Prakash Singh Rathore
Prakash Singh Rathore Mar 25, 2019

जय श्री गुरुदेव महाराज दोस्तो आप के लिये एक बोधकथा लेके आया हु एक बार जरूर पढ़ें तृष्णा ======= एक व्यापारी था, वह ट्रक में चावल के बोरे लिए जा रहा था। एक बोरा खिसक कर गिर गया। कुछ चीटियां आयीं 10-20 दाने ले गयीं, कुछ चूहे आये 100-50 ग्राम खाये और चले गये, कुछ पक्षी आये थोड़ा खाकर उड़ गये, कुछ गायें आयीं 2-3 किलो खाकर चली गयीं, एक मनुष्य आया और वह पूरा बोरा ही उठा ले गया। अन्य प्राणी पेट के लिए जीते हैं, लेकिन मनुष्य तृष्णा में जीता है। इसीलिए इसके पास सब कुछ होते हुए भी यह सर्वाधिक दुखी है। आवश्यकता के बाद इच्छा को रोकें, अन्यथा यह अनियंत्रित बढ़ती ही जायेगी, और दुख का कारण बनेगी।✍🏻 _चौराहे पर खड़ी जिंदगी,_ _नजरें दौड़ाती हैं..._ 👀 _काश कोई बोर्ड दिख जाए_ _जिस पर लिखा हो..._ ✍🏻🙏🏻 *"सुकून..* *0. कि.मी."*

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Harcharan pahwa Apr 24, 2019

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Rekha singh Apr 24, 2019

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mukesh Apr 24, 2019

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Ashok Jangid Apr 24, 2019

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