।। श्री रंगदेवी जी प्रागट्योत्सव की मंगल बधाई ।। रंगदेवी सखियन सरनाम | पुंडरीक – किंजल्क बरन तनु, लखि लाजत शत काम | पहिरे वसन जपा कुसुमन रँग, सोहति अति अभिराम | विविध भाँति भूषण पहिरावति, नित प्रति श्यामा – श्याम | परम चतुर श्रृंगार – कला महँ, नहिं पटतर कोउ बाम | रहति ‘कृपालु’ निकुंजविहारिणि, संगहिँ आठों याम || भावार्थ – रंगदेवी सखि समस्त सखियों में प्रख्यात सखी हैं | इनके शरीर का रंग कमल के केशर के समान है एवं इनकी रूपमाधुरी से सैकड़ों कामदेव लज्जित होते हैं | यह इन्द्रवधूटी के रंग के अत्यन्त ही सुन्दर कपड़े पहनती हैं | यह नित्यप्रति प्रिया – प्रियतम को अनेक प्रकार के गहने पहनाती हैं, एवं श्रृंगार करने की कला में इनकी समानता की चतुर गोपी और कोई नहीं है | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि यह सदा किशोरी जी के साथ रहती हैं | "श्री रंगदेवी सखी" पिता- वीरभानु गोप, माता- सुर्यवती, गांव- डभारा, जन्म- भाद्रपद, शुक्ल पक्ष, त्रयोदशी रंगदेवी सखी- रंगदेवी जी प्यारी जी की वेणी गूंथना श्रंगार करना ओर प्यारी जी के नैनो मे काजल लगाती है। रंगदेवी सखी गुलाबी साडी पहनती है ,वैसे तो सखियॉं तरह-तरह के रंगों की साडियां पहने होती है । युगल के विविध आभूषणो को सावधानी पूर्वक संजो कर रखती है , ह्रदय मे गाढी प्रिति लिये सारी आभूषण सदा सेवा मे लेकर खडी रहती है । इनके अंगों की कान्ति पद्मपराग (कमल-केसर) के समान है और ये जवाकुसुम रंग की साड़ी धारण करती हैं। ये नित्य श्रीराधा के हाथों और चरणों में अत्यन्त सुन्दर जावक (महावर) लगाती हैं। व्रतों व त्यौहारों में आस्था रखने वाली अत्यन्त सुन्दर रंगदेवी सखी सभी कलाओं में निपुण हैं। इनके अंगों की कान्ति पद्मपराग (कमल-केसर) के समान है और ये जवाकुसुम रंग की साड़ी धारण करती हैं। ये नित्य श्रीराधा के हाथों और चरणों में अत्यन्त सुन्दर जावक (महावर) लगाती हैं। व्रतों व त्यौहारों में आस्था रखने वाली अत्यन्त सुन्दर रंगदेवी सखी सभी कलाओं में निपुण हैं। नित्य लगाती रुचि कर-चरणों में यावक अतिशय अभिराम। आस्था अति त्यौहार-व्रतों में कला-कुशल शुचि शोभाधाम।। युग्मा$ड़्घ्रिचिन्तनरतां प्रियरंगदेवीं, दिव्यां सरोजनयनां नवमेघवर्णाम्। मन्दस्मितां कनकचामरमादधानां, वृंदावनाधिपसखीं रसदां भजामि।। जिनका वर्ण नवमेघ के समान है, जिनके नेत्र कमल के सदृश हैं और मंदहास्ह युक्त , स्वर्ण की डंडी वाले चंवर को धारण किए हुए हैं , श्रीयुगल प्रिया-प्रियतम के चरणारविन्दों के चिंतन में तत्पर श्री वृंदावनाधीश्वर की सखी श्रीरंगदेवीजी का हम भजन स्मरण करते हैं।।

