पाणी से जलता यहां दिपक हमारा भारत देश, आस्थाओं और विभिन्न रहस्यों से भरा हुआ देश है। यहां हर आधे किलोमीटर पर आपको धर्मस्थल मिल जाएंगे और हर धर्मस्थल के साथ ही एक कहानी भी। वहीं, हमारे देश में कुछ मंदिर से इतने रहस्यमयी है कि उनके रहस्यों के बारे मे आज तक कोई जान भी नहीं पाया है. आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मध्य प्रदेश में स्थित है. ये मंदिर देशभर में अद्भुत चमत्कार के मशहूर है. इस मंदिर में एक दिया वर्षों से जलता आ रहा है, लेकिन ये दिव्य ज्योत, तेल या घी से नहीं बल्कि पानी से जलती है. आज तक कई वैज्ञानिकों ने इस मंदिर का रहस्य समझने की कोशिश की, लेकिन किसी को कामयाबी नहीं मिली.   यह मंदिर, मध्य प्रदेश के काली सिंध नदी के किनारे बसे आगर-मालवा जिले के अंतर्गत आने वाले नलखेड़ा गांव से लगभग 15 किमी दूर गाड़िया गांव के पास मौजूद है. इस मंदिर को गड़ियाघाट वाली माताजी के नाम से जाना जाता है. मंदिर के पुजारी के अनुसार, पहले इस मंदिर में हमेशा तेल का दीपक जलता था, लेकिन लगभग पांच साल पहले उन्हें मातारानी ने सपने में दर्शन देकर पानी से दीपक जलाने के लिए कहा. इसे मातारानी का आदेश मानते हुए पुजारी ने सुबह उठकर जब उन्होंने पास बह रही काली सिंध नदी से पानी भरा और उसे दीए में डाल दिया. दीपक में पानी डालने के बाद जैसे ही उसमे रखी हुई ज्योत के पास जलती हुई माचिस ले जाई गई, वैसे ही ज्योत जल उठी. यह देखकर पुजारी खुद भी अचंभित रह गए और लगभग दो महीने तक उन्होंने इस बारे में किसी को कुछ नहीं बताया. बाद में उन्होंने इस बारे में कुछ ग्रामीणों को बताया तो उन्होंने भी पहले विश्वास नहीं किया, मगर जब उन्होंने भी दीए में पानी डालकर ज्योति जलाने की कोशिश की, तो ज्योति जल उठी. बताया जाता है कि उसके बाद इस चमत्कार की बात आग की तरह पूरे गांव में फैल गई. तब से लेकर आज तक इस मंदिर में काली सिंध नदी के पानी से ही ज्योत प्रजलवित की जाती है . बताया जाता है कि जब दीपक में पानी डाला जाता है, तो वह चिपचिपे तरल पदार्थ में तब्दील हो जाता है और ज्योत जल उठती है. स्‍थानीय न‍िवास‍ियों के अनुसार, हालांकि पानी से जलने वाली यह ज्‍योत वर्षा ऋतू में नहीं जलती है. क्योंकि बरसात के मौसम में काली सिंध नदी का जल स्तर बढ़ने के चलते यह मंदिर पानी में डूब जाता है, जिससे यहां पूजा करना संभव नहीं होता।  लेकिन शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानी घटस्थापना के साथ ज्योत दोबारा प्रज्जवलित कर दी जाती है, जो अगले साल बार‍िश के मौसम तक निरंतर जलती रहती है. जय श्री जगदंबे माता की जय हो भोलेनाथ ॐ ऐं र्‍हिं ल्किं चामुण्डायै विच्चे जय माता की 🌅 नमस्कार शुभप्रभात 🌅 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी नारायण जय श्री भोलेनाथ जय श्री पार्वती माता की जय हो आप सभी भारतवासी मित्रों को मेरा सुबह नमस्कार शुभप्रभात वंदन जय हो 🌹👏🚩🐚🎪👪👬🙏🚩 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷

पाणी से जलता यहां दिपक 


हमारा भारत देश, आस्थाओं और विभिन्न रहस्यों से भरा हुआ देश है। यहां हर आधे किलोमीटर पर आपको धर्मस्थल मिल जाएंगे और हर धर्मस्थल के साथ ही एक कहानी भी। वहीं, हमारे देश में कुछ मंदिर से इतने रहस्यमयी है कि उनके रहस्यों के बारे मे आज तक कोई जान भी नहीं पाया है. आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मध्य प्रदेश में स्थित है. ये मंदिर देशभर में अद्भुत चमत्कार के मशहूर है. इस मंदिर में एक दिया वर्षों से जलता आ रहा है, लेकिन ये दिव्य ज्योत, तेल या घी से नहीं बल्कि पानी से जलती है. आज तक कई वैज्ञानिकों ने इस मंदिर का रहस्य समझने की कोशिश की, लेकिन किसी को कामयाबी नहीं मिली.  

यह मंदिर, मध्य प्रदेश के काली सिंध नदी के किनारे बसे आगर-मालवा जिले के अंतर्गत आने वाले नलखेड़ा गांव से लगभग 15 किमी दूर गाड़िया गांव के पास मौजूद है. इस मंदिर को गड़ियाघाट वाली माताजी के नाम से जाना जाता है. मंदिर के पुजारी के अनुसार, पहले इस मंदिर में हमेशा तेल का दीपक जलता था, लेकिन लगभग पांच साल पहले उन्हें मातारानी ने सपने में दर्शन देकर पानी से दीपक जलाने के लिए कहा. इसे मातारानी का आदेश मानते हुए पुजारी ने सुबह उठकर जब उन्होंने पास बह रही काली सिंध नदी से पानी भरा और उसे दीए में डाल दिया. दीपक में पानी डालने के बाद जैसे ही उसमे रखी हुई ज्योत के पास जलती हुई माचिस ले जाई गई, वैसे ही ज्योत जल उठी. यह देखकर पुजारी खुद भी अचंभित रह गए और लगभग दो महीने तक उन्होंने इस बारे में किसी को कुछ नहीं बताया. बाद में उन्होंने इस बारे में कुछ ग्रामीणों को बताया तो उन्होंने भी पहले विश्वास नहीं किया, मगर जब उन्होंने भी दीए में पानी डालकर ज्योति जलाने की कोशिश की, तो ज्योति जल उठी.


बताया जाता है कि उसके बाद इस चमत्कार की बात आग की तरह पूरे गांव में फैल गई. तब से लेकर आज तक इस मंदिर में काली सिंध नदी के पानी से ही ज्योत प्रजलवित की जाती है . बताया जाता है कि जब दीपक में पानी डाला जाता है, तो वह चिपचिपे तरल पदार्थ में तब्दील हो जाता है और ज्योत जल उठती है. स्‍थानीय न‍िवास‍ियों के अनुसार, हालांकि पानी से जलने वाली यह ज्‍योत वर्षा ऋतू में नहीं जलती है. क्योंकि बरसात के मौसम में काली सिंध नदी का जल स्तर बढ़ने के चलते यह मंदिर पानी में डूब जाता है, जिससे यहां पूजा करना संभव नहीं होता।  लेकिन शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानी घटस्थापना के साथ ज्योत दोबारा प्रज्जवलित कर दी जाती है, जो अगले साल बार‍िश के मौसम तक निरंतर जलती रहती है.


 जय श्री जगदंबे माता की जय हो भोलेनाथ ॐ ऐं र्‍हिं ल्किं चामुण्डायै विच्चे जय माता की 🌅 नमस्कार शुभप्रभात 🌅 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी नारायण जय श्री भोलेनाथ जय श्री पार्वती माता की जय हो आप सभी भारतवासी मित्रों को मेरा सुबह नमस्कार शुभप्रभात वंदन जय हो 🌹👏🚩🐚🎪👪👬🙏🚩
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हमारा भारत देश, आस्थाओं और विभिन्न रहस्यों से भरा हुआ देश है। यहां हर आधे किलोमीटर पर आपको धर्मस्थल मिल जाएंगे और हर धर्मस्थल के साथ ही एक कहानी भी। वहीं, हमारे देश में कुछ मंदिर से इतने रहस्यमयी है कि उनके रहस्यों के बारे मे आज तक कोई जान भी नहीं पाया है. आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मध्य प्रदेश में स्थित है. ये मंदिर देशभर में अद्भुत चमत्कार के मशहूर है. इस मंदिर में एक दिया वर्षों से जलता आ रहा है, लेकिन ये दिव्य ज्योत, तेल या घी से नहीं बल्कि पानी से जलती है. आज तक कई वैज्ञानिकों ने इस मंदिर का रहस्य समझने की कोशिश की, लेकिन किसी को कामयाबी नहीं मिली.  

यह मंदिर, मध्य प्रदेश के काली सिंध नदी के किनारे बसे आगर-मालवा जिले के अंतर्गत आने वाले नलखेड़ा गांव से लगभग 15 किमी दूर गाड़िया गांव के पास मौजूद है. इस मंदिर को गड़ियाघाट वाली माताजी के नाम से जाना जाता है. मंदिर के पुजारी के अनुसार, पहले इस मंदिर में हमेशा तेल का दीपक जलता था, लेकिन लगभग पांच साल पहले उन्हें मातारानी ने सपने में दर्शन देकर पानी से दीपक जलाने के लिए कहा. इसे मातारानी का आदेश मानते हुए पुजारी ने सुबह उठकर जब उन्होंने पास बह रही काली सिंध नदी से पानी भरा और उसे दीए में डाल दिया. दीपक में पानी डालने के बाद जैसे ही उसमे रखी हुई ज्योत के पास जलती हुई माचिस ले जाई गई, वैसे ही ज्योत जल उठी. यह देखकर पुजारी खुद भी अचंभित रह गए और लगभग दो महीने तक उन्होंने इस बारे में किसी को कुछ नहीं बताया. बाद में उन्होंने इस बारे में कुछ ग्रामीणों को बताया तो उन्होंने भी पहले विश्वास नहीं किया, मगर जब उन्होंने भी दीए में पानी डालकर ज्योति जलाने की कोशिश की, तो ज्योति जल उठी.


बताया जाता है कि उसके बाद इस चमत्कार की बात आग की तरह पूरे गांव में फैल गई. तब से लेकर आज तक इस मंदिर में काली सिंध नदी के पानी से ही ज्योत प्रजलवित की जाती है . बताया जाता है कि जब दीपक में पानी डाला जाता है, तो वह चिपचिपे तरल पदार्थ में तब्दील हो जाता है और ज्योत जल उठती है. स्‍थानीय न‍िवास‍ियों के अनुसार, हालांकि पानी से जलने वाली यह ज्‍योत वर्षा ऋतू में नहीं जलती है. क्योंकि बरसात के मौसम में काली सिंध नदी का जल स्तर बढ़ने के चलते यह मंदिर पानी में डूब जाता है, जिससे यहां पूजा करना संभव नहीं होता।  लेकिन शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानी घटस्थापना के साथ ज्योत दोबारा प्रज्जवलित कर दी जाती है, जो अगले साल बार‍िश के मौसम तक निरंतर जलती रहती है.


 जय श्री जगदंबे माता की जय हो भोलेनाथ ॐ ऐं र्‍हिं ल्किं चामुण्डायै विच्चे जय माता की 🌅 नमस्कार शुभप्रभात 🌅 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी नारायण जय श्री भोलेनाथ जय श्री पार्वती माता की जय हो आप सभी भारतवासी मित्रों को मेरा सुबह नमस्कार शुभप्रभात वंदन जय हो 🌹👏🚩🐚🎪👪👬🙏🚩
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हमारा भारत देश, आस्थाओं और विभिन्न रहस्यों से भरा हुआ देश है। यहां हर आधे किलोमीटर पर आपको धर्मस्थल मिल जाएंगे और हर धर्मस्थल के साथ ही एक कहानी भी। वहीं, हमारे देश में कुछ मंदिर से इतने रहस्यमयी है कि उनके रहस्यों के बारे मे आज तक कोई जान भी नहीं पाया है. आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मध्य प्रदेश में स्थित है. ये मंदिर देशभर में अद्भुत चमत्कार के मशहूर है. इस मंदिर में एक दिया वर्षों से जलता आ रहा है, लेकिन ये दिव्य ज्योत, तेल या घी से नहीं बल्कि पानी से जलती है. आज तक कई वैज्ञानिकों ने इस मंदिर का रहस्य समझने की कोशिश की, लेकिन किसी को कामयाबी नहीं मिली.  

यह मंदिर, मध्य प्रदेश के काली सिंध नदी के किनारे बसे आगर-मालवा जिले के अंतर्गत आने वाले नलखेड़ा गांव से लगभग 15 किमी दूर गाड़िया गांव के पास मौजूद है. इस मंदिर को गड़ियाघाट वाली माताजी के नाम से जाना जाता है. मंदिर के पुजारी के अनुसार, पहले इस मंदिर में हमेशा तेल का दीपक जलता था, लेकिन लगभग पांच साल पहले उन्हें मातारानी ने सपने में दर्शन देकर पानी से दीपक जलाने के लिए कहा. इसे मातारानी का आदेश मानते हुए पुजारी ने सुबह उठकर जब उन्होंने पास बह रही काली सिंध नदी से पानी भरा और उसे दीए में डाल दिया. दीपक में पानी डालने के बाद जैसे ही उसमे रखी हुई ज्योत के पास जलती हुई माचिस ले जाई गई, वैसे ही ज्योत जल उठी. यह देखकर पुजारी खुद भी अचंभित रह गए और लगभग दो महीने तक उन्होंने इस बारे में किसी को कुछ नहीं बताया. बाद में उन्होंने इस बारे में कुछ ग्रामीणों को बताया तो उन्होंने भी पहले विश्वास नहीं किया, मगर जब उन्होंने भी दीए में पानी डालकर ज्योति जलाने की कोशिश की, तो ज्योति जल उठी.


