Dharam Pal Summi
Dharam Pal Summi Apr 19, 2019

Jai Shree Ram ji 🙏🙏🌹🌹

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Anita Mittal May 21, 2019

🏵🏵मत कर चिंता कुछ न मिलेगा , चिंता चित जलाये नाम सुमिर ले राम का , ये बिगड़े काम बनाये 🏵🏵 🌹🌹जय श्री राम 🌹🌹 🌻🌻गुरु वशिष्ठ का विचित्र संकल्प 🌻🌻 '''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''' श्री रामचंद्र ने अश्वमेध यज्ञ किया , जिसमें उन्होंने सर्वस्व दान कर दिया । उन्होंने घोषणा की कियदि कोई अयोध्या का राज्य , कौस्तुभ मणि , पुष्पक विमान , कामधेनु गाय अथवा सीता को भी माँगेगा , तो मैं सहर्ष दे दूँगा । वशिष्ठ जी ने कुछ सोचकर राम से कहा , यह गोदान क्या कर रहे हो ! यदि देना ही है , तो सर्वालंकारमंडिता सीता को ही दान करो । यह सुनकर जनता में हाहाकार मच गया । कुछ लोग कहने लगे कि क्या गुरु वशिष्ठ पागल हो गये हैं ? जबकि कुछ ने माना कि मुनि केवल विनोद कर रहे हैं । इस बीच श्रीराम जी ने हँसकर सीता जी को बुलाया । उनका हाथ पकड़ कर मुनि वशिष्ठ जी से कहने लगे , आप स्त्री दान का मंत्र बोलें , मैं सीता को दान कर रहा हूँ । वशिष्ठ जी ने यथा विधि यह काम सम्पन्न किया । वशिष्ठ जी ने सीता को अपने पीछे बैठने को कहा । फिर श्रीराम ने मुनि से कहा , अब कामधेनु गाय भी ले लीजिए । इसपर मुनि वशिष्ठ बोले , राम ! मैने केवल तुम्हारे औदार्य प्रदर्शन के लिये यह कौतूहल रचा था । अब सीता का आठ गुना सोना तोलकर तुम इन्हें वापिस ले लो और आज से कामधेनु , सीता , कौस्तुभ मणि , पुष्पक विमान तथा संपूर्ण राज्य किसी को देने का नाम मत लेना । भगवान ने वैसा ही किया और निरलंकार केवल दो वस्त्रों के साथ सीता को लौटा लिया । आकाश से पुष्पवृष्टि होने लगी । जयजयकार की ध्वनि से दशों दिशायें भर गयी । 🌻🌻रामजी का कृपाप्रसाद आपके साथ बना रहे जी 🌻🌻 🌹🌹जय श्री राम जी 🌹🌹 🌹🌹जय हनुमानजी 🌹🌹

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kalavati Rajput May 21, 2019

🌺🌺ॐ अज निरंजन निर्विकार जगत्पतये नमः🙏 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 🎆सच्ची पंचायतन वेदोक्त और वेदानुकूल देवपूजा एवं मूर्तिपूजा 🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇 परमपूज्य गुरुदेवजी के चरणों में सादर नमन 🌺🙏🌺 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 प्राचीन धर्म ग्रंथोऔर महर्षियों के अनुसार, 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 ✍️(१) मा नो वधी:पितरं मोत मातरम । 🚩 यजु० ✍️(२) आचार्याउपनयमानो ब्रम्चारिनभिच्छते ।। ✍️(३) अतिथिगृहआनु पच्छेत।। 🚩 अथर्व० ✍️(४) अर्चत प्रार्चत प्रियमेधासो अर्चत।। 🚩 ऋग्वेद ✍️(५) त्वमेव प्रत्यक्षम ब्रम्हासि त्वमेव प्रत्यक्षम ब्रम्ह वदिष्यामि ।।। मातृ देवो भव पितृ देवो भव आचार्यदेवो भव अतिथिदेवो भव ।।। 🚩 तैत्तरीय उपनिषद ✍️(६) पितृभिभ्रातृभिश्चयतः पतिभिर्देवरैस्तथा ।पूज्या भूषियतव्याघ्र बहुकल्याणमीपसुभि: ।। पुज्यो देवत्पति:।। 🚩मनु स्मृति 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 उपरोक्त ऋचाओ में बताया गया है कि : -- प्रथम माता मूर्तिमयी पूज्यनीय देवता अर्थात संतानों को तन मन धन से सेवा करके माँ को प्रसन्न रखना हिंसा अर्थात कभी ताड़ना न करना। क्योकि कहा गया है कि माता के ही चरणों में सातो स्वर्ग समाये होते हैं इसलिए माँ के चरण कमलों की वंदना करनी चाहिये। दूसरा पिता सत्कर्म देव उनकी भी माता के सामान सेवा करना । तीसरा आचार्य अर्थात परमपूज्य गुरु जो विद्या देने वाला है उनकी भी तन मन धन से सेवा करना । गुरु को भगवान से भी बड़ा बताया गया है क्योकि कबीरदास जी ने भी कहा है 🚩गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागो पाय । बलिहारी गुरु अपने, गोविन्द दियो बताय।। चौथा अतिथि जो विद्वान ,धार्मिक,निष्कपटी ,सबकी उन्नति चाहने वाला, जगत में भ्रमण करता करता हुआ,सत्य उपदेश से सबको सुखी करता है उसकी सेवा करे। पांचवा स्त्री के लिए पति और पति के लिए स्वपत्नी पूजनीय है। ये ही पांच मूर्तिमान देव जिनके संग से मनुष्यदेह की उत्पत्ति ,पालन, सत्यशिक्षा , विद्या और सत्योपदेश की प्राप्ति होती है। ये ही परमेश्वर की प्राप्ति होंवे की सीढ़ियां है। मातादि मूर्तिमानो की सेवा करने में ही कल्याण है। ईश्वर बहुरूप है , उनके सभी रूप बहुत ही अनुपम है। केवल ईश्वर का नाम लेने से या देवी देवताओं की मूर्तिपूजा करने से कुछ भी नही हो सकता है जब तक कि परमात्मा का उस स्वरूप का सच्चे हृदय अर्थात अंतःकरण से सुमिरन न किया जाय। परमात्मा का वास कण कण में होता है। मूर्तिपूजा भक्ति का आधार माना गया है। मूर्तिपूजा तो तंत्र एवं पुराणों से चली । क्योकि वेद अनादि है । उस समय देवता तो प्रत्यक्ष थे तब मूर्ति का कोई काम नही था। जब मनुष्यो का ज्ञान और सामर्थ न्यूनहो गया तो परमेश्वर को ध्यान में नही ला सके और मूर्ति का ध्यान तो कर ही सकते थे। क्योंकि पूजते पूजते जब ज्ञान होगा और अंतःकरण पवित्र तब परमात्मा का ध्यान कर सकेंगे इसलिए मूर्ति को सामनेरखना प्रारम्भ किया। कर्म ही पूजा है। आचार्य जैमिनी मुनि ने मीमांसा शास्त्र में सब कर्मकांड की व्याख्या की है 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩ॐ सच्चिदानंद स्वरूपाय नमः🙏🚩🚩🚩 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

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Hanumandeepak 5 May 21, 2019

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