. श्री श्रीचैतन्य चरित्रावली पोस्ट - 153 श्री शिवानन्द सेन की सहनशीलता न भवति भवति च न चिरं भवति चिरं चेत् फले विसंवादी। कोपः सत्पुरुषाणां तुल्यः स्नेहेन नीचानाम्॥ पहले तो महापुरुषों को क्रोध होता ही नहीं है यदि किसी विशेष कारणवश क्रोध हो भी जाय तो वह स्थायी नहीं रहता, क्षण भर में ही शान्त हो जाता है। यदि कोई ऐसा ही भारी कारण आ उपस्थित हुआ और महापुरुषों का कोप कुछ काल तक बना रहा तो उसका परिणाम सुखकारी ही होता है। महापुरुषों को बड़ा भारी कोप और नीच पुरुषों का अत्यधिक स्नेह दोनों बराबर ही हैं। बल्कि कुपुरुषों के प्रेम से सत्पुरुषों का क्रोध लाख दर्जे अच्छा है, किन्तु सत्पुरुषों के क्रोध को सहन करने की शक्ति सब किसी में नहीं होती है। कोई परम भाग्यवान क्षमाशील भगवद्भक्त ही महापुरुषों के क्रोध को बिना मन में विकार लाये सहन करने में समर्थ होते हैं और इसीलिये वे संसार में सुयश के भागी बनते हैं। क्योंकि शास्त्रों में मनुष्य का भूषण सुन्दर रूप बताया गया है, सुन्दर रूप भी तभी शोभा पाता है, जब उसके साथ सदगुण भी हों। सदगुणों का भूषण ज्ञान है और ज्ञान का भूषण क्षमा है।[2]चाहे मनुष्य कितना भी बड़ा ज्ञानी क्यों न हो, उसमें कितने ही सदगुण क्यों न हों, उसका रूप कितना ही सुन्दर क्यों न हो, यदि उसमें क्षमा नहीं है, यदि वह लोगों के द्वारा कही हुई कड़वी बातों को प्रसन्नतापूर्वक सहन नहीं कर सकता तो उसका रूप, ज्ञान और सभी प्रकार के सदगुण व्यर्थ ही हैं। क्षमावान तो कोई शिवानन्द जी सेन के समान लाखों-करोड़ों में एक आध ही मिलेंगे। महात्मा शिवानन्द जी तो क्षमा के अवतार ही थे- इसे पाठक नीचे की घटना से समझ सकेंगे। पाठकों को यह तो पता ही है कि गौड़ीय भक्त रथ यात्रा को उपलक्ष्य बनाकर प्रतिवर्ष ज्येष्ठ के अन्त में अपने स्त्री-बच्चों के सहित श्री जगन्नाथ पुरी में आते थे और बरसात के चार मास बिताकर अन्त में अपने-अपने घरों को लौट जाते थे। उन सबके लाने का, मार्ग में सभी प्रकार के प्रबन्ध करने का भार प्रभु ने शिवानन्द जी को ही सौंप दिया था। वे भी प्रतिवर्ष अपने पास से हजारों रुपये व्यय करके बड़ी सावधानी के साथ भक्तों को अपने साथ लाते थे। सबसे अधिक कठिनाई घाटों पर उतरने की थी। एक एक, दो-दो रुपये उतराई लेने पर भी घाट वाले यात्रियों को ठीक समय पर नहीं उतारते थे। यद्यपि महाप्रभु के देशव्यापी प्रभाव के कारण गौर भक्तों को इतनी अधिक असुविधा नहीं होती थी, फिर भी कोई कोई खोटी बुद्धि वाला घटवारिया इनसे कुछ-न-कुछ अड़ंगा लगा ही देता था। ये बड़े सरल थे, सम्पूर्ण भक्तों का भार इन्हीं के ऊपर था, इसलिये घटवारिया, पहले-पहल इन्हें ही पकड़ते थे। एक बार नीलाचंल आते समय पुरी के पास ही किसी घटवारिया ने शिवानन्द सेनजी को रोक रखा। वे भक्तों के ठहरने और खाने पीने का कुछ भी प्रबन्ध न कर सके। क्योंकि घटवारियों ने उन्हें वहीं बैठा लिया था। इससे नित्यानन्द जी को उनके ऊपर बड़ा क्रोध आया। एक तो वे दिन भर भूखे थे, दूसरे रास्ता चलकर आये थे, तीसरे भक्तों को निराश्रय भटकते देखने से उनका क्रोध उभड़ पड़ा। वे सेन महाशय करे भली बूरी बातें सुनाने लगे, उसी क्रोध के आवेश में आकर उन्होंने यहाँ तक कह डाला कि- ‘इस शिवानन्द के तीनों पुत्र मर जाये, इसकी धन सम्पत्ति का नाश हो जाय, इसने हमारे तथा भक्तों के रहने और खाने पीने का कुछ भी प्रबन्ध नहीं किया।’ नित्यानन्द जी के क्रोध में दिये हुए ऐसे अभिशाप को सुनकर सेन महाशय की पत्नी को अत्यन्त ही दुःख हुआ, वे फूट फूट कर रोने लगीं। जब बहुत रात्रि बीतने पर घाटवालों से जैसे-तैसे पिण्ड छुड़ाकर शिवानन्द जी अपने बाल-बच्चों के समीप आये तब उनकी धर्मपत्नी ने रोते रोते कहा- 'गुसाईं ने क्रुद्ध होकर हमें ऐसा भयंकर शाप दे दिया है। हमने उनका ऐसा क्या बिगाड़ा था? अब भी वे क्रुद्ध हो रहे हैं, आप उनके पास न जायँ।’ शिवानन्द जी ने दृढ़ता के साथ पत्नी की बात की अवहेलना करते हुए कहा- ‘पगली कहीं की ! तू उन महापुरुष की महिमा क्या जाने? तेरे तीनों पुत्र चाहे अभी मर जायँ और धन सम्पत्ति की तो मुझे कुछ परवा नहीं। वह तो सब गुसाईं की ही है, वे चाहें तो आज ही सबको छीन लें। मैं अभी उनके पास जाऊँगा और उनके चरण पकड़कर उन्हें शान्त करूँगा।’ यह कहते हुए वे नित्यानन्द जी के समीप चले। उस समय भी नित्यानन्द जी का क्रोध शान्त नहीं हुआ था। वृद्ध शिवानन्द जी को अपनी ओर आते देखकर उनकी पीठ में उठकर जोरों से एक लात मारी। सेन महाशय ने कुछ भी नहीं कहा। उसी समय उनके ठहरने और खाने पीने की समुचित व्यवस्था करके हाथ जोड़े हुए कहने लगे- ‘प्रभो ! आज मेरा जन्म सफल हुआ, जिन चरणों की रज के लिये इन्द्रादि देवता भी तरसते हैं वही चरण आपने मेंरी पीठ से छुआये। मैं सचमुच कृतार्थ हो गया। गुसाईं ! अज्ञान के कारण मेरा जो अपराध हुआ हो, उसे क्षमा करें। मैं अपनी मूर्खतावश आपको क्रुद्ध करने का कारण बना- इस अपराध के लिये मैं लज्जित हूँ। प्रभो ! मुझे अपना सेवक समझकर मेरे समसत अपराधों को क्षमा करें और मुझ पर प्रसन्न हों।’ शिवानन्द जी की इतनी सहनयशीलता, ऐसी क्षमा और ऐसी एकान्तनिष्ठा को देखकर नित्यानन्द जी का हृदय भर आया। उन्होंने जल्दी से उठकर शिवानन्द जी को गले से लगाया और उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहने लगे-‘शिवानन्द ! तुम्हीं सचमुच प्रभु के परम कृपापात्र बनने योग्य हो। जिसमें इतनी अधिक क्षमा है वह प्रभु का अवश्य ही अन्तरंग भक्त बन सकता है।’ सचमुच नित्यानन्द जी का यह आशीर्वाद फलीभूत हुआ और प्रभु ने सेन महाशय के ऊपर अपार कृपा प्रदर्शित की। प्रभु ने अपने अच्छिष्ट महाप्रसाद को शिवानन्द जी के सम्पूर्ण परिवार के लिये भिजवाने की गोविन्द को स्वयं आशा दी। इनकी ऐसी ही तपस्या के परिणामस्वरूप तो कवि कर्णपूर-जैसे परम प्रतिभावान महाकवि और भक्त इनके यहाँ पुत्ररूप में उत्पन्न हुए। नित्यानन्द जी का ऐसा बर्ताव शिवानन्द जी सेन के भगिनी-पुत्र श्री कान्त को बहुत ही अरुचिकर प्रतीत हुआ। वह युवक था, शरीर में युवावस्था का नूतन रक्त प्रवाहित हो रहा था, इस बात से उसने अपने मामा का घोर अपमान समझा और इसकी शिकायत करने के निमित्त वह सभी भक्तों से अलग होकर सबसे पहले प्रभु के समीप पहुँचा। बिना वस्त्र उतारे ही वह प्रभु को प्रणाम करने लगा। इस पर गोविन्द ने कहा- श्री कान्त ! तुम यह शिष्टाचार के विरुद्ध बर्ताव क्यों कर रहे हो? अंगरखे को उतारकर तब साष्टांग प्रणाम किया जाता है। पहले वस्त्रों को उतार लो, रास्ते की थकान मिटा लो, हाथ-मुँह धो लो, तब प्रभु के सम्मुख प्रणाम करने जाना।’ किन्तु उसने गोविन्द की बात नहीं सुनी। प्रभु भी समझ गये अवश्य ही कुछ दाल में काला है, इसलिये उन्होंने गोविन्द से कह दिया- ‘श्री कान्त के लिये क्या शिष्टाचार और नियम, वह जो करता है ठीक ही है, इसे तुम मत रोका। इसी दशा में इसे बातें करने दो।’ इतना कहकर प्रभु उससे भक्तों के सम्बन्ध में बहुत सी बातें पूछने लगे। पुराने भक्तों की बात पूछकर प्रभु ने नवीन भक्तों के सम्बन्ध में पूछा कि अबके बाल भक्तों में से कौन-कौन आया है? प्रभु के पीछे जो बच्चे उत्पन्न हुए थे, वे सभी अबके अपनी अपनी माताओं के साथ प्रभु के दर्शनों की उत्कण्ठा से आ रहे थे। श्रीकान्त ने सभी बच्चों का परिचय देते हुए शिवानन्द जी के पुत्र परमानन्द दास का परिचय दिया और उसकी प्रखर प्रतिभा तथा प्रभु दर्शनों की उत्कण्ठा की भी प्रशंसा की। प्रभु उस बच्चे को देखने के लिये लालायित से प्रतीत होने लगे। इन सभी बातों में श्री कान्त नित्यानन्द जी की शिकायत करना भूल गये। इतने में ही सभी भक्त आ उपस्थित हुए। प्रभु ने सदा की भाँति सबका स्वागत-सत्कार किया और उन्हें रहने के लिये यथायोग्य स्थान दिलाकर सभी के प्रसाद की व्यवस्था करायी। श्रीकृष्ण! गोविन्द! हरे मुरारे! हे नाथ! नारायण! वासुदेव! ----------:::×:::---------- - प्रभुदत्त ब्रह्मचारी श्री श्रीचैतन्य चरित्रावली (123) गीताप्रेस (गोरखपुर) "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप " *******************************************

.                      श्री श्रीचैतन्य चरित्रावली
                               पोस्ट - 153

                श्री शिवानन्द सेन की सहनशीलता

     न भवति भवति च न चिरं भवति चिरं चेत् फले विसंवादी।
     कोपः     सत्पुरुषाणां      तुल्यः      स्नेहेन       नीचानाम्॥

          पहले तो महापुरुषों को क्रोध होता ही नहीं है यदि किसी विशेष कारणवश क्रोध हो भी जाय तो वह स्थायी नहीं रहता, क्षण भर में ही शान्त हो जाता है। यदि कोई ऐसा ही भारी कारण आ उपस्थित हुआ और महापुरुषों का कोप कुछ काल तक बना रहा तो उसका परिणाम सुखकारी ही होता है। महापुरुषों को बड़ा भारी कोप और नीच पुरुषों का अत्यधिक स्नेह दोनों बराबर ही हैं। बल्कि कुपुरुषों के प्रेम से सत्पुरुषों का क्रोध लाख दर्जे अच्छा है, किन्तु सत्पुरुषों के क्रोध को सहन करने की शक्ति सब किसी में नहीं होती है। कोई परम भाग्यवान क्षमाशील भगवद्भक्त ही महापुरुषों के क्रोध को बिना मन में विकार लाये सहन करने में समर्थ होते हैं और इसीलिये वे संसार में सुयश के भागी बनते हैं। क्योंकि शास्त्रों में मनुष्य का भूषण सुन्दर रूप बताया गया है, सुन्दर रूप भी तभी शोभा पाता है, जब उसके साथ सदगुण भी हों। सदगुणों का भूषण ज्ञान है और ज्ञान का भूषण क्षमा है।[2]चाहे मनुष्य कितना भी बड़ा ज्ञानी क्यों न हो, उसमें कितने ही सदगुण क्यों न हों, उसका रूप कितना ही सुन्दर क्यों न हो, यदि उसमें क्षमा नहीं है, यदि वह लोगों के द्वारा कही हुई कड़वी बातों को प्रसन्नतापूर्वक सहन नहीं कर सकता तो उसका रूप, ज्ञान और सभी प्रकार के सदगुण व्यर्थ ही हैं। क्षमावान तो कोई शिवानन्द जी सेन के समान लाखों-करोड़ों में एक आध ही मिलेंगे। महात्मा शिवानन्द जी तो क्षमा के अवतार ही थे- इसे पाठक नीचे की घटना से समझ सकेंगे।
          पाठकों को यह तो पता ही है कि गौड़ीय भक्त रथ यात्रा को उपलक्ष्य बनाकर प्रतिवर्ष ज्येष्ठ के अन्त में अपने स्त्री-बच्चों के सहित श्री जगन्नाथ पुरी में आते थे और बरसात के चार मास बिताकर अन्त में अपने-अपने घरों को लौट जाते थे। उन सबके लाने का, मार्ग में सभी प्रकार के प्रबन्ध करने का भार प्रभु ने शिवानन्द जी को ही सौंप दिया था। वे भी प्रतिवर्ष अपने पास से हजारों रुपये व्यय करके बड़ी सावधानी के साथ भक्तों को अपने साथ लाते थे। सबसे अधिक कठिनाई घाटों पर उतरने की थी। एक एक, दो-दो रुपये उतराई लेने पर भी घाट वाले यात्रियों को ठीक समय पर नहीं उतारते थे। यद्यपि महाप्रभु के देशव्यापी प्रभाव के कारण गौर भक्तों को इतनी अधिक असुविधा नहीं होती थी, फिर भी कोई कोई खोटी बुद्धि वाला घटवारिया इनसे कुछ-न-कुछ अड़ंगा लगा ही देता था। ये बड़े सरल थे, सम्पूर्ण भक्तों का भार इन्हीं के ऊपर था, इसलिये घटवारिया, पहले-पहल इन्हें ही पकड़ते थे।
          एक बार नीलाचंल आते समय पुरी के पास ही किसी घटवारिया ने शिवानन्द सेनजी को रोक रखा। वे भक्तों के ठहरने और खाने पीने का कुछ भी प्रबन्ध न कर सके। क्योंकि घटवारियों ने उन्हें वहीं बैठा लिया था। इससे नित्यानन्द जी को उनके ऊपर बड़ा क्रोध आया। एक तो वे दिन भर भूखे थे, दूसरे रास्ता चलकर आये थे, तीसरे भक्तों को निराश्रय भटकते देखने से उनका क्रोध उभड़ पड़ा। वे सेन महाशय करे भली बूरी बातें सुनाने लगे, उसी क्रोध के आवेश में आकर उन्होंने यहाँ तक कह डाला कि- ‘इस शिवानन्द के तीनों पुत्र मर जाये, इसकी धन सम्पत्ति का नाश हो जाय, इसने हमारे तथा भक्तों के रहने और खाने पीने का कुछ भी प्रबन्ध नहीं किया।’ 
          नित्यानन्द जी के क्रोध में दिये हुए ऐसे अभिशाप को सुनकर सेन महाशय की पत्नी को अत्यन्त ही दुःख हुआ, वे फूट फूट कर रोने लगीं। जब बहुत रात्रि बीतने पर घाटवालों से जैसे-तैसे पिण्ड छुड़ाकर शिवानन्द जी अपने बाल-बच्चों के समीप आये तब उनकी धर्मपत्नी ने रोते रोते कहा- 'गुसाईं ने क्रुद्ध होकर हमें ऐसा भयंकर शाप दे दिया है। हमने उनका ऐसा क्या बिगाड़ा था? अब भी वे क्रुद्ध हो रहे हैं, आप उनके पास न जायँ।’ 
          शिवानन्द जी ने दृढ़ता के साथ पत्नी की बात की अवहेलना करते हुए कहा- ‘पगली कहीं की ! तू उन महापुरुष की महिमा क्या जाने? तेरे तीनों पुत्र चाहे अभी मर जायँ और धन सम्पत्ति की तो मुझे कुछ परवा नहीं। वह तो सब गुसाईं की ही है, वे चाहें तो आज ही सबको छीन लें। मैं अभी उनके पास जाऊँगा और उनके चरण पकड़कर उन्हें शान्त करूँगा।’ 
          यह कहते हुए वे नित्यानन्द जी के समीप चले। उस समय भी नित्यानन्द जी का क्रोध शान्त नहीं हुआ था। वृद्ध शिवानन्द जी को अपनी ओर आते देखकर उनकी पीठ में उठकर जोरों से एक लात मारी। सेन महाशय ने कुछ भी नहीं कहा। उसी समय उनके ठहरने और खाने पीने की समुचित व्यवस्था करके हाथ जोड़े हुए कहने लगे- ‘प्रभो ! आज मेरा जन्म सफल हुआ, जिन चरणों की रज के लिये इन्द्रादि देवता भी तरसते हैं वही चरण आपने मेंरी पीठ से छुआये। मैं सचमुच कृतार्थ हो गया। गुसाईं ! अज्ञान के कारण मेरा जो अपराध हुआ हो, उसे क्षमा करें। मैं अपनी मूर्खतावश आपको क्रुद्ध करने का कारण बना- इस अपराध के लिये मैं लज्जित हूँ। प्रभो ! मुझे अपना सेवक समझकर मेरे समसत अपराधों को क्षमा करें और मुझ पर प्रसन्न हों।’
          शिवानन्द जी की इतनी सहनयशीलता, ऐसी क्षमा और ऐसी एकान्तनिष्ठा को देखकर नित्यानन्द जी का हृदय भर आया। उन्होंने जल्दी से उठकर शिवानन्द जी को गले से लगाया और उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहने लगे-‘शिवानन्द ! तुम्हीं सचमुच प्रभु के परम कृपापात्र बनने योग्य हो। जिसमें इतनी अधिक क्षमा है वह प्रभु का अवश्य ही अन्तरंग भक्त बन सकता है।’ सचमुच नित्यानन्द जी का यह आशीर्वाद फलीभूत हुआ और प्रभु ने सेन महाशय के ऊपर अपार कृपा प्रदर्शित की। प्रभु ने अपने अच्छिष्ट महाप्रसाद को शिवानन्द जी के सम्पूर्ण परिवार के लिये भिजवाने की गोविन्द को स्वयं आशा दी। इनकी ऐसी ही तपस्या के परिणामस्वरूप तो कवि कर्णपूर-जैसे परम प्रतिभावान महाकवि और भक्त इनके यहाँ पुत्ररूप में उत्पन्न हुए। नित्यानन्द जी का ऐसा बर्ताव शिवानन्द जी सेन के भगिनी-पुत्र श्री कान्त को बहुत ही अरुचिकर प्रतीत हुआ। वह युवक था, शरीर में युवावस्था का नूतन रक्त प्रवाहित हो रहा था, इस बात से उसने अपने मामा का घोर अपमान समझा और इसकी शिकायत करने के निमित्त वह सभी भक्तों से अलग होकर सबसे पहले प्रभु के समीप पहुँचा। बिना वस्त्र उतारे ही वह प्रभु को प्रणाम करने लगा।
          इस पर गोविन्द ने कहा- श्री कान्त ! तुम यह शिष्टाचार के विरुद्ध बर्ताव क्यों कर रहे हो? अंगरखे को उतारकर तब साष्टांग प्रणाम किया जाता है। पहले वस्त्रों को उतार लो, रास्ते की थकान मिटा लो, हाथ-मुँह धो लो, तब प्रभु के सम्मुख प्रणाम करने जाना।’ किन्तु उसने गोविन्द की बात नहीं सुनी। प्रभु भी समझ गये अवश्य ही कुछ दाल में काला है, इसलिये उन्होंने गोविन्द से कह दिया- ‘श्री कान्त के लिये क्या शिष्टाचार और नियम, वह जो करता है ठीक ही है, इसे तुम मत रोका। इसी दशा में इसे बातें करने दो।’ इतना कहकर प्रभु उससे भक्तों के सम्बन्ध में बहुत सी बातें पूछने लगे। पुराने भक्तों की बात पूछकर प्रभु ने नवीन भक्तों के सम्बन्ध में पूछा कि अबके बाल भक्तों में से कौन-कौन आया है? प्रभु के पीछे जो बच्चे उत्पन्न हुए थे, वे सभी अबके अपनी अपनी माताओं के साथ प्रभु के दर्शनों की उत्कण्ठा से आ रहे थे। श्रीकान्त ने सभी बच्चों का परिचय देते हुए शिवानन्द जी के पुत्र परमानन्द दास का परिचय दिया और उसकी प्रखर प्रतिभा तथा प्रभु दर्शनों की उत्कण्ठा की भी प्रशंसा की। प्रभु उस बच्चे को देखने के लिये लालायित से प्रतीत होने लगे। इन सभी बातों में श्री कान्त नित्यानन्द जी की शिकायत करना भूल गये। इतने में ही सभी भक्त आ उपस्थित हुए। प्रभु ने सदा की भाँति सबका स्वागत-सत्कार किया और उन्हें रहने के लिये यथायोग्य स्थान दिलाकर सभी के प्रसाद की व्यवस्था करायी।
    श्रीकृष्ण! गोविन्द! हरे मुरारे! हे नाथ! नारायण! वासुदेव!
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                                                - प्रभुदत्त ब्रह्मचारी
                              श्री श्रीचैतन्य चरित्रावली (123)
                                             गीताप्रेस (गोरखपुर)

                       "जय जय श्री राधे"
                      "कुमार रौनक कश्यप "
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Tanu May 11, 2021

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sukhadev awari May 11, 2021

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Mona Bhardwaj May 11, 2021

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sukhadev awari May 10, 2021

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🌹•°🍁°•🥀•°🌻°•🍂•°🎋°•🌻 🔔°•🔔•°🔔°•🔔°•🔔°•🔔•°🔔 ॐ हं हनुमते नमः ।। ॐ मंगलाय नमः,ॐ भूमि पुत्राय नमः ॐ ऋण हर्त्रे नमः,ॐ धन प्रदाय नमः, ॐ स्थिर आसनाय नमः, ॐ महा कायाय नमः, ॐ सर्व कामार्थ साधकाय नमः, ॐ लोहिताय नमः, ॐ लोहिताक्षाय नमः, ॐ साम गानाम कृपा करे नमः, ॐ धरात्मजाय नमः,ॐ भुजाय नमः ॐ भौमाय नमः,ॐ भुमिजाय नमः ॐ भूमि नन्दनाय नमः ॐ अंगारकाय नमः,ॐ यमाय नमः ॐ सर्व रोग प्रहाराकाय नमः ॐ वृष्टि कर्ते नमः,ॐ वृष्टि हराते नमः ॐ सर्व कामा फल प्रदाय नमः मृत्युंजयमहादेव त्राहिमां शरणागतम्। जन्ममृत्युजराव्याधिपीड़ितः कर्मबन्धनः। सुप्रभातम् ॐ श्रीगणेशाय नमः अथ् पंचांगम् दिनाँक 11-05-2021 मंगलवार, अक्षांश- 30°:36", रेखांश 76°:80" अम्बाला शहर हरियाणा, पिन कोड 134007 🙏°•🙏•°🙏°•🙏•°🙏 🍁•°🌹°•🍂•°🌷°•💐•°🥀°•🌹 ----°•- •°-•°°•- समाप्तिकाल ----°•-•°-- 📒 तिथि अमावस्या 24:31:16 ☄️ नक्षत्र भरणी 23:31:28 🏵️ करण : 🏵️ चतुष्पाद 11:13:43 🏵️ नाग 24:31:16 🔒 पक्ष कृष्ण 🏵️ योग सौभाग्य 22:40:44 🗝️ वार मंगलवार 🌄 सूर्योदय 05:31:52 🌙 चन्द्र राशि मेष 🦌 🌌 सूर्यास्त 19:07:00 🌑 चन्द्रास्त 18:47:00 💥 ऋतु ग्रीष्म 🏵️ शक सम्वत 1943 प्लव 🏵️ कलि सम्वत 5123 🏵️ दिन काल 13:35:07 🏵️ विक्रम सम्वत 2078 🏵️ मास अमांत चैत्र 🏵️ मास पूर्णिमांत वैशाख 📯 शुभ समय 🥁 अभिजित 11:52:16 - 12:46:36 🕳️ दुष्टमुहूर्त 08:14:54 - 09:09:14 🕳️ कंटक 06:26:13 - 07:20:33 🕳️ यमघण्ट 10:03:35 - 10:57:55 😈 राहु काल 15:43:13 - 17:25:06 🕳️ कुलिक 13:40:57 - 14:35:17 🕳️ कालवेला 08:14:54 - 09:09:14 🕳️ यमगण्ड 08:55:39 - 10:37:33 🕳️ गुलिक 12:19:26 - 14:01:19 🏵️ दिशा शूल उत्तर ☘️☘️होरा 🏵️मंगल 05:31:52 - 06:39:48 🏵️सूर्य 06:39:48 - 07:47:44 🏵️शुक्र 07:47:44 - 08:55:39 🏵️बुध 08:55:39 - 10:03:35 🏵️चन्द्रमा 10:03:35 - 11:11:30 🏵️शनि 11:11:30 - 12:19:26 🏵️बृहस्पति 12:19:26 - 13:27:22 🏵️मंगल 13:27:22 - 14:35:17 🏵️सूर्य 14:35:17 - 15:43:13 🏵️शुक्र 15:43:13 - 16:51:08 🏵️बुध 16:51:08 - 17:59:04 🏵️चन्द्रमा 17:59:04 - 19:07:00 🏵️शनि 19:07:00 - 19:59:00 🏵️बृहस्पति 19:59:00 - 20:51:01 🏵️मंगल 20:51:01 - 21:43:02 🚩🚩 चोघडिया ☘️रोग 05:31:52 - 07:13:46 🕳️उद्वेग 07:13:46 - 08:55:39 🛑चल 08:55:39 - 10:37:33 ⛩️लाभ 10:37:33 - 12:19:26 ⛩️अमृत 12:19:26 - 14:01:19 🕳️काल 14:01:19 - 15:43:13 😈शुभ 15:43:13 - 17:25:06 ☘️रोग 17:25:06 - 19:07:00 🕳️काल 19:07:00 - 20:25:01 ⛩️लाभ 20:25:01 - 21:43:02 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 🍁 ग्रह गोचर 🍁 💥 सूर्य - मेष 🦌 🌙 चन्द्र - मेष 🦌 🌑 मंगल - मिथुन 👬🏼 🌑 बुध - वृष 🐂 🌑 बृहस्पति - कुम्भ ⚱️ 🌑 शुक्र - वृष 🐂 🌑 शनि - मकर 🐊 🌑 राहु - वृष 🐂 🌑 केतु - वृश्चिक 🦞 --------------------------------------------- व्रत-त्यौहार 14 मई तक 🎊🎊🎊🎊🎊🎊 🛑 11 मई- मंगल- वैशाख (भौमवती) अमावस तर्पण आदि हेतु पितृ कार्यों के लिए स्नान आदि का विशेष माहात्म्य होगा। मेला हरिद्वार प्रयागराज आदि तीर्थ स्नान का विशेष महत्व में होगा। 🥀सूर्य 💥कृतिका में 12: 33, मेला हरिद्वार प्रयागराज , तीर्थ स्थान -माहात्म्य कुंभ पर्व, मेला पिंजौर हरियाणा। 🛑 12 मई-बुधवार - वैशाख शुक्ल 🔓पक्ष प्रारंभ, शुक्र रोहिणी में 16:31 🏵️ 13 मई -गुरु -चंद्र दर्शन, मु. 45 श्रीशिवाजी जयंती। 🏵️ 14 मई - शुक्र - अक्षय तृतीया व्रत और श्री परशुराम जयंती मनाई जाएगी। यह तिथि तीर्थ स्नान,जप -तप, दान, देव पितृ तर्पण आदि कृत्यों के लिए विशेष पुण्य फल वाली होगी। इस दिन जब पाठ, दान होम आदि कर्मों का फल अनंत गुना होता है। सभी कर्म अक्षय हो जाते हैं। इस तिथि की गणना युग आदि तिथियों में होती है। इस स्थिति को नर- नारायण परशुराम एवं हयग्रीव अवतार हुए थे तथा इसी दिन त्रेतायुग का भी आरंभ हुआ था। अक्षय तृतीया स्वयं सिद्ध मुहूर्त है और सुख सौभाग्य देने वाली तिथि मानी जाती है। इसी दिन कुंभ महापर्व हरिद्वार में मुख्य स्नान भी होगा। स्नान कुंभ महापर्व (हरिद्वार) भगवान परशुराम जयंती, केदार - बद्री यात्रा प्रारंभ, 🏵️ 14 मई - शुक्रवार-🥀💥सूर्य 🐂वृष में 23 :24, ज्येष्ठ सक्रांति - शुक्रवार वैशाख शुक्ल द्वितीया मृगशिरा नक्षत्र कालीन रात्रि 11:14 पर धनु 🏹लग्न में प्रवेश करेगी ।30 मुहूर्ति इस सक्रांति का पुण्य काल तारीख 14 को मध्याह्न बाद से अगले दिन प्रातः 6:00 बजे तक होगा। वार अनुसार मिश्रा तथा नक्षत्र अनुसार मंदाकिनी नामक यह सक्रांति राजनेताओं एवम् पशुओं के लिए सुख कर रहेगी । लोक भविष्य- मंगल -शनि के मध्य षडाष्टक योग बना हुआ है । राजनीतिक वातावरण अशांत और असमंजस पूर्ण रहेगा। सत्तारूढ़ व विपक्षी दलों के नेताओं में परस्पर टकराव व खींचातानी बढ़ेगी। परस्पर तालमेल की कमी रहेगी। सोना चांदी आदि धातुओं सरसों क्रूड -आयल में विशेष तेजी बनेगी। 