बताया जाता है कि उसके बाद इस चमत्कार की बात आग की तरह पूरे गांव में फैल गई. तब से लेकर आज तक इस मंदिर में काली सिंध नदी के पानी से ही ज्योत प्रजलवित की जाती है . बताया जाता है कि जब दीपक में पानी डाला जाता है, तो वह चिपचिपे तरल पदार्थ में तब्दील हो जाता है और ज्योत जल उठती है. स्‍थानीय न‍िवास‍ियों के अनुसार, हालांकि पानी से जलने वाली यह ज्‍योत वर्षा ऋतू में नहीं जलती है. क्योंकि बरसात के मौसम में काली सिंध नदी का जल स्तर बढ़ने के चलते यह मंदिर पानी में डूब जाता है, जिससे यहां पूजा करना संभव नहीं होता।  लेकिन शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानी घटस्थापना के साथ ज्योत दोबारा प्रज्जवलित कर दी जाती है, जो अगले साल बार‍िश के मौसम तक निरंतर जलती रहती है.


 जय श्री जगदंबे माता की जय हो भोलेनाथ ॐ ऐं र्‍हिं ल्किं चामुण्डायै विच्चे जय माता की 🌅 नमस्कार शुभप्रभात 🌅 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी नारायण जय श्री भोलेनाथ जय श्री पार्वती माता की जय हो आप सभी भारतवासी मित्रों को मेरा सुबह नमस्कार शुभप्रभात वंदन जय हो 🌹👏🚩🐚🎪👪👬🙏🚩
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हमारा भारत देश, आस्थाओं और विभिन्न रहस्यों से भरा हुआ देश है। यहां हर आधे किलोमीटर पर आपको धर्मस्थल मिल जाएंगे और हर धर्मस्थल के साथ ही एक कहानी भी। वहीं, हमारे देश में कुछ मंदिर से इतने रहस्यमयी है कि उनके रहस्यों के बारे मे आज तक कोई जान भी नहीं पाया है. आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मध्य प्रदेश में स्थित है. ये मंदिर देशभर में अद्भुत चमत्कार के मशहूर है. इस मंदिर में एक दिया वर्षों से जलता आ रहा है, लेकिन ये दिव्य ज्योत, तेल या घी से नहीं बल्कि पानी से जलती है. आज तक कई वैज्ञानिकों ने इस मंदिर का रहस्य समझने की कोशिश की, लेकिन किसी को कामयाबी नहीं मिली.  

यह मंदिर, मध्य प्रदेश के काली सिंध नदी के किनारे बसे आगर-मालवा जिले के अंतर्गत आने वाले नलखेड़ा गांव से लगभग 15 किमी दूर गाड़िया गांव के पास मौजूद है. इस मंदिर को गड़ियाघाट वाली माताजी के नाम से जाना जाता है. मंदिर के पुजारी के अनुसार, पहले इस मंदिर में हमेशा तेल का दीपक जलता था, लेकिन लगभग पांच साल पहले उन्हें मातारानी ने सपने में दर्शन देकर पानी से दीपक जलाने के लिए कहा. इसे मातारानी का आदेश मानते हुए पुजारी ने सुबह उठकर जब उन्होंने पास बह रही काली सिंध नदी से पानी भरा और उसे दीए में डाल दिया. दीपक में पानी डालने के बाद जैसे ही उसमे रखी हुई ज्योत के पास जलती हुई माचिस ले जाई गई, वैसे ही ज्योत जल उठी. यह देखकर पुजारी खुद भी अचंभित रह गए और लगभग दो महीने तक उन्होंने इस बारे में किसी को कुछ नहीं बताया. बाद में उन्होंने इस बारे में कुछ ग्रामीणों को बताया तो उन्होंने भी पहले विश्वास नहीं किया, मगर जब उन्होंने भी दीए में पानी डालकर ज्योति जलाने की कोशिश की, तो ज्योति जल उठी.


बताया जाता है कि उसके बाद इस चमत्कार की बात आग की तरह पूरे गांव में फैल गई. तब से लेकर आज तक इस मंदिर में काली सिंध नदी के पानी से ही ज्योत प्रजलवित की जाती है . बताया जाता है कि जब दीपक में पानी डाला जाता है, तो वह चिपचिपे तरल पदार्थ में तब्दील हो जाता है और ज्योत जल उठती है. स्‍थानीय न‍िवास‍ियों के अनुसार, हालांकि पानी से जलने वाली यह ज्‍योत वर्षा ऋतू में नहीं जलती है. क्योंकि बरसात के मौसम में काली सिंध नदी का जल स्तर बढ़ने के चलते यह मंदिर पानी में डूब जाता है, जिससे यहां पूजा करना संभव नहीं होता।  लेकिन शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानी घटस्थापना के साथ ज्योत दोबारा प्रज्जवलित कर दी जाती है, जो अगले साल बार‍िश के मौसम तक निरंतर जलती रहती है.