।। श्री रंगदेवी जी प्रागट्योत्सव की मंगल बधाई ।।

रंगदेवी सखियन सरनाम |
पुंडरीक – किंजल्क बरन तनु, लखि लाजत शत काम |
पहिरे वसन जपा कुसुमन रँग, सोहति अति अभिराम |
विविध भाँति भूषण पहिरावति, नित प्रति श्यामा – श्याम |
परम चतुर श्रृंगार – कला महँ, नहिं पटतर कोउ बाम |
रहति ‘कृपालु’ निकुंजविहारिणि, संगहिँ आठों याम ||

भावार्थ – रंगदेवी सखि समस्त सखियों में प्रख्यात सखी हैं | इनके शरीर का रंग कमल के केशर के समान है एवं इनकी रूपमाधुरी से सैकड़ों कामदेव लज्जित होते हैं | यह इन्द्रवधूटी के रंग के अत्यन्त ही सुन्दर कपड़े पहनती हैं | यह नित्यप्रति प्रिया – प्रियतम को अनेक प्रकार के गहने पहनाती हैं, एवं श्रृंगार करने की कला में इनकी समानता की चतुर गोपी और कोई नहीं है | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि यह सदा किशोरी जी के साथ रहती हैं |

"श्री रंगदेवी सखी"
पिता- वीरभानु गोप, माता- सुर्यवती, गांव- डभारा, जन्म- भाद्रपद, शुक्ल पक्ष, त्रयोदशी

रंगदेवी सखी- रंगदेवी जी प्यारी जी की वेणी गूंथना श्रंगार करना ओर प्यारी जी के नैनो मे काजल लगाती है। रंगदेवी सखी गुलाबी साडी पहनती है ,वैसे तो सखियॉं तरह-तरह के रंगों की साडियां पहने होती है । युगल के विविध आभूषणो को सावधानी पूर्वक संजो कर रखती है , ह्रदय मे गाढी प्रिति लिये सारी आभूषण सदा सेवा मे लेकर खडी रहती है । इनके अंगों की कान्ति पद्मपराग (कमल-केसर) के समान है और ये जवाकुसुम रंग की साड़ी धारण करती हैं। ये नित्य श्रीराधा के हाथों और चरणों में अत्यन्त सुन्दर जावक (महावर) लगाती हैं। व्रतों व त्यौहारों में आस्था रखने वाली अत्यन्त सुन्दर रंगदेवी सखी सभी कलाओं में निपुण हैं।

इनके अंगों की कान्ति पद्मपराग (कमल-केसर) के समान है और ये जवाकुसुम रंग की साड़ी धारण करती हैं। ये नित्य श्रीराधा के हाथों और चरणों में अत्यन्त सुन्दर जावक (महावर) लगाती हैं। व्रतों व त्यौहारों में आस्था रखने वाली अत्यन्त सुन्दर रंगदेवी सखी सभी कलाओं में निपुण हैं।

    नित्य लगाती रुचि कर-चरणों
    में यावक अतिशय अभिराम।
    आस्था अति त्यौहार-व्रतों में
    कला-कुशल शुचि शोभाधाम।।

युग्मा$ड़्घ्रिचिन्तनरतां प्रियरंगदेवीं,
      दिव्यां सरोजनयनां नवमेघवर्णाम्।
मन्दस्मितां कनकचामरमादधानां,
     वृंदावनाधिपसखीं रसदां भजामि।।

जिनका वर्ण नवमेघ के समान है, जिनके नेत्र कमल के सदृश हैं और मंदहास्ह युक्त , स्वर्ण की डंडी वाले चंवर को धारण किए हुए हैं , श्रीयुगल प्रिया-प्रियतम के चरणारविन्दों के चिंतन में तत्पर श्री वृंदावनाधीश्वर की सखी श्रीरंगदेवीजी का हम भजन स्मरण करते हैं।।

+14 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 0 शेयर

कामेंट्स

sushma Sep 11, 2019
🙏🙏🙏 Good noon ji

Gulshan Kumar Sep 12, 2019
jai Shri Radha Raman Sarkar ki 🙏🕉 Hare Krishna 🙏

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB