श्री बाबा सालासर बालाजी महाराज

 श्री बाबा सालासर बालाजी महाराज

+268 प्रतिक्रिया 10 कॉमेंट्स • 24 शेयर

कामेंट्स

shankar Oct 14, 2017
जयश्री राम

Ravi pandey Oct 14, 2017
jai baba sadasar Ji jai shree Krishna radhe Radhe

shandhya shingh Apr 19, 2019

+5 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 0 शेयर
shandhya shingh Apr 19, 2019

+3 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 1 शेयर

संकट मोचन पवन पुत्र हनुमान जयंती चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक चैत्र पूर्णिमा को ही बजरंगबली का जन्म हुअा था। इस दिन बजरंगबली की विधिवत पूजा करने से शत्रु पर विजय मिलने के साथ ही मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। पवन पुत्र हनुमान को भगवान शिव का 11 वां अवतार माना जाता है। उनका अवतार रामभक्ति और भगवान श्री राम के कार्यों को सिद्ध करने के लिए हुआ था। वे बाल ब्रह्मचारी थे और बचपन से लेकर अपना पूरा जीवन उन्होंने राम भक्ति और भगवान श्री राम की सेवा में समर्पित कर दिया था। हनुमान जी की जन्म कथा हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां अवतार माना जाता है। हनुमान जी के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा के मुताबिक एक बार अमरत्व की प्राप्ति के लिये जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तो उससे निकले अमृत को असुरों ने छीन लिया। इसके बाद देव और दानवों में युद्ध छिड़ गया। इसे देख भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया, जिसे देख देवताओं और असुरों के साथ ही भगवान शिव भी कामातुर हो गए। इस दौरान भगवान शिव ने वीर्य त्याग किया, जिसे पवनदेव ने वानरराज केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया। इसके फलस्वरूप माता अंजना के गर्भ से श्री हनुमान का जन्म हुआ। हनुमान जयंती व्रत और पूजन विधि हनुमान जयंती का व्रत रखने वालों को एक दिन पूर्व ब्रह्मचर्य का पालन करने के साथ ही कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान श्रीराम, माता सीता व श्री हनुमान का स्मरण करने के बाद स्वच्छ होकर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। इन्हें जनेऊ भी चढ़ाई जाती है। सिंदूर और चांदी का वर्क चढ़ाने की भी परंपरा है। कहा जाता है, एक बार माता सीता को मांग में सिंदूर लगाते देख हनुमान जी ने इसका महत्व पूछा। माता सीता ने उन्हें बताया कि पति-परमेश्वर की लंबी आयु के लिए मांग में सिंदूर लगाया जाता है। इसके बाद भगवान श्री राम की लंबी आयु के लिए हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया था, इसीलिए हनुमान जयंती के दिन उन्हें सिंदूर चढ़ाया जाता है। इसके अलावा हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ किया जाता है और उनकी आरती उतारी जाती है। इस दिन स्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का अखंड पाठ भी करवाया जाता है। प्रसाद के रुप में उन्हें गुड़, भीगे या भुने चने एवं बेसन के लड्डू चढ़ाए जाते हैं। संत श्री लखनदास महाराज

+11 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 5 शेयर
Ganesh Apr 18, 2019

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर
Neha Sharma Apr 19, 2019

+122 प्रतिक्रिया 12 कॉमेंट्स • 60 शेयर
Rajesh Chaturvedi ji Apr 18, 2019

+7 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Situ Sharma Apr 17, 2019

कर्नाटक स्थित चमुंडेश्वरी देवी के दिव्य दर्शन

+9 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Asha Shrivastava Apr 17, 2019

+4 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 0 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB