Anuradha Tiwari
Anuradha Tiwari Aug 15, 2018

नागपंचमी की पौराणिक एवं प्रामाणिक कथा..

नागपंचमी की पौराणिक एवं प्रामाणिक कथा..

आपको सपरिवार इष्टमित्रों सहित स्वतंत्रता दिवस एवं नाग पंचमी की मंगलमय हार्दिक शुभकामनाएं... विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झण्डा ऊँचा रहें हमारा।।

*जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन।
करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन॥

भावार्थ:-जिन्हें स्मरण करने से सब कार्य सिद्ध होते हैं, जो गणों के स्वामी और सुंदर हाथी के मुख वाले हैं, वे ही बुद्धि के राशि और शुभ गुणों के धाम (श्री गणेशजी) मुझ पर कृपा करें॥

नागपंचमी की पौराणिक एवं प्रामाणिक कथा...

नागपंचमी की पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक सेठजी के सात पुत्र थे। सातों के विवाह हो चुके थे। सबसे छोटे पुत्र की पत्नी श्रेष्ठ चरित्र की विदूषी और सुशील थी, परंतु उसके भाई नहीं था।

एक दिन बड़ी बहू ने घर लीपने को पीली मिट्टी लाने के लिए सभी बहुओं को साथ चलने को कहा तो सभी धलिया और खुरपी लेकर मिट्टी खोदने लगी। तभी वहां एक सर्प निकला, जिसे बड़ी बहू खुरपी से मारने लगी। यह देखकर छोटी बहू ने उसे रोकते हुए कहा- 'मत मारो इसे? यह बेचारा निरपराध है।'

यह सुनकर बड़ी बहू ने उसे नहीं मारा तब सर्प एक ओर जा बैठा। तब छोटी बहू ने उससे कहा-'हम अभी लौट कर आती हैं तुम यहां से जाना मत। यह कहकर वह सबके साथ मिट्टी लेकर घर चली गई और वहां कामकाज में फँसकर सर्प से जो वादा किया था उसे भूल गई।

उसे दूसरे दिन वह बात याद आई तो सब को साथ लेकर वहां पहुंची और सर्प को उस स्थान पर बैठा देखकर बोली- सर्प भैया नमस्कार! सर्प ने कहा- 'तू भैया कह चुकी है, इसलिए तुझे छोड़ देता हूं, नहीं तो झूठी बात कहने के कारण तुझे अभी डस लेता।

वह बोली- भैया मुझसे भूल हो गई, उसकी क्षमा माँगती हूँ, तब सर्प बोला- अच्छा, तू आज से मेरी बहिन हुई और मैं तेरा भाई हुआ। तुझे जो माँगना हो, माँग ले। वह बोली- भैया! मेरा कोई नहीं है, अच्छा हुआ जो तू मेरा भाई बन गया।

कुछ दिन व्यतीत होने पर वह सर्प मनुष्य का रूप रखकर उसके घर आया और बोला कि 'मेरी बहिन को भेज दो।' सबने कहा कि 'इसके तो कोई भाई नहीं था, तो वह बोला- मैं दूर के रिश्ते में इसका भाई हूँ, बचपन में ही बाहर चला गया था।

उसके विश्वास दिलाने पर घर के लोगों ने छोटी को उसके साथ भेज दिया। उसने मार्ग में बताया कि 'मैं वहीं सर्प हूँ, इसलिए तू डरना नहीं और जहां चलने में कठिनाई हो वहां मेरी पूछ पकड़ लेना। उसने कहे अनुसार ही किया और इस प्रकार वह उसके घर पहुंच गई। वहां के धन-ऐश्वर्य को देखकर वह चकित हो गई।

एक दिन सर्प की माता ने उससे कहा- 'मैं एक काम से बाहर जा रही हूँ, तू अपने भाई को ठंडा दूध पिला देना। उसे यह बात ध्यान न रही और उसने गर्म दूध पिला दिया, जिसमें उसका मुख बेतरह जल गया। यह देखकर सर्प की माता बहुत क्रोधित हुई।

परंतु सर्प के समझाने पर चुप हो गई। तब सर्प ने कहा कि बहिन को अब उसके घर भेज देना चाहिए। तब सर्प और उसके पिता ने उसे बहुत सा सोना, चाँदी, जवाहरात, वस्त्र-भूषण आदि देकर उसके घर पहुंचा दिया।

इतना ढेर सारा धन देखकर बड़ी बहू ने ईर्ष्या से कहा- भाई तो बड़ा धनवान है, तुझे तो उससे और भी धन लाना चाहिए। सर्प ने यह वचन सुना तो सब वस्तुएं सोने की लाकर दे दीं। यह देखकर बड़ी बहू ने कहा- 'इन्हें झाड़ने की झाड़ू भी सोने की होनी चाहिए'। तब सर्प ने झाडू भी सोने की लाकर रख दी।

सर्प ने छोटी बहू को हीरा-मणियों का एक अद्भुत हार दिया था। उसकी प्रशंसा उस देश की रानी ने भी सुनी और वह राजा से बोली कि- सेठ की छोटी बहू का हार यहां आना चाहिए।'

राजा ने मंत्री को हुक्म दिया कि उससे वह हार लेकर शीघ्र उपस्थित हो मंत्री ने सेठजी से जाकर कहा कि 'महारानीजी छोटी बहू का हार पहनेंगी, वह उससे लेकर मुझे दे दो'। सेठजी ने डर के कारण छोटी बहू से हार मँगाकर दे दिया।

