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Acharya Rajesh Apr 16, 2021

☀️ *धारावाहिक लेख:- नवदुर्गा, भाग-5* चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से माॅ दुर्गा भवानी के परम पावन वासंतीय नवरात्रो का आंरभ होता है, इसका आंरभ नौ नवरात्रो से होता है । इन नौ नवरात्रो की क्रमशः नौ देवियाॅ होती है । जो कि क्रम से इस प्रकार है  । पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तृतीय चंद्रघण्टा, चौथी कूष्माडा, पांचवीं स्कंदमाता, छठी कात्यायनी, सातवी कालरात्रि, आठवी महागौरी तथा नवी माता का नाम सिद्धिदात्री है । नवरात्रो के पांचवे दिन "माता स्कंदमाता देवी" का दिन है । *पंचम देवी:- स्कंदमाता* देवी भगवती का छठा स्वरुप स्कंदमाता का  है । स्कंदमाता को ही पार्वती, महेश्वरी, और गौरी कहते है । स्कंदकुमार की माता होने के कारण देवी का नाम स्कंदमाता पडा ।  परम सौभाग्य की देवी परम वैभवमयी तथा असुरो का नाश करने वाली है । देवी पर्वत राज की पुत्री होने से पार्वती कहलाती हैं । महादेव की पत्नी होने से माहेश्वरी कहलाती हैं और अपने गौर वर्ण के कारण देवी गौरी के नाम से भी पूजी जाती हैं । एक बार महाअसुर तारकासुर ने तप करके ब्रह्मा जी से अक्षत जीवन का वचन ले लिया । उसने ब्रह्माजी से वचन लिया कि यदि उसकी मृत्यु हो तो भगवान शिव के पुत्र के हाथो से हो । अब तारकासुर ने सोचा कि न तो शंकर जी कभी विवाह करेगे, न ही उनके कभी पुत्र होगा और न ही कभी मेरी मौत होगी । तारकासुर ने अपने को अजेय मानकर जगत मे हाहाकार मचाना शुरु कर दिया । तब देवगण भागे-२ शकंरजी के पास गये, बहुत अनुनय विनय के बाद उन्होने साकार रुप धारण कर पार्वतीजी से विवाह रचाया । शिव और पार्वती जी के पुत्र के रुप मे कार्तिकेय या स्कंदकुमार ने तारकासुर का वध करके जगत को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई । यह देवी असुरो का दमन करने वाली और सभी का कल्याण करने वाली है । स्कंदमाता के स्वरुप के साथ ही माता और पुत्र के संबध की नीव पडी । स्कंदकुमार को पहला शुक्रोत्पन्न प्राणी क्हा जाता है । माता को अपने पुत्र से अधिक प्रेम है अत: मां को अपने पुत्र के नाम के साथ संबोधित किया जाना अच्छा लगता है । जो भक्त माता के इस स्वरूप की पूजा करते है मां उस पर अपने पुत्र के समान स्नेह करती हैं । *स्कन्दमाता का स्वरूप* देवी स्कन्दमाता की चार भुजाएं हैं, माता की दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल पकडा हुआ है। और एक भुजा में भगवान स्कन्द या कुमार कार्तिकेय को सहारा देकर अपनी गोद में लिये बैठी हैं । मां का चौथा हाथ भक्तो को आशीर्वाद देने की मुद्रा मे है । माँ का वर्ण पूर्णतः शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। इसी से इन्हें पद्मासना की देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन भी सिंह है । सिह के आसन पर विराजमान तथा कमल के पुष्प से सुशोभित यशस्विनी देवी स्कन्दमाता शुभदायिनी है। *कुण्डलिनी चक्र* इनकी आराधना से विशुद्ध चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं, जिससे साधक अलौकिक तेज की प्राप्ति करता है । यह अलौकिक प्रभामंडल प्रति क्षण उसके योगक्षेम का निर्वाहन करता है । एकाग्रभाव से मन को पवित्र करके माँ की स्तुति करने से दुःखों से मुक्ति पाकर मोक्ष का मार्ग भी सुलभ होता है । *स्कंदमाता का भोग:-* पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को भी देना चाहिए, ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है । *बिमारियों से रक्षा* वात, पित्त, कफ जैसी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए और माता को अलसी चढ़ाकर प्रसाद में रूप में ग्रहण करना चाहिए *स्कंदमाता की अराधना मंत्र है:-* *1.या देवी सर्वभूतेषु मातृ रुपेण संस्थिता ।* *नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥* *2.सिहांसनगता नित्यं पद्माश्रित करद्वया ।* *शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी ।।* *स्तोत्र* *नमामि स्कन्धमातास्कन्धधारिणीम्।* *समग्रतत्वसागरमपारपारगहराम्॥* *शिप्रभांसमुल्वलांस्फुरच्छशागशेखराम्।* *ललाटरत्‍‌नभास्कराजगतप्रदीप्तभास्कराम्॥* *महेन्द्रकश्यपाíचतांसनत्कुमारसंस्तुताम्।* *सुरासेरेन्द्रवन्दितांयथार्थनिर्मलादभुताम्॥* *मुमुक्षुभिíवचिन्तितांविशेषतत्वमूचिताम्।* *नानालंकारभूषितांकृगेन्द्रवाहनाग्रताम्।।* *सुशुद्धतत्वातोषणांत्रिवेदमारभषणाम्।* *सुधाíमककौपकारिणीसुरेन्द्रवैरिघातिनीम्॥* *शुभांपुष्पमालिनीसुवर्णकल्पशाखिनीम्।* *तमोअन्कारयामिनीशिवस्वभावकामिनीम्॥* *सहस्त्रसूर्यराजिकांधनज्जयोग्रकारिकाम्।* *सुशुद्धकाल कन्दलांसुभृडकृन्दमज्जुलाम्॥* *प्रजायिनीप्रजावती नमामिमातरंसतीम्।* *स्वकर्मधारणेगतिंहरिप्रयच्छपार्वतीम्॥* *इनन्तशक्तिकान्तिदांयशोथमुक्तिदाम्।* *पुन:पुनर्जगद्धितांनमाम्यहंसुराचिताम्॥* *जयेश्वरित्रिलाचनेप्रसीददेवि पाहिमाम्॥* *कवच* *ऐं बीजालिंकादेवी पदयुग्मधरापरा।* *हृदयंपातुसा देवी कातिकययुता॥* *श्रींहीं हुं ऐं देवी पूर्वस्यांपातुसर्वदा।* *सर्वाग में सदा पातुस्कन्धमातापुत्रप्रदा॥* *वाणवाणामृतेहुं फट् बीज समन्विता।* *उत्तरस्यातथाग्नेचवारूणेनेत्रतेअवतु॥* *इन्द्राणी भैरवी चैवासितांगीचसंहारिणी।* *सर्वदापातुमां देवी चान्यान्यासुहि दिक्षवै॥* *(क्रमशः)* *लेख के छठे भाग में कल षष्ठ "माता कात्यायनी देवी" के विषय मे लेख ।* _________________________ *आगामी लेख:-* *1. 23 अप्रैल को "कामदा" एकादशी पर लेख ।* *2. 24 अप्रैल को "वैशाख मास" विषय पर लेख ।* *3. शीघ्र ही हनुमान जयंती पर लेख ।* _________________________ ☀️ *जय श्री राम* *आज का पंचांग 🌹🌹🌹* *शनिवार,17.4.2021* *श्री संवत 2078* *शक संवत् 1943* *सूर्य अयन- उत्तरायण, गोल-उत्तर गोल* *ऋतुः- वसन्त-ग्रीष्म ऋतुः ।* *मास- चैत्र मास।* *पक्ष- शुक्ल पक्ष ।* *तिथि- पंचमी तिथि 8:34 pm तक* *चंद्रराशि- चंद्र वृष राशि मे 1:09 pm तक तदोपरान्त मिथुन राशि ।* *नक्षत्र- मृगशिरा अगले दिन 2:33 am तक* *योग- शोभन योग 7:17 pm तक (शुभ है)* *करण- बव करण 7:23 am तक* *सूर्योदय 5:54 am, सूर्यास्त 6:47 pm* *अभिजित् नक्षत्र- 11:55 am से 12:46 pm* *राहुकाल - 9:07 am से 10:44 am* (अशुभ कार्य वर्जित,दिल्ली )* *दिशाशूल- पूर्व दिशा ।* *अप्रैल माह -शुभ दिन:-* शुभ दिन : 17, 18, 19, 20 (12 pm उपरांत), 21, 22, 23 (11 am तक), 24, 25, 26 (1 pm तक), 28 (सायंकाल 5 उपरांत), 29 (12 pm तक), 30 (12 pm उपरांत) *अप्रैल माह-अशुभ दिन:-* 27 ______________________ *विशेष:- जो व्यक्ति दिल्ली से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है* ________________________ *आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*21 अप्रैल:- राम नवमी। 22 अप्रैल:- चैत्र नवरात्रि पारण। 23 अप्रैल:- कामदा एकादशी। 24 अप्रैल:- शनि प्रदोष। 26 अप्रैल:- चैत्र पूर्णिमा। 30 अप्रैल:- संकष्टी चतुर्थी आपका दिन मंगलमय हो . 💐💐💐 *आचार्य राजेश ( रोहिणी, दिल्ली )* *9810449333, 7982803848*

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Acharya Rajesh Apr 14, 2021

☀️ *धारावाहिक लेख:- नवदुर्गा, भाग-3* चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से माॅ दुर्गा भवानी के परम पावन वासंतीय नवरात्रो का आंरभ होता है, इसका आंरभ नौ नवरात्रो से होता है । इन नौ नवरात्रो की क्रमशः नौ देवियाॅ होती है । जो कि क्रम से इस प्रकार है  । पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तृतीय चंद्रघण्टा, चौथी कूष्माडा, पांचवीं स्कंदमाता, छठी कात्यायनी, सातवी कालरात्रि, आठवी महागौरी तथा नवी माता का नाम सिद्धिदात्री है । नवरात्रो के द्वितीय दिन "माता चंद्रघंटा देवी" का दिन है । *तीसरा माता:- चंद्रघंटा* मां दुर्गा का तीसरा स्वरुप चन्द्रघण्टा के नाम से प्रसिद्व हैै । नवरात्रि उपासना के तीसरे दिन इन्ही के विग्रह का पूजन किया जाता है । इनकी आराधनासे मनुष्य के हृदय से अहंकार का नाश होता है तथा वह असीम शांति की प्राप्ति कर प्रसन्न होता है। माँ चन्द्रघण्टा मंगलदायनी है तथा भक्तों को निरोग रखकर उन्हें वैभव तथा ऐश्वर्य प्रदान करती है। उनके घंटे की ध्वनि मे अपूर्व शीतलता का वास है। देवी चन्द्रघण्टा भक्त को सभी प्रकार की बाधाओं एवं संकटों से उबारने वाली हैं । *माता चंद्रघंटा का स्वरूप* यह स्वरुप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है । इनके मस्तक पर घण्टे के आकार का अर्धचन्द्र है, इसी कारण से इन्हे चन्द्रघण्टा क्हा जाता है, इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है, चेहरा शांत एवं सौम्य है और मुख पर सूर्यमंडल की आभा छिटक रही होती है । माता के दस हाथ है, और दसो हाथो में खड्ग,  तलवार, ढाल, गदा, पाश, त्रिशूल, चक्र, धनुष, भरे हुए तरकश जैसे अस्त्र शस्त्र विभूषित है । इनका वाहन सिंह हे तथा इनकी मुद्रा युद्व के लिए उद्यत (तैयार) रहने की होती है । इनके घण्टे की भयानक चण्ड ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य तथा राक्षस सदैव कांपते रहते है । अपने इस रूप से माता देवगण, संतों एवं भक्त जन के मन को संतोष एवं प्रसन्न प्रदान करती हैं । *कुण्डलिनी चक्र* नवरात्र की उपासना मे तीसरे दिन पूजा का अत्यन्त महत्व रहता है । इस दिन साधक का मन मणिपूर चक्र मे प्रविष्ट होता है । माता कि कृृपा से उसे अलौकिक वस्तुओ के दर्शन होते है, दिव्य सुगन्धियो का अनुभव होता है, ये क्षण साधक के लिए अत्यन्त सावधान रहने के होते है । *माॅ चन्द्रघण्टा की कृृपा* माॅ चन्द्रघण्टा की कृृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएं विनष्ट हो जाती है, माॅ भक्तो के कष्टो का निवारण कर देती है, इनका उपासक इनके सिंह की भांति पराक्रमी और निर्भीक हो जाता है, इनके घण्टे की ध्वनि प्रेतबाधा से रक्षा करती है, इनका ध्यान करते ही शरणागत की रक्षा के लिए घण्टे की ध्वनि का नाद तुरंत शुरु हो जाता है । *मां चंद्रघंटा का भोग:-* मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं और इसी का दान भी करें । ऐसा करने से मां की कृपा प्राप्त होती हैं और सभी दुखों का नाश करती हैं । *चन्द्रघण्टा मां का मंत्र:-* *पिण्डज प्रवरारुडा चण्डकोपास्त्रकैर्युता ।