Hemlata Soni
Hemlata Soni Sep 6, 2017

जय श्रीकृष्णा। शुभरात्रि।।

जय श्रीकृष्णा। शुभरात्रि।।

सुख क्या है?

इस भौतिक संसार में सबके लिये भिन्न है सुख की परिभाषा । कोई धन कोई वैभव कोई विश्राम को सुख कहता है पर ये सब कुछ पल के सुख है अस्थिर हैं। सच्चा सुख क्या है ये कुछ ही मनुष्य समझते हैं,सच्चा सुख इन नश्वर पदार्थों से परे है। जो परमानंद की स्थिति में इंद्रियों को अनुभव होता है वही दिव्य सुख है।

वास्तव में सुख या दुख का अनुभव हमारी चेतना करती हैं ये भौतिक शरीर नहीं,यथार्थ सुख व आनंद प्राप्त करने के लिये हमे इन भौतिक इंद्रियों से परे जाना होगा,अपने अंतःकरण में परमात्मा पे चित को एकाग्र करके,अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करके सुख का अनुभव करना होगा।

वास्तविक सुख प्राप्त करने हेतु हमे कृष्ण भवनामृत की ओर बढ़ना होगा। जैसे जैसे हम इस ओर बढ़ेंगे हम आध्यात्मिक आनंद को सहज रूप अनुभव करने लगेंगे और इस झूठे भौतिक सुख से विरक्त होने लगेंगे,और इस सुख का अनुभव करने के पश्चात साधक के लिये कोई और सुख बड़ा नहीं होता,फिर वो बड़े से बड़े दुख से भी विचलित नहीं होता फिर उसके लिये इस भौतिक जगत की बड़ी से बड़ी उपलब्धि भी तुच्छ है।

जय श्री हरी

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संकल्प Sep 22, 2020

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संकल्प Sep 22, 2020

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संकल्प Sep 22, 2020

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संकल्प Sep 22, 2020

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आशुतोष Sep 21, 2020

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Shakti Sep 22, 2020

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