Subhash Khurana
Subhash Khurana Feb 13, 2019

Ashtami

Ashtami

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Sangeeta Lal Feb 13, 2019
Jay shree ganesh ji shubh Shandhy ji aap aur aapke parivar hamesha khush rahe ji shubh mangalmay ho ji 🙏🙏be happy ji always ji

Prince Trivedi Apr 18, 2019

*🌞🎂हनुमान जन्मोत्सव 2019 - कथा पर्व तिथि व मुहूर्त 2019*🎂🎶🎷🎯 *🔔संकट मोचन, अंजनी सुत, पवन पुत्र हनुमान का जन्मोत्सव चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है| हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली की विधिवत पूजा पाठ करने से शत्रु पर विजय और मनोकामना की पूर्ति होती है|*   *🏆संकट मोचन हनुमान जी की जन्म कथा*🏆 *हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रूद्र अवतार माने जाते हैं| उनके जन्म के बारे में पुराणों में जो उल्लेख मिलता है उसके अनुसार अमरत्व की प्राप्ति के लिये जब देवताओं व असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया को उससे निकले अमृत को असुरों ने छीन लिया और आपस में ही लड़ने लगे। तब भगवान विष्णु मोहिनी के भेष अवतरित हुए। मोहनी रूप देख देवता व असुर तो क्या स्वयं भगवान शिवजी कामातुर हो गए। इस समय भगवान शिव ने जो वीर्य त्याग किया उसे पवनदेव ने वानरराज केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया| जिसके फलस्वरूप माता अंजना के गर्भ से केसरी नंदन मारुती संकट मोचन रामभक्त श्री हनुमान का जन्म हुआ|* *केसरी नंदन कैसे बने हनुमान*🌹🌹 *केसरी नंदन मारुती का नाम हनुमान कैसे पड़ा?  इससे जुड़ा एक जग प्रसिद्ध किस्सा है| यह घटना हनुमानजी की बाल्यावस्था में घटी| एक दिन मारुती अपनी निद्रा से जागे और उन्हें तीव्र भूख लगी|  उन्होंने पास के एक वृक्ष पर लाल पका फल देखा| जिसे खाने के लिए वे निकल पड़े| दरअसल मारुती जिसे लाल पका फल समझ रहे थे वे सूर्यदेव थे| वह अमावस्या का दिन था और राहू सूर्य को ग्रहण लगाने वाले थे। लेकिन वे सूर्य को ग्रहण लगा पाते उससे पहले ही हनुमान जी ने सूर्य को निगल लिया। राहु कुछ समझ नहीं पाए कि हो क्या रहा है? उन्होनें इंद्र से सहायता मांगी| इंद्रदेव के बार-बार आग्रह करने पर जब हनुमान जी ने सूर्यदेव को मुक्त नहीं किया तो,  इंद्र ने बज्र से उनके मुख पर प्रहार किया जिससे सूर्यदेव मुक्त हुए| वहीं इस प्रहर से मारुती मूर्छित होकर आकाश से धरती की ओर गिरते हैं| पवनदेव इस घटना से क्रोधित होकर मारुती को अपने साथ ले एक गुफा में अंतर्ध्यान हो जाते हैं*| *जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी पर जीवों में त्राहि- त्राहि मच उठती है| इस विनाश को रोकने के लिए सारे देवगण पवनदेव से आग्रह करते हैं कि वे अपने क्रोध को त्याग पृथ्वी पर प्राणवायु का प्रवाह करें| सभी देव मारुती को वरदान स्वरूप कई दिव्य शक्तियाँ प्रदान करते हैं और उन्हें हनुमान नाम से पूजनीय होने का वरदान देते हैं| उस दिन से मारुती का नाम हनुमान पड़ा| इस घटना की व्याख्या तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा में की गई है -*😊😊 *जुग सहस्र जोजन पर भानू।* *लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।* *हनुमान जयंती व्रत पूजा  विधि*📯🚩 *इस दिन व्रत रखने वालों को कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है| व्रत रखने वाले व्रत की पूर्व रात्रि से ब्रह्मचर्य का पालन करें| हो सके तो जमीन पर ही सोये इससे अधिक लाभ होगा| प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर प्रभू श्री राम, माता सीता व श्री हनुमान का स्मरण करें| तद्पश्चात नित्य क्रिया से निवृत होकर स्नान कर हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा करें| इसके बाद हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करें| फिर हनुमान जी की आरती उतारें*|   *इस दिन स्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का अखंड पाठ भी करवाया जाता है| प्रसाद के रुप में गुड़, भीगे या भुने चने एवं बेसन के लड्डू हनुमान जी को चढ़ाये जाते हैं| पूजा सामग्री में सिंदूर, केसर युक्त चंदन, धूप, अगरबती, दीपक के लिए शुद्ध घी या चमेली के तेल का उपयोग कर सकते हैं|पूजन में पुष्प के रूप में गैंदा, गुलाब, कनेर, सूरजमुखी आदि के लाल या पीले पुष्प अर्पित करें|🌿🎷🌹🙏 इस दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाने से मनोकामना की शीघ्र पूर्ति होती है|* *👇हनुमान जयंती पर्व तिथि व मुहूर्त 2019*👇 *💥हनुमान जयंती तिथि - शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019*💥 पूर्णिमा तिथि आरंभ - 19:26  (18 अप्रैल 2019) से पूर्णिमा तिथि समाप्त - 16:41 (19 अप्रैल 2019) तक *🌿JAI SHREE RAM🍁* *🙏🚩JAI SHREE MAHAKAL*🚩🙏 🙏हनुमान जन्मोत्सव -2019  - हनुमान जी की ख़ास पूजा🙏LINK-https://www.mymandir.com/p/jFt1U?ref=share 🙏हनुमानजयन्ती-2019-श्री हनुमान चालीसा + हनुमान जी के सिद्ध चमत्कारी मंत्र* Link👍👍https://www.mymandir.com/p/37jcLb?ref=share 🏆🌞हनुमान जयंती 2019 - संकटमोचन हनुमानाष्टक मंत्र जप, पाठ, पूजा एवं व्रत Link--👍https://www.mymandir.com/p/VHuwr?ref=share हनुमान जयन्ती 2019 - सम्पूर्ण बजरंग बाण प्राचीन पाण्डुलिपियों के आधार पर -Link 👍https://www.mymandir.com/p/bFketc?ref=share हनुमान जयंती -2019 एकदशमुख हनुमत कवच👍👍Link -https://www.mymandir.com/p/10fHKb?ref=share *📯हनुमान जयंती 2019 - हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् - श्री हनुमान जी के 1000 नाम*🙏https://www.mymandir.com/p/hrEOrc?ref=share 👍हनुमान जयंती 2019 -हनुमान वडवानल स्तोत्र पाठ करने की विधि*Link-https://www.mymandir.com/p/UQkoFb?ref=share *📯✈हनुमान जयंती - 2019 जीवन रक्षा के लिए करें  श्री पंचमुखी हनुमान कवच 🚀🚩* Link👇👇https://www.mymandir.com/p/0he1z?ref=share *🎯💥हनुमान जयंती 2019- विचित्रवीरहनुमन्मालामन्त्रःLINK👇👇👇https://www.mymandir.com/p/3I6Jc?ref=share हनुमान जयंती 2019 - बजरंग की कैंची चमत्कारी प्रयोग*🔫🔫🔫LINK👇👇👇https://www.mymandir.com/p/aN0yNb?ref=share हनुमान जयंती -2019 एकदशमुख हनुमत कवच*🍀🍂🏆LINK👇👇👇https://www.mymandir.com/p/kWeMjb?ref=share

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Prince Trivedi Apr 18, 2019

*🎯💥हनुमान जयंती 2019- विचित्रवीरहनुमन्मालामन्त्रः*🏆🏆  *हनुमान जयंती शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019 को  पूर्णिमा पर है। श्री हनुमानजी का जन्म इसी दिन हुआ, ऐसा माना जाता है। वैसे तो हनुमान मंत्रों का प्रयोग किसी भी शुभ मुहूर्त मंगलवार या शनिवार से किया जा सकता है, लेकिन इस मुहूर्त में किए जाने वाले पूजन-अर्चन कई गुना लाभ पहुंचाते हैं।*🍂🌹👇👇👇👇  समय  असमय  हम विभिन्न कारणों से शत्रुओं से या अनचाहे रूप से परेशान करने वालों से अथवा कत्यों में व्यवधान पैदा करने वालों से दुखी रहते हैं। इनसे सुरक्षित रहते हुए अपने कार्यों को सुचारु करने और जो जबरन  परेशान करते हैं उन्हें पीड़ित करने हेतु ये हनुमान जी के  विचित्रविर रूप का मंत्र अति उपयोगी है।  इसके प्रतिदिन मात्र ११ बार करने से मनुष्य शटरों से मुक्त रहता है और जो लोग परेशान करना चाहते हैं उन्हें हनुमान जी के कोप का भाजन बना पड़ता है। *🔫💣इस मन्त्र से आप अपने बड़े-से-बड़े शत्रु को धुल चटा सकते हैं ।सरसों के तेल का दीपक जलाकर इस मन्त्र का जप अधिक-से-अधिक करना होगा ।।*🎶🎷 *🌺श्रीगणेशाय नमः ।* 🌺ॐ अस्य श्रीविचित्रवीरहनुमन्मालामन्त्रस्य श्रीरामचन्द्रो भगवानृषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीविचित्रवीरहनुमान् देवता, ममाभीष्टसिद्ध्यर्थे मालामन्त्र जपे विनियोगः । 🌺अथ करन्यासः । 🌺ॐ ह्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः । 🌺ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः । 🌺ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः । 🌺ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः । 🌺ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः । 🌺ॐ ह्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः । 🌺अथ अङ्गन्यासः 🌺ॐ ह्रां हृदयाय नमः । 🌺ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा । 🌺ॐ ह्रूं शिखायै वषट् । 🌺ॐ ह्रैं कवचाय हुम् । 🌺ॐ ह्रौं नेत्रत्रयाय वौषट् । 🌺ॐ ह्रः अस्त्राय फट् । 🌺अथ ध्यानम् । 🌺वामे करे वैरवहं वहन्तं शैलं परे श्रृङ्खलमालयाढ्यम् । दधानमाध्मातसुवर्णवर्णं भजे ज्वलत्कुण्डलमाञ्जनेयम् ॥ 🌺ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते प्रलयकालानलप्रभाज्वलत्प्रतापवज्रदेहाय अञ्जनीगर्भसम्भूताय प्रकटविक्रमवीरदैत्य- दानवयक्षराक्षसग्रहबन्धनाय भूतग्रह- प्रेतग्रहपिशाचग्रहशाकिनीग्रहडाकिनीग्रह- काकिनीग्रहकामिनीग्रहब्रह्मग्रहब्रह्मराक्षसग्रह- चोरग्रहबन्धनाय एहि एहि आगच्छागच्छ- आवेशयावेशय मम हृदयं प्रवेशय प्रवेशय स्फुर स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर सत्यं कथय कथय व्याघ्रमुखं बन्धय बन्धय सर्पमुखं बन्धय बन्धय राजमुखं बन्धय बन्धय सभामुखं बन्धय बन्धय शत्रुमुखं बन्धय बन्धय सर्वमुखं बन्धय बन्धय लङ्काप्रासादभञ्जन सर्वजनं मे वशमानय वशमानय श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सर्वानाकर्षय आकर्षय शत्रून् मर्दय मर्दय मारय मारय चूर्णय चूर्णय खे खे खे श्रीरामचन्द्राज्ञया प्रज्ञया मम कार्यसिद्धि कुरु कुरु मम शत्रून् भस्मी कुरु कुरु स्वाहा ॥ 🌺ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् श्रीविचित्रवीरहनुमते मम सर्वशत्रून् भस्मी कुरु कुरु हन हन हुं फट् स्वाहा ॥ 🌺एकादशशतवारं जपित्वा सर्वशत्रून् वशमानयति नान्यथा इति ॥ *🙏🏻इति श्रीविचित्रवीरहनुमन्मालामन्त्रः सम्पूर्णम्*🙏 *🙏यथाशक्ति पूजन चंदन, रक्तपुष्प, सिन्दूर, बेसन के लड्डू का नैवेद्य, लाल वस्त्र, पान, यज्ञोपवीत इत्यादि चढ़ाकर किया जाता है।🙏* *🍁Jai Shree Ram🍁* *🌞Jai Shree Mahakal🌞* 🙏हनुमान जन्मोत्सव -2019  - हनुमान जी की ख़ास पूजा🙏LINK-https://www.mymandir.com/p/jFt1U?ref=share 🙏हनुमानजयन्ती-2019-श्री हनुमान चालीसा + हनुमान जी के सिद्ध चमत्कारी मंत्र* Link👍👍https://www.mymandir.com/p/37jcLb?ref=share 🏆🌞हनुमान जयंती 2019 - संकटमोचन हनुमानाष्टक मंत्र जप, पाठ, पूजा एवं व्रत Link--👍https://www.mymandir.com/p/VHuwr?ref=share हनुमान जयन्ती 2019 - सम्पूर्ण बजरंग बाण प्राचीन पाण्डुलिपियों के आधार पर -Link 👍https://www.mymandir.com/p/bFketc?ref=share हनुमान जयंती -2019 एकदशमुख हनुमत कवच👍👍Link -https://www.mymandir.com/p/10fHKb?ref=share *📯हनुमान जयंती 2019 - हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् - श्री हनुमान जी के 1000 नाम*🙏https://www.mymandir.com/p/hrEOrc?ref=share 👍हनुमान जयंती 2019 -हनुमान वडवानल स्तोत्र पाठ करने की विधि*Link-https://www.mymandir.com/p/UQkoFb?ref=share *📯✈हनुमान जयंती - 2019 जीवन रक्षा के लिए करें  श्री पंचमुखी हनुमान कवच 🚀🚩* Link👇👇https://www.mymandir.com/p/0he1z?ref=share

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जयश्री Apr 18, 2019

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Prince Trivedi Apr 17, 2019

*🙏हनुमानजयन्ती-2019-श्री हनुमान चालीसा + हनुमान जी के सिद्ध चमत्कारी मंत्र*🚩🚩📯🏆🌞 *जब कोई भक्त हनुमानजी को सच्चे मन से समर्प्रित होकर याद करता है तब आसानी से हनुमानजी उस पर प्रसन्न हो जाते है | वो राम के परम भक्त है और खुद वानर है अत: प्रभु राम की भक्ति और वानरों को गुड चन्ने और केले का प्रसाद खिलाना , अचूक उपाय है हनुमान जी को खुश करने का | इसके अलावा हनुमान जी को सिंदूर लगाना भी सबसे प्रिय पूजा के भागो में से एक है | हनुमान जी अपने माँ पिता के बड़े लाडले थे अत: माँ अंजना और पिता केसरी के जयकारे से भी हनुमान अति शिग्रह प्रसन्न होते है* |  *हनुमानजी को खुश करके उनकी विशेष कृपा पाने के कुछ नियम और कार्य* :- हर दिन भगवान श्री हनुमान की मूर्ति या तश्वीर या हो सके तो मंदिर में जा कर दर्शन करे | सुबह जगने के बाद और रात्रि में सोने से पहले हनुमान चालीसा या हनुमान मंत्र का जाप करे | दिन में कम से कम एक बार हनुमान चालीसा पूर्ण ध्यान और समझते हुए पढ़े | यदि हो सके तो पूर्ण रूप से मांसारी खाना और मादक पेय त्याग दे | हनुमान भक्त को श्री राम और माँ जानकी की भी पूजा करनी चाहिए | हो सके तो मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी का व्रत करना चाहिए | हर मंगलवार या शनिवार को हनुमान मंदिर में बालाजी की लाल मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाना चाहिए उसके बाद जनेऊ पहनानी चाहिए फिर उन्हें गुड चन्ना या केले का प्रसाद चढ़ा कर हो सके तो वानरों को यह प्रसाद खिलाना चाहिए | *श्री राम के परम भक्त हनुमान जी महाराज आठ चिरंजीवियो में से एक है जो अनंत काल से अपने भक्तो के आस पास ही रहते है और उनसे खुश होकर उनकी मनोकामनाओ को पूर्ण करते है | हनुमान जी जल्द ही प्रसन्न होने वाले देवताओ में से एक है और इसके लिए कुछ चमत्कारी मंत्र यहा बताये जा रहे है | इन मंत्रो की सही विधि जान कर आप इनका जाप करे जिससे की बालाजी प्रसन्न होकर आप पर कृपा बरसाए* | *हनुमान जी के सिद्ध चमत्कारी मंत्र* भय नाश करने के लिए हनुमान मंत्र : हं हनुमंते नम: प्रेत भुत बाधा दूर करने के लिए मंत्र : हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल:। अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।। द्वादशाक्षर हनुमान मंत्र : ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्। मनोकामना पूर्ण करवाने के लिए मानता : महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते। हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये।। शत्रुओ और रोगों पर विजय पाने के लिए : ऊँ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा संकट दूर करने का हनुमान मंत्र : ऊँ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा कर्ज से मुक्ति के लिए मंत्र : : ऊँ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा। श्री हनुमान चालीसा *हिन्दू देवी देवताओ के चालिसाओ में हनुमान चालीसा को सबसे विशेष स्थान दिया गया है | हनुमान भक्तो को इसके एक एक शब्द याद है | हनुमान चालीसा को लाल रंग से लिखा गया है क्योकि बालाजी को लाल रंग अति प्रिय है | हनुमान चालीसा बड़ी से बड़ी नकारात्मक उर्जा को नाश करने वाला है | रात्रि में इसके पाठ करके सोने से बुरे सपने नहीं आते | तुलसीदास ने इसकी रचना की है | इसे सुन्दरकाण्ड पाठ का सार भी बताया जाता है* | हनुमान चालीसा    श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥ ॥चौपाई॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥ राम दूत अतुलित बल धामा । अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥ महाबीर बिक्रम बजरङ्गी । कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥ कञ्चन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥ सङ्कर सुवन केसरीनन्दन । तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥ बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥७॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥ भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥ लाय सञ्जीवन लखन जियाये । श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥ रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥ सहस बदन तुह्मारो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना । राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥ तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना । लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥ जुग सहस्र जोजन पर भानु । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥ दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥ राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥ सब सुख लहै तुह्मारी सरना । तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥ आपन तेज सह्मारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥ भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥ नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥ सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥ सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥ और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥ चारों जुग परताप तुह्मारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥ साधु सन्त के तुम रखवारे । असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥ अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥ राम रसायन तुह्मरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥ तुह्मरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥ अन्त काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥ और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥ सङ्कट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥ जय जय जय हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥  जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥ ॥दोहा॥ पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥                                *JAI SHREE RAM* इस तरह इन बातो का ध्यान और पालन करते हुए आप बालाजी महाराज की विशेष कृपा के पात्र बन सकते है | समर्पण और धैर्य ही उचित कुंजी है हनुमान कृपा द्वार खोलने के लिए |              *JAI SHREE MAHAKAL*

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Prince Trivedi Apr 17, 2019

*📯हनुमान जयंती 2019 - हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् - श्री हनुमान जी के 1000 नाम*🙏 *चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को मनाया जाता है हनुमान जयन्ती का त्योहार। शास्त्रों के अनुसार हनुमान जयन्ती  कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी और चैत्र शुक्ल पूर्णिमा दोनों दिन मनाई जाता है। इस विषय में ग्रंथों में दोनों के ही उल्लेख मिलते हैं। चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के दिन मनाई जाने वाली हनुमान जयंती हनुमान जी का जन्मदिन का पर्व मानया जाता है।*  *हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए  तिल के तेल में नारंगी सिंदूर घोलकर चढ़ाएं। हनुमान जी को चमेली की खुश्बू या तेल और लाल फूल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा हनुमान जी की कृपा पाने के लिए 11 लडडू चढ़ाने चाहिए। हनुमान जी पर जल चढ़ाने के बाद पंचामृत चढ़ाना भी अच्छा होता है।*  *SHREE GANESHAY NAMAH* *JAI SHREE RAM* ॥ *हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् ॥* रुद्रयामलतः कैलासशिखरे रम्ये देवदेवं महेश्वरम् । ध्यानोपरतमासीनं नन्दिभृङ्गिगणैर्वृतम् ॥ १॥ ध्यानान्ते च प्रसन्नास्यमेकान्ते समुपस्थितम् । दृष्ट्वा शम्भुं तदा देवी पप्रच्छ कमलानना ॥ २॥ देव्युवाच शृणु देव प्रवक्ष्यामि संशयोऽस्ति महान्मम । रुद्रैकादशमाख्यातं पुराहं न च वेद्मि तम् ॥ ३॥ कथयस्व महाप्राज्ञ सर्वतो निर्णयं शुभम् । समाराधयतो लोके भुक्तिमुक्तिफलं भवेत् ॥ ४॥ मन्त्रं यन्त्रं तथा तन्निर्णयं च विधिपूजनम् । तत्सर्वं ब्रूहि मे नाथ कृतार्था च भवाम्यहम् ॥ ५॥ ईश्वर उवाच शृणु देवि प्रवक्ष्यामि गोप्यं सर्वागमे सदा । सर्वस्वं मम लोकानां नृणां स्वर्गापवर्गदम् ॥ ६॥ दश विष्णुर्द्वादशार्कास्ते चैकादश संस्मृताः । रुद्रः परमचण्डश्च लोकेऽस्मिन्भुक्तिमुक्तिदः ॥ ७॥ हनुमान्स महादेवः कालकालः सदाशिवः । इहैव भुक्तिकैवल्यमुक्तिदः सर्वकामदः ॥ ८॥ चिद्रूपी च जगद्रूपस्तथारूपविराडभूत् । रावणस्य वधार्थाय रामस्य च हिताय च ॥ ९॥ अञ्जनीगर्भसम्भूतो वायुरूपी सनातनः । यस्य स्मरणमात्रेण सर्वविघ्नं विनश्यति ॥ १०॥ मन्त्रं तस्य प्रवक्ष्यामि कामदं सुरदुलर्भम् । नित्यं परतरं लोके देवदैत्येषु दुलर्भम् ॥ ११॥ प्रणवं पूर्वमुद्धृत्य कामराजं ततो वदेत् । ॐ नमो भगवते हनुमतेऽपि ततो वदेत् ॥ १२॥ ततो वैश्वानरो मायामन्त्रराजमिमं प्रिये । एवं बहुतरा मन्त्राः सर्वशास्त्रेषु गोपिताः ॥ १३॥ ॐ क्लीं नमो भगवते हनुमते स्वाहा येन विज्ञातमात्रेण त्रैलोक्यं वशमानयेत् । वह्निं शीतङ्करोत्येव वातं च स्थिरतां नयेत् ॥ १४॥ विघ्नं च नाशयत्याशु दासवत्स्याज्जगत्त्रयम् । ध्यानं तस्य प्रवक्ष्यामि हनुर्येन प्रसीदति ॥ १५॥ ध्यानम् - प्रदीप्तं स्वर्णवर्णाभं बालार्कारुणलोचनम् । स्वर्णमेरुविशालाङ्गं शतसूर्यसमप्रभम् ॥ १६॥ रक्ताम्बरं धरासीनं सुग्रीवादियुतं तथा । गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसम् ॥ १७॥ पुच्छवन्तं कपीशं तं महारुद्रं भयङ्करम् । ज्ञानमुद्रालसद्बाहुं सर्वालङ्कारभूषितम् ॥ १८॥ ध्यानस्य धारणादेव विघ्नान्मुक्तः सदा नरः । त्रिषु लोकेषु विख्यातः सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ १९॥ नाम्नां तस्य सहस्रं तु कथयिष्यामि ते शृणु । यस्य स्मरणमात्रेण वादी मूको भवेद्ध्रुवम् ॥ २०॥ स्तम्भनं परसैन्यानां मारणाय च वैरिणाम् । दारयेच्छाकिनीः शीघ्रं डाकिनीभूतप्रेतकान् ॥ २१॥ हरणं रोगशत्रूणां कारणं सर्वकर्मणाम् । तारणं सर्वविघ्नानां मोहनं सर्वयोषिताम् ॥ २२॥ धारणं सर्वयोगानां वारणं शीघ्रमापदाम् ॥ २३॥ ॐ अस्य श्रीहनुमतः सहस्रनामस्तोत्रमन्त्रस्य सदाशिव ऋषिः । अनुष्टुप् छन्दः । श्रीहनुमान् देवता । ॐ क्लीं इति बीजम् । नम इति कीलकम् । स्वाहेति शक्तिः । समस्तपुरुषार्थसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । ॐओङ्कारनमोरूपमोंनमोरूपपालकः । ओङ्कारमयोङ्कारकृदोङ्कारात्मा सनातनः ॥ २४॥ ब्रह्मब्रह्ममयो ब्रह्मज्ञानी ब्रह्मस्वरूपवित् । कपीशः कपिनाथश्च कपिनाथसुपालकः ॥ २५॥ कपिनाथप्रियः कालः कपिनाथस्य घातकः । कपिनाथशोकहर्ता कपिभर्ता कपीश्वरः ॥ २६॥ कपिजीवनदाता च कपिमूर्तिः कपिर्भृतः । कालात्मा कालरूपी च कालकालस्तु कालभुक् ॥ २७॥ कालज्ञानी कालकर्ता कालहानिः कलानिधिः । कलानिधिप्रियः कर्ता कलानिधिसमप्रभः ॥ २८॥ कलापी च कलापाता कीशत्राता किशां पतिः । कमलापतिप्रियः काकस्वरघ्नः कुलपालकः ॥ २९॥ कुलभर्ता कुलत्राता कुलाचारपरायणः । काश्यपाह्लादकः काकध्वंसी कर्मकृतां पतिः ॥ ३०॥ कृष्णः कृष्णस्तुतिः कृष्णकृष्णरूपो महात्मवान् । कृष्णवेत्ता कृष्णभर्ता कपीशः क्रोधवान् कपिः ॥ ३१॥ कालरात्रिः कुबेरश्च कुबेरवनपालकः । कुबेरधनदाता च कौसल्यानन्दजीवनः ॥ ३२॥ कोसलेशप्रियः केतुः कपाली कामपालकः । कारुण्यः करुणारूपः करुणानिधिविग्रहः ॥ ३३॥ कारुण्यकर्ता दाता च कपिः साध्यः कृतान्तकः । कूर्मः कूर्मपतिः कूर्मभर्ता कूर्मस्य प्रेमवान् ॥ ३४॥ कुक्कुटः कुक्कुटाह्वानः कुञ्जरः कमलाननः । कुञ्जरः कलभः केकिनादजित्कल्पजीवनः ॥ ३५॥ कल्पान्तवासी कल्पान्तदाता कल्पविबोधकः । कलभः कलहस्तश्च कम्पः कम्पपतिस्तथा ॥ ३६॥ कर्मफलप्रदः कर्मा कमनीयः कलापवान् । कमलासनबन्धश्च-कम्पः-कमलासनपूजकः ॥ ३७॥ कमलासनसेवी च कमलासनमानितः । कमलासनप्रियः कम्बुः कम्बुकण्ठोऽपि कामधुक् ॥ ३८॥ किञ्जल्करूपी किञ्जल्कः किञ्जल्कावनिवासकः । खगनाथप्रियः खङ्गी खगनाथप्रहारकः ॥ ३९॥ खगनाथसुपूज्यश्च खगनाथप्रबोधकः । खगनाथवरेण्यश्च खरध्वंसी खरान्तकः ॥ ४०॥ खरारिप्रियबन्धुश्च खरारिजीवनः सदा । खङ्गहस्तः खङ्गधनः खङ्गहानी च खङ्गपः ॥ ४१॥ खञ्जरीटप्रियः खञ्जः खेचरात्मा खरारिजित् ॥ ४२॥ खञ्जरीटपतिः पूज्यः खञ्जरीटपचञ्चलः । खद्योतबन्धुः खद्योतः खद्योतनप्रियः सदा ॥ ४३॥ गरुत्मान् गरुडो गोप्यो गरुत्मद्दर्पहारकः । गर्विष्ठो गर्वहर्ता च गर्वहा गर्वनाशकः ॥ ४४॥ गर्वो गुणप्रियो गाणो गुणसेवी गुणान्वितः । गुणत्राता गुणरतो गुणवन्तप्रियो गुणी ॥ ४५॥ गणेशो गणपाती च गणरूपो गणप्रियः । गम्भीरोऽथ गुणाकारो गरिमा गरिमप्रदः ॥ ४६॥ गणरक्षो गणहरो गणदो गणसेवितः । गवांशो गवयत्राता गर्जितश्च गणाधिपः ॥ ४७॥ गन्धमादनहर्ता च गन्धमादनपूजकः । गन्धमादनसेवी च गन्धमादनरूपधृक् ॥ ४८॥ गुरुर्गुरुप्रियो गौरो गुरुसेव्यो गुरून्नतः । गुरुगीतापरो गीतो गीतविद्यागुरुर्गुरुः ॥ ४९॥ गीताप्रियो गीतरातो गीतज्ञो गीतवानपि । गायत्र्या जापको गोष्ठो गोष्ठदेवोऽथ गोष्ठपः ॥ ५०॥ गोष्पदीकृतवारीशो गोविन्दो गोपबन्धकः । गोवर्धनधरो गर्वो गोवर्धनप्रपूजकः ॥ ५१॥ गन्धर्वो गन्धर्वरतो गन्धर्वानन्दनन्दितः । गन्धो गदाधरो गुप्तो गदाढ्यो गुह्यकेश्वरः ॥ गिरिजापूजको गीश्च गीर्वाणो गोष्पतिस्तथा । गिरिर्गिरिप्रियो गर्भो गर्भपो गर्भवासकः ॥ ५३॥ गभस्तिग्रासको ग्रासो ग्रासदाता ग्रहेश्वरः । ग्रहो ग्रहेशानो ग्राहो ग्रहदोषविनाशनः ॥ ५४॥ ग्रहारूढो ग्रहपतिर्गर्हणो ग्रहणाधिपः । गोली गव्यो गवेशश्च गवाक्षमोक्षदायकः ॥ ५५॥ गणो गम्यो गणदाता गरुडध्वजवल्लभः । गेहो गेहप्रदो गम्यो गीतागानपरायणः ॥ ५६॥ गह्वरो गह्वरत्राणो गर्गो गर्गेश्वरप्रदः । गर्गप्रियो गर्गरतो गौतमो गौतमप्रदः ॥ ५७॥ गङ्गास्नायी गयानाथो गयापिण्डप्रदायकः । गौतमीतीर्थचारी च गौतमीतीर्थपूजकः ॥ ५८॥ गणेन्द्रोऽथ गणत्राता ग्रन्थदो ग्रन्थकारकः । घनाङ्गो घातको घोरो घोररूपी घनप्रदः ॥ ५९॥ घोरदंष्ट्रो घोरनखो घोरघाती घनेतरः । घोरराक्षसघाती च घोररूप्यघदर्पहा ॥ ६०॥ घर्मो घर्मप्रदश्चैव घर्मरूपी घनाघनः । घनध्वनिरतो घण्टावाद्यप्रियघृणाकरः ॥ ६१॥ घोघो घनस्वनो घूर्णो घूर्णितोऽपि घनालयः । ङकारो ङप्रदो ङान्तश्चन्द्रिकामोदमोदकः ॥ ६२॥ चन्द्ररूपश्चन्द्रवन्द्यश्चन्द्रात्मा चन्द्रपूजकः । चन्द्रप्रेमश्चन्द्रबिम्बश्चामरप्रियश्चञ्चलः ॥ ६३॥ चन्द्रवक्त्रश्चकोराक्षश्चन्द्रनेत्रश्चतुर्भुजः । चञ्चलात्मा चरश्चर्मी चलत्खञ्जनलोचनः ॥ ६४॥ चिद्रूपश्चित्रपानश्च चलच्चित्ताचितार्चितः । चिदानन्दश्चितश्चैत्रश्चन्द्रवंशस्य पालकः ॥ ६५॥ छत्रश्छत्रप्रदश्छत्री छत्ररूपी छिदाञ्छदः । छलहा छलदश्छिन्नश्छिन्नघाती क्षपाकरः ॥ ६६॥ छद्मरूपी छद्महारी छली छलतरुस्तथा । छायाकरद्युतिश्छन्दश्छन्दविद्याविनोदकः ॥ ६७॥ छिन्नारातिश्छिन्नपापश्छन्दवारणवाहकः । छन्दश्छ(क्ष)त्रहनश्छि(क्षि)प्रश्छ(क्ष)- वनश्छन्मदश्छ(क्ष)मी ॥ ६८॥ क्षमागारः क्षमाबन्धः क्षपापतिप्रपूजकः । छलघाती छिद्रहारी छिद्रान्वेषणपालकः ॥ ६९॥ जनो जनार्दनो जेता जितारिर्जितसङ्गरः । जितमृत्युर्जरातीतो जनार्दनप्रियो जयः ॥ ७०॥ जयदो जयकर्ता च जयपातो जयप्रियः । जितेन्द्रियो जितारातिर्जितेन्द्रियप्रियो जयी ॥ ७१॥ जगदानन्ददाता च जगदानन्दकारकः । जगद्वन्द्यो जगज्जीवो जगतामुपकारकः ॥ ७२॥ जगद्धाता जगद्धारी जगद्बीजो जगत्पिता । जगत्पतिप्रियो जिष्णुर्जिष्णुजिज्जिष्णुरक्षकः ॥ ७३॥ जिष्णुवन्द्यो जिष्णुपूज्यो जिष्णुमूर्तिविभूषितः । जिष्णुप्रियो जिष्णुरतो जिष्णुलोकाभिवासकः ॥ जयो जयप्रदो जायो जायको जयजाड्यहा । जयप्रियो जनानन्दो जनदो जनजीवनः ॥ ७५॥ जयानन्दो जपापुष्पवल्लभो जयपूजकः । जाड्यहर्ता जाड्यदाता जाड्यकर्ता जडप्रियः ॥ ७६॥ जगन्नेता जगन्नाथो जगदीशो जनेश्वरः । जगन्मङ्गलदो जीवो जगत्यवनपावनः ॥ ७७॥ जगत्त्राणो जगत्प्राणो जानकीपतिवत्सलः । जानकीपतिपूज्यश्च जानकीपतिसेवकः ॥ ७८॥ जानकीशोकहारी च जानकीदुःखभञ्जनः । यजुर्वेदो यजुर्वक्ता यजुःपाठप्रियो व्रती ॥ ७९॥ जिष्णुर्जिष्णुकृतो जिष्णुधाता जिष्णुविनाशनः । जिष्णुहा जिष्णुपाती तु जिष्णुराक्षसघातकः ॥ ८०॥ जातीनामग्रगण्यश्च जातीनां वरदायकः । झुँझुरो झूझुरो झूर्झनवरो झञ्झानिषेवितः ॥ ८१॥ झिल्लीरवस्वरो ञन्तो ञवणो ञनतो ञदः । टकारादिष्टकारान्ताष्टवर्णाष्टप्रपूजकः ॥ ८२॥ टिट्टिभष्टिट्टिभस्तष्टिष्टिट्टिभप्रियवत्सलः । ठकारवर्णनिलयष्ठकारवर्णवासितः ॥ ८३॥ ठकारवीरभरितष्ठकारप्रियदर्शकः । डाकिनीनिरतो डङ्को डङ्किनीप्राणहारकः ॥ ८४॥ डाकिनीवरदाता च डाकिनीभयनाशनः । डिण्डिमध्वनिकर्ता च डिम्भो डिम्भातरेतरः ॥ ८५॥ डक्काढक्कानवो ढक्कावाद्यष्ठक्कामहोत्सवः । णान्त्यो णान्तो णवर्णश्च णसेव्यो णप्रपूजकः ॥ ८६॥ तन्त्री तन्त्रप्रियस्तल्पस्तन्त्रजित्तन्त्रवाहकः । तन्त्रपूज्यस्तन्त्ररतस्तन्त्रविद्याविशारदः ॥ ८७॥ तन्त्रयन्त्रजयी तन्त्रधारकस्तन्त्रवाहकः । तन्त्रवेत्ता तन्त्रकर्ता तन्त्रयन्त्रवरप्रदः ॥ ८८॥ तन्त्रदस्तन्त्रदाता च तन्त्रपस्तन्त्रदायकः । तत्त्वदाता च तत्त्वज्ञस्तत्त्वस्तत्त्वप्रकाशकः ॥ ८९॥ तन्द्रा च तपनस्तल्पतलातलनिवासकः । तपस्तपःप्रियस्तापत्रयतापी तपःपतिः ॥ ९०॥ तपस्वी च तपोज्ञाता तपतामुपकारकः । तपस्तपोत्रपस्तापी तापदस्तापहारकः ॥ ९१॥ तपःसिद्धिस्तपोऋद्धिस्तपोनिधिस्तपःप्रभुः । तीर्थस्तीर्थरतस्तीव्रस्तीर्थवासी तु तीर्थदः ॥ ९२॥ तीर्थपस्तीर्थकृत्तीर्थस्वामी तीर्थविरोधकः । तीर्थसेवी तीर्थपतिस्तीर्थव्रतपरायणः ॥ ९३॥ त्रिदोषहा त्रिनेत्रश्च त्रिनेत्रप्रियबालकः । त्रिनेत्रप्रियदासश्च त्रिनेत्रप्रियपूजकः ॥ ९४॥ त्रिविक्रमस्त्रिपादूर्ध्वस्तरणिस्तारणिस्तमः । तमोरूपी तमोध्वंसी तमस्तिमिरघातकः ॥ ९५॥ तमोधृक्तमसस्तप्ततारणिस्तमसोऽन्तकः । तमोहृत्तमकृत्ताम्रस्ताम्रौषधिगुणप्रदः ॥ तैजसस्तेजसां मूर्तिस्तेजसः प्रतिपालकः । तरुणस्तर्कविज्ञाता तर्कशास्त्रविशारदः ॥ ९७॥ तिमिङ्गिलस्तत्त्वकर्ता तत्त्वदाता व तत्त्ववित् । तत्त्वदर्शी तत्त्वगामी तत्त्वभुक्तत्त्ववाहनः ॥ ९८॥ त्रिदिवस्त्रिदिवेशश्च त्रिकालश्च तमिस्रहा । स्थाणुः स्थाणुप्रियः स्थाणुः सर्वतोऽपि च वासकः ॥ ९९॥ दयासिन्धुर्दयारूपो दयानिधिर्दयापरः । दयामूर्तिर्दयादाता दयादानपरायणः ॥ १००॥ देवेशो देवदो देवो देवराजाधिपालकः । दीनबन्धुर्दीनदाता दीनोद्धरणदिव्यदृक् ॥ १०१॥ दिव्यदेहो दिव्यरूपो दिव्यासननिवासकः । दीर्घकेशो दीर्घपुच्छो दीर्घसूत्रोऽपि दीर्घभुक् ॥ १०२॥ दीर्घदर्शी दूरदर्शी दीर्घबाहुस्तु दीर्घपः । दानवारिर्दरिद्रारिर्दैत्यारिर्दस्युभञ्जनः ॥ १०३॥ दंष्ट्री दण्डी दण्डधरो दण्डपो दण्डदायकः । दामोदरप्रियो दत्तात्रेयपूजनतत्परः ॥ १०४॥ दर्वीदलहुतप्रीतो दद्रुरोगविनाशकः । धर्मो धर्मी धर्मचारी धर्मशास्त्रपरायणः ॥ १०५॥ धर्मात्मा धर्मनेता च धर्मदृग्धर्मधारकः । धर्मध्वजो धर्ममूर्तिर्धर्मराजस्य त्रासकः ॥ १०६॥ धाता ध्येयो धनो धन्यो धनदो धनपो धनी । धनदत्राणकर्ता च धनपप्रतिपालकः ॥ १०७॥ धरणीधरप्रियो धन्वी धनवद्धनधारकः । धन्वीशवत्सलो धीरो धातृमोदप्रदायकः ॥ १०८॥ धात्रैश्वर्यप्रदाता च धात्रीशप्रतिपूजकः । धात्रात्मा च धरानाथो धरानाथप्रबोधकः ॥ १०९॥ धर्मिष्ठो धर्मकेतुश्च धवलो धवलप्रियः । धवलाचलवासी च धेनुदो धेनुपो धनी ॥ ११०॥ ध्वनिरूपो ध्वनिप्राणो ध्वनिधर्मप्रबोधकः । धर्माध्यक्षो ध्वजो धूम्रो धातुरोधिविरोधकः ॥ १११॥ नारायणो नरो नेता नदीशो नरवानरः । नन्दीसङ्क्रमणो नाट्यो नाट्यवेत्ता नटप्रियः ॥ ११२॥ नारायणात्मको नन्दी नन्दिशृङ्गिगणाधिपः । नन्दिकेश्वरवर्मा च नन्दिकेश्वरपूजकः ॥ ११३॥ नरसिंहो नटो नीपो नखयुद्धविशारदः । नखायुधो नलो नीलो नलनीलप्रमोदकः ॥ ११४॥ नवद्वारपुराधारो नवद्वारपुरातनः । नरनारयणस्तुत्यो नखनाथो नगेश्वरः ॥ ११५॥ नखदंष्ट्रायुधो नित्यो निराकारो निरञ्जनः । निष्कलङ्को निरवद्यो निर्मलो निर्ममो नगः ॥ ११६॥ नगरग्रामपालश्च निरन्तो नगराधिपः । नागकन्याभयध्वंसी नागारिप्रियनागरः ॥ ११७॥ पीताम्बरः पद्मनाभः पुण्डरीकाक्षपावनः । पद्माक्षः पद्मवक्त्रश्च पद्मासनप्रपूजकः ॥ ११८॥ पद्ममाली पद्मपरः पद्मपूजनतत्परः । पद्मपाणिः पद्मपादः पुण्डरीकाक्षसेवनः ॥ ११९॥ पावनः पवनात्मा च पवनात्मजः पापहा । परः परतरः पद्मः परमः परमात्मकः ॥ १२०॥ पीताम्बरः प्रियः प्रेम प्रेमदः प्रेमपालकः । प्रौढः प्रौढपरः प्रेतदोषहा प्रेतनाशकः ॥ १२१॥ प्रभञ्जनान्वयः पञ्च पञ्चाक्षरमनुप्रियः । पन्नगारिः प्रतापी च प्रपन्नः परदोषहा ॥ १२२॥ पराभिचारशमनः परसैन्यविनाशकः । प्रतिवादिमुखस्तम्भः पुराधारः पुरारिनुत् ॥ १२३॥ पराजितः परम्ब्रह्म परात्परपरात्परः । पातालगः पुराणश्च पुरातनः प्लवङ्गमः ॥ १२४॥ पुराणपुरुषः पूज्यः पुरुषार्थप्रपूरकः । प्लवगेशः पलाशारिः पृथुकः पृथिवीपतिः ॥ १२५॥ पुण्यशीलः पुण्यराशिः पुण्यात्मा पुण्यपालकः । पुण्यकीर्तिः पुण्यगीतिः प्राणदः प्राणपोषकः ॥ १२६॥ प्रवीणश्च प्रसन्नश्च पार्थध्वजनिवासकः । पिङ्गकेशः पिङ्गरोमा प्रणवः पिङ्गलप्रणः ॥ १२७॥ पराशरः पापहर्ता पिप्पलाश्रयसिद्धिदः । पुण्यश्लोकः पुरातीतः प्रथमः पुरुषः पुमान् ॥ १२८॥ पुराधारश्च प्रत्यक्षः परमेष्ठी पितामहः । फुल्लारविन्दवदनः फुल्लोत्कमललोचनः ॥ १२९॥ फूत्कारः फूत्करः फूश्च फूदमन्त्रपरायणः । स्फटिकाद्रिनिवासी च फुल्लेन्दीवरलोचनः ॥ १३०॥ वायुरूपी वायुसुतो वाय्वात्मा वामनाशकः । वनो वनचरो बालो बालत्राता तु बालकः ॥ १३१॥ विश्वनाथश्च विश्वं च विश्वात्मा विश्वपालकः । विश्वधाता विश्वकर्ता विश्ववेत्ता विशाम्पतिः ॥ १३२॥ विमलो विमलज्ञानो विमलानन्ददायकः । विमलोत्पलवक्त्रश्च विमलात्मा विलासकृत् ॥ १३३॥ बिन्दुमाधवपूज्यश्च बिन्दुमाधवसेवकः । बीजोऽथ वीर्यदो बीजहारी बीजप्रदो विभुः ॥ १३४॥ विजयो बीजकर्ता च विभूतिर्भूतिदायकः । विश्ववन्द्यो विश्वगम्यो विश्वहर्ता विराट्तनुः ॥ १३५॥ बुलकारहतारातिर्वसुदेवो वनप्रदः । ब्रह्मपुच्छो ब्रह्मपरो वानरो वानरेश्वरः ॥ १३६॥ बलिबन्धनकृद्विश्वतेजा विश्वप्रतिष्ठितः । विभोक्ता च वायुदेवो वीरवीरो वसुन्धरः ॥ १३७॥ वनमाली वनध्वंसी वारुणो वैष्णवो बली । विभीषणप्रियो विष्णुसेवी वायुगविर्विदुः ॥ १३८॥ विपद्मो वायुवंश्यश्च वेदवेदाङ्गपारगः । बृहत्तनुर्बृहत्पादो बृहत्कायो बृहद्यशाः ॥ १३९॥ बृहन्नासो बृहद्बाहुर्बृहन्मूर्तिर्बृहत्स्तुतिः । बृहद्धनुर्बृहज्जङ्घो बृहत्कायो बृहत्करः ॥ १४०॥ बृहद्रतिर्बृहत्पुच्छो बृहल्लोकफलप्रदः । बृहत्सेव्यो बृहच्छक्तिर्बृहद्विद्याविशारदः ॥ १४१॥ बृहल्लोकरतो विद्या विद्यादाता विदिक्पतिः । विग्रहो विग्रहरतो व्याधिनाशी च व्याधिदः ॥ १४२॥ विशिष्टो बलदाता च विघ्ननाशो विनायकः । वराहो वसुधानाथो भगवान् भवभञ्जनः ॥ १४३॥ भाग्यदो भयकर्ता च भागो भृगुपतिप्रियः । भव्यो भक्तो भरद्वाजो भयाङ्घ्रिर्भयनाशनः ॥ १४४॥ माधवो मधुरानाथो मेघनादो महामुनिः । मायापतिर्मनस्वी च मायातीतो मनोत्सुकः ॥ १४५॥ मैनाकवन्दितामोदो मनोवेगी महेश्वरः । मायानिर्जितरक्षाश्च मायानिर्जितविष्टपः ॥ १४६॥ मायाश्रयश्च निलयो मायाविध्वंसको मयः । मनोयमपरो याम्यो यमदुःखनिवारणः ॥ १४७॥ यमुनातीरवासी च यमुनातीर्थचारणः । रामो रामप्रियो रम्यो राघवो रघुनन्दनः ॥ १४८॥ रामप्रपूजको रुद्रो रुद्रसेवी रमापतिः । रावणारी रमानाथवत्सलो रघुपुङ्गवः ॥ १४९॥ रक्षोघ्नो रामदूतश्च रामेष्टो राक्षसान्तकः । रामभक्तो रामरूपो राजराजो रणोत्सुकः ॥ १५०॥ लङ्काविध्वंसको लङ्कापतिघाती लताप्रियः । लक्ष्मीनाथप्रियो लक्ष्मीनारायणात्मपालकः ॥ १५१॥ प्लवगाब्धिहेलकश्च लङ्केशगृहभञ्जनः । ब्रह्मस्वरूपी ब्रह्मात्मा ब्रह्मज्ञो ब्रह्मपालकः ॥ १५२॥ ब्रह्मवादी च विक्षेत्रं विश्वबीजं च विश्वदृक् । विश्वम्भरो विश्वमूर्तिर्विश्वाकारोऽथ विश्वधृक् ॥ १५३॥ विश्वात्मा विश्वसेव्योऽथ विश्वो विश्वेश्वरो विभुः । शुक्लः शुक्रप्रदः शुक्रः शुक्रात्मा च शुभप्रदः ॥ १५४॥ शर्वरीपतिशूरश्च शूरश्चाथ श्रुतिश्रवाः । शाकम्भरीशक्तिधरः शत्रुघ्नः शरणप्रदः ॥ १५५॥ शङ्करः शान्तिदः शान्तः शिवः शूली शिवार्चितः । श्रीरामरूपः श्रीवासः श्रीपदः श्रीकरः शुचिः ॥ १५६॥ श्रीशः श्रीदः श्रीकरश्च श्रीकान्तप्रियः श्रीनिधिः । षोडशस्वरसंयुक्तः षोडशात्मा प्रियङ्करः ॥ १५७॥ षडङ्गस्तोत्रनिरतः षडाननप्रपूजकः । षट्शास्त्रवेत्ता षड्बाहुः षट्स्वरूपः षडूर्मिपः ॥ १५८॥ सनातनः सत्यरूपः सत्यलोकप्रबोधकः । सत्यात्मा सत्यदाता च सत्यव्रतपरायणः ॥ १५९॥ सौम्यः सौम्यप्रदः सौम्यदृक्सौम्यः सौम्यपालकः । सुग्रीवादियुतः सर्वसंसारभयनाशनः ॥ १६०॥ सूत्रात्मा सूक्ष्मसन्ध्यश्च स्थूलः सर्वगतिः पुमान् । सुरभिः सागरः सेतुः सत्यः सत्यपराक्रमः ॥ १६१॥ सत्यगर्भः सत्यसेतुः सिद्धिस्तु सत्यगोचरः । सत्यवादी सुकर्मा च सदानन्दैक ईश्वरः ॥ १६२॥ सिद्धिः साध्यः सुसिद्धश्च सङ्कल्पः सिद्धिहेतुकः । सप्तपातालचरणः सप्तर्षिगणवन्दितः ॥ १६३॥ सप्ताब्धिलङ्घनो वीरः सप्तद्वीपोरुमण्डलः । सप्ताङ्गराज्यसुखदः सप्तमातृनिषेवितः ॥ १६४॥ सप्तच्छन्दोनिधिः सप्त सप्तपातालसंश्रयः । सङ्कर्षणः सहस्रास्यः सहस्राक्षः सहस्रपात् ॥ १६५॥ हनुमान् हर्षदाता च हरो हरिहरीश्वरः । क्षुद्रराक्षसघाती च क्षुद्धतक्षान्तिदायकः ॥ १६६॥ अनादीशो ह्यनन्तश्च आनन्दोऽध्यात्मबोधकः । इन्द्र ईशोत्तमश्चैव उन्मत्तजन ऋद्धिदः ॥ १६७॥ ऋवर्णो ऌलुपदोपेत ऐश्वर्यं औषधीप्रियः । औषधश्चांशुमांश्चैव अकारः सर्वकारणः ॥ १६८॥ इत्येतद्रामदूतस्य नाम्नां चैव सहस्रकम् । एककालं द्विकालं वा त्रिकालं श्रद्धयान्वितः ॥ १६९॥ पठनात्पाठनाद्वापि सर्वा सिद्धिर्भवेत्प्रिये । मोक्षार्थी लभते मोक्षं कामार्थी काममाप्नुयात् ॥ १७०॥ विद्यार्थी लभते विद्यां वेदव्याकरणादिकम् । इच्छाकामांस्तु कामार्थी धर्मार्थी धर्ममक्षयम् ॥ १७१॥ पुत्रार्थी लभते पुत्रं वरायुस्सहितं पुमान् । क्षेत्रं च बहुसस्यं स्याद्गावश्च बहुदुग्धदाः ॥ १७२॥ दुःस्वप्नं च नृभिर्दृष्टं सुस्वप्नमुपजायते । दुःखौघो नश्यते तस्य सम्पत्तिर्वर्द्धते चिरम् ॥ १७३॥ चतुर्विधं वस्तु तस्य भवत्येव न संशयः । अश्वत्थमूले जपतां नास्ति वैरिकृतं भयम् ॥ १७४॥ त्रिकालं पठनात्तस्य सिद्धिः स्यात्करसंस्थिता । अर्धरात्रे रवौ धृत्वा कण्ठदेशे नरः शुचिः ॥ १७५॥ दशावर्तं पठेन्मर्त्यः सर्वान्कामानवाप्नुयात् । भौमे निशान्ते न्यग्रोधमूले स्थित्वा विचक्षणः ॥ १७६॥ दशावर्तं पठेन्मर्त्यः सार्वभौमः प्रजायते । अर्कमूलेऽर्कवारे तु यो मध्याह्ने शुचिर्जपेत् ॥ १७७॥ चिरायुः स सुखी पुत्री विजयी जायते क्षणात् । ब्राह्मे मुहूर्ते चोत्थाय प्रत्यहं च पठेन्नरः ॥ १७८॥ यं यं कामयते कामं लभते तं न संशयः । सङ्ग्रामे सन्निविष्टानां वैरिविद्रावणं परम् ॥ १७९॥ डाकिनीभूतप्रेतेषु ग्रहपीडाहरं तथा । ज्वरापस्मारशमनं यक्ष्मप्लीहादिवारणम् ॥ १८०॥ सर्वसौख्यप्रदं स्तोत्रं सर्वसिद्धिप्रदं तथा । सर्वान्कामानवाप्नोति वायुपुत्रप्रसादतः ॥ १८१॥ *इति श्रीरुद्रयामलतः श्रीहनुमत्सहस्रनामस्तोत्रं सम्पूर्णम्* *🙏कहा जाता है कि हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए भगवान राम की भक्ति भी करनी चाहिए। । हनुमान जी ने अपने जीवन को श्रीराम को समर्प्रीत किया है। ये अमर और चिरंजीवी है। इनकी भक्ति करने से मनुष्य को शक्ति और समर्पण प्राप्त होता है। इस दिन हनुमान जी सभी भक्तों की मुरादें पूरी करते हैं।* *JAI SHREE RAM* *JAI SHREE MAHAKAL* 🙏हनुमानजयन्ती-2019-श्री हनुमान चालीसा + हनुमान जी के सिद्ध चमत्कारी मंत्र* Link👍👍https://www.mymandir.com/p/37jcLb?ref=share 🏆🌞हनुमान जयंती 2019 - संकटमोचन हनुमानाष्टक मंत्र जप, पाठ, पूजा एवं व्रत Link--👍https://www.mymandir.com/p/VHuwr?ref=share हनुमान जयन्ती 2019 - सम्पूर्ण बजरंग बाण प्राचीन पाण्डुलिपियों के आधार पर -Link 👍https://www.mymandir.com/p/bFketc?ref=share हनुमान जयंती -2019 एकदशमुख हनुमत कवच👍👍Link -https://www.mymandir.com/p/10fHKb?ref=share

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Prince Trivedi Apr 17, 2019

🌺🙏 *महर्षि पाराशर पंचांग* 🙏🌺 🙏🌺🙏 *अथ पंचांगम्* 🙏🌺🙏 *********ll जय श्री राधे ll********* 🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺 *दिनाँक -: 17/04/2019,बुधवार* त्रयोदशी, शुक्ल पक्ष चैत्र """"""""""""""""""""""""""""(समाप्ति काल) तिथि----------त्रयोदशी22:24:01 तक पक्ष-----------------------------शुक्ल नक्षत्र---उत्तराफाल्गुनी23:35:16 योग-----------------घ्रुव18:30:25 करण-----------कौलव11:55:00 करण-------------तैतुल22:24:01 वार---------------------------बुधवार माह-------------------------------चैत्र चन्द्र राशि----------सिंह07:16:33 चन्द्र राशि----------------------कन्या सूर्य राशि-------------------------मेष रितु-----------------------------वसंत आयन---------------------उत्तरायण संवत्सर----------------------विकारी संवत्सर (उत्तर)-----------परिधावी विक्रम संवत-----------------2076 विक्रम संवत (कर्तक)-------2075 शाका संवत------------------1941 वृन्दावन सूर्योदय-----------------05:54:28 सूर्यास्त------------------18:43:35 दिन काल---------------12:49:06 रात्री काल--------------11:09:53 चंद्रोदय------------------16:35:45 चंद्रास्त------------------29:14:31 लग्न----मेष2°36' , 2°36' सूर्य नक्षत्र--------------------अश्विनी चन्द्र नक्षत्र-----------उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र पाया---------------------रजत *🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩* टे----उत्तराफाल्गुनी 07:16:33 टो----उत्तराफाल्गुनी 12:42:45 पा----उत्तराफाल्गुनी 18:08:57 पी----उत्तराफाल्गुनी 23:35:16 पू----हस्त 29:01:53 *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================= सूर्य=मीन 02 ° 32 ' अश्विनी, 1 चु चन्द्र =सिंह 28°13' उo फाo' 1 टे बुध=मीन 05 °30' उ oभा o ' 1 दू शुक्र=कुम्भ 01° 26, पू oभा o , 4 दी मंगल=वृषभ 16°59 ' रोहिणी' 3 वी गुरु=धनु 00 ° 17 ' मूल , 1 ये शनि=धनु 26°17' पू o षा o ' 4 ढा राहू=मिथुन 27°54 ' पुनर्वसु , 3 हा केतु=धनु 27 ° 54' उo षाo, 1 भे *🚩💮🚩शुभा$शुभ मुहूर्त🚩💮🚩* राहू काल 12:19 - 13:55अशुभ यम घंटा 07:31 - 09:07अशुभ गुली काल 10:43 - 12:19अशुभ अभिजित 11:53 -12:45अशुभ दूर मुहूर्त 11:53 - 12:45अशुभ 💮चोघडिया, दिन लाभ 05:54 - 07:31शुभ अमृत 07:31 - 09:07शुभ काल 09:07 - 10:43अशुभ शुभ 10:43 - 12:19शुभ रोग 12:19 - 13:55अशुभ उद्वेग 13:55 - 15:31अशुभ चाल 15:31 - 17:07शुभ लाभ 17:07 - 18:44शुभ 🚩चोघडिया, रात उद्वेग 18:44 - 20:07अशुभ शुभ 20:07 - 21:31शुभ अमृत 21:31 - 22:55शुभ चाल 22:55 - 24:19*शुभ रोग 24:19* - 25:42*अशुभ काल 25:42* - 27:06*अशुभ लाभ 27:06* - 28:30*शुभ उद्वेग 28:30* - 29:53*अशुभ 💮होरा, दिन बुध 05:54 - 06:59 चन्द्र 06:59 - 08:03 शनि 08:03 - 09:07 बृहस्पति 09:07 - 10:11 मंगल 10:11 - 11:15 सूर्य 11:15 - 12:19 शुक्र 12:19 - 13:23 बुध 13:23 - 14:27 चन्द्र 14:27 - 15:31 शनि 15:31 - 16:35 बृहस्पति 16:35 - 17:39 मंगल 17:39 - 18:44 🚩होरा, रात सूर्य 18:44 - 19:39 शुक्र 19:39 - 20:35 बुध 20:35 - 21:31 चन्द्र 21:31 - 22:27 शनि 22:27 - 23:23 बृहस्पति 23:23 - 24:19 मंगल 24:19* - 25:14 सूर्य 25:14* - 26:10 शुक्र 26:10* - 27:06 बुध 27:06* - 28:02 चन्द्र 28:02* - 28:58 शनि 28:58* - 29:53 *नोट*-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥ रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥ अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । *💮दिशा शूल ज्ञान----------------उत्तर* परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो पान अथवा पिस्ता खाके यात्रा कर सकते है l इस मंत्र का उच्चारण करें-: *शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l* *भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll* *🚩 अग्नि वास ज्ञान -:* *यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,* *चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।* *दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,* *नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्* *नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।* 13 + 4 + 1= 18 ÷ 4 = 2 शेष आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l *💮 शिव वास एवं फल -:* 13 + 13 + 5 = 31 ÷ 7 = 3 शेष वृषभारूढ़ = शुभ कारक *🚩भद्रा वास एवं फल -:* *स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।* *मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।* स्वर्गलोक = शुभ कारक *💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮* * प्रदोष व्रत (शिव पूजन ) बुध प्रदोष व्रत पूजा विधि एवं कथा. Budh Pradosh Vrat Vidhi and Katha in Hindi. LINK 👇👇👇 https://www.mymandir.com/p/cZabeb?ref=share * श्री महावीर जयन्ती जैन महावीर जयंती, पढ़ें Link 👇👇 https://www.mymandir.com/p/bo9dJb?ref=share * सर्वार्थ सिद्धि योग 23:35 से *💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮* वापीकूपतडागानामारामसुरवेश्यनाम् । उच्छेदने निराशंकः स विप्रो म्लेच्छ उच्यते ।। ।।चा o नी o।। एक ब्राह्मण जो तालाब को, कुए को, टाके को, बगीचे को और मंदिर को नष्ट करता है, वह म्लेच्छ है. *🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩* गीता -: संख्यायोग अo-02 एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति ।, स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति ॥, हे अर्जुन! यह ब्रह्म को प्राप्त हुए पुरुष की स्थिति है, इसको प्राप्त होकर योगी कभी मोहित नहीं होता और अंतकाल में भी इस ब्राह्मी स्थिति में स्थित होकर ब्रह्मानन्द को प्राप्त हो जाता है॥,72॥, *💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮* देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।। विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।। 🐏मेष पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बन सकता है। रचनात्मक कार्यक्रम सफल रहेंगे। पठन, पाठन व लेखन आदि के कार्य में ध्यान लगेगा। कारोबार अच्छा चलेगा। व्यस्तता के चलते थकान हो सकती है। नए विचार मन में आएंगे। नौकरी में मातहतों का सहयोग मिलेगा। 🐂वृष वाणी पर नियंत्रण रखें। दूसरों से अधिक अपेक्षा न करें तथा दूसरों के कार्य में दखल न दें। भावना में बहकर कोई निर्णय न लें। दौड़धूप रहेगी। कोई बुरी सूचना प्राप्त हो सकती है। शत्रु सक्रिय रहेंगे। धन प्राप्ति सुगम होगी। 👫मिथुन मित्रों तथा रिश्तेदारों की सहायता कर पाएंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। नए कार्य मिल सकेंगे। भाग्य का साथ रहेगा। नौकरी में कोई नया कार्य कर पाएंगे। अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। व्यय होगा। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। 🦀कर्क उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। छोटी-मोटी यात्रा हो सकती है। कोई बड़ा काम करने की इच्छा जागृत होगी। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। कारोबार अच्छा चलेगा। नौकरी में चैन रहेगा। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। प्रमाद न करें। 🐅सिंह किसी लंबी यात्रा का कार्यक्रम बन सकता है। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। भेंट व उपहार की प्राप्ति की संभावना है। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड लाभदायक रहेगा। किसी बड़ी समस्या से छुटकारा मिल सकता है। धनार्जन होगा। 🙎‍♀कन्या स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। किसी अपने ही व्यक्ति का व्यवहार प्रतिकूल हो सकता है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। अपेक्षित कार्यों में विलंब हो सकता है। ⚖तुला रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बन सकता है। मनपसंद भोजन का आनंद प्राप्त होगा। नए विचार मन में आएंगे। संगीत व चित्रकारी आदि में रुचि जागृत होगी। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। शेयर मार्केट से लाभ होगा। 🦂वृश्चिक क्रोध व उत्तेजना से कार्य बिगड़ सकते हैं। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। कोई बुरी खबर मिल सकती है। मेहनत अधिक होगी। आराम व मनोरंजन का समय नहीं मिलेगा। शत्रु सक्रिय रहेंगे। आवश्यक वस्तु समय पर नहीं मिलेगी। चिंता रहेगी। 🏹धनु कोर्ट व कचहरी के कार्य में अनुकूलता रहेगी। तंत्र-मंत्र में रुचि जागृत होगी। समय की अनुकूलता का लाभ लें। भरपूर प्रयास करें। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। दूसरों से अपेक्षा न करें। पार्टनरों से मतभेद दूर होंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। 🐊मकर जल्दबाजी से बचें। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। किसी भी अपरिचत पर अंधविश्वास न करें। भावना में बहकर कोई निर्णय न लें। आय में वृद्धि होगी। 🍯कुंभ कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति लाभप्रद बनेगी। किसी प्रभावशाली व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त हो सकता है। नौकरी में उच्चाधिकारी की प्रसन्नता प्राप्त होगी। पारिवारिक व्यय बढ़ सकता है। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड लाभदायक रहेंगे। 🐟मीन स्थायी संपत्ति के कार्य आश्चर्यजनक बड़ा लाभ दे सकते हैं। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। व्यग्रता पर नियंत्रण रखें। जल्दबाजी न करें। आय में वृद्धि होगी। जीवन सुखमय व्यतीत होगा। 🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏 🌺🌺🌺🌺🙏🌺🌺🌺🌺

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Prince Trivedi Apr 16, 2019

*🙏द्वादशी व्रत का माहात्म्य*🙏 *🍁 महाभारत आश्वमेधिक पर्व के वैष्णव धर्म पर्व के अंतर्गत अध्याय 92 में द्वादशी व्रत के माहात्म्य का वर्णन हुआ है।🔔* *कृष्ण द्वारा द्वादशी व्रत का माहात्म्य युधिष्ठिर ने कहा- भगवन! सब प्रकार के उपवासों में जो सबसे श्रेष्‍ठ, महान फल देने वाला और कल्‍याण का सर्वोत्तम साधन हो, उसका वर्णन करने की कृपा कीजिये। श्रीभगवान बोले- महाराज युधिष्ठिर! तुम मेरे भक्‍त हो। जैसे पूर्व में मैंने नारद से कहा था, वैसे ही तुम्‍हें बतलाता हूँ, सुनो। नरेश! जो पुरुष स्‍नान आदि से पवित्र होकर मेरी पंचमी के दिन भक्‍तिपूर्वक उपवास करता है तथा तीनों समय मेरी पूजा में संलग्‍न रहता है, वह सम्‍पूर्ण यज्ञों का फल पाकर मेरे परम धाम में पगतिष्‍ठित होता है।* *🍁नरेश्‍वर! अमावस्‍या और पूर्णिमा-ये दोनों पर्व, दोनों पक्ष की द्वादशी तथा श्रवण-नक्षत्र-ये पाँच तिथियाँ मेरी पंचमी कहलाती हैं। ये मुझे विशेष प्रिय हैं। अत: श्रेष्‍ठ ब्राह्मणों को उचित है कि वे मेरा विशेष प्रिय करने के लिये मुझ में चित्त लगाकर इन तिथियों में उपवास करें। नरश्रेष्‍ठ! जो सब में उपवास न कर सके, वह केवल द्वादशी को ही उपवास करें; इससे मुझे बड़ी प्रसन्‍नता होती है।*🍁 *🌞जो मार्गशीर्ष की द्वादशी को दिन-रात उपवास करके ‘केशव’ नाम से मेरी पूजा करता है, उसे अश्‍वमेध-यज्ञ का फल मिलता है।* *🌞जो पौष मास की द्वादशी को उपवास करके जो ‘नारायण’ नाम से मेरी पूजा करता है, वह वाजिमेध-यज्ञ का फल पाता है।* *🌞राजन! जो माघ की द्वादशी को उपवास करके ‘माधव’ नाम से मेरा पूजन करता है, उसे राजसूय-यज्ञ का फल प्राप्‍त होता है।* *🌞नरेश्वर! फाल्गुन के महीने में द्वादशी को उपवास करके जो ‘गोविंद’ के नाम से मेरा अर्चन करता है, उसे अतिरात्र याग का फल मिलता है।* *🎄🌞चैत्र महीने की द्वादशी तिथि को व्रत धारण करके जो ‘विष्‍णु’ नाम से मेरी पूजा करता है, वह पुण्‍डरीक-यज्ञ के फल का भागी होता है।*🌞🌹   *🌞पाण्‍डुनन्‍दन! वैशाख की द्वादशी को उपवास करके ‘मधुसूदन’ नाम से मेरी पूजा करने वाले को अग्‍निष्‍टोम-यज्ञ का फल मिलता है।* *🌞राजन! जो मनुष्‍य ज्‍येष्‍ठ मास की द्वादशी तिथि को उपवास करके ‘त्रिविक्रम’ नाम से मेरी पूजा करता है, वह गोमेध के फल का भागी होता है*। *🌞भरतश्रेष्‍ठ! आषाढ़मास की द्वादशी को व्रत रहकर ‘वामन’ नाम से मेरी पूजा करने वाले पुरुष को नरमेध-यज्ञ का फल प्राप्‍त होता है।* *🌞राजन! श्रावण महीने में द्वादशी तिथि को उपवास करके जो ‘श्रीधर’ नाम से मेरा पूजन करता है, वह पंचयज्ञों का फल पाता है।* *🌞नरेश्‍वर! भाद्रपद मास की द्वादशी तिथि को उपवास करके ‘हृषीकेश’ नाम से मेरा अर्चन करने वाले को सौत्रामणि-यज्ञ का फल मिलता है।* *🌞महाराज! आश्विन की द्वादशी को उपवास करके जो ‘पद्मनाभ’ नाम से मेरा अर्चन करता है, उसे एक हजार गोदान का फल प्राप्‍त होता है।* *🌞राजन! कार्तिक महीने की द्वादशी तिथि को व्रत रहकर जो ‘दामोदर’ नाम से मेरी पूजा करता है, उसको सम्‍पूर्ण यज्ञों का फल मिलता है।* *🏆 👪नरपते! जो द्वादशी को केवल उपवास ही करता है, उसे पूर्वोक्‍त फल का आधा भाग ही प्राप्‍त होता है। इसी प्रकार श्रावण में यदि मनुष्‍य भक्‍तियुक्‍त चित्त से मेरी पूजा करता है तो वह मेरी सालोक्‍य मुक्‍ति को प्राप्‍त होता है, इसमें तनिक भी अन्‍यिथा विचार करने की आवश्‍यकता नहीं है।📯*👍 *🌞 🙏उपर्युक्‍त रूप से प्रतिमास आलस्‍य छोड़कर मेरी पूजा करते-करते जब एक साल पूरा हो जाय, तब पुन: दूसरे साल भी मासिक पूजन प्रारम्‍भ कर दे। इस प्रकार जो मेरा भक्‍त मेरी आराधना में तत्‍पर होकर बारह वर्ष तक बिना किसी विघ्‍न-बाधा के मेरी पूजा करता रहता है, वह मेरे स्‍वरूप को प्राप्‍त हो जाता है।🔔🌞🏆* *🌞🔔📯🙏 राजन्! जो मनुष्‍य द्वादशी तिथि को प्रेमपूर्वक मेरी और वेदसंहिता की पूजा करता है, उसे पूर्वोक्‍त फलों की प्राप्‍ति होती है, इसमें संशय नहीं है।। जो द्वादशी तिथि को मरे लिये चन्दन, पुष्‍प, फल, जल, पत्र अथवा मूल अर्पण करता है उसके समान मेरा प्रिय भक्‍त कोई नहीं है। नरश्रेष्‍ठ युधिष्ठिर! इन्‍द्र आदि सम्‍पूर्ण देवता उपर्युक्‍त विधि से मेरा भजन करने के कारण ही आज स्‍वर्गीय सुख का उपभोग कर रहे हैं।🍊🌼🎉🍃🍂🌿* 🚩🙏🚩 *🍂🍂राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे । सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने*🚩🚩 ॥  *॥ 🎄श्रीरामायणसूत्र 🎄॥*  *आदौ रामतपोवनादिगमनं हत्वा मृगं काञ्चनम् वैदेहीहरणं जटायुमरणम् सुग्रीवसम्भाषणम् ॥ वालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लङ्कापुरीदाहनम् पश्चाद्रावणकुम्भकर्णहननं एतद्धिरामायणम्* ॥  *॥ 🎄श्रीभागवतसूत्र 🎄॥*  *आदौ देवकिदेविगर्भजननं गोपीगृहे वर्धनम् मायापूतनजीवितापहरणं गोवर्धनोद्धारणम् ॥ कंसच्छेदनकौरवादिहननं कुंतीसुतां पालनम् एतद्भागवतं पुराणकथितं श्रीकृष्णलीलामृतम्* ॥  *॥ 🎄गीतास्तव🎄 ॥*  *पार्थाय प्रतिबोधितां भगवता नारायणेन स्वयम् व्यासेनग्रथितां पुराणमुनिना मध्ये महाभारते अद्वैतामृतवर्षिणीं भगवतीमष्टादशाध्यायिनीम् अम्ब त्वामनुसन्दधामि भगवद्गीते भवेद्वेषिणीम्* ॥  *🌻सर्वोपनिषदो गावो दोग्धा गोपालनन्दनः । पार्थो वत्सः सुधीर्भोक्ता दुग्धं गीतामृतं महत्* ॥  *🙏Om Namo Bhagavate Vasudevay🎄* *💥Jai Shree Mahakal🙏*

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जयश्री Apr 17, 2019

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