शुभ रविवार शुभ मातृ दिवस

शुभ रविवार 
शुभ मातृ दिवस

+67 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 239 शेयर

कामेंट्स

premchand shami May 10, 2020
🌺🌺🌺🌺जय माता दी 🌺🌺🌺🌺 💐💐💐💐💐🙏🏻🙏🏻💐💐💐💐💐शुभ प्रभात मंगलमय हो आपका 💐💐💐🙏🏻

Kamlesh May 10, 2020
ऊँ सूर्य देवाय नमः

rajinderkumar jamwal May 10, 2020
🙏🥀जय🌺 माता🥀 दी,🙏🥀 🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀

Babita Sharma May 10, 2020

मातृ देवो भव: मां एक ऐसा शब्द है,जिसे सिर्फ बोलने से ही ह्रदय में प्यार और खुशी की लहर आ जाती है।और ऐसे पावन दिवस पर हर मां को मेरा प्रणाम 🙋🙏🙏 आप सभी को मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🌹💞🤱 *............."माँ".............* *माँ- दुःख में सुख का एहसास है,* *माँ - हरपल मेरे आस पास है* *माँ- घर की आत्मा है,* *माँ- साक्षात् परमात्मा है* *माँ- आरती, अज़ान है,* *माँ- गीता और कुरान है* *माँ- ठण्ड में गुनगुनी धूप है,* *माँ- उस रब का ही एक रूप है* *माँ- तपती धूप में साया है,* *माँ- आदि शक्ति महामाया है* *माँ- जीवन में प्रकाश है,* *माँ- निराशा में आस है* *माँ- महीनों में सावन है,* *माँ- गंगा सी पावन है* *माँ- वृक्षों में पीपल है,* *माँ- फलों में श्रीफल है* *माँ- देवियों में गायत्री है,* *माँ- मनुज देह में सावित्री है* *माँ- ईश् वंदना का गायन है,* *माँ- चलती फिरती रामायन है* *माँ- रत्नों की माला है,* *माँ- अँधेरे में उजाला है,* *माँ- बंदन और रोली है,* *माँ- रक्षासूत्र की मौली है* *माँ- ममता का प्याला है,* *माँ- शीत में दुशाला है* *माँ- गुड सी मीठी बोली है,* *माँ- ईद, दिवाली, होली है* *माँ- इस जहाँ में हमें लाई है,* *माँ- मेरी दुर्गा माई है,* *माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है* *माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है* *"अंत में मैं बस ये इक पुण्य का काम करता हूँ,* *दुनिया की हरेक माँ को दंडवत प्रणाम 🙏🙏*

+1774 प्रतिक्रिया 243 कॉमेंट्स • 729 शेयर

+46 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 239 शेयर
Jay Shree Krishna May 10, 2020

*अंतरराष्ट्रीय मातृदिवस पर* मां प्राण है, मां शक्ति है, मां ऊर्जा है, मां प्रेम, करुणा और ममता का पर्याय है। मां केवल जन्मदात्री ही नहीं जीवन निर्मात्री भी है। मां धरती पर जीवन के विकास का आधार है। मां ने ही अपने हाथों से इस दुनिया का ताना-बाना बुना है। सभ्यता के विकास क्रम में आदिकाल से लेकर आधुनिक काल तक इंसानों के आकार- प्रकार में , रहन-सहन में , सोच-विचार, मस्तिष्क में लगातार बदलाव हुए। लेकिन मातृत्व के भाव में बदलाव नहीं आया उस आदिम युग में भी मां, मां ही थी। तब भी वह अपने बच्चों को जन्म देकर उनका पालन-पोषण करती थीं। उन्हें अपने अस्तित्व की रक्षा करना सिखाती थी। आज के इस आधुनिक युग में भी मां वैसी ही है। मां नहीं बदली। एक दार्शनिक ने मां की महिमा इन शब्दों में व्यक्त की है कि एक माँ की गोद कोमलता से बनी रहती है और बच्चे उसमें आराम से सोते हैं। मां को धरती पर विधाता की प्रतिनिधि कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। सच तो यह है कि मां विधाता से कहीं कम नहीं है। क्योंकि मां ने ही इस दुनिया को सिरजा और पाला-पोशा है। कण-कण में व्याप्त परमात्मा किसी को नजर आये न आए मां हर किसी को हर जगह नजर आती है। कहीं अण्डे सेती, तो कहीं अपने शावक को, छोने को, बछड़े को, बच्चे को दुलारती हुई नजर आती है। मां एक भाव है मातृत्व का, प्रेम और वात्सल्य का, त्याग का और यही भाव उसे विधाता बनाता है। मां विधाता की रची इस दुनिया को फिर से, अपने ढंग से रचने वाली विधाता है। मां सपने बुनती है और यह दुनिया उसी के सपनों को जीती है और भोगती है। मां जीना सिखाती है। पहली किलकारी से लेकर आखिरी सांस तक मां अपनी संतान का साथ नहीं छोड़ती। मां पास रहे या न रहे मां का प्यार दुलार, मां के दिये संस्कार जीवन भर साथ रहते हैं। मां ही अपनी संतानों के भविष्य का निर्माण करती हैं। इसीलिए मां को प्रथम गुरु कहा गया है। साथीयों अपनी मां के आंखों कभी आंसुओं को आने मत देना वरना विधाता कभी तुम्हे सात जन्मों तक माफ नहीं करेगी यह शास्वत सत्य है इसे गांठ बांध कर रखना। एक विचारक ने सही कहा है कि मेरी माँ मेरी सबसे बड़ी अध्यापक थी, करुणा, प्रेम, निर्भयता की एक शिक्षक अगर प्यार एक फुल के जितना मीठा है, तो मेरी माँ प्यार का मीठा फूल है। प्रथम गुरु के रूप में अपनी संतानों के भविष्य निर्माण में मां की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। मां कभी लोरियों में, कभी झिड़कियों में, कभी प्यार से तो कभी दुलार से बालमन में भावी जीवन के बीज बोती है। इसलिए यह आवश्यक है कि मातृत्व के भाव पर नारी मन के किसी दूसरे भाव का असर न आए। जैसाकि आज कन्याभ्रूणों की हत्या का जो सिलसिला बढ़ रहा है, वह नारी-शोषण का आधुनिक वैज्ञानिक रूप हैं तथा उसके लिए मातृत्व ही जिम्मेदार है। महान् जैन आचार्य एवं अणुव्रत आन्दोलन के प्रवर्तक आचार्य तुलसी की मातृ शक्ति को भारतीय संस्कृति से परिचित कराती हुई निम्न प्रेरणादायिनी पंक्तिया पठनीय ही नहीं, मननीय भी हैं- ‘‘भारतीय मां की ममता का एक रूप तो वह था, जब वह अपने विकलांग, विक्षिप्त और बीमार बच्चे का आखिरी सांस तक पालन करती थी। परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा की गई उसकी उपेक्षा से मां पूरी तरह से आहत हो जाती थी। वही भारतीय मां अपने अजन्मे, अबोल शिशु को अपनी सहमति से समाप्त करा देती है। क्यों? इसलिए नहीं कि वह विकलांग है, विक्षिप्त है, बीमार है पर इसलिए कि वह एक लड़की है। क्या उसकी ममता का स्रोत सूख गया है? कन्याभ्रूण की बढ़ती हुई हत्या एक ओर मनुष्य को नृशंस करार दे रही है, तो दूसरी ओर स्त्रियों की संख्या में भारी कमी मानविकी पर्यावरण में भारी असंतुलन उत्पन्न कर रही है।’’ अन्तर्राष्ट्रीय मातृ-दिवस को मनाते हुए मातृ-महिमा पर छा रहे ऐसे अनेक धुंधलों को मिटाना जरूरी है, जैसा मां ने हमें पलकों पर बैठाकर स्वर्ग जैसे सुखो की अनुभूति दी है उसी तरहां सेवाभावी बनकर रहना कभी अपनी मां की आंखों में आंसू मत आने देना तभी इस दिवस की सार्थकता है।

+40 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 31 शेयर

+14 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 87 शेयर
Naresh Narwal May 9, 2020

+35 प्रतिक्रिया 7 कॉमेंट्स • 61 शेयर
B.G.Agrawal May 10, 2020

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+1125 प्रतिक्रिया 161 कॉमेंट्स • 558 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB