AARYAM
AARYAM Sep 7, 2017

किशोर वर्ग और डिजिटल क्रांति

https://youtu.be/79hLZyVp_dQ

*"आर्यम-सूत्र"*

*"किशोरों की दुनियां और डिजिटल वर्ल्ड"*

वर्तमान परिदृश्य में पूरी की पूरी दुनियां डिजिटलाइजेशन की ओर बढ़ती नज़र आ रही है ऐसे में समाज का आईना बनने वाली हमारी भावी पीढ़ी या बच्चे-किशोर, युवा कोई भी डिजिटल युग के प्रभाव से शायद ही अछूता हो! ऐसे में विशेष कर बच्चे जिनके जीवन का मुख्य ध्येय शिक्षा व संस्कार अर्जन करना होना चाहिए वे विभिन्न प्रकार के गैजेट्स और मोबाइल के आदि हो कर अपनी मौलिकता व प्रतिभा से दूर होते जा रहे हैं। अब मूल प्रश्न यह बन चुका है कि लत बन चुकी आधुनिक गैजेट्स व इन उपकरणों की निर्भरता से कैसे बचें व अपने बच्चों को इनके दुष्प्रभाव से बचाएं!अक्सर अभिभावक जब बच्चों के साथ अपने जीवन की लय नही बना पाते, उन्हें उतना समय नही दे पाते जितना उन्हें मिलना चाहिए तभी तो वे ख़ुद ही उन्हें मोबाईल या गैजेट्स पकड़ा देते हैं। ज़्यादातर जिन अभिभावकों को लगता है कि उनके पास समय नही वही अपने बच्चों को ऐसी चीज़ें मुहैया कराते हैं कि उनके बच्चे उन उपकरणों में व्यस्त हो जाएं और उनके माता-पिता अपने अन्य काम निपटा लें! लेकिन जिन लोगों को ऐसा लगता है कि उनके पास समय नही है ज्यादातर उनके पास ही सबसे ज्यादा समय होता है।ऐसे में हम ही उन्हें इन गैजेट्स का आदि बनाते हैं और जब यही गैजेट्स समस्या का कारण बनते हैं तो हम इनसे छुटकारा पाने के उपाय ढूंढते हैं, ये सही व्यवहार नहीं है! बच्चों को इन गैजेट्स की लत से बचाना चाहिए क्योंकि ये सभी उपकरण विशेष कर मोबाइल फोन में की कार्य-प्रणाली में विशेष प्रकार की मैरिडियन्स-तरंगें उत्सर्जित होती हैं जो बच्चों के लिए बेहद घातक हैं। अनेक प्रकार के मनोरोग जो बहुत तेजी के साथ बच्चों में दिखलाई पड़ने लगे हैं वे सिर्फ मोबाइल की ही देन हैं, देंखने में तो यह भी आया है कि जो बच्चे अपने माता-पिता के साथ घर में 5 मिनिट भी नही करते वे रजाई में दुबक कर 2-2 घंटे दूसरों से-अपने दोस्तों से बात करने में निकाल दिया करते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि बात करने के इस रुचि रस को हमें अपने बच्चों में स्थापित करना पड़ेगा।किन्तु यह कार्य रातोंरात सम्भव नही, इस वातावरण को निर्मित करने के लिए बच्चों के साथ अभिभावकों को इतनी सहजता और सुविधा उपलब्ध करानी होगी कि बच्चा अपनी हर बात को अपने माता-पिता से खुद ही साझा करना चाहे! क्योंकि वही बात तो वे अपने मित्रों से भी करते हैं तो अपने घर में क्यों नही कर सकते? ऐसे माहौल का अपने घर में निर्माण करने की जिम्मेदारी सर्वप्रथम माता-पिता या अभिभावकों की ही होती है। बच्चों की परवरिश ऐसी होनी चाहिए कि उन्हें किसी मित्र की आवश्यकता न पड़े। बच्चों के साथ तानाशाह या हुक्मकर्ता के रूप में स्वयं को स्थापित न करें कि हम बड़े हैं! माता-पिता-चाचा हैं बल्कि उस बच्चे की अवस्था और मनःस्थिति को समझ कर उनके अनुसार उनसे व्यवहार करें। अगर हम अपने बच्चों के मनोविज्ञान को समझ लें तो इन परिस्थितियों ने निज़ात पाई जा सकती है और यही एकमात्र विकल्प भी गैजेट्स को रिप्लेस करने का!बच्चों के साथ समय व्यतीत करना ही इसका समाधान है।
अभिभावकों को चाहिए कि वे इन गैजेट्स के दुष्परिणामों से अपने बच्चों को अवगत कराएं कि यदि वे इन गैजेट्स को लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं तो उन्हें कई तरह की समस्याएं जैसे- कान से सुनने में परेशानी आने लगेगी, आंखें ख़राब हो जाएंगी और तो और 'टच स्क्रीन' फोन इस्तेमाल करने वाले लोगों को तो स्वस्थ शरीर के संचालन में काम करने वाली ऊर्जा तथा शरीर की बहुत सी कोशिकाओं के नष्ट होने की आशंका सतत बनी रहती है! टच स्क्रीन मोबाइल फोन से तो हमारे शरीर को कई घातक परिणाम झेलने पड़ सकते हैं। इसलिये अपने बच्चों के लिए समय निकालना माँ-बाप की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए वरना समय निकल जाने पर पहले जैसा कुछ भी नही हो सकता! कई दफ़ा कुछ लोग कहते हैं कि हम टाइम काट रहे हैं किंतु समय को कोई नही काट सकता बल्कि समय सब को काट देता है।

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BACCHAN SINGH Apr 3, 2020

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Mukesh Kumar Apr 3, 2020

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ये देश 🇮🇳 है वीर जवानों का,💪 अलबेलों का मस्तानों का इस देश का यारो क्या कहना.. ये देश है दुनियां का गहना..👌👌 बॉस हो तो सुभाषचंद्र जैसा.. पांडे हो तो मंगल जैसा.. लाला हो तो लाजपत राय जैसा.. तिलक हो तो लोकमान्य जैसा.. संगठन हो तो रा.स्व.से.संघ जैसा.. शंख हो तो पांचजन्य जैसा महान् हो तो महाराणा प्रताप जैसा.. गुरू हो तो चाणक्य जैसा.. स्वदेशी हो तो राजीव दीक्षित जैसा.. शास्त्री हो तो लाल बहादुर जैसा.. रानी हो तो लक्ष्मीबाई जैसी.. सिंह हो तो भगत जैसा.. आजाद हो तो चंद्रशेखर जैसा.. धर्म हो तो सनातन हिंदू जैसा.. झंडा हो तो भगवा जैसा..🚩 देश हो तो भारतवर्ष जैसा..🇮🇳 जय हिंद..🇮🇳🌷🌻🙏देशद्रोहियों के लिये... अगर चिढ़ते हैं तो चिढ़ने दो, मेहमान थोड़ी है ये सब हैं जाहिल, अब्दुल कलाम थोड़ी है... फैलेगा कोरोना तो आएंगे घर कई ज़द्द में यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है... हम जानते है देश उनका भी है लेकिन हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है... हमारे मुंह से वहीं निकलेगा जो सच है हमारे मुंह में तुम्हारी जुबां थोड़ी है.... जो आज मरकज में फैलाए हैं कोरोना किराएदार है जाती मकान थोड़ी है... बुलाते हैं मरकज में फैलाते है कोरोना हिंदुस्तान इनके खाला का मकान थोड़ी है???🙏🌷🌼🌺🌻🍀🌹🌳🙏🌷🌼🌺🌻🍀🌹🙏 🙏🌹!!जय मां अष्ट भवानी 🌹🙏 🙏🌹🌳🌷🌼🌺🌻🍀🙏🌹🌳🌷🌼🌺🌻🙏 गंगा गीता गायत्री हरिद्वार !! 🙏🍀🌻🌺🌹🌳🌷🌼🙏🍀🌻🌺🌹🌳🌷🙏🌹🌹🌹सेवक भरत व्यास बांगा हिसार

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Shyam Amarnani Apr 3, 2020

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Madanpal Singh Apr 3, 2020

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Prakash Srivastava Apr 3, 2020

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RINKU kumar yogi Apr 3, 2020

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Parshotam:Yadav Apr 3, 2020

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Madanpal Singh Apr 3, 2020

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