11 मई को वैशाख अमावस मंगलवासरी होने से इस दिन गंगा आदि तीर्थ पर स्नान दान आदि करने से एक हजार गोदान का फल मिलता है। हरिद्वार में कुंभ महापर्व की विशेष स्नान तिथि भी रहेगी । इस कारण भी इस तिथि पर स्नान दान आदि का माहात्म्य विशेष रूपेण रहेगा । राजनीतिक पक्ष से मंगलवारी अमावस का पल शुभ नहीं माना गया । राजनेताओं में विग्रह, किसी प्रमुख नेता के अपदस्थ कहीं छत्र भंग (सत्ता परिवर्तन) उपद्रव जन- धन संपदा की क्षति हो। अल्प वृष्टि अग्निकांड आदि प्राकृतिक आपदाएं बढ़ेंगी। सक्रांति राशिफल- यह सक्रांति मेष 🦌 मिथुन👬🏼 सिंह🦁 कन्या 👩🏻‍🦱तुला ⚖️धनु 🏹मकर 🐊कुंभ ⚱️मीन🐬 राशि वालों को शुभ रहेगी। बाजार 📉मंदा तेजी 📈 14मई तक 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ 🛑 11 मई को सूर्य 🌞कृतिका नक्षत्र ☄️में आएगा । घी रूई सोना चांदी अलसी एरण्ड गेहूं चना मूंग मोठ चावल राई सरसों खांड में तेजी बनेगी। 🛑 12 मई को शुक्र रोहिणी नक्षत्र ☄️में आकर बुध एवं राहु के साथ एक नक्षत्र संबंध बनाएगा। अकेला शुक्र यद्यपि यहां मंदी📉 करता है परंतु बुध राहु के योग से यहां तेजी📈 मालूम होती है। सोना चांदी आदि धातुओं अल्सी सरसों तेल गुड़ खाण्ड दाग छुहारा सुपारी नारियल ऊन में पहले मंदी 📉बन फिर तेजी 📈का रुख बन जाएगा। 🛑13 मई को गुरुवार के दिन चंद्र🌃 दर्शन होने से रुई तथा सूती रेशमी ऊनी वस्त्र सरसों तेल घी में तेजी 📈बनेगी। सोना चांदी खाण्ड में कुछ मंदीे 📉रहे। 🛑 14 मई को सूर्य 🌞वृष राशि 🐂में आकर बुध शुक्र और राहु के साथ मेल करेगा। सोना चांदी गुड़ खांड शक्कर कपास रूई सूत बादाम सुपारी नारियल तिल तेल सरसों आदि में विशेष तेजी बनेगी। जौं चना गेहूं मटर अरहर मूंग चावल आदि कुछ वस्तुओं में मंदी 📉बनेगी। 🚩 दैनिक राशिफल 🚩 🦌मेष नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामजिक कार्य करने की इच्छा जागृत होगी। प्रतिष्ठा वृद्धि होगी। सुख के साधन जुटेंगे। नौकरी में वर्चस्व स्थापित होगा। आय के स्रोत बढ़ सकते हैं। व्यवसाय लाभप्रद रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। घर-बाहर सहयोग व प्रसन्नता में वृद्धि होगी। 🐂वृष यात्रा सफल रहेगी। नेत्र पीड़ा हो सकती है। लेन-देन में सावधानी रखें। बगैर मांगे किसी को सलाह न दें। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। धनार्जन होगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। अज्ञात भय व चिंता रहेंगे। 👫मिथुन अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। व्यवस्था नहीं होने से परेशानी रहेगी। व्यवसाय में कमी होगी। नौकरी में नोकझोंक हो सकती है। पार्टनरों से मतभेद हो सकते हैं। थकान महसूस होगी। अपेक्षित कार्यों में विघ्न आएंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। आय में निश्चितता रहेगी। 🦀कर्क जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। अप्रत्याशित लाभ के योग हैं। भाग्य का साथ मिलेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। जुए, सट्टे व लॉटरी के चक्कर में न पड़ें। निवेश शुभ रहेगा। प्रमाद न करें। उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। 🦁सिंह पूजा-पाठ व सत्संग में मन लगेगा। आत्मशांति रहेगी। कोर्ट व कचहरी के कार्य अनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। मातहतों का सहयोग मिलेगा। किसी सामाजिक कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर प्राप्त हो सकता है। दूसरे के काम में दखल न दें। 👩🏻‍🦱कन्या स्थायी संपत्ति की खरीद-फरोख्त से बड़ा लाभ हो सकता है। प्रतिद्वंद्विता रहेगी। पार्टनरों का सहयोग समय पर मिलने से प्रसन्नता रहेगी। नौकरी में मातहतों का सहयोग मिलेगा। व्यवसाय ठीक-ठीक चलेगा। आय में वृद्धि होगी। चोट व रोग से बाधा संभव है। दूसरों के काम में दखलंदाजी न करें। ⚖️तुला मन की चंचलता पर नियंत्रण रखें। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति अनुकूल रहेगी। जीवनसाथी पर आपसी मेहरबानी रहेगी। जल्दबाजी में धनहानि हो सकती है। व्यवसाय में वृद्धि होगी। नौकरी में सुकून रहेगा। निवेश लाभप्रद रहेगा। कार्य बनेंगे। घर-बाहर सुख-शांति बने रहेंगे। 🦂वृश्चिक क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। विवाद को बढ़ावा न दें। पुराना रोग बाधा का कारण रहेगा। स्वास्थ्य पर खर्च होगा। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें। छोटी सी गलती से समस्या बढ़ सकती है। व्यवसाय ठीक चलेगा। मित्र व संबंधी सहायता करेंगे। आय बनी रहेगी। जोखिम न लें। 🏹धनु पार्टी व पिकनिक की योजना बनेगी। मित्रों के साथ समय अच्‍छा व्यतीत होगा। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। बौद्धिक कार्य सफल रहेंगे। किसी प्रबुद्ध व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। शत्रु सक्रिय रहेंगे। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। 🐊मकर घर-बाहर अशांति रहेगी। कार्य में रुकावट होगी। आय में कमी तथा नौकरी में कार्यभार रहेगा। बेवजह लोगों से कहासुनी हो सकती है। दु:खद समाचार मिलने से नकारात्मकता बढ़ेगी। व्यवसाय से संतुष्टि नहीं रहेगी। पार्टनरों से मतभेद हो सकते हैं। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। जल्दबाज न करें। ⚱️कुंभ दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। व्यवसाय में जल्दबाजी से काम न करें। चोट व दुर्घटना से बचें। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। घर-बाहर स्थिति मनोनुकूल रहेगी। प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। वस्तुएं संभालकर रखें। 🐟मीन प्रयास सफल रहेंगे। किसी बड़े कार्य की समस्याएं दूर होंगी। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। कर्ज में कमी होगी। संतुष्टि रहेगी। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। व्यापार मनोनुकूल चलेगा। अपना प्रभाव बढ़ा पाएंगे। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। निवेश शुभ रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य न करें। ACHARYA ANIL PARASHAR, VADIC,KP ASTROLOGER. 🏵️आपका दिन मंगलमय हो🏵️ 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

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. "मीरा चरित" (पोस्ट-016) विवाह के उत्सव घर में होने लगे- हर तरफ कोलाहल सुनाई देता था। मेड़ते में हर्ष समाता ही न था। मीरा तो जैसी थी, वैसी ही रही। विवाह की तैयारी में मीरा को पीठी (हल्दी) चढ़ी। उसके साथ ही दासियाँ गिरधरलाल को भी पीठी करने और गीत गाने लगी। मीरा को किसी भी बात का कोई उत्साह नहीं था। किसी भी रीति-रिवाज के लिए उसे श्याम कुन्ज से खींच कर लाना पड़ता था। जो करा लो, सो कर देती। न कराओ तो गिरधर लाल के वागे (पोशाकें), मुकुट, आभूषण संवारती, श्याम कुन्ज में अपने नित्य के कार्यक्रम में लगी रहती। खाना पीना, पहनना उसे कुछ भी नहीं सुहाता। श्याम कुन्ज अथवा अपने कक्ष का द्वार बंद करके वह पड़ी-पड़ी रोती रहती। मीरा का विरह बढ़ता जा रहा है। उसके विरह के पद जो भी सुनता, रोये बिना न रहता। किन्तु सुनने का, देखने का समय ही किसके पास है ? सब कह रहे है कि मेड़ता के तो भाग जगे हैं कि हिन्दुआ सूरज का युवराज इस द्वार पर तोरण वन्दन करने आयेगा। उसके स्वागत में ही सब बावले हुये जा रहे हैं। कौन देखे-सुने कि मीरा क्या कह रही है ? वह आत्महत्या की बात सोचती - ले कटारी कंठ चीरूँ कर लऊँ मैं अपघात। आवण आवण हो रह्या रे नहीं आवण की बात॥ किन्तु आशा मरने नहीं देती। जिया भी तो नहीं जाता, घड़ी भर भी चैन नहीं था। मीरा अपनी दासियों-सखियों से पूछती कि कोई संत प्रभु का संदेशा लेकर आये हैं ? उसकी आँखें सदा भरी-भरी रहतीं। मीरा का विरह बढ़ता जा रहा है। उसके विरह के पद जो भी सुनता, रोये बिना न रहता। कोई कहियो रे प्रभु आवन की,आवन की मनभावन की॥ आप न आवै लिख नहीं भेजे, बान पड़ी ललचावन की। ऐ दोऊ नैण कह्यो नहीं मानै,नदिया बहै जैसे सावन की॥ कहा करूँ कछु बस नहिं मेरो, पाँख नहीं उड़ जावन की। मीरा के प्रभु कबरे मिलोगे, चेरी भई तेरे दाँवन की॥ कोई कहियो रे प्रभु आवन की,आवन की मनभावन की॥ मीरा का विरह बढ़ता जा रहा था। इधर महल में, रनिवास में जो भी रीति रिवाज चल रहे थे, उन पर भी उसका कोई वश नहीं था। मीरा को एक घड़ी भी चैन नहीं था। ऐसे में न तो उसका ढंग से कुछ खाने को मन होता और न ही किसी ओर कार्य में रूचि। सारा दिन प्रतीक्षा में ही निकल जाता। शायद ठाकुर किसी संत को अपना संदेश दे भेजें या कोई संकेत कर मुझे कुछ आज्ञा दें, और रात्रि किसी घायल की तरह रो-रो कर निकलती। ऐसे में जो भी गीत मुखरित होता वह विरह के भाव से सिक्त होता। घड़ी एक नहीं आवड़े तुम दरसण बिन मोय। जो मैं ऐसी जाणती रे प्रीति कियाँ दुख होय। नगर ढिंढोरा फेरती रे प्रीति न कीजो कोय। पंथ निहारूँ डगर बुहारूँ ऊभी मारग जोय। मीरा के प्रभु कबरे मिलोगा तुम मिलियाँ सुख होय। (ऊभी अर्थात किसी स्थान पर रूक कर प्रतीक्षा करनी) कभी मीरा अन्तर्व्यथा से व्याकुल होकर अपने प्राणधन को पत्र लिखने बैठती। कौवे से कहती- "तू ले जायेगा मेरी पाती, ठहर मैं लिखती हूँ।" किन्तु एक अक्षर भी लिख नहीं पाती। आँखों से आँसुओं की झड़ी कागज को भिगो देती - पतियां मैं कैसे लिखूँ लिखी ही न जाई॥ कलम धरत मेरो कर काँपत हिय न धीर धराई॥ मुख सो मोहिं बात न आवै नैन रहे झराई॥ कौन विध चरण गहूँ मैं सबहिं अंग थिराई॥ मीरा के प्रभु आन मिलें तो सब ही दुख बिसराई॥ मीरा दिन पर दिन दुबली होती जा रही थी। देह का वर्ण फीका हो गया, मानों हिमदाह से मुरझाई कुमुदिनी हो। वीरकुवंरी जी ने पिता रतनसिंह को बताया तो उन्होंने वैद्य को भेजा। वैद्य जी ने निरीक्षण करके बताया - "बाईसा को कोई रोग नहीं, केवल दुर्बलता है।" वैद्य जी गये तो मीरा मन ही मन में कहने लगी - "यह वैद्य तो अनाड़ी है, इसको मेरे रोग का मर्म क्या समझ में आयेगा।" मीरा ने इकतारा लिया और अपने ह्रदय की सारी पीड़ा इस पद में उड़ेल दी - ऐ री मैं तो प्रेम दीवानी, मेरो दरद न जाणे कोय। सूली ऊपर सेज हमारी, सोवण किस विध होय। गगन मँडल पर सेज पिया की, किस विध मिलना होय॥ घायल की गति घायल जाणे, जो कोई घायल होय। जौहर की गति जौहरी जाणे, और न जाणे कोय॥ दरद की मारी बन बन डोलूँ, वैद मिल्या नहीं कोय। मीरा की प्रभु पीर मिटै जब, वैद साँवरिया होय॥ - पुस्तक- "मीरा चरित" लेखिका:- आदरणीय सौभाग्य कुँवरी राणावत ~~~०~~~ "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप " *************************************************

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sukhadev awari May 10, 2021

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🌹•°🍁°•🥀•°🌻°•🍂•°🎋°•🌻 🔔°•🔔•°🔔°•🔔°•🔔°•🔔•°🔔 जय श्री महाकालेश्वर विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय कर्पूरकान्ति धवलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय गौरीप्रियाय रजनीश कलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिप कङ्कणाय गङ्गाधराय गजराज विमर्धनाय दारिद्र्यदुःख दहनाय नम:शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः । ॐ श्रां श्रीं श्रीं सः चन्द्राय नमः । सुप्रभातम् ॐ श्रीगणेशाय नमः अथ् पंचांगम् दिनाँक 10-05-2021 सोमवार अक्षांश- 30°:36", रेखांश 76°:80" अम्बाला शहर हरियाणा, पिन कोड- 134 007 ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ ॐ शिवाय नम:,ॐ सर्वात्मने नम: ॐ त्रिनेत्राय नम:,ॐ हराय नम: ॐ इन्द्र्मुखाय नम:ॐ श्रीकंठाय नम: ॐ स द्योजाताय नम:,ॐ वामदेवाय नम: ॐ अघोरह्र्द्याय नम:,ॐ तत्पुरुषाय नम: ॐ ईशानाय नम:,ॐ अनंतधर्माय नम: ॐ ज्ञानभूताय नम:, ॐ अनंतवैराग्यसिंघायनम:, ॐ प्रधानाय नम: ॐ व्योमात्मने नम:, ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम: ॐ महेश्वराए नमः, ॐ शूलपानायाय नमः, ॐ पिनाकपनाये नमः, ॐ पशुपति नमः । 🙏🙏🙏🙏🙏 🍁🍁•°🌹°•🍂•°🌷°•💐•°🥀 --------------समाप्तिकाल----------------- 📒 तिथि चतुर्दशी 21:57:39 ☄️ नक्षत्र अश्विनी 20:25:55 🏵️ करण : 🏵️विष्टि 08:43:48 🏵️शकुन 21:57:39 🔒 पक्ष कृष्ण 🏵️ योग आयुष्मान 21:38:01 🗝️ वार सोमवार 🌄 सूर्योदय 05:32:36 🌃चन्द्रोदय 29:17:00 🌙 चन्द्र राशि 🦌मेष 🌌 सूर्यास्त 19:06:20 🌑 चन्द्रास्त 17:52:59 💥 ऋतु ग्रीष्म 🏵️शक सम्वत 1943 प्लव 🏵️ कलि सम्वत 5123 🏵️ दिन काल 13:33:43 🏵️ विक्रम सम्वत 2078 🏵️ मास अमांत चैत्र 🏵️ मास पूर्णिमांत वैशाख 📯 शुभ समय 🥁 अभिजित 11:52:21 - 12:46:36 🕳️ दुष्टमुहूर्त : 🕳️ 12:46:36 - 13:40:51 🕳️ 15:29:21 - 16:23:36 🕳️ कंटक 08:15:21 - 09:09:36 🕳️ यमघण्ट 11:52:21 - 12:46:36 😈 राहु काल 07:14:20 - 08:56:02 🕳️ कुलिक 15:29:21 - 16:23:36 🕳️ कालवेला 10:03:51 - 10:58:06 🕳️ यमगण्ड 10:37:45 - 12:19:28 🕳️ गुलिक 14:01:11 - 15:42:54 🏵️दिशा शूल पूर्व 🚩🚩 होरा 🏵️चन्द्रमा 05:32:36 - 06:40:25 🏵️शनि 06:40:25 - 07:48:14 🏵️बृहस्पति 07:48:14 - 08:56:02 🏵️मंगल 08:56:02 - 10:03:51 🏵️सूर्य 10:03:51 - 11:11:40 🏵️शुक्र 11:11:40 - 12:19:29 🏵️बुध 12:19:29 - 13:27:17 🏵️चन्द्रमा 13:27:17 - 14:35:06 🏵️शनि 14:35:06 - 15:42:55 🏵️बृहस्पति 15:42:55 - 16:50:43 🏵️मंगल 16:50:43 - 17:58:32 🏵️सूर्य 17:58:32 - 19:06:20 🏵️शुक्र 19:06:20 - 19:58:28 🏵️बुध 19:58:28 - 20:50:36 🏵️चन्द्रमा 20:50:36 - 21:42:43 ☘️☘️चोघड़िया ⛩️अमृत 05:32:36 - 07:14:20 😈काल 07:14:20 - 08:56:02 ⛩️शुभ 08:56:02 - 10:37:45 ☘️रोग 10:37:45 - 12:19:28 🕳️उद्वेग 12:19:28 - 14:01:11 🛑चल 14:01:11 - 15:42:54 ⛩️लाभ 15:42:54 - 17:24:37 ⛩️अमृत 17:24:37 - 19:06:20 🛑चल 19:06:20 - 20:24:32 ☘️रोग 20:24:32 - 21:42:43 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 🍁 ग्रह गोचर 🍁 🌞 सूर्य - मेष 🦌 🌙 चन्द्र - मेष 🦌 🌑 मंगल - मिथुन 👬🏼 🌑 बुध - वृष 🐂 🌑 बृहस्पति - कुम्भ ⚱️ 🌑 शुक्र - वृष 🐂 🌑 शनि - मकर 🐊 🌑 राहु - वृष 🐂 🌑 केतु - वृश्चिक 🦞 --------------------------------------------- व्रत-त्यौहार 14 मई तक 🎊🎊🎊🎊🎊🎊 🛑10 मई -चंद्र -भद्रा 8:44 तक गण्डमूल 20 :25 तक। 🛑 11 मई- मंगल- वैशाख (भौमवती) अमावस तर्पण आदि हेतु पितृ कार्यों के लिए स्नान आदि का विशेष माहात्म्य होगा। मेला हरिद्वार प्रयागराज आदि तीर्थ स्नान का विशेष महत्व में होगा। 🥀सूर्य 💥कृतिका में 12: 33, मेला हरिद्वार प्रयागराज , तीर्थ स्थान -माहात्म्य कुंभ पर्व, मेला पिंजौर हरियाणा। 🛑 12 मई-बुधवार - वैशाख शुक्ल 🔓पक्ष प्रारंभ, शुक्र रोहिणी में 16:31 🏵️ 13 मई -गुरु -चंद्र दर्शन, मु. 45 श्रीशिवाजी जयंती। 🏵️ 14 मई - शुक्र - अक्षय तृतीया व्रत और श्री परशुराम जयंती मनाई जाएगी। यह तिथि तीर्थ स्नान,जप -तप, दान, देव पितृ तर्पण आदि कृत्यों के लिए विशेष पुण्य फल वाली होगी। इस दिन जब पाठ, दान होम आदि कर्मों का फल अनंत गुना होता है। सभी कर्म अक्षय हो जाते हैं। इस तिथि की गणना युग आदि तिथियों में होती है। इस स्थिति को नर- नारायण परशुराम एवं हयग्रीव अवतार हुए थे तथा इसी दिन त्रेतायुग का भी आरंभ हुआ था। अक्षय तृतीया स्वयं सिद्ध मुहूर्त है और सुख सौभाग्य देने वाली तिथि मानी जाती है। इसी दिन कुंभ महापर्व हरिद्वार में मुख्य स्नान भी होगा। स्नान कुंभ महापर्व (हरिद्वार) भगवान परशुराम जयंती, केदार - बद्री यात्रा प्रारंभ, 🏵️ 14 मई - शुक्रवार-🥀💥सूर्य 🐂वृष में 23 :24, ज्येष्ठ सक्रांति - शुक्रवार वैशाख शुक्ल द्वितीया मृगशिरा नक्षत्र कालीन रात्रि 11:14 पर धनु 🏹लग्न में प्रवेश करेगी ।30 मुहूर्ति इस सक्रांति का पुण्य काल तारीख 14 को मध्याह्न बाद से अगले दिन प्रातः 6:00 बजे तक होगा। वार अनुसार मिश्रा तथा नक्षत्र अनुसार मंदाकिनी नामक यह सक्रांति राजनेताओं एवम् पशुओं के लिए सुख कर रहेगी । लोक भविष्य- मंगल -शनि के मध्य षडाष्टक योग बना हुआ है । राजनीतिक वातावरण अशांत और असमंजस पूर्ण रहेगा। सत्तारूढ़ व विपक्षी दलों के नेताओं में परस्पर टकराव व खींचातानी बढ़ेगी। परस्पर तालमेल की कमी रहेगी। सोना चांदी आदि धातुओं सरसों क्रूड -आयल में विशेष तेजी बनेगी। 11 मई को वैशाख अमावस मंगलवासरी होने से इस दिन गंगा आदि तीर्थ पर स्नान दान आदि करने से एक हजार गोदान का फल मिलता है। हरिद्वार में कुंभ महापर्व की विशेष स्नान तिथि भी रहेगी । इस कारण भी इस तिथि पर स्नान दान आदि का माहात्म्य विशेष रूपेण रहेगा । राजनीतिक पक्ष से मंगलवारी अमावस का पल शुभ नहीं माना गया । राजनेताओं में विग्रह, किसी प्रमुख नेता के अपदस्थ कहीं छत्र भंग (सत्ता परिवर्तन) उपद्रव जन- धन संपदा की क्षति हो। अल्प वृष्टि अग्निकांड आदि प्राकृतिक आपदाएं बढ़ेंगी। सक्रांति राशिफल- यह सक्रांति मेष 🦌 मिथुन👬🏼 सिंह🦁 कन्या 👩🏻‍🦱तुला ⚖️धनु 🏹मकर 🐊कुंभ ⚱️मीन🐬 राशि वालों को शुभ रहेगी। बाजार 📉मंदा तेजी 📈 14मई तक 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ 🛑 11 मई को सूर्य 🌞कृतिका नक्षत्र ☄️में आएगा । घी रूई सोना चांदी अलसी एरण्ड गेहूं चना मूंग मोठ चावल राई सरसों खांड में तेजी बनेगी। 🛑 12 मई को शुक्र रोहिणी नक्षत्र ☄️में आकर बुध एवं राहु के साथ एक नक्षत्र संबंध बनाएगा। अकेला शुक्र यद्यपि यहां मंदी📉 करता है परंतु बुध राहु के योग से यहां तेजी📈 मालूम होती है। सोना चांदी आदि धातुओं अल्सी सरसों तेल गुड़ खाण्ड दाग छुहारा सुपारी नारियल ऊन में पहले मंदी 📉बन फिर तेजी 📈का रुख बन जाएगा। 🛑13 मई को गुरुवार के दिन चंद्र🌃 दर्शन होने से रुई तथा सूती रेशमी ऊनी वस्त्र सरसों तेल घी में तेजी 📈बनेगी। सोना चांदी खाण्ड में कुछ मंदीे 📉रहे। 🛑 14 मई को सूर्य 🌞वृष राशि 🐂में आकर बुध शुक्र और राहु के साथ मेल करेगा। सोना चांदी गुड़ खांड शक्कर कपास रूई सूत बादाम सुपारी नारियल तिल तेल सरसों आदि में विशेष तेजी बनेगी। जौं चना गेहूं मटर अरहर मूंग चावल आदि कुछ वस्तुओं में मंदी 📉बनेगी। 🏵️🚩 दैनिक राशिफल 🚩🏵️ 🦌मेष धनार्जन सुगम होगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता अर्जित करेगा। पठन-पाठन में मन लगेगा। दूर यात्रा की योजना बन सकती है। मनपसंद भोजन का आनंद प्राप्त होगा। वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। बेचैनी रहेगी। 🐂वृष वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी के व्यवहार से क्लेश हो सकता है। पुराना रोग उभर सकता है। दु:खद समाचार मिल सकता है, धैर्य रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। प्रतिद्वंद्विता बढ़ेगी। पारिवारिक चिंता में वृद्धि होगी। आवश्यक वस्तु समय पर नहीं मिलेगी। तनाव रहेगा। 👫मिथुन शत्रु नतमस्तक होंगे। विवाद को बढ़ावा न दें। प्रयास सफल रहेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आय के स्रोतों में वृद्धि हो सकती है। व्यवसाय ठीक चलेगा। चोट व रोग से बाधा संभव है। फालतू खर्च होगा। मातहतों का सहयोग प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी न करें। 🦀कर्क लेन-देन में सावधानी रखें। शारीरिक कष्ट संभव है। परिवार में तनाव रह सकता है। शुभ समाचार मिलेंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। भाइयों का सहयोग प्राप्त होगा। परिवार के साथ मनोरंजन का कार्यक्रम बन सकता है। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रमाद न करें। 🦁सिंह रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। सट्टे व लॉटरी से दूर रहें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। कोई बड़ी समस्या से छुटकारा मिल सकता है। आय में वृद्धि होगी। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। पारिवारिक चिंता बनी रहेगी। 👩🏻‍🦱कन्या अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। किसी विवाद में उलझ सकते हैं। चिंता तथा तनाव रहेंगे। जोखिम न उठाएं। घर-बाहर असहयोग मिलेगा। अपेक्षाकृत कार्यों में विलंब होगा। आय में कमी हो सकती है। ⚖️तुला बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। व्यापार-व्यवसाय में लाभ होगा। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। बेचैनी रहेगी। थकान महसूस होगी। वरिष्ठजन सहयोग करेंगे। 🦂वृश्चिक नई आर्थिक नीति बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। कारोबारी अनुबंधों में वृद्धि हो सकती है। समय का लाभ लें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। नेत्र पीड़ा हो सकती है। कानूनी बाधा आ सकती है। विवाद न करें। 🏹धनु बेचैनी रहेगी। चोट व रोग से बचें। काम का विरोध होगा। तनाव रहेगा। कोर्ट व कचहरी के काम अनुकूल होंगे। पूजा-पाठ में मन लगेगा। तीर्थयात्रा की योजना बनेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। सुख के साधनों पर व्यय हो सकता है। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। प्रमाद न करें। 🐊मकर स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। विवाद से क्लेश संभव है। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें। अपेक्षित कार्यों में अप्रत्याशित बाधा आ सकती है। तनाव रहेगा। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। राज्य के प्रतिनिधि सहयोग करेंगे। ⚱️कुंभ कष्ट, भय, चिता व बेचैनी का वातावरण बन सकता है। कोर्ट व कचहरी के काम मनोनुकूल रहेंगे। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। मातहतों से संबंध सुधरेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। जल्दबाजी न करें। कुबुद्धि हावी रहेगी। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। 🐟मीन धन प्राप्ति सुगम होगी। ऐश्वर्य के साधनों पर बड़ा खर्च हो सकता है। भूमि, भवन, दुकान व फैक्टरी आदि के खरीदने की योजना बनेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। अपरिचितों पर अतिविश्वास न करें। प्रमाद न करें। ACHARYA ANIL PARASHAR, VADIC,KP. ASTROLOGER. 🚩आपका दिन मंगलमय हो🚩 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

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Meena Dubey May 10, 2021

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