 जय श्री जगदंबे माता की जय हो भोलेनाथ ॐ ऐं र्‍हिं ल्किं चामुण्डायै विच्चे जय माता की 🌅 नमस्कार शुभप्रभात 🌅 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी नारायण जय श्री भोलेनाथ जय श्री पार्वती माता की जय हो आप सभी भारतवासी मित्रों को मेरा सुबह नमस्कार शुभप्रभात वंदन जय हो 🌹👏🚩🐚🎪👪👬🙏🚩
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कामेंट्स

sanjay choudhary Feb 26, 2021
🙏🙏 जय माता दी।।🙏🙏 ।।।। शुभ प्र्भात्।।। जी।।।। *🙏🌸प्रातः!!🌼!!अभिनंदन🌸🙏* *✍️...."संबंधों" की "मधुरता" के लिए* *"सम्बोधन" की "मधुरता" "अनिवार्य" है...✍️* *🌼आज का दिन शुभ हो🌼*                         *🙏सुप्रभात🌼!!राधेराधे!!🙏* 🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃

शामराव ठोंबरे पाटील Feb 26, 2021
@sanjaychoudhary3 नमस्कार शुभप्रभात वंदन जय श्री भोलेनाथ जय श्री महाकाल जी जय माता महाकाली की जय हो 🌅 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी नारायण 🙏 🐚 नमस्कार 🙏 🚩

Brajesh Sharma Feb 26, 2021
.प्रेम से बोलो जय माता दी जय माता दी.. .ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव ईश्वर आपकी समस्त कामनाओं की पूर्ति करें, आपका सदा कल्याण करें..

Manoj manu Feb 26, 2021
🚩🌺🌿जय माता दी राधे राधे जी जगत जननी माँ भगवती की अनंत सुंदर एवं ममतामयी कृपा दृष्टि के साथ में शुभ दिन मधुर मंगल जी 🌹🌹🌿🌹🌹🙏

शामराव ठोंबरे पाटील Feb 26, 2021
@brajeshsharma1 नमस्कार ब्रिजेश भाई जी जय माता महाकाली की जय हो भोलेनाथ 🌹 नमस्कार 🙏 शुभ 🌅 शुभ शुक्रवार जय श्री लक्ष्मी नारायण 🙏 🐚 🌹 💐 नमस्कार 🙏 🚩

शामराव ठोंबरे पाटील Feb 26, 2021
@manojm नमस्कार मनोज जी धन्यवाद 👏 जय श्री लक्ष्मी नारायण 🙏 जय श्री भोलेनाथ ॐ ऐं र्‍हिं ल्किं चामुण्डायै विच्चे जय माता की 🌅 नमस्कार शुभप्रभात वंदन जय हो माता रानी की कृपा दृष्टी हमेशा बनी रहे नमस्कार 🙏 🚩

शामराव ठोंबरे पाटील Feb 26, 2021
@dhruvwadhwani नमस्कार वाधवाणी साहब धन्यवाद आपको 👏 जय श्री लक्ष्मी नारायण 🙏 जय श्री भोलेनाथ ॐ ऐं र्‍हिं ल्किं चामुण्डायै विच्चे जय माता की जय हो

pramod singh Apr 16, 2021

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Poonam Aggarwal Apr 17, 2021

🎪🎪* जय श्री स्कंद मां जय माता दी *🎪🎪🙏 🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪 🌻🌼🌺🪴🌺🌼🌻 *पाने को कुछ नहीं,* *ले जाने को कुछ नहीं;* *उड़ जाएंगे एक दिन...* *तस्वीर से रंगों की तरह!* *हम वक्त की टहनी पर...* *बैठे हैं परिंदों की तरह !!* *खटखटाते रहिए दरवाजा...* *एक दूसरे के मन का;* *मुलाकातें ना सही,* *आहटें आती रहनी चाहिए !!* *ना राज़ है... “ज़िन्दगी”* *ना नाराज़ है... “ज़िन्दगी";* *बस जो है, वो आज है... “ज़िन्दगी”* 🌹🙏 सुप्रभात 🙏🌹 💐 आपका दिन मंगलमय हो 💐 *सुबह पुकारूँ, शाम पुकारूँ,* *पुकारूँ मै दिन रात...* ♥️♥️♥️ *बाबा साथ ना छोड़ना* *पकड़े रहना आप मेरा हाथ..🌹* 🌷🌹 *༺꧁ जय श्री श्याम जी꧂༻* [ 🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺 🌹🌳 #जय_जय_श्री_राधे 🌳🌹🙏🏻 बरसाने की राधिका,नंद गांव के श्याम। दोनों के ही चरणों में,कोटि-कोटि प्रणाम।। 🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺

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Durgeshgiri Apr 16, 2021

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Sanjeev sharma Apr 17, 2021

🇱 🇮 🇻 🇪 🇩 🇦 🇷 🇸 🇭 🇦 🇳 👣 🌹👁️🔻👁️🌹 जय माता कुलजा देवी श्री नैना देवी जी🕉️🌺🙏🌹🌻🎇🌹👣🌷🔔🎊🕉️🎈🎉🍍⛳️🙏जय माता कुलजा देवी जी आदि शक्ति जगजननी विश्वविख्यात श्री सिद्ध शक्तिपीठ माता श्री नैना देवी जी के आज के प्रातः काल के श्रृंगार दर्शन हिमाचल प्रदेश बिलासपुर नैना देवी से🙏👣🎉🕉️🌷🎊🌺⛳️🌻👁️❗️👁️🌹👣1⃣7⃣🌷🌹 *अप्रैल* ❤️ *शनिवार* 🔱 🎈2⃣0⃣2⃣1️⃣👣🌷 🌻💐✍️...दास संजीव शर्मा🕉️👣 💐🍓 🔔🎉🙏🌹👁️🔻👁️🌹👣 जेष्ठ माता श्री नैना देवी जी सदैव अपनी कृपा बनाए रखें भक्तों पर🕉️ शुभ विक्रम संवत- 2078 शक संवत-1943 *अयन* - उत्तरायण *ऋतु* -वसंत *मास* -चैत्र *पक्ष* - शुक्ल *तिथि* - पंचमी रात्रि 08:32 तक तत्पश्चात षष्ठी *नक्षत्र* - मृगशिरा 18 अप्रैल रात्रि 02:34 बजे तक तत्पश्चात आर्द्रा *योग* - शोभन शाम 07:19 तक तत्पश्चात अतिगण्ड *दिशाशूल*- पूर्व दिशा में *व्रत पर्व* *विवरण* - श्री पंचमी 🏵️ *विशेष*- पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। पांचमे नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं सभी माता के भक्तों को जय माता श्री नैना देवी जी।🎉🌹🎈⛳️👣🔱🐚🔔🙏

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Archana Singh Apr 16, 2021

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इक्यावन शक्तिपीठों में प्रमुख विन्ध्यवासिनी जी की कथा 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ 'भगवती विंध्यवासिनी आद्या महाशक्ति हैं। विन्ध्याचल सदा से उनका निवास-स्थान रहा है। जगदम्बा की नित्य उपस्थिति ने विंध्यगिरिको जाग्रत शक्तिपीठ बना दिया है। महाभारत के विराट पर्व में धर्मराज युधिष्ठिर देवी की स्तुति करते हुए कहते हैं- विन्ध्येचैवनग-श्रेष्ठे तवस्थानंहि शाश्वतम्। हे माता! पर्वतों में श्रेष्ठ विंध्याचलपर आप सदैव विराजमान रहती हैं। पद्मपुराण में विंध्याचल-निवासिनी इन महाशक्ति को विंध्यवासिनी के नाम से संबंधित किया गया है- विन्ध्येविन्ध्याधिवासिनी। श्रीमद्देवीभागवत के दशम स्कन्ध में कथा आती है, सृष्टिकर्ता ब्रह्माजीने जब सबसे पहले अपने मन से स्वायम्भुवमनु और शतरूपा को उत्पन्न किया। तब विवाह करने के उपरान्त स्वायम्भुव मनु ने अपने हाथों से देवी की मूर्ति बनाकर सौ वर्षो तक कठोर तप किया। उनकी तपस्या से संतुष्ट होकर भगवती ने उन्हें निष्कण्टक राज्य, वंश-वृद्धि एवं परम पद पाने का आशीर्वाद दिया। वर देने के बाद महादेवी विंध्याचलपर्वत पर चली गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि सृष्टि के प्रारंभ से ही विंध्यवासिनी की पूजा होती रही है। सृष्टि का विस्तार उनके ही शुभाशीषसे हुआ। त्रेता युग में भगवान श्रीरामचन्द्र सीताजीके साथ विंध्याचल आए थे। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा स्थापित रामेश्वर महादेव से इस शक्तिपीठ की माहात्म्य और बढ गया है। द्वापरयुग में मथुरा के राजा कंस ने जब अपने बहन-बहनोई देवकी-वसुदेव को कारागार में डाल दिया और वह उनकी सन्तानों का वध करने लगा। तब वसुदेवजीके कुल-पुरोहित गर्ग ऋषि ने कंस के वध एवं श्रीकृष्णावतार हेतु विंध्याचल में लक्षचण्डी का अनुष्ठान करके देवी को प्रसन्न किया। जिसके फलस्वरूप वे नन्दरायजीके यहाँ अवतरित हुई। मार्कण्डेयपुराण के अन्तर्गत वर्णित दुर्गासप्तशती (देवी-माहात्म्य) के ग्यारहवें अध्याय में देवताओं के अनुरोध पर भगवती उन्हें आश्वस्त करते हुए कहती हैं, देवताओं वैवस्वतमन्वन्तर के अट्ठाइसवें युग में शुम्भऔर निशुम्भनाम के दो महादैत्य उत्पन्न होंगे। तब मैं नन्दगोप के घर में उनकी पत्नी यशोदा के गर्भ से अवतीर्ण हो विन्ध्याचल में जाकर रहूँगी और उक्त दोनों असुरों का नाश करूँगी। लक्ष्मीतन्त्र नामक ग्रन्थ में भी देवी का यह उपर्युक्त वचन शब्दश: मिलता है। ब्रज में नन्द गोप के यहाँ उत्पन्न महालक्ष्मीकी अंश-भूता कन्या को नन्दा नाम दिया गया। मूर्तिरहस्य में ऋषि कहते हैं- नन्दा नाम की नन्द के यहाँ उत्पन्न होने वाली देवी की यदि भक्तिपूर्वक स्तुति और पूजा की जाए तो वे तीनों लोकों को उपासक के आधीन कर देती हैं। श्रीमद्भागवत महापुराण के श्रीकृष्ण-जन्माख्यान में यह वर्णित है कि देवकी के आठवें गर्भ से आविर्भूत श्रीकृष्ण को वसुदेवजीने कंस के भय से रातोंरात यमुनाजीके पार गोकुल में नन्दजीके घर पहुँचा दिया तथा वहाँ यशोदा के गर्भ से पुत्री के रूप में जन्मीं भगवान की शक्ति योगमाया को चुपचाप वे मथुरा ले आए। आठवीं संतान के जन्म का समाचार सुन कर कंस कारागार में पहुँचा। उसने उस नवजात कन्या को पत्थर पर जैसे ही पटक कर मारना चाहा, वैसे ही वह कन्या कंस के हाथों से छूटकर आकाश में पहुँच गई और उसने अपना दिव्य स्वरूप प्रदर्शित किया। कंस के वध की भविष्यवाणी करके भगवती विन्ध्याचल वापस लौट गई। मन्त्रशास्त्र के सुप्रसिद्ध ग्रंथ शारदातिलक में विंध्यवासिनी का वनदुर्गा के नाम से यह ध्यान बताया गया है- सौवर्णाम्बुजमध्यगांत्रिनयनांसौदामिनीसन्निभां चक्रंशंखवराभयानिदधतीमिन्दो:कलां बिभ्रतीम्। ग्रैवेयाङ्गदहार-कुण्डल-धरामारवण्ड-लाद्यै:स्तुतां ध्यायेद्विन्ध्यनिवासिनींशशिमुखीं पा‌र्श्वस्थपञ्चाननाम्॥ अर्थ-जो देवी स्वर्ण-कमल के आसन पर विराजमान हैं, तीन नेत्रों वाली हैं, विद्युत के सदृश कान्ति वाली हैं, चार भुजाओं में शंख, चक्र, वर और अभय मुद्रा धारण किए हुए हैं, मस्तक पर सोलह कलाओं से परिपूर्ण चन्द्र सुशोभित है, गले में सुन्दर हार, बांहों में बाजूबन्द, कानों में कुण्डल धारण किए इन देवी की इन्द्रादि सभी देवता स्तुति करते हैं। विंध्याचलपर निवास करने वाली, चंद्रमा के समान सुन्दर मुखवाली इन विंध्यवासिनी के समीप सदा शिव विराजित हैं। सम्भवत:पूर्वकाल में विंध्य-क्षेत्रमें घना जंगल होने के कारण ही भगवती विन्ध्यवासिनीका वनदुर्गा नाम पडा। वन को संस्कृत में अरण्य कहा जाता है। इसी कारण ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की षष्ठी विंध्यवासिनी-महापूजा की पावन तिथि होने से अरण्यषष्ठी के नाम से विख्यात हो गई है। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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Anita Sharma Apr 16, 2021

((((( संगति, परिवेश और भाव ))))) . एक राजा अपनी प्रजा का भरपूर ख्याल रखता था. राज्य में अचानक चोरी की शिकायतें बहुत आने लगीं. कोशिश करने से भी चोर पकड़ा नहीं गया. . हारकर राजा ने ढींढोरा पिटवा दिया कि जो चोरी करते पकडा जाएगा उसे मृत्युदंड दिया जाएगा. सभी स्थानों पर सैनिक तैनात कर दिए गए. घोषणा के बाद तीन-चार दिनों तक चोरी की कोई शिकायत नही आई. . उस राज्य में एक चोर था जिसे चोरी के सिवा कोई काम आता ही नहीं था. उसने सोचा मेरा तो काम ही चोरी करना है. मैं अगर ऐसे डरता रहा तो भूखा मर जाउंगा. चोरी करते पकडा गया तो भी मरुंगा, भूखे मरने से बेहतर है चोरी की जाए. . वह उस रात को एक घर में चोरी करने घुसा. घर के लोग जाग गए. शोर मचाने लगे तो चोर भागा. पहरे पर तैनात सैनिकों ने उसका पीछा किया. चोर जान बचाने के लिए नगर के बाहर भागा. . उसने मुडके देखा तो पाया कि कई सैनिक उसका पीछा कर रहे हैं. उन सबको चमका देकर भाग पाना संभव नहीं होगा. भागने से तो जान नहीं बचने वाली, युक्ति सोचनी होगी. . चोर नगर से बाहर एक तालाब किनारे पहुंचा. सारे कपडे उतारकर तालाब मे फेंक दिया और अंधेरे का फायदा उठाकर एक बरगद के पेड के नीचे पहुंचा. . बरगद पर बगुलों का वास था. बरगद की जड़ों के पास बगुलों की बीट पड़ी थी. चोर ने बीट उठाकर उसका तिलक लगा लिया ओर आंख मूंदकर ऐसे स्वांग करने बैठा जैसे साधना में लीन हो. . खोजते-खोजते थोडी देर मे सैनिक भी वहां पहुंच गए पर उनको चोर कहीं नजर नहीं आ रहा था. खोजते खोजते उजाला हो रहा था ओर उनकी नजर बाबा बने चोर पर पडी. . सैनिकों ने पूछा- बाबा इधर किसी को आते देखा है. पर ढोंगी बाबा तो समाधि लगाए बैठा था. वह जानता था कि बोलूंगा तो पकडा जाउंगा सो मौनी बाबा बन गया और समाधि का स्वांग करता रहा. . सैनिकों को कुछ शंका तो हुई पर क्या करें. कही सही में कोई संत निकला तो ? आखिरकार उन्होंने छुपकर उसपर नजर रखना जारी रखा. यह बात चोर भांप गया. जान बचाने के लिए वह भी चुपचाप बैठा रहा. . एक दिन, दो दिन, तीन दिन बीत गए बाबा बैठा रहा. नगर में चर्चा शुरू हो गई की कोई सिद्ध संत पता नही कितने समय से बिना खाए-पीए समाधि लगाए बैठै हैं. सैनिकों को तो उनके अचानक दर्शऩ हुए हैं. . नगर से लोग उस बाबा के दर्शन को पहुंचने लगे. भक्तों की अच्छी खासी भीड़ जमा होने लगी. राजा तक यह बात पहुंच गई. राजा स्वयं दर्शन करने पहुंचे. राजा ने विनती की आप नगर मे पधारें और हमें सेवा का सौभाग्य दें. . चोर ने सोचा बचने का यही मौका है. वह राजकीय अतिथि बनने को तैयार हो गया. सब लोग जयघोष करते हुए नगर में लेजा कर उसकी सेवा सत्कार करने लगे. . लोगों का प्रेम और श्रद्धा भाव देखकर ढोंगी का मन परिवर्तित हुआ. उसे आभास हुआ कि यदि नकली में इतना मान-संम्मान है तो सही में संत होने पर कितना सम्मान होगा. उसका मन पूरी तरह परिवर्तित हो गया और चोरी त्यागकर संन्यासी हो गया. . संगति, परिवेश और भाव इंसान में अभूतपूर्व बदलाव ला सकता है. रत्नाकर डाकू को गुरू मिल गए तो प्रेरणा मिली और वह आदिकवि हो गए. असंत भी संत बन सकता है, यदि उसे राह दिखाने वाला मिल जाए. . अपनी संगति को शुद्ध रखिए, विकारों का स्वतः पलायन आरंभ हो जाएगा.

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