मायमंदिर फ़्री कुंडली
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जय भोलेनाथ की🌹🌹🌹🌹 हिन्दू नववर्ष के पहले सोमवार की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ।🌹🌹🌹🌹🌹 आप व आपके पूरे परिवार का दिन शुभ व मंगलमय हो।🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय भोलेनाथ की🌹🌹🌹🌹
हिन्दू नववर्ष के पहले सोमवार की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ।🌹🌹🌹🌹🌹
आप व आपके पूरे परिवार का दिन शुभ व मंगलमय हो।🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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कामेंट्स

DR..SEEMA SONI Apr 28, 2019
जय श्री राधे कृष्णा शुभ प्रभात वंदन जी।सूर्य देव की कृपा आप और आपके परिवार पर सदा बनी रहे जी।🙏भाई जी 🙏

sumitra Apr 28, 2019
Ram ram bhaiji aapka HR pl Shubh v mnglmay ho bhaiji Surya bhgwan aapko sawsth rkhe Khush rkhe Bhai ji Aapka HR pl Shubh v mnglmay ho bhaiji🌹🙏

DR..SEEMA SONI Apr 29, 2019
ओम नमः शिवाय शुभ प्रभात वंदन भाई जी।🙏🌹🙏

Narayan Tiwari Apr 29, 2019
शिव मंत्र :-🚩 (१)- ॐ नम: शिवाय। महामृत्युंजय मंत्र:-🚩 (२) ॐ ह्रौं जू सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जू ह्रौं ॐ ॥  

DR..SEEMA SONI May 1, 2019
शुभ दोपहर वंदन भाई जी। श्री गणेशजी आपके सारे कष्ट दूर करे भाई जी।🙏🌹🙏

DR..SEEMA SONI May 1, 2019
ओम नमः शिवाय शुभ रात्रि भाई जी।🙏🌹🙏

DR..SEEMA SONI May 2, 2019
Om Sai ram Ji 🙏 Sri Laxmi Narayan Ji Aapko HR Khushi De Ji 🙏Good Afternoon Mere Bhaiya Ji 🙏

DR..SEEMA SONI May 3, 2019
Jay Mata Di 🙏Good Morning Ji 🙏Mata Rani Aapko HR Khushi De mere Bhaiya Ji 🙏

DR..SEEMA SONI May 5, 2019
Om Surya devay nmh 🙏 Good Morning Ji 🙏 Surya Dev ki kripa bni Rhe Ji 🙏 Bhai Ji 🙏

Anita Mittal May 7, 2019
हर हर महादेव जी महादेव का आशीर्वाद व स्नेह आपके साथ बना रहे भाईजी आपका हर पल मंंगलमय हो जी अक्षय तृतीया की सपरिवार हार्दिक शुभेच्छायें जी 🌹🌹🌷🌷🌹🌹

Savita May 7, 2019
om namh shiyay 🌹 har har mahadev 🌹 Akashay trirtya v parshuram jayanti ki hardik shubh kamnaye 🍁

DR..SEEMA SONI May 7, 2019
जय श्री राम जी जय हनुमान जी।अक्षय तृतीया और परशु राम जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं जी 🙏भैया जी 🙏🌹🙏

Babita Sharma May 7, 2019
अक्षय तृतीया एवं परशुराम जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं भाई🙏🌹🌹 आपके जीवन में सुख समृद्धि एवं स्वास्थ्य का अक्षय वास हो। जय श्री राधे कृष्णा 🌺🌱🌺

sumitra May 8, 2019
jAi Shree Ganesh Bhai ji ganpati bappa aapki HR mnokamna Puri kre bhaiji Aapka din shubh v mnglmay ho bhaiji🌹🙏

sumitra May 10, 2019
jAi Mata Di bhaiji Mata Rani aapko Aapke priwar ko hmesha Khush rkhe Bhai ji Aapka din shubh v mnglmay ho bhaiji🌹🙏

B. L. Soni. vns. May 14, 2019
shree Radhe Radhe JI 🌹🌴🌹 Jab30yrars me patal me JAL nahi Rahega to usha time Kiya hoga Apne mb. se adhik se adhik Pena poudha Lagane ke prati muhim chalaiye.. 🙏🌴🌴🌴🌴🌄🌿

Sanjay Singh Jul 16, 2019

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SUNIL KUMAR SHARMA Jul 16, 2019

