रहो।
सिद्धोहम ।
ज्ञानानंद स्वरुपोहम।
आनंद स्वरुपोहम।
परमानंद स्वरुपोहम।

अैसे सिद्ध स्वरूपी आत्मा को जानके,
सर्व जीवों का कल्याण हो,

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कामेंट्स

Sunil Kumar Sep 14, 2017
Sari batey thik he lakin jain dharam ko manney wale hi usko kitna amal kartey he yah dhayan dene wali baat he SUNIL JAIN 9313576363

Dhanraj Maurya Oct 16, 2018

Om jai jai Om

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Lotus Pranam Like +89 प्रतिक्रिया 16 कॉमेंट्स • 836 शेयर
Dhanraj Maurya Oct 16, 2018

Om Jai Jai Om

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जब भोजन करने बैठो, तो प्रभु को प्रणाम करके उसका धन्यवाद अवश्य करें ! मैं आपका दिव्य प्रसाद ग्रहण कर रहा हूं मुझे इस लायक बनाए रखना कि मैं अपनी कमाई खाऊं,पाप की कमाई घर में ना लाऊं ,उसमें बेगुनाहों का खून ना हो,किसी के बच्चे का हिस्सा ना मारू,जिसस...

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Aechana Mishra Oct 16, 2018

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Ashish shukla Oct 16, 2018

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Tulsi Like Belpatra +62 प्रतिक्रिया 16 कॉमेंट्स • 366 शेयर
Sushil Dhiman Oct 16, 2018

आठवाँ नवरात्रा'- मां महागौरी माता 🌹
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महागौरी :- माँ दुर्गा का आठवां रूप है महागौरी। देवी पारवती का रंग सावला था और इसी कारन महादेव शिवजी उन्हें कालिके के नाम से पुकारा करते थे। बाद में माता पार्वती ने तपस्या किया जि...

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harshita malhotra Oct 16, 2018

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