बुधवार गनेश जी और एकादशी

बुधवार गनेश जी और एकादशी

"बुधवार + एकादशी के योग में ये 5 उपाय कर लेंगे तो दूर होगी

बुधवार, 13 दिसंबर को सफला एकादशी है। एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और बुधवार गणेशजी की आराधना के लिए खास दिन है। बुधवार और एकादशी के योग में गणेशजी के साथ ही विष्णु भगवान के उपाय किए जाए तो घर की गरीबी दूर हो सकती है। जानिए कुछ खास उपाय...

सफला एकादशी का महत्व

हिन्दी पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है।

- मान्यता है कि इस एकादशी पर व्रत करने से साल की सभी एकादशी के बराबर पुण्य फल मिलता है।

- सफला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पूजा के बाद ब्रह्माणों को दान दिया जाता है।

- काफी लोग इस एकादशी पर पूरी रात जागते हैं और भगवान की पूजा करते हैं।

ये है व्रत की सामान्य विधि

एकादशी पर सुबह जल्दी उठें और नहाने के बाद भगवान विष्णु का लक्ष्मीजी के साथ पूजन करें। पूजन में फल-फूल, गंगाजल, धूप दीप और प्रसाद आदि अर्पित करें। दिन में एक समय फलाहार करें। रात में भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाएं। भगवान के मंत्रों का जाप करें। अगले दिन यानी द्वादशी पर किसी ब्राह्मण को दान-दक्षिणा दें। इसके बाद भोजन ग्रहण करें। इस व्रत में किसी भी तरह के गर्म वस्त्रों का दान करना बड़ा बहुत शुभ माना जाता है।

एकादशी पर कर सकते हैं ये उपाय

1. गणेशजी को दूर्वा की 21 गांठ चढ़ाएं और श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप 108 बार करें।

2. भगवान विष्णु को केले और हलवे का भोग लगाएं।

3. विष्णुजी को पीले वस्त्र चढ़ाएं। लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा करें।

4. गणेशजी की पूजा गजानंद के रूप में की जाती है। इसीलिए किसी हाथी को गन्ना खिलाएं।

5. गणेशजी के साथ ही रिद्धि-सिद्धि की भी पूजा करें। इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

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*!! सबसे बड़ा दानी !!* 🌾🍁🏯👏👏👏👏👏🏯🍁🌾 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ एक बार की बात है कि श्री कृष्ण और अर्जुन कहीं जा रहे थे। रास्ते में अर्जुन ने श्री कृष्ण से पूछा कि प्रभु– एक जिज्ञासा है मेरे मन में, अगर आज्ञा हो तो पूछूँ ? श्री कृष्ण ने कहा– अर्जुन, तुम मुझसे बिना किसी हिचक, कुछ भी पूछ सकते हो। तब अर्जुन ने कहा कि मुझे आज तक यह बात समझ नहीं आई है कि दान तो मैं भी बहुत करता हूँ परंतु सभी लोग कर्ण को ही सबसे बड़ा दानी क्यों कहते हैं ? यह प्रश्न सुन श्री कृष्ण मुस्कुराये और बोले कि आज मैं तुम्हारी यह जिज्ञासा अवश्य शांत करूंगा। श्री कृष्ण ने पास में ही स्थित दो पहाड़ियों को सोने का बना दिया। इसके बाद वह अर्जुन से बोले कि हे अर्जुन इन दोनों सोने की पहाड़ियों को तुम आस पास के गाँव वालों में बांट दो। अर्जुन प्रभु से आज्ञा ले कर तुरंत ही यह काम करने के लिए चल दिया। उसने सभी गाँव वालों को बुलाया। उनसे कहा कि वह लोग पंक्ति बना लें अब मैं आपको सोना बाटूंगा और सोना बांटना शुरू कर दिया। गाँव वालों ने अर्जुन की खूब जय जयकार करनी शुरू कर दी। अर्जुन सोना पहाड़ी में से तोड़ते गए और गाँव वालों को देते गए। लगातार दो दिन और दो रातों तक अर्जुन सोना बांटते रहे। उनमें अब तक अहंकार आ चुका था। गाँव के लोग वापस आ कर दोबारा से लाईन में लगने लगे थे। इतने समय पश्चात अर्जुन काफी थक चुके थे। जिन सोने की पहाड़ियों से अर्जुन सोना तोड़ रहे थे, उन दोनों पहाड़ियों के आकार में जरा भी कमी नहीं आई थी। उन्होंने श्री कृष्ण जी से कहा कि अब मुझसे यह काम और न हो सकेगा। मुझे थोड़ा विश्राम चाहिए। प्रभु ने कहा कि ठीक है तुम अब विश्राम करो और उन्होंने कर्ण को बुला लिया। उन्होंने कर्ण से कहा कि इन दोनों पहाड़ियों का सोना इन गांव वालों में बांट दो। कर्ण तुरंत सोना बांटने चल दिये। उन्होंने गाँव वालों को बुलाया और उनसे कहा– यह सोना आप लोगों का है, जिसको जितना सोना चाहिए वह यहां से ले जायें। ऐसा कह कर कर्ण वहां से चले गए। यह देख कर अर्जुन ने कहा कि ऐसा करने का विचार मेरे मन में क्यों नहीं आया? श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को शिक्षा— इस पर श्री कृष्ण ने जवाब दिया कि तुम्हें सोने से मोह हो गया था। तुम खुद यह निर्णय कर रहे थे कि किस गाँव वाले की कितनी जरूरत है। उतना ही सोना तुम पहाड़ी में से खोद कर उन्हें दे रहे थे। तुम में दाता होने का भाव आ गया था। दूसरी तरफ कर्ण ने ऐसा नहीं किया। वह सारा सोना गाँव वालों को देकर वहां से चले गए। वह नहीं चाहते थे कि उनके सामने कोई उनकी जय जयकार करे या प्रशंसा करे। उनके पीठ पीछे भी लोग क्या कहते हैं उससे उनको कोई फर्क नहीं पड़ता। यह उस आदमी की निशानी है जिसे आत्मज्ञान हासिल हो चुका है। इस तरह श्री कृष्ण ने खूबसूरत तरीके से अर्जुन के प्रश्न का उत्तर दिया, अर्जुन को भी अब अपने प्रश्न का उत्तर मिल चुका था। *निष्कर्ष:-* *दान देने के बदले में धन्यवाद या बधाई की उम्मीद करना भी उपहार नहीं सौदा कहलाता है।* *यदि हम किसी को कुछ दान या सहयोग करना चाहते हैं तो हमें यह बिना किसी उम्मीद या आशा के करना चाहिए, ताकि यह हमारा सत्कर्म हो, न कि हमारा अहंकार ।* 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ 🍃🎋🍃🎋🕉️🎋🍃🎋🍃 🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾

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Amarnath Sep 20, 2020

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Garima Gahlot Rajput Sep 20, 2020

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rohit patel Sep 20, 2020

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Garima Gahlot Rajput Sep 20, 2020

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Garima Gahlot Rajput Sep 20, 2020

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