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हीरा Sep 24, 2020

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Vidhya saravanan Sep 24, 2020

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Devidas Chitale Sep 24, 2020

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हीरा Sep 24, 2020

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Devidas Chitale Sep 24, 2020

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, JK🌹 Sep 24, 2020

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देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे त्रिभुवनतारिणि तरल तरंगे। शंकर मौलिविहारिणि विमले मम मति रास्तां तव पद कमले जब वामन भगवान ने सम्पूर्ण भूमंडल को तीन कदमों में नापा था । उस समय उनके चरण के नख से जल की धारा बह निकली जो ध्रुव मंडल और सप्तऋषि मंडल होती हुई मेरु पर्वत पर गिरी और 4 भागों में बंट गयी। जिसकी एक धारा की शिव की जटाओं में राजा भगीरथ लाए जो भागीरथी कहलायी और दूसरी धारा अलकापुरी होती हुई आई और अलकनंदा कहलाई। दोनों देवप्रयाग में आकर मिल गयी। यही संगम मोक्ष प्रदान कराता है। यही से गंगा बनती है देवप्रयाग 👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏🌹🌹🙏🌹जय जय श्रीराधे🌹🙏 हे सर्वव्याप्त सर्वशक्तिमान सर्वहृदयस्वामी सर्वेश्वर भगवन् श्रीबाँकेबिहारी जी🌹श्रीराधे🌹 🌹श्रीराधे🌹.....हे भगवन्..आपके श्रीचरणों में ऋग्वैदिक प्रार्थ़ना समर्पित है.....🙏🌹🙏 भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः ॥ (ऋग्वेद मंडल 1, सूक्त 89, मंत्र 8) (भद्रम् कर्णेभिः शृणुयाम देवाः भद्रम् पश्येम अक्षभिः यजत्राः स्थिरैः अङ्गैः तुष्टुवांसः तनूभिः वि-अशेम देव-हितम् यत् आयुः ।) भावार्थ: हे देववृंद, हे सच्चिदानंद हम अपने कानों से कल्याणमय वचन सुनें । जो याज्ञिक अनुष्ठानों के योग्य हैं (यजत्राः) ऐसे हे देवो, हम अपनी आंखों से मंगलमय घटित होते देखें । नीरोग इंद्रियों एवं स्वस्थ देह के माध्यम से आपकी स्तुति करते हुए (तुष्टुवांसः) हम प्रजापति ब्रह्मा द्वारा हमारे हितार्थ (देवहितं) सौ वर्ष अथवा उससे भी अधिक जो आयु नियत कर रखी है उसे प्राप्त करें (व्यशेम) । तात्पर्य है कि हमारे शरीर के सभी अंग और इंद्रियां स्वस्थ एवं क्रियाशील बने रहें और हम सौ या उससे अधिक लंबी आयु पावें । और अनुक्रम में दूसरी ऋचा है शतमिन्नु शरदो अन्ति देवा यत्र नश्चक्र जरसं तनूनाम् । पुत्रासो यत्र पितरो भवन्ति मा नो मध्या रीरिषतायुर्गन्तोः ॥ (यथा उपर्युल्लिखित, मंत्र 9) (शतम् इत् नु शरदः अन्ति देवाः यत्र नः चक्र जरसम् तनूनाम् पुत्रासः यत्र पितरः भवन्ति मा नः मध्या रीरिषत आयुः गन्तोः ।) भावार्थ: हे देवो, हे जगतपालनकर्ता मनुष्य की आयु की सम्यक् समाप्ति सौ वर्ष (शरदः) की नियत की गयी है, जिसमें वृद्धावस्था (जरसं) की व्यवस्था की है (चक्र) और जिसमें हमारे पुत्र (पुत्रासः) स्वयं पिता बन सकें, अर्थात् हम पौत्रवान् बन जावें । ऐसे उस पूर्ण आयु की अंतकाल (अन्ति) से पहले बीच के काल में ही हमारी हिंसा न करें, यानी हमें क्षति न पहुंचाएं (रीरिषत), हमें क्षीणकाय न बनावें । हे श्रीमन्नारायण भगवन् हमारी प्रार्थ़नाओं को स्वीकृत कर हम सभी को उत्तम स्वास्थ्य ऐश्वर्य ज्ञान प्रेमभक्ति विवेक का वर प्रदान करें 🌹श्रीराधे🌹सेवक श्री अनन्त दुबे जी 👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏🍅✴☀❣जय मां अंबे भवानी ❣☀✴🍅❣ 🍂🐚 गंगा गीता गायत्री 🍂🐚 (¯`•.•´¯) *`•.¸(¯`•.•´¯)¸.•´ `•.¸.•´ ჱܓ*“ 🍅✴☀✴☀✴☀✴☀✴☀✴☀✴🍅 ☆*´¨`☽  ¸.★* ´¸.★*´¸.★*´☽ (  ☆** Ψ त्रिवेणी घाट हरिद्वार .Ψ `★.¸¸¸. ★• ° 🙏सेवक भरत व्यास बांगा हिसार चंडी घाट हरिद्वार 👏 देवप्रयाग उत्तराखंड👏🌹🌹🌹 हे सिंहवाहिनी जगदम्बे तेरा ही एक सहारा है। मेरी विपदायें दूर करो करुणा दृष्टि इस ओर करो संकट के बीच घिरा हूँ माँ आशा से तुम्हे पुकारा है।। तेरा ही एक सहारा है।। कुमकुम अक्षत और पुष्पो से नौवेद्य धूप और अर्चन से नित तुम्हे रिझाया करता हूँ क्यूँ अब तक नहीं निहारा है ।। हे सिंहवाहिनी जगदम्बे तेरा ही एक सहारा है।। जय माता रानी की

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हीरा Sep 24, 2020

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हीरा Sep 24, 2020

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