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sn.vyas May 3, 2021

🙏🏻🚩🌳🚩🌳🚩🌳🚩🌳🙏🏻 *🙏🏻सादर वन्दे🙏🏻* *🚩धर्मयात्रा🚩* *🌳श्री सिद्धवट मन्दिर उज्जैन🌳* उज्जैन के भैरवगढ़ के पूर्व में शिप्रा के तट पर प्राचीन सिद्धवट का स्थान है। इसे शक्तिभेद तीर्थ के नाम से जाना जाता है। हिंदू पुराणों में इस स्थान की महिमा का वर्णन किया गया है। हिंदू मान्यता अनुसार चार वट वृक्षों का महत्व अधिक है। अक्षयवट , वंशीवट , बौधवट और सिद्धवट के बारे में कहा जाता है कि इनकी प्राचीनता के बारे में कोई नहीं जानता। संसार में केवल चार ही पवित्र वट वृक्ष हैं। प्रयाग(इलाहाबाद) में *अक्षयवट* , मथुरा-वृंदावन में *वंशीवट* , गया में गयावट जिसे *बौधवट* भी कहा जाता है और यहाँ उज्जैन में पवित्र *सिद्धवट* हैं । कहते हैं कि इस वटवृक्ष को नष्ट करने के लिए , एक दुष्ट राजा ने इसे काटकर इस पर लोहे का तवा जड़वा दिया गया था , ताकि यह पुनः प्रस्फुटित न हो सके परन्तु कोई भी इसको पुनः फुटने से रोक नहीं पाया एवं यह फिर से प्रस्फुटित होकर हरा-भरा हो गया था। यह जिस घाट पर स्थित है वहाँ पर पित्रुओं के लिए श्राद्धकर्म किये जाते है। इस स्थान पर शिवलिंग भी स्थित है , जिसे पातालेश्वर के नाम से पुकारा जाता है। यहाँ पर एक शिला है जिसको प्रेत-शीला के नाम से जाना जाता है। यहाँ तीन तरह की सिद्धि प्राप्त होती है; संतति , संपत्ति और सद्‍गति। तीनों की प्राप्ति के लिए यहाँ पूजन किया जाता है। यह वटवृक्ष तीनों प्रकार की सिद्धि देता है इसीलिए इसे सिद्धवट कहा जाता है।यहाँ पर नागबलि , नारायण बलि - विधान का विशेष महत्व है। यहाँ पर कालसर्प शान्ति का भी विशेष महत्व है , इसीलिए कालसर्प दोष की भी यहाँ पूजा होती है। सम्राट विक्रमादित्य ने यहाँ तपस्या करके *अग्या बेताल* की सिद्धि की थी । इस मन्दिर में स्थित शिवलिंग (पतालिश्वर) का लिंग जलाधारी की सतह से निचे है ; कहा जाता है कि जैसे जैसे प्रथ्वी पर पाप बढ़ता जाताहै यह धंसता चला जा रहा है । मंदिर क्षिप्रा के तट पर ही है जहाँ पक्के घाट बने हुए हैं। यह उज्जैन रेलवे स्टेशन से करीब 7 कि.मी. दूर स्थित है । * 🙏🏻🚩🌳🚩🌳🚩🌳🚩🌳🙏🏻

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Girish Pandey May 3, 2021

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Radha rani May 3, 2021

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