छोटी बहू को यह बात बहुत बुरी लगी, उसने अपने सर्प भाई को याद किया और आने पर प्रार्थना की- भैया ! रानी ने हार छीन लिया है, तुम कुछ ऐसा करो कि जब वह हार उसके गले में रहे, तब तक के लिए सर्प बन जाए और जब वह मुझे लौटा दे तब हीरों और मणियों का हो जाए। सर्प ने ठीक वैसा ही किया। जैसे ही रानी ने हार पहना, वैसे ही वह सर्प बन गया। यह देखकर रानी चीख पड़ी और रोने लगी।

यह देख कर राजा ने सेठ के पास खबर भेजी कि छोटी बहू को तुरंत भेजो। सेठजी डर गए कि राजा न जाने क्या करेगा? वे स्वयं छोटी बहू को साथ लेकर उपस्थित हुए।

राजा ने छोटी बहू से पूछा- तुने क्या जादू किया है, मैं तुझे दंड दूँगा। छोटी बहू बोली- राजन ! धृष्टता क्षमा कीजिए, यह हार ही ऐसा है कि मेरे गले में हीरों और मणियों का रहता है और दूसरे के गले में सर्प बन जाता है। यह सुनकर राजा ने वह सर्प बना हार उसे देकर कहा- अभी पहनकर दिखाओ। छोटी बहू ने जैसे ही उसे पहना वैसे ही हीरों-मणियों का हो गया।

यह देखकर राजा को उसकी बात का विश्वास हो गया और उसने प्रसन्न होकर उसे बहुत सी मुद्राएं भी पुरस्कार में दीं। छोटी बहू अपने हार और धन सहित घर लौट आई। उसके धन को देखकर बड़ी बहू ने ईर्ष्या के कारण उसके पति को सिखाया कि छोटी बहू के पास कहीं से धन आया है। यह सुनकर उसके पति ने अपनी पत्नी को बुलाकर कहा- ठीक-ठीक बता कि यह धन तुझे कौन देता है? तब वह सर्प को याद करने लगी।

तब उसी समय सर्प ने प्रकट होकर कहा- यदि मेरी धर्म बहिन के आचरण पर संदेह प्रकट करेगा तो मैं उसे खा लूँगा। यह सुनकर छोटी बहू का पति बहुत प्रसन्न हुआ और उसने सर्प देवता का बड़ा सत्कार किया। उसी दिन से नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है और स्त्रियां सर्प को भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं।

Pranam Belpatra Sindoor +267 प्रतिक्रिया 34 कॉमेंट्स • 494 शेयर

कामेंट्स

Prakash Dhaka Aug 15, 2018
anuradha gi बहूत अछि मारवाङी कहानि भेजी आपने 🙏🙏

Ram pal Sharma Aug 15, 2018
Om Namo shvai Har Har Maha Dev shiv Bole Nath Baba ji kee Jai Nag maharaj ji kee Jai

Anuradha Tiwari Sep 20, 2018

आँखों से उजाला रूठने से पहले ,
मुंह से निवाला छूटने से पहले ,
एक बार तो मेरे प्रभु दरस दिखा जाना ,
मेरे इन साँसों की माला टूटने से पहले !

,,,,,,, प्रभु दर्शन एवं प्रभु की कृपा प्राप्त करने के लिए ऋषियों एवं मनीषियों द्वारा प्रतिपादित "यम एवं नियम...

(पूरा पढ़ें)
Tulsi Milk Pranam +23 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 15 शेयर
Mahima Shukla Sep 20, 2018

RADHE RADHE to everyone.
Finally I fixed my schedule.
And Kanha' ki Kripa se Muze itna time mil gaya ki Mai..post dal sakun..

Thank you so much Kanha'..

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏😊

Like Flower Belpatra +45 प्रतिक्रिया 18 कॉमेंट्स • 50 शेयर
Sushil Dhiman Sep 21, 2018

एक बहुत बड़ा विशाल पेड़ था। उस पर बीसीयों हंस रहते थे। उनमें एक बहुत सयाना हंस था, बुद्धिमान और बहुत दूरदर्शी। सब उसका आदर करते ‘ताऊ’ कहकर बुलाते थे। एक दिन उसने एक नन्ही-सी बेल को पेड़ के तने पर बहुत नीचे लिपटते पाया। ताऊ ने दूसरे हंसों को बुलाकर कह...

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Belpatra Bell Pranam +25 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 72 शेयर
Navyug Mishra Sep 20, 2018

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""" विकल्प """
बाज लगभग सत्तर वर्ष जीवित रहता है | परन्तु अपने जीवन के चालीसवें वर्ष में आते-आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है | उस अवस्था में उसके शरीर के तीन प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं |

पंजे लम्बे...

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Pranam Like Bell +36 प्रतिक्रिया 10 कॉमेंट्स • 113 शेयर

Dhoop Belpatra Pranam +375 प्रतिक्रिया 53 कॉमेंट्स • 202 शेयर

🙏🌹जय श्री अनादिकल्पेश्वर 🌹🙏
पृथ्वी के नाभि केन्द्र श्री अनादिकल्पेश्वर महादेव का आज का संध्या आरती शृंगार दर्शन श्री महाकालेश्वर महाकाल मंदिर परिसर उज्जैन मध्यप्रदेश से

20 सितंबर 2018 ( बृहस्पतिवार )

Belpatra Jyot Pranam +33 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 17 शेयर
Manpreet Kaur Sep 20, 2018

Like Bell Pranam +30 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 54 शेयर

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