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Subhash Khurana
Subhash Khurana Feb 13, 2019

Ashtami

Ashtami

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Sangeeta Lal Feb 13, 2019
Jay shree ganesh ji shubh Shandhy ji aap aur aapke parivar hamesha khush rahe ji shubh mangalmay ho ji 🙏🙏be happy ji always ji

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रविवार, 16 जून को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा है। इस तिथि पर वट सावित्री व्रत किया जाता है। विवाहित महिलाओं के लिए इस पर्व का महत्व काफी अधिक है। महिलाएं अपने पति के सौभाग्य, स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए ये व्रत करती हैं। इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने की परंपरा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार रविवार और पूर्णिमा का योग होने से इसका महत्व काफी अधिक बढ़ गया है। रविवार का स्वामी ग्रह सूर्य है। ज्योतिष में सूर्य को मान-सम्मान का कारक माना गया है। कुंडली में सूर्य की शुभ-अशुभ स्थिति का अच्छा या बुरा असर हमारी बुद्धि पर भी होता है। सूर्य की शुभ स्थिति समाज में मान-सम्मान भी दिलवाती है। सूर्य से शुभ फल पाने के लिए रविवार और पूर्णिमा के योग में सूर्य की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। इस दिन के बाद से नियमित रूप से सूर्य को जल चढ़ाना शुरू करें। जानिए कैसे कर सकते हैं सूर्य की पूजा... सूर्य पूजा से जुड़ी खास बातें रविवार और पूर्णिमा के योग में सुबह जल्दी उठें। स्नान के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें, चावल, फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। जल चढ़ाते समय ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। जल चढ़ाने के बाद सूर्य मंत्र स्तुति का पाठ करें। इस पाठ के साथ शक्ति, बुद्धि, स्वास्थ्य और सम्मान की कामना से करें। सूर्य की पूजा में धूप, दीप जलाकर से सूर्यदेव की आरती करें। सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, माणिक्य, लाल चंदन आदि का दान करें। अपनी श्रद्धानुसार इन चीजों में से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है। सूर्य के निमित्त व्रत करें। एक समय फलाहार करें और सूर्यदेव की पूजन करें।

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Pt Vinod Pandey 🚩 Jun 15, 2019

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Prince Trivedi Jun 15, 2019

*🍀ज्येष्ठ पूर्णिमा - वट पूर्णिमा व्रतकथा, पूजा विधि महत्व 16 जून 2019 -रविवार🌹🚩🙏* *🌞ज्येष्ठ मास के शुल्क पक्ष की पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा कहा जाता है. हिंदू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा एक साल में पड़ने वाली पूर्णिमा में से खास मानी जाती है. दक्षिण भारत में ज्येष्ठ पूर्णिमा को बड़ी ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है. ज्येष्ठ पूर्णिमा इस साल 16 जून रविवार को मनाई जाएगी. दरअसल इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रख वट वृक्ष की पूजा करती हैं. यही वजह है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा का दूसरा नाम वट पूर्णिमा रखा गया है.* *⛅💧 पुराणों के आधार पर ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन इंद्र देवता की से विनती करते हैं कि बारिश हो ताकि गर्मी के प्रचंड दौर के महीने में नदी, तालाब झीलें जलमग्न रहें और किसानों को फैसलों के लिए लाभ मिले.💧🍀* *🎄ज्येष्ठ पूर्णिमा महत्व-*🎄 *हिंदू शास्त्रों के मुताबिक ज्येष्ठ पूर्णिमा पर जो सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखती है और विधि विधान पूजा करती हैं उनको सौभाग्य की प्राप्ती होती है. साथ ही उनके पति और बच्चों की आयु भी बढ़ती है. इसके अलावा सभी पापों से मुक्ति से भी मिलती है.* *🔥🌹ज्येष्ठ पूर्णिमा (वट पूर्णिमा) व्रत कथा-🔥💥* *पौराणिक कथाओं के माध्यम से एक दिन मद्र देश के राजा अश्वपति ने संतान प्राप्ती के यज्ञ किया और 18 साल तक चलने वाले इस यज्ञ के बाद सावित्री देवी (गायत्री और सरस्वती) ने राजा अश्वपति को एक कन्या प्राप्ती का वरदान दिया. ऐसे में राजा कुछ समय बाद पुत्र की प्राप्ती हुई और उन्होंने उस कन्या का नाम सावित्री ही रखा. धीरे-धीरे जब कन्या बड़ी हो गई तो शादी के लिए योग्य वर न मिलने पर राजा अश्वपित चिंतित होने लगे और सावित्री दुखी होकर तपोवन में भटकने लगी. वहां सावित्री को साल्व देश के राजा धुमत्सेन (जिनका राज्य छीन चुका था) के बेटे से सावित्री की मुलाकात हुई.* *नारद मुनि ने सावित्री को बताया था कि शादी के कुछ समय बाद सत्यवान की मृत्यु हो जाएगी ऐसे में सावित्री सत्यवान से शादी न करें . लेकिन सावित्री ने सत्यावन से शादी और अपनी नारद मुनि की भविष्यवाणी आगे चलकर सही साबित हुई और अल्पायु होने की वजह से एक दिन सत्यवान की मृत्यु वट वृक्ष के नीचे हो गई. लेकिन सावित्री ने अपनी घोर तपस्या और यमराज से विनती से अपने पति के प्राण, अपने सास-ससुर का खोया राज्य और नेत्र ज्योति मांगी. यमराज ने सावित्री को तीनों वरदान दिए और कहा की उसी वट वृक्ष के नीचे तुम्हें तुम्हारा पति जीवित मिलेगा. तभी से ज्येष्ठ पूर्णिमा और वट वृक्ष पूजा का महत्व चलता आ रहा है*. *🌕🌜ज्येष्ठ पूर्णिमा 2019 पूजा विधि-🌖🌛* *ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखती हैं.ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट वृक्ष की जाती है.वट वृक्ष फूल माला, अगरबत्ती, दीपक, सिंदूर, चालव आदि पूजा साम्रगी को थाली में सजाकर लाल कपड़े ढक कर ले जाएं.वट वृक्ष के नीचे बैठकर विधि विधान से देवी मां सावित्री की पूजा-अर्चना करें.पूजा करने के साथ सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की प्रक्रिमा करें और देवी मां की आरती का गुणगान करें ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सभी को प्रसाद के रूप में मिठाई, फल आदि को वितरित करें.* *⏰ज्येष्ठ पूर्णिमा 2019 शुभ मुहूर्त-⏰🚩* *पूर्णिमा तिथि,* 16 जून रविवार दोपहर 2 बजे के बाद से रात 8:25 बजे तक वट वृक्ष पूजा मुहूर्त, *🌞महिलाएं 17 जून को भी दोपहर के समय तक उपवास रख, वट वृक्ष की पूजा करें*. *पंचांग के अनुसार 16 जून को दोपहर 2 बजे तक चतुर्दशी की तिथि रहेगी इसके बाद पूर्णिमा की तिथि शुरू होगी. संध्या काल से लेकर रात 8 बजकर 25 मिनट तक शुभ मुहूर्त रहेगा, इस समय में आप देवी मां की आराधना करें तो अवश्य लाभ होगा. वहीं महिलाएं 17 जून को सुबह भी व्रत रखकर भी वट वृक्ष की पूजा कर सकती हैं. 17 जून दोपहर तक पूर्णिमा की तिथि रहेगी.* *🔥Jai Shree Mahakal*🔥 https://youtu.be/B9MHCEUM9ts

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Prince Trivedi Jun 15, 2019

*🍀ज्येष्ठ पूर्णिमा - वट पूर्णिमा व्रतकथा, पूजा विधि महत्व 16 जून 2019 -रविवार🌹🚩🙏* *🌞ज्येष्ठ मास के शुल्क पक्ष की पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा कहा जाता है. हिंदू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा एक साल में पड़ने वाली पूर्णिमा में से खास मानी जाती है. दक्षिण भारत में ज्येष्ठ पूर्णिमा को बड़ी ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है. ज्येष्ठ पूर्णिमा इस साल 16 जून रविवार को मनाई जाएगी. दरअसल इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रख वट वृक्ष की पूजा करती हैं. यही वजह है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा का दूसरा नाम वट पूर्णिमा रखा गया है.* *⛅💧 पुराणों के आधार पर ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन इंद्र देवता की से विनती करते हैं कि बारिश हो ताकि गर्मी के प्रचंड दौर के महीने में नदी, तालाब झीलें जलमग्न रहें और किसानों को फैसलों के लिए लाभ मिले.💧🍀* *🎄ज्येष्ठ पूर्णिमा महत्व-*🎄 *हिंदू शास्त्रों के मुताबिक ज्येष्ठ पूर्णिमा पर जो सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखती है और विधि विधान पूजा करती हैं उनको सौभाग्य की प्राप्ती होती है. साथ ही उनके पति और बच्चों की आयु भी बढ़ती है. इसके अलावा सभी पापों से मुक्ति से भी मिलती है.* *🔥🌹ज्येष्ठ पूर्णिमा (वट पूर्णिमा) व्रत कथा-🔥💥* *पौराणिक कथाओं के माध्यम से एक दिन मद्र देश के राजा अश्वपति ने संतान प्राप्ती के यज्ञ किया और 18 साल तक चलने वाले इस यज्ञ के बाद सावित्री देवी (गायत्री और सरस्वती) ने राजा अश्वपति को एक कन्या प्राप्ती का वरदान दिया. ऐसे में राजा कुछ समय बाद पुत्र की प्राप्ती हुई और उन्होंने उस कन्या का नाम सावित्री ही रखा. धीरे-धीरे जब कन्या बड़ी हो गई तो शादी के लिए योग्य वर न मिलने पर राजा अश्वपित चिंतित होने लगे और सावित्री दुखी होकर तपोवन में भटकने लगी. वहां सावित्री को साल्व देश के राजा धुमत्सेन (जिनका राज्य छीन चुका था) के बेटे से सावित्री की मुलाकात हुई.* *नारद मुनि ने सावित्री को बताया था कि शादी के कुछ समय बाद सत्यवान की मृत्यु हो जाएगी ऐसे में सावित्री सत्यवान से शादी न करें . लेकिन सावित्री ने सत्यावन से शादी और अपनी नारद मुनि की भविष्यवाणी आगे चलकर सही साबित हुई और अल्पायु होने की वजह से एक दिन सत्यवान की मृत्यु वट वृक्ष के नीचे हो गई. लेकिन सावित्री ने अपनी घोर तपस्या और यमराज से विनती से अपने पति के प्राण, अपने सास-ससुर का खोया राज्य और नेत्र ज्योति मांगी. यमराज ने सावित्री को तीनों वरदान दिए और कहा की उसी वट वृक्ष के नीचे तुम्हें तुम्हारा पति जीवित मिलेगा. तभी से ज्येष्ठ पूर्णिमा और वट वृक्ष पूजा का महत्व चलता आ रहा है*. *🌕🌜ज्येष्ठ पूर्णिमा 2019 पूजा विधि-🌖🌛* *ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखती हैं.ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट वृक्ष की जाती है.वट वृक्ष फूल माला, अगरबत्ती, दीपक, सिंदूर, चालव आदि पूजा साम्रगी को थाली में सजाकर लाल कपड़े ढक कर ले जाएं.वट वृक्ष के नीचे बैठकर विधि विधान से देवी मां सावित्री की पूजा-अर्चना करें.पूजा करने के साथ सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की प्रक्रिमा करें और देवी मां की आरती का गुणगान करें ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सभी को प्रसाद के रूप में मिठाई, फल आदि को वितरित करें.* *⏰ज्येष्ठ पूर्णिमा 2019 शुभ मुहूर्त-⏰🚩* *पूर्णिमा तिथि,* 16 जून रविवार दोपहर 2 बजे के बाद से रात 8:25 बजे तक वट वृक्ष पूजा मुहूर्त, *🌞महिलाएं 17 जून को भी दोपहर के समय तक उपवास रख, वट वृक्ष की पूजा करें*. *पंचांग के अनुसार 16 जून को दोपहर 2 बजे तक चतुर्दशी की तिथि रहेगी इसके बाद पूर्णिमा की तिथि शुरू होगी. संध्या काल से लेकर रात 8 बजकर 25 मिनट तक शुभ मुहूर्त रहेगा, इस समय में आप देवी मां की आराधना करें तो अवश्य लाभ होगा. वहीं महिलाएं 17 जून को सुबह भी व्रत रखकर भी वट वृक्ष की पूजा कर सकती हैं. 17 जून दोपहर तक पूर्णिमा की तिथि रहेगी.* *🔥Jai Shree Mahakal*🔥 https://youtu.be/WSYkMuThkjs

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जयश्री Jun 15, 2019

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