गुरु भक्त आरुणि यह महर्षि आयोदधौम्य का आश्रम है। पूरे आश्रम में म‍हर्षि की मंत्र वाणी गूंजती रहती है। गुरुजी प्रात: 4 बजे उठकर गंगा स्नान करके लौटते, तब तक शिष्यगण भी नहा-धोकर बगीची से फूल तोड़कर गुरु को प्रणाम कर उपस्थित हो जाते। आश्रम, पवित्र यज्ञ धूम्र से सुगंधित रहता। आश्रम में एक तरफ बगीचा था। बगीचे के सामने झोपड़ियों में अनेक शिष्य रहते थे। एक दिन की बात है सायंकाल अचानक बादलों की गर्जना सुनाई देने लगी... घड़ड़ड़... घड़ड़ड़...।   कुछ दूर गुरुजी के खेत थे। गुरुजी ने सोचा कि कहीं अपने धान के खेत की मेड़ अधिक पानी भरने से टूट न जाए। खेतों में से सब पानी बह जाएगा। मिट्टी कट जाएगी। उन्होंने आवाज दी- आरुणि! बेटा आरुणिऽऽ! उपस्थित हुआ गुरुदेवऽऽ! बेटा आरुणि! वर्षा हो रही है। तुम खेत पर जाओ और देखो, कहीं मेड़ टूटकर खेत का पानी निकल न जाए। जो आज्ञा गुरुदेव! गुरु का आदेश पाकर आरुणि चल पड़ा खेत की ओर। झमाझम पानी बरस रहा था। बादल गरज रहे थे... घड़ड़ड़ऽऽऽ ... ऽऽऽ...।  मोर मस्ती में भर वर्षा के स्वागत में टुहुक रहे थे- पि... केऽऽ क। पिऽऽ कोऽऽ का। आरुणि भीगता हुआ भी दौड़ा जा रहा था। गुरुजी ने दूसरे शिष्यों की बजाए आरुणि को आदेश दिया इसलिए आरुणि खुशी से फूला नहीं समा रहा था। उसके कानों में वर्षा की रिमझिम के स्थान पर गुरुजी की बताई शिक्षा गूंजने लगी- गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर:। आरुणि ने देखा कि खेत की मेड़ एक स्थान पर टूट गई है तथा वहां से बड़े जोर से पानी की धारा बहने लगी है। आरुणि ने टूटी मेड़ पर मिट्टी जमाकर पानी रोकना चाहा किंतु बहता पानी मिट्टी को बहा ले जाता। . हाय! यह तो सारी मेहनत ही बेकार हो गई। पानी तो ठहरता ही नहीं। क्या करूं? मैं खुद ही क्यों नहीं टूटी मेड़ के स्थान पर सो जाऊं? हां, यही ठीक रहेगा। और आरुणि सचमुच टूटी‍ मेड़ के स्थान पर सो गया। पानी का बहाव थम गया।  रात पड़ गई। चारों ओर अंधकार ही अंधकार। बादलों की गर्जना... घड़ड़ड़... घड़ड़ड़...।  गीदड़ों की... हुआऽऽ हुआऽऽ। झमाझम बरसता पानी। कल-कल बहती धाराएं। सर्द हवाएं। आरुणि का शरीर सर्दी से अकड़ने लगा किंतु उसे तो एक ही धुन... गुरु की आज्ञा का पालन। बहता हुआ पानी कल-कल करता मानो आरुणि को कहने लगा- मैं वर्षा का बहता पानी,  मेरी चाल बड़ी तूफानी। उठ आरुणि अपने घर जा, रास्ता दे दे, हट जा, हट जा।।  मगर गुरु भक्त बालक आरुणि का उत्तर था-  गुरुजी का आदेश मुझे है, मैं रोकूंगा बहती धारा। जय गुरु देवा, जय गुरु देवा, आज्ञा पालन काम हमारा।। रात बीतती रही। बादल गरजते रहे। गीदड़ चीखते रहे- हुआऽऽ हुआऽऽ।  मेंढक टर्राते रहे- टर्र... टर्र... टर्र...। एक घंटा... दो घंटे... तीन घंटे...। आरुणि रातभर खेत के सहारे सोता रहा। सर्दी में शरीर सुन्न पड़ गया। गुरुदेव के खेत से पानी बहने न पाए, इस विचार से वह न तो तनिक भी हिला और न ही उसने करवट बदली। शरीर भयंकर पीड़ा होते रहने पर भी सचमुच गुरु का स्मरण करते हुए पड़ रहा।  चिड़िया चहकने लगी। मुर्गे ने सुबह होने की सूचना दी... कुकड़ूं कूंऽऽ।  गुरुजी नहा-धोकर लौटे। सभी शिष्यगण सदैव की तरह गुरुजी को प्रणाम करने पहुंचा- गुरुदेव प्रणाम! प्रसन्न रहो उपमन्यु! गुरुदेव प्रणाम! प्रसन्न रहो बेटा वेद! गुरु ने देखा कि आज आरुणि प्रणाम करने नहीं आया। उन्होंने दूसरे शिष्यों से पूछा- आज आरुणि नहीं दिख रहा है?  एक शिष्य ने याद दिलाया- गुरुदेव! आरुणि कल संध्या समय खेत की मेड़ बांधने गया था, तब से अब तक नहीं लौटा। अरे हां, याद आ गया। किंतु वह लौटा क्यों नहीं? कहां रह गया? चलो पता लगाएं। महर्षि अपने शिष्यों की टोली के साथ आरुणि को ढूंढ़ने निकल पड़े। चलते-चलते वे खेत की मेड़ की तरफ जा पहूंचे।  बेटा आरुणिऽऽ! कहां हो? किंतु आरुणि का शरीर सर्दी से इतना अकड़ गया था कि न बोला जा रहा था, न हिल-डुल सकता था। वह रहा। वह तो मेड़ के सहारे पानी के बहाव में मूर्छित पड़ा है- एक ने बताया। सभी वहां पहुंचे। उन्होंने मरणासन्न आरुणि को उठाया। हाथ-पांवों की मालिश की। थोड़ी देर बाद उसे होश आ गया। गुरुजी ने सब बातें सुनकर उसे हृदय से लगा लिया और आशीर्वाद दिया- बेटा आरुणि! तुम सच्चे गुरुभक्त हो। तुम्हें सब विद्याएं अपने आप ही आ जाएंगी। जगत में आरुणि की गुरुभक्ति सदा अमर रहेगी। सभी बालकों ने आरुणि को कंधों पर उठा लिया। घोष होने लगा। गुरु भक्त आरुणि,  धन्य हो। धन्य हो। गुरु भक्त आरुणि,  धन्य हो। धन्य हो।

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M S MAMTA Jul 16, 2019

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Ajay singh Jul 16, 2019

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Gopal Jalan Jul 16, 2019

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deepa chaturvedi Jul 16, 2019

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