राम जी की कृपा

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JAI MAA VAISHNO Feb 25, 2021
JAI SHREE RAM PARIVAR KI JAI SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE

C.S.Tanwar Feb 25, 2021
जय श्री राम जय श्री राम शुभ संध्या

dhruv wadhwani Feb 25, 2021
ओम साईं राम जी नमो शुभ संध्या जी

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Rajendra Joshi Apr 20, 2021

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श्रीरामकी प्रतिमाकी पूजाविधि एवं उपासना-पद्धति श्रीरामनवमीकी पूजाके लिए नित्य पूजाकी सामग्रीके साथ सौंठका बनाया विशेष प्रसाद होता है । सौंठ अर्थात सूखे अदरकका चूर्ण एवं पीसी हुई चीनी तथा सूखे नारियलका चूरा मिलाकर उस मिश्रणको प्रसादके रूपमें निवेदित किया जाता है । पूजाविधी आरंभ करते समय प्रथम आचमन करें । अब प्राणायाम करें । देशकालकथन कर पूजाके लिए संकल्प करें । अब चंदनका तिलक करें । अब अक्षत समर्पित करें । तदुपरांत फूल एवं तुलसी अर्पित करें । अब पुष्पमाला अर्पित करें । अब अगरबत्ती दिखाएं । अब दीप दिखाएं । अब नैवेद्य समर्पित करें । इस प्रकार पूजा करनेके उपरांत आरती, मंत्रपुष्प, परिक्रमा एवं नमस्कार करें । अनेक राममंदिरोंमें चैत्र शुक्ल प्रतिपदासे लेकर नौ दिनतक यह उत्सव चलता है । रामायणके पारायण, कथा-कीर्तन तथा राममूर्तिका विविध शृंगार कर, यह उत्सव मनाया जाता है । यह हुआ सार्वजनिक उत्सव । कुछ स्थानोंपर कुछ परिवारोंके सदस्य एकत्रित होकर यह उत्सव मनाते हैं । कुछ लोग नौ दिन उपवास कर इसे व्यक्तिगत स्तरपर व्रतके रूपमें भी मनाते हैं । रामका स्मरण, भजन एवं पूजन कर नौंवे दिन श्रीरामजन्मोत्सव मनाते हैं । अगले दिन उद्यापन कर व्रतकी समाप्ति करते हैं । चैत्र शुक्ल नवमीके दिन मध्याह्न कालमें श्रीरामजीके जन्मका कीर्तन होता है। जहां श्रीरामजीकी मूर्ति उपलब्ध होती है, वहां मूर्तिको कंटोप पहनाकर उसे हिंडोलेमें रखा जाता है । छोटे बच्चेके सिरपर बांधे जानेवाले वस्त्रको कंटोप कहते हैं । यह वस्त्र पीठतक होता है । तदुपरांत भक्तगण उसपर गुलाल तथा पुष्पवर्षाव करते हैं । इस अवसरपर श्रीरामजीके जन्मके गीत गाए जाते हैं । कुछ स्थानोंपर रामलल्लाकी पालकी भी निकाली जाती है । तदुपरांत श्रीरामजीका स्तोत्रपाठ एवं नामजप किया जाता है । उसके उपरांत महाआरती एवं महाप्रसाद होता है । इस प्रकार वर्षारंभमेंही व्यक्तिगत, पारिवारिक तथा सामाजिक क्षमता बढाने हेतु यह उत्सव पारंपरिक पद्धतिसे मनाया जाता है । हमें इस बातको ध्यानमें रखना आवश्यक है, कि देवता तत्त्वरूपमें होते हैं । 👉C/P

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Ramlal Gurjar Kumda Apr 20, 2021

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Deepa methwani Apr 18, 2021

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pravinbhai kakkad Apr 20, 2021

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sn.vyas Apr 20, 2021

...........!! *श्रीराम: शरणं मम* !!......... ।।श्रीरामकिंकर वचनामृत।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° *दृष्टि दोष-दर्शन पर नहीं,* *बल्कि गुण-दर्शन पर हो।* °" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "° अहल्या को महर्षि गौतम ने शाप दिया और कबन्ध को दुर्वासा ने शाप दिया। पर दोनों की दृष्टि में आपको भिन्नता दिखाई देगी। अहल्या जब भगवान के चरणों के स्पर्श से चेतन हुई तो कह सकती थी कि महाराज! आप बड़े सज्जन हैं, मेरे पति तो बड़े क्रोधी हैं। क्योंकि एक छोटे से अपराध पर उन्होंने मुझे इतना बड़ा शाप दे दिया। अगर ऐसी बात अहल्या कहती तो गौतम के व्यवहार की दृष्टि से कोई अटपटी बात नहीं होती। लेकिन अहल्या की दृष्टि कितनी सुन्दर है ! अहल्या को उस समय महर्षि गौतम की याद आई और तुरत उसने भगवान राम के चरणों में प्रणाम करके कहा -- प्रभु ! मैं आपकी कृतज्ञ तो हूँ ही लेकिन अपने पतिदेव की और भी अधिक कृतज्ञ हूँ। क्योंकि -- *मुनि साप जो दीन्हा अति भल कीन्हा* *परम अनुग्रह मैं माना।* *देखेउँ भरि लोचन हरि भव मोचन* *इहइ लाभ संकर जाना।।* १/२११ -- महाराज ! वरदान का लक्ष्य अन्त में भगवान की प्राप्ति ही तो है। तो *जो ईश्वर, वरदान से मिलता है अगर शाप से मिल जाय, तब तो वरदान की अपेक्षा शाप ही अच्छा है।* मेरे पतिदेव ने बड़ी कृपा की जो मुझे शाप दे दिया। और जब भगवान राम अहल्या को इस प्रकार की वाणी को सुनते हैं तो समझ लेते हैं कि इसकी दृष्टि दोष-दर्शन पर नहीं है बल्कि गुण-दर्शन पर है। ☯️ जय गुरुदेव जय सियाराम 🙏

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