Gaurav
Gaurav Jan 9, 2018

प्रभु की भक्ति न्यारी

+8 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 25 शेयर

कामेंट्स

AARYAM Mar 27, 2020

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Mannish Sharma Mannu Mar 27, 2020

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+8 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 14 शेयर
Chandrashekhar Karwa Mar 27, 2020

श्रीरामचरित मानस  Serial No 437 (अयोध्याकाण्ड)    2/234/1  चौपाई / छंद / दोहा - मोरें सरन रामहि की पनही । राम सुस्वामि दोसु सब जनही ॥ व्यक्त भाव एवं प्रेरणा - श्री भरतलालजी श्री चित्रकूटजी में प्रभु श्री रामजी से मिलने के पूर्व विचार करने लगे कि क्या प्रभु उनके मिलने पर उन्हें त्याग देंगे या सेवक मानकर उन्हें अपना लेंगे । श्री भरतलालजी सोचने लगे कि प्रभु श्री रामजी तो अच्छे से भी अच्छे स्वामी है पर दोष तो उनके दास श्री भरतलालजी का ही है । फिर जो श्री भरतलालजी ने सोचा वह अद्भुत है । श्री भरतलालजी अपने मन में विचार करते हैं कि वे प्रभु श्री रामजी के श्री कमलचरणों की शरण के लायक तो शायद नहीं हैं पर प्रभु श्री रामजी के श्री कमलचरणों की पादुका की ही शरण उन्हें मिल जाये तो भी उनका कल्याण हो जायेगा । www.devotionalthoughts.in

+9 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Chandrashekhar Karwa Mar 27, 2020

+8 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Chandrashekhar Karwa Mar 27, 2020

+7 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Chandrashekhar Karwa Mar 27, 2020

*भक्ति हमें जो प्रभु को प्रिय लगता है वह करने के लिए प्रेरित करती है । प्रभु के लिए नियम पालन करना भक्ति हमें सिखाती है । मन को सही मार्ग पर ले जाने का एक ही उपाय है, भक्ति, केवल भक्ति और केवल भक्ति ।* *कभी भी, कितने भी जन्म के बाद भी आखिर मिलना तो प्रभु से ही होगा क्योंकि वे ही हमारे मूल स्वरूप हैं । इसलिए बुद्धिमानी यही है कि इस मानव जन्म में ही ऐसा प्रयास किया जाये । यह सिद्धांत है कि सजातीय तत्व ही मिलता है । हम चेतन तत्व हैं और प्रभु चेतन हैं इसलिए हमारा मिलना प्रभु से ही हो सकता है । संसार जड़ है इसलिए हम कितना भी संसार से चिपके पर संसार से हम कभी भी मिल नहीं पायेंगे ।* प्रभु से जोड़ने वाले इस तरह के रोजाना सुबह व्हाट्सएप पर एक मैसेज पाने के लिए 9462308471 पर SHREE HARI लिखकर व्हाट्सएप करें www.bhaktivichar.in GOD GOD & only GOD जो प्रभु के चिंतन से दिन की शुरुआत करना चाहते हैं उन्हें यह फॉरवर्ड करें और ऐसे ग्रुपों में शेयर करें

+7 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 4 शेयर
Chandrashekhar Karwa Mar 26, 2020

श्रीरामचरित मानस Serial No 435 (अयोध्याकाण्ड)   2/231/दोहा  चौपाई / छंद / दोहा - भरतहि होइ न राजमदु बिधि हरि हर पद पाइ ॥ कबहुँ कि काँजी सीकरनि छीरसिंधु बिनसाइ ॥ व्यक्त भाव एवं प्रेरणा - जब श्री लक्ष्मणजी ने यह कहा कि राज्य का मद सबसे कठिन मद है तो प्रभु श्री रामजी ने श्री भरतलालजी के बचाव में जो कहा वह ध्यान देने योग्य है । प्रभु ने कहा कि श्री अयोध्याजी के राज्य की बात ही क्या है अगर श्री त्रिदेवजी श्री भरतलालजी को त्रिलोकी का राज्या भी दे देवें तो भी उन्हें राज्य मद नहीं हो सकता । प्रभु ने उपमा देते हुये कहा कि क्या खटाई की कुछ बूंदों से क्षीरसागर फट सकता है । जैसे यह कतई संभव नहीं वैसे ही श्री भरतलालजी को राज्य मद हो यह कतई संभव नहीं है । www.devotionalthoughts.in

+7 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Mansing Sumaniya Mar 25, 2020

+101 प्रतिक्रिया 10 कॉमेंट्स • 6 शेयर
Chandrashekhar Karwa Mar 26, 2020

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB