सुन्दर कांड की विशेशता

सुन्दर कांड की विशेशता

मित्रों आज आपको सुंदरकाण्ड से जुड़ी पाँच मुख्य बातें बतायेंगे।

* भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि।
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥

श्री रघुवीर का यश भव (जन्म-मरण) रूपी रोग की (अचूक) दवा है। जो पुरुष और स्त्री इसे सुनेंगे, त्रिशिरा के शत्रु श्री रामजी उनके सब मनोरथों को सिद्ध करेंगे॥ सुंदरकाण्ड को हनुमानजी की सफलता के रूप में याद किया जाता है। श्रीरामचरित मानस में सात काण्ड हैं। इन्ही में से एक सुंदरकाण्ड रामचरित मानस के पांचवें अध्याय का नाम है। बता दें कि यहां काण्ड का अभिप्राय अध्याय से है।

सुंदरकाण्ड के अतिरिक्त सभी अध्यायों के नाम स्थान या स्थितियों के आधार पर रखे गए हैं। बाललीला का बालकाण्ड, अयोध्या की घटनाओं का अयोध्या काण्ड, जंगल के जीवन का अरण्य काण्ड, किष्किंधा राज्य के कारण किष्किंधा काण्ड, लंका के युद्ध का लंका काण्ड और जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर उत्तरकाण्ड में दिए गए हैं। इसलिए लोग यह जानना चाहते हैं कि श्रीरामचरित मानस के इस पांचवें अध्याय का नाम सुंदरकाण्ड ही क्यों रखा गया।

सुंदरकाण्ड का नाम सुंदरकाण्ड क्यों रखा गया?

हनुमानजी, सीताजी की खोज में लंका गए थे और लंका त्रिकुटाचल पर्वत पर बसी हुई थी। त्रिकुटाचल पर्वत यानी यहां 3 पर्वत थे पहला सुबैल पर्वत, जहां के मैदान में युद्ध हुआ था। दूसरा नील पर्वत, जहां राक्षसों के महल बसे हुए थे। और तीसरे पर्वत का नाम है सुंदर पर्वत, जहां अशोक वाटिका थी। इसी वाटिका में हनुमानजी और सीताजी की भेंट हुई थी। इस कांंड की यही सबसे प्रमुख घटना थी, इसलिए इसका नाम सुंदरकांड रखा गया है !

शुभ अवसरों पर सुन्दरकाण्ड का पाठ क्यों-
शुभ अवसरों पर गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया जाता है। शुभ कार्यों की शुरूआत से पहले सुंदरकांड का पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है।

किसी व्यक्ति के जीवन में ज्यादा परेशानियां हो, कोई काम नहीं बन पा रहा है, आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या हो, सुंदरकांड के पाठ से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते हैं, कई ज्योतिषी या संत भी विपरित परिस्थितियों में सुंदरकांड करने की सलाह देते हैं।

जानिए सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से क्यों किया जाता है- माना जाता है कि सुंदरकांड के पाठ से हनुमानजी प्रसन्न होते हैं। सुंदरकांड के पाठ में बजरंगबली की कृपा बहुत ही जल्द प्राप्त हो जाती है। जो लोग नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ करते हैं, उनके सभी दुख दूूर हो जाते हैं, इसमें हनुमानजी नें अपनी बुद्धि और बल से सीता की खोज की है। इसी वजह से सुंदरकांड को हनुमानजी की सफलता के लिए याद किया जाता है।

मिलता है धार्मिक लाभ- वास्तव में श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड की कथा सबसे अलग हैं। संपूर्ण श्रीरामचरितमानस भगवान श्रीराम कें गुणों और उनके पुरुषार्थ को दर्शाती हैं, सुंदरकांड एकमात्र ऐसा अध्याय है जो श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का है।

सुंदरकांड से मिलता है मनोवैज्ञानिक लाभ-
मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो यह आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला कांड हैं,सुंदरकांड के पाठ से व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्त होती हैं, किसी भी कार्य को पूूर्ण करने के लिए आत्मविश्वास मिलता है।

।। राम सिया राम सिया राम जय जय राम।।

राम नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊ गली गली ।
लेलो रे कोई राम का प्याला, शोर मचाऊं गली गली ।
बोलो राम , बोलो राम , बोलो राम राम राम ।।

*'भक्ति मार्ग की चर्चा सुनकर आपको भजन शब्द याद न आये तो यह बिलकुल ऐसा हुआ जैसे अचार के बारे में कल्पना करके आपके मुंह में पानी न आये । भजन का अर्थ है थोड़े से शब्द और बहुत सारा ज्ञान । भक्ति हैं भाव व्यक्त करने की कला ।'*

*' स्वर ' साज ' शब्द ' संगीत और भाव '*
का मिला जुला मिश्रण है भजन ।
भजन गा कर भक्ति भाव में अहंकार को झुकने का मौका मिलता हैं । झुकना महत्वपूर्ण हैं ' किसके आगे झुकना हो रहा है ' वह उतना महत्वपूर्ण नहीं है । भजन गा कर स्वतः ही यह क्रिया घटने लगती हैं इसलिए भजन को आज तक इतना महत्व दिया गया है ।
*' जन हैं सराहना । भजन हैं ' उस सृजनहार की तारीफ जिसने यह संसार बनाया । भजन हैं प्रशंसा उस ( तेज स्थान ) हृदय की ' जो हमारे ही अंदर हैं और वहीं से सारे विचार लहरों की तरह उमड़ते हैं । जब मन ईश्वर की तारीफ करके बिल्कुल न थके तब कहा जा सकता है कि खोजी को प्रेम हो गया है ' खोजी को भक्ति प्रदान हुई है ।'*
भक्ति को अपना लक्ष्य बनाइए और इस दुनिया का एक ऐसा नाटक देखिए जो हैं नहीं सिर्फ मन के होने की वजह से दिखता है ।
*' हमारा शरीर ईश्वर का मंदिर है । मंदिर सदा साफ़ ' स्वच्छ रहे यह भक्त चाहता है । भक्त को भगवान से तेज प्रेम है । वह अपने भगवान के अनेक मंदिर बनवाना चाहता है लेकिन धन की दिक्कत की वजह से वह संसार में मंदिर नहीं बनवा सकता । तब वह अपने शरीर को ईश्वर का मंदिर बनाने की ठान लेता है । इस कार्य में उसे किसी धन की आवश्यकता नहीं हैं । इस कार्य में उसे जरूरत है केवल भक्ति साधना की ' साधना के बल से वह अपने शरीर ( मंदिर। ) से सारे दुर्गुण निकाल फेकता हैं । उसका शरीर सदा प्रेम के प्रकाश से जगमगाने लगता हैं । यह भक्ति साधना के प्रताप से होता है । क्या आपको अपने शरीर से ' तेज प्रेम है ? क्या आप अपने ईश्वर के लिए कम से कम एक मंदिर ( मान्यता रहित ' पॅटनर्स मुक्त ' गुणवान शरीर ) बना सकते है ? यदि हाँ तो यह लेख आपको मंदिर बनाने में मदद करेगा ।

*🍀👏 श्रीराम जयराम बोलो राम राम बोलो राम राम 👏🍀*

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कामेंट्स

Tarun Mishra Nov 23, 2017
सुंदर प्रसंग। जय श्री हनुमान

Deepak Meena Nov 23, 2017
जय जय श्री सितरामो देवाय नमो नमः

madhav Nov 23, 2017
राम जी की जय

Captain Nov 23, 2017
जय श्री राम जय श्री हनुमान जी

Veena Tiwari Nov 23, 2017
बहुत हीसही ढंग से सुन्दरकाण्ड की महिमा का वर्णन किया है

🚩🚩 जय श्री महाकाल मित्रों, 🚩🚩
दिव्य दर्शन आज प्रातः काल #भस्मआरती के,
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मन्दिर उज्जैन से,
आप का मित्र - दीपक राव इन्दौर, 18-08-18

Pranam Flower Belpatra +111 प्रतिक्रिया 23 कॉमेंट्स • 41 शेयर

🚩🚩जय श्री महाकाल मित्रों🚩🚩
दिव्य दर्शन आज संध्या श्रृंगार आरती के,
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मन्दिर उज्जैन से,
आप का मित्र - दीपक राव इन्दौर, 18-08-18

Milk Flower Fruits +71 प्रतिक्रिया 7 कॉमेंट्स • 8 शेयर

🚩🚩 जय श्री महाकाल मित्रों, 🚩🚩
दिव्य दर्शन आज प्रातः काल भस्म आरती के,
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मन्दिर उज्जैन से,
आप का मित्र - दीपक राव इन्दौर, 17-08-18

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जयजय बाबेरी सा
जयजय बाबेरी हॉ
जयजय बाबेरी जी

॰॰॰॰॰ बाबार रो फोन॰॰॰॰॰॰
भादों का महिना मगन हुये मोर
बाबा रो फोन आयो मन में उठे हिलोर
मन मे उठे हिलोर॰॰॰॰
बहन को बुलाया भुआ मामी को बुलाया
काकी को बुलाया काका पिछे-2 आया
काका मस्त...

(पूरा पढ़ें)
Jyot Pranam Flower +11 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 6 शेयर

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के प्रातः दर्शन का आनंद लें. दूसरे भक्तों को भी बाबा के दर्शन का आनंद दिलायें. प्रेम से बोलिये काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की जय.

Pranam Belpatra Water +32 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 16 शेयर

🚩🚩 जय श्री महाकाल मित्रों, 🚩🚩
दिव्य दर्शन आज संध्या श्रृंगार आरती के,
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मन्दिर उज्जैन से,
आप का मित्र - दीपक राव इन्दौर, 17-08-18

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