जय श्री बदरी विशाल

#श्रीबदरिकाश्रम " बदरीनाथो विजयतॆ #जय_बद्री_जय_केदार

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parmila Mar 4, 2021

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Smt Neelam Sharma Mar 4, 2021

*_ll ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ll🏵ll_* *_शुभ वृहस्पतिवारीय सुप्रभातम 💐_* *_🔸💫🌸((🕉))🌸💫🔸_* *_शान्ताकारं भुजग-शयनं पद्मनाभं सुरेशं,_* *_विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।_* _*शान्ताकारं*– जिनकी आकृति अतिशय शांत है, वह जो धीर क्षीर गंभीर हैं,_ _*भुजग-शयनं* – जो शेषनाग की शैया पर शयन किए हुए हैं (विराजमान हैं),_ _*पद्मनाभं* – जिनकी नाभि में कमल है,_ _*सुरेशं* – जो ‍देवताओं के भी ईश्वर और_ _*विश्वाधारं* – जो संपूर्ण जगत के आधार हैं, संपूर्ण विश्व जिनकी रचना है,_ _*गगन-सदृशं* – जो आकाश के सदृश सर्वत्र व्याप्त हैं,_ _*मेघवर्ण* – नीलमेघ के समान जिनका वर्ण है,_ _*शुभाङ्गम्* – अतिशय सुंदर जिनके संपूर्ण अंग हैं, जो अति मनभावन एवं सुंदर है !_ *_लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्_* *_वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥_* _*लक्ष्मीकान्तं* – ऐसे लक्ष्मीपति,_ _*कमल-नयनं* – कमलनेत्र (जिनके नयन कमल के समान सुंदर हैं !)_ _*योगिभिर्ध्यानगम्यम्* – (योगिभिर – ध्यान – गम्यम्) – जो योगियों द्वारा ध्यान करके प्राप्त किए जाते हैं, (योगी जिनको प्राप्त करने के लिया हमेशा ध्यानमग्न रहते हैं !)_ _*वन्दे विष्णुं* – भगवान श्रीविष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ (ऐसे परमब्रम्ह श्री विष्णु को मेरा नमन है !)_ _*भवभय-हरं* – जो जन्म-मरण रूप भय का नाश करने वाले हैं, जो सभी भय को नाश करने वाले हैं !_ _*सर्वलोकैक-नाथम्* – जो संपूर्ण लोकों के स्वामी हैं, सभी चराचर जगत के ईश्वर हैं !!_ *_जगत के पालनहार प्रभु, श्री विष्णु भगवान हम सबका प्रणाम स्वीकार करें !!🙏!!_* _*🔸💫🌸((🙏))🌸💫🔸*_ _*💐 श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा 💐*_

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Sarita Mar 4, 2021

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Aneela Lath Mar 4, 2021

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷 🇮🇳🕉️ *卐 सत्यराम सा 卐* 🕉️🇮🇳 🌹🙏 *ॐ नमो नारायण* 🙏🌹 🦚🌹 *हार्दिक शुभकामनाएँ* 🌹🦚 🇮🇳🦚🇮🇳.🇮🇳🦚🇮🇳.🇮🇳🦚🇮🇳 *साभार ऑडियो ~ @⁨Kamini Agarwal⁩* *मात पिता जुवति सुत बंधव,* *लागत है सब कौं अति प्यारौ ।* *लोग कुटुम्ब खरौ हित राखत,* *होइ नहीं हम तैं कहुं न्यारौ ॥* *देह सनेह तहां लग जांनहु,* *बोलत है मुख शब्द उचारौ ।* *सुन्दर चेतनि शक्ति गई जब,* *बेगि कहैं घर मांहि निकारौ ॥३॥* *जीव के बिना देह की निरर्थकता* : जब तक यह देह जीवित रहता है तब तक इस के माता पिता, स्त्री पुत्र, भाई बान्धव आदि सभी को अतिप्रिय लगता है । कुटुम्ब के सभी लोग इसकी पूरी देखभाल रखते हैं और यही मनाते रहते हैं कि यह हमसे कभी दूर न हो । परन्तु उनका यह शारीरिक स्नेह तभी तक समझो, जब तक यह शरीर बोल रहा है । श्री सुन्दरदास जी कहते हैं - परन्तु इस शरीर से चेतनाशक्ति के लुप्त ही वे ही कुटुम्ब के सब लोग कहने लगते हैं कि इस शव(मुर्दे) को इस घर से अतिशीघ्र निकाल दो ॥३॥ *(सवैया ग्रंथ ~ काल चितावनी को अंग)* https://youtu.be/amkRr6W-8BU https://youtu.be/amkRr6W-8BU

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