* *प्रसादं तनुते मह्नयां चन्द्रघण्टेति विश्रुता ।।* *चन्द्रघंटा की स्तोत्र पाठ :-* *आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।* *अणिमादि सिध्दिदात्री चंद्रघटा प्रणमाभ्यम्॥* *चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम्।* *धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यहम्॥* *नानारूपधारिणी इच्छानयी ऐश्वर्यदायनीम्।* *सौभाग्यारोग्यदायिनी चंद्रघंटप्रणमाभ्यहम्॥* *चन्द्रघंटा की कवच* *रहस्यं श्रुणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।* *श्री चन्द्रघन्टास्य कवचं सर्वसिध्दिदायकम्॥* *बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोध्दा बिना होमं।* *स्नानं शौचादि नास्ति श्रध्दामात्रेण सिध्दिदाम॥* *कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च न दातव्यं ।* *न दातव्यं न दातव्यं कदाचितम्॥* *(क्रमशः)* *लेख के चौथे भाग में कल चतुर्थ "माता कूष्माण्डा देवी" के विषय मे लेख ।* _________________________ *आगामी लेख:-* *1. 23 अप्रैल को "कामदा" एकादशी पर लेख ।* *2. 24 अप्रैल को "वैशाख मास" विषय पर लेख ।* *3. शीघ्र ही हनुमान जयंती पर लेख ।* _________________________ ☀️ *जय श्री राम* *आज का पंचांग 🌹🌹🌹* *वृहस्पतिवार,15.4.2021* *श्री संवत 2078* *शक संवत् 1943* *सूर्य अयन- उत्तरायण, गोल-उत्तर गोल* *ऋतुः- वसन्त-ग्रीष्म ऋतुः ।* *मास- चैत्र मास।* *पक्ष- शुक्ल पक्ष ।* *तिथि- तृतीया तिथि 3:28 pm तक* *चंद्रराशि- चंद्र वृष राशि मे ।* *नक्षत्र- कृतिका 8:33 pm तक* *योग- आयुष्मान योग 5:18 pm तक (शुभ है)* *करण- गर करण 3:28 pm तक* *सूर्योदय 5:56 am, सूर्यास्त 6:46 pm* *अभिजित् नक्षत्र- 11:55 am से 12:47 pm* *राहुकाल - 1:57 pm से 3:34 pm* (अशुभ कार्य वर्जित,दिल्ली )* *दिशाशूल- दक्षिण दिशा ।* *अप्रैल माह -शुभ दिन:-* शुभ दिन : 16 (6 pm उपरांत), 17, 18, 19, 20 (12 pm उपरांत), 21, 22, 23 (11 am तक), 24, 25, 26 (1 pm तक), 28 (सायंकाल 5 उपरांत), 29 (12 pm तक), 30 (12 pm उपरांत) *अप्रैल माह-अशुभ दिन:-* 15, 27 *यमघण्टक योग :- 15 अप्रैल 5:56 am से 15 अप्रैल 8:33 pm तक* यह एक अशुभ योग हैं, यह कष्टदायक योग है, इसमे विशेष रूप से शुभ कार्य के लिए की जाने वाली यात्रा तथा बच्चो के शुभ कार्य न करे । परंतु इस कुयोग के साथ ही यदि कोई सर्वार्थ सिद्ध योग जैसा शुभ योग भी हो तो इस योग का दुष्प्रभाव जाता रहता है । *रवि योग :- 15 अप्रैल 8:33 pm to 16 अप्रैल 11:40 pm तक* यह एक शुभ योग है, इसमे किए गये दान-पुण्य, नौकरी  या सरकारी नौकरी को join करने जैसे कायों मे शुभ परिणाम मिलते है । यह योग, इस समय चल रहे, अन्य बुरे योगो को भी प्रभावहीन करता है। ______________________ *विशेष:- जो व्यक्ति दिल्ली से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है* ________________________ *आगामी व्रत तथा त्यौहार:-* 16 अप्रैल:- विनायक चतुर्थी। 21 अप्रैल:- राम नवमी। 22 अप्रैल:- चैत्र नवरात्रि पारण। 23 अप्रैल:- कामदा एकादशी। 24 अप्रैल:- शनि प्रदोष। 26 अप्रैल:- चैत्र पूर्णिमा। 30 अप्रैल:- संकष्टी चतुर्थी आपका दिन मंगलमय हो . 💐💐💐 *आचार्य राजेश ( रोहिणी, दिल्ली )* *9810449333, 7982803848*

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Acharya Rajesh Apr 16, 2021

☀️ *धारावाहिक लेख:- नवदुर्गा, भाग-4* चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से माॅ दुर्गा भवानी के परम पावन वासंतीय नवरात्रो का आंरभ होता है, इसका आंरभ नौ नवरात्रो से होता है । इन नौ नवरात्रो की क्रमशः नौ देवियाॅ होती है । जो कि क्रम से इस प्रकार है  । पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तृतीय चंद्रघण्टा, चौथी कूष्माडा, पांचवीं स्कंदमाता, छठी कात्यायनी, सातवी कालरात्रि, आठवी महागौरी तथा नवी माता का नाम सिद्धिदात्री है । नवरात्रो के द्वितीय दिन "माता कूष्माण्डा देवी" का दिन है । *चतुर्थ देवी:- कूष्माण्डा* मां दुर्गा के चौथे स्वरुप का नाम कूष्माण्डा है । अपनी मंद मंद, हल्की हंसी द्वारा अण्ड अर्थात ब्रह्मंड को उत्पन्न करने के कारण इन्हे कूष्माण्डा देवी के नाम से जाना जाता है । जब सृृष्टि का अस्तित्व नही था, चारो ओर अंधकार ही अंघकार था, तब इन्ही देवी ने अपने ईषत हास्य से ब्रह्मंड की रचना की थी । अतः यही सृष्टि की आदिस्वरुपा आदिशक्ति है । इनके पूर्व ब्रह्मंड का अस्तित्व ही नही था । *देवी कूष्माण्डा का निवास तथा तेज* इनका निवास सूर्यमण्डल के भीतर के लोक में है । देवी, सूर्य मंडल को अपने संकेत से नियंत्रित रखती हैं । सूर्यलोक मे निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्ही मे ही है । इनके शरीर की कांति और प्रभा भी सूर्य के समान है । इनके तेज की तुलना भी केवल इन्ही से ही की जा सकती है, अन्य कोई देवी देवता इनके तेज और प्रभाव की बराबरी नही कर सकते । इन्ही के तेज से दसो दिशाएं प्रकाशित हो रही है । *मां कुष्मांडा का स्वरूप:-* देवी कूष्मांडा अष्टभुजा से युक्त हैं अत: इन्हें देवी अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है. देवी अपने इन हाथों में क्रमश: कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत से भरा कलश, चक्र तथा गदा है. देवी के आठवें हाथ मे सभी सिद्वियां और निघियां को देने वाली कमल फूल के बीज (कमलगट्टे) की जपमाला है । इनका वाहन सिंह है । संस्कृत मे कूष्माण्डा कुम्हडे (अन्न की बाली) को कहते है । बलियो मे कुम्हडे की बलि इन्हे अत्यंत प्रिय है । *कुण्डलिनी चक्र* कूष्मांडा के पूजन से अनाहत चक्र जाग्रति की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इनकी उपासना अथवा अनाहत चक्र के जागरण से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं, तथा आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है। *मां कुष्मांडा का भोग:-* मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं, तथा प्रसाद को किसी ब्राह्मण को भी खिलाकर खुद भी खाएं. इससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय क्षमता भी अच्छी हो जाएगी. *कूष्माण्डा मां मंत्र:-* 1.*सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च ।* *दधाना हस्त पद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ।।* 2*या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।* *नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।* *स्तोत्र पाठ* *दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्।* *जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥* *जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्। *चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥* *त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहिदुःख शोक निवारिणीम्।* *परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाभ्यहम्॥* *कवच* *हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्।* *हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम्॥* *कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा,पूर्वे पातु* *वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम।* *दिगिव्दिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजं सर्वदावतु॥* *(क्रमशः)* *लेख के पांचवें भाग में कल पंचम "माता स्कंदमाता देवी" के विषय मे लेख ।* _________________________ *आगामी लेख:-* *1. 23 अप्रैल को "कामदा" एकादशी पर लेख ।* *2. 24 अप्रैल को "वैशाख मास" विषय पर लेख ।* *3. शीघ्र ही हनुमान जयंती पर लेख ।* _________________________ ☀️ *जय श्री राम* *आज का पंचांग 🌹🌹🌹* *शुक्रवार,16.4.2021* *श्री संवत 2078* *शक संवत् 1943* *सूर्य अयन- उत्तरायण, गोल-उत्तर गोल* *ऋतुः- वसन्त-ग्रीष्म ऋतुः ।* *मास- चैत्र मास।* *पक्ष- शुक्ल पक्ष ।* *तिथि- चतुर्थी तिथि 6:07 pm तक* *चंद्रराशि- चंद्र वृष राशि मे ।* *नक्षत्र- रोहिणी 11:40 pm तक* *योग- सौभाग्य योग 6:22 pm तक (शुभ है)* *करण- विष्टि करण 6:07 pm तक* *सूर्योदय 5:55 am, सूर्यास्त 6:47 pm* *अभिजित् नक्षत्र- 11:55 am से 12:47 pm* *राहुकाल - 10:44 am से 12:21 pm* (अशुभ कार्य वर्जित,दिल्ली )* *दिशाशूल- पश्चिम दिशा ।* *अप्रैल माह -शुभ दिन:-* शुभ दिन : 16 (6 pm उपरांत), 17, 18, 19, 20 (12 pm उपरांत), 21, 22, 23 (11 am तक), 24, 25, 26 (1 pm तक), 28 (सायंकाल 5 उपरांत), 29 (12 pm तक), 30 (12 pm उपरांत) *अप्रैल माह-अशुभ दिन:-* 27. *भद्रा :- 16 अप्रैल 4:47 am to 16 अप्रैल 6:06 pm तक* ( भद्रा मे मुण्डन, गृहारंभ, गृहप्रवेश, विवाह, रक्षाबंधन आदि शुभ काम नही करने चाहिये , लेकिन भद्रा मे स्त्री प्रसंग, यज्ञ, तीर्थस्नान, आपरेशन, मुकद्दमा, आग लगाना, काटना, जानवर संबंधी काम किए जा सकतें है । *यमघण्टक योग :- 16 अप्रैल 5:55 am से 16 अप्रैल 11:40 pm तक* यह एक अशुभ योग हैं, यह कष्टदायक योग है, इसमे विशेष रूप से शुभ कार्य के लिए की जाने वाली यात्रा तथा बच्चो के शुभ कार्य न करे । परंतु इस कुयोग के साथ ही यदि कोई सर्वार्थ सिद्ध योग जैसा शुभ योग भी हो तो इस योग का दुष्प्रभाव जाता रहता है । *रवि योग :- 15 अप्रैल 8:33 pm to 16 अप्रैल 11:40 pm तक* यह एक शुभ योग है, इसमे किए गये दान-पुण्य, नौकरी  या सरकारी नौकरी को join करने जैसे कायों मे शुभ परिणाम मिलते है । यह योग, इस समय चल रहे, अन्य बुरे योगो को भी प्रभावहीन करता है। ______________________ *विशेष:- जो व्यक्ति दिल्ली से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है* ________________________ *आगामी व्रत तथा त्यौहार:-* 16 अप्रैल:- विनायक चतुर्थी। 21 अप्रैल:- राम नवमी। 22 अप्रैल:- चैत्र नवरात्रि पारण। 23 अप्रैल:- कामदा एकादशी। 24 अप्रैल:- शनि प्रदोष। 26 अप्रैल:- चैत्र पूर्णिमा। 30 अप्रैल:- संकष्टी चतुर्थी आपका दिन मंगलमय हो . 💐💐💐 *आचार्य राजेश ( रोहिणी, दिल्ली )* *9810449333, 7982803848*

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white beauty Apr 15, 2021

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suresh joshi Apr 15, 2021

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