M T
M T Jan 19, 2021

🌹🌹🌹🌹राम राम जी 🌹🌹🌹🌹 अभिमान को आने मत दो; और स्वाभिमान को जाने मत दो; अभिमान तुम्हें उठने नहीं देगा; और स्वाभिमान गिरने नहीं देगा; जिसकी नीति अच्छी होगी; उसकी उन्नति हमेशा होगी मैं श्रेष्ठ हूँ; यह आत्मविश्वास है; लेकिन मैं ही श्रेष्ठ हूँ; यह अहंकार है । अभिमान तब आता है जब हमें लगता है कि हमने कुछ किया है सम्मान तब मिलता है जब दुनिया को लगता है कि आपने कुछ किया है । पूरी दुनिया जीत सकते हैं संस्कार से और जीता हुआ भी हार सकते हैं अहंकार से..। रावण ने कैलाश पर्वत उठा लिया था, वो केवल शिव की भक्ति के कारण। बाकी अहंकार से तो वो अंगद का पांव भी नहीं उठवा पाया था । जिंदगी में कभी भी अपने किसी हुनर पर घमंड मत करना, क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वजन से डूब जाता है। जीत किस के लिए, हार किस के लिए ज़िंदगी भर ये तकरार किसके लिए जो भी ‘आया’ है वो ‘जायेगा’ एक दिन फिर ये इतना “अहंकार” किसके लिए । अगर आप; किसी को छोटा देख रहे हो तो; आप उसे या तो “दूर” से देख रहे हो; या अपने ” गुरूर” से देख रहे हो । 🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🥀🌿

🌹🌹🌹🌹राम राम जी 🌹🌹🌹🌹
अभिमान को आने मत दो;
और स्वाभिमान को जाने मत दो;
अभिमान तुम्हें उठने नहीं देगा;
और स्वाभिमान गिरने नहीं देगा;
जिसकी नीति अच्छी होगी;
उसकी उन्नति हमेशा होगी
मैं श्रेष्ठ हूँ;
यह आत्मविश्वास है;
लेकिन मैं ही श्रेष्ठ हूँ;
यह अहंकार है  ।

अभिमान
तब आता है
जब हमें लगता है कि
हमने कुछ किया है
सम्मान तब मिलता है
जब दुनिया को लगता है कि
आपने कुछ किया है ।

पूरी दुनिया जीत सकते हैं
संस्कार से
और जीता हुआ भी हार सकते हैं
अहंकार से..।

रावण ने कैलाश पर्वत उठा लिया था,
वो केवल शिव की भक्ति के कारण।
बाकी अहंकार से तो वो
अंगद का पांव भी नहीं उठवा पाया था ।

जिंदगी में कभी भी अपने किसी हुनर पर
घमंड मत करना, क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो
अपने ही वजन से डूब जाता है।

जीत किस के लिए,
हार किस के लिए
ज़िंदगी भर ये तकरार किसके लिए
जो भी ‘आया’ है वो ‘जायेगा’
एक दिन
फिर ये इतना “अहंकार” किसके लिए ।

अगर आप;
किसी को छोटा देख रहे हो तो;
आप उसे या तो “दूर” से देख रहे हो;
या अपने ” गुरूर” से देख रहे हो ।
🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🥀🌿

+433 प्रतिक्रिया 103 कॉमेंट्स • 375 शेयर

कामेंट्स

RAKESH SHARMA Jan 19, 2021
RADHEY RADHEY🌹🙏🌹APKO HARDIK SHUBHKAMANA SE MANGALMAY SHUBH RATRI VANDAN AVM NAMAN 🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹

Rajpal singh Jan 19, 2021
jai shree ram ji jai shree Radhe Radhe ji good night ji 🙏🙏🌷🌷🙏🙏

Mohan Patidar Jan 19, 2021
jai shree Radhe krishna ji good night bahin ji 💐🌹💐

rakesh dubey Jan 19, 2021
Jai shri ram🚩🚩 Jai shri radhe krishna ji🌷 GOOD night ji💐💐💐

madan pal 🌷🙏🏼 Jan 19, 2021
जय श्री राम जी शुभ रात्रि वंदन जी पवन सुत हनुमान जी की कृपा आप व आपके परिवार पर बनीं रहे जी 🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷

Rajesh Lakhani Jan 19, 2021
RADHE RADHE BEHENA SHUBH RATRI THAKOR JI KI KRUPA AAP PER OR AAP KE PARIVAR PER SADA BANI RAHE AAP KA AANE WALA HAR PAL SHUBH OR MANGALMAYE HO BEHENA JAI SHREE KRISHNA

Arvid bhai Jan 19, 2021
jay shri radhe krisna subh ratri vandan

Neha Sharma, Haryana Jan 19, 2021
🙏श्रीराम🙏 हनुमान🚩शुभ रात्रि नमन🙏 🌸🙏ईश्वर की असीम कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे जी। आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो बहनाजी🙏🌸 🌸🙏जय जय श्री राधेकृष्णा🙏🌸

R.S.PARMAR⚡JAY MAHAKAL Jan 19, 2021
🌹🌸 शुभ प्रभात स्नेह वंदन जी आप का दिन मंगलमय हो और आप हर पल खुश रहे स्वास्थ रहे और सदैव मुस्कराते रहे 🙏🚩 जय श्री राधे राधे 🚩🙏

Ajit sinh Parmar Jan 20, 2021
🌺गुड मॉर्निंग 🌺🎋 🎋🌺र।धेकृषण 🎋🌹🎋🌹🎋🌺🌺

Ajit sinh Parmar Jan 20, 2021
🌺गुड मॉर्निंग 🌺🎋 🎋🌺र।धेकृषण 🎋🌹🎋🌹🎋🌺🌺

Shah Mahesh Jan 20, 2021
🍀 💐જય શ્રી કૃષ્ણ 🍀 💐

Rajesh Lakhani Jan 20, 2021
OM SHREE GANESHAY NMAH SHUBH PRABHAT BEHENA GANPATTI BAPPA KI KRUPA AAP PER OR AAP KE PARIVAR PER SADA BANI RAHE AAP KA DIN SHUBH OR MANGALMAYE HO AAP OR AAP KA PARIVAR HAMESA KHUS RAHE SWASTH RAHE BEHENA

k l तिवारी Jan 20, 2021
🏵️🌼🌻दीन दयाल विरिदु संभारी🏵️🌼🌸 🌹🙏🌷हरहु नाथ मम संकट भारी🌷🙏🌹 🌷🌹राम राम बहन🌷जय श्री माता की🌺🌼हे 🌹🏵️ हे गजानन आपको बारम्बार प्रणाम है🌷🌺परमपूज्य प्यारी बहन के श्रीचरण की सादर वंदना करता हूँ🙏🙏🙏 🌺🌸श्रीमाता जगतजननी जगदम्बा की कृपा से आप सौभाग्यवती रहो मेरी प्यारी बहना🌹🌼🌹🙏🍵 शुभप्रभात वंदन ☕🙏🌹🌹सदैव हँसती मुस्कराती रहो स्वस्थ रहो प्रसन्न रहो मेरी बहन🌾🌺तुम्हारा सारा जीवन फूलों की तरह महकता रहे खुश्बू 🌷🌹🌼🏵️🌺🌻की तरह बिखरता रहे🌹🌼🌷तुम्हारे माँथे की बिंदिया सदा चमकती रहे,🌺🌸🌺हाँथों में रंगबिरंगी चूड़ियाँ सजती रहें🌼पाँव पायल छनकती रहे🏵️🌼हे गजानन मेरी प्यारी बहना पर अपनी कृपादृष्टि सदैव बनाये रखना🌻🌹हम भगवान से यही प्रार्थना करते हैं🌹🙏💜🙏🌹🏵️

* जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन* #एक_कदम_परमात्मा_की_ओर किसी नगर में एक सेठजी रहते थे। उनके घर के नजदीक ही एक मंदिर था। एक रात्रि को पुजारी के कीर्तन की ध्वनि के कारण उन्हें ठीक से नींद नहीं आयी। सुबह उन्होंने पुजारी जी को खूब डाँटा कि ~ यह सब क्या है? पुजारी जी बोले ~ एकादशी का जागरण कीर्तन चल रहा था। सेठजी बोले ~ जागरण कीर्तन करते हो,तो क्या हमारी नींद हराम करोगे? अच्छी नींद के बाद ही व्यक्ति काम करने के लिए तैयार हो पाता है। फिर कमाता है, तब खाता है। पुजारी :- सेठजी! खिलाता तो वह खिलाने वाला ही है। सेठजी :-कौन खिलाता है? क्या तुम्हारा भगवान खिलाने आयेगा? पुजारी :- वही तो खिलाता है। सेठजी :- क्या भगवान खिलाता है! हम कमाते हैं तब खाते हैं। पुजारी :- निमित्त होता है तुम्हारा कमाना, और पत्नी का रोटी बनाना, बाकी सबको खिलाने वाला, सबका पालनहार तो वह जगन्नाथ ही है। सेठजी :- क्या पालनहार-पालनहार लगा रखा है! बाबा आदम के जमाने की बातें करते हो। क्या तुम्हारा पालने वाला एक-एक को आकर खिलाता है? हम कमाते हैं तभी तो खाते हैं। पुजारी :- सभी को वही खिलाता है। सेठजी :- हम नहीं खाते उसका दिया। पुजारी :- नहीं खाओ तो मारकर भी खिलाता है। सेठजी :- पुजारी जी! अगर तुम्हारा भगवान मुझे चौबीस घंटों में नहीं खिला पाया तो फिर तुम्हें अपना यह भजन-कीर्तन सदा के लिए बंद करना होगा। पुजारी :- मैं जानता हूँ कि तुम्हारी पहुँच बहुत ऊपर तक है, लेकिन उसके हाथ बड़े लम्बे हैं। जब तक वह नहीं चाहता, तब तक किसी का बाल भी बाँका नहीं हो सकता। आजमाकर देख लेना। *निश्चित ही पुजारीजी भगवान में प्रीति रखने वाले कोई सात्त्विक भक्त रहें होंगे। पुजारी की निष्ठा परखने के लिये सेठजी घोर जंगल में चले गये ! और एक विशालकाय वृक्ष की ऊँची डाल पर ये सोचकर बैठ गये कि अब देखें इधर कौन खिलाने आता है?चौबीस घंटे बीत जायेंगे, और पुजारी की हार हो जायेगी। सदा के लिए कीर्तन की झंझट मिट जायेगी। तभी एक अजनबी आदमी वहाँ आया। उसने उसी वृक्ष के नीचे आराम किया, फिर अपना सामान उठाकर चल दिया, लेकिन अपना एक थैला वहीं भूल गया। भूल गया कहो या छोड़ गया कहो। भगवान ने किसी मनुष्य को प्रेरणा की थी अथवा मनुष्य रूप में साक्षात् भगवान ही वहाँ आये थे, यह तो भगवान ही जानें! थोड़ी देर बाद पाँच डकैत वहाँ पहुँचे। उनमें से एक ने अपने सरदार से कहा :- उस्ताद! यहाँ कोई थैला पड़ा है। क्या है? जरा देखो! खोलकर देखा, तो उसमें गरमा-गरम भोजन से भरा टिफिन! उस्ताद भूख लगी है। लगता है यह भोजन भगवान ने हमारे लिए ही भेजा है। अरे ! तेरा भगवान यहाँ कैसे भोजन भेजेगा?हमको पकड़ने या फँसाने के लिए किसी शत्रु ने ही जहर-वहर डालकर यह टिफिन यहाँ रखा होगा, अथवा पुलिस का कोई षडयंत्र होगा। इधर-उधर देखो जरा, कौन रखकर गया है। उन्होंने इधर-उधर देखा, लेकिन कोई भी आदमी नहीं दिखा। तब डाकुओं के मुखिया ने जोर से आवाज लगायी ,कोई हो तो बताये कि यह थैला यहाँ कौन छोड़ गया है? सेठजी ऊपर बैठे-बैठे सोचने लगे कि अगर मैं कुछ बोलूँगा तो ये मेरे ही गले पड़ेंगे। वे तो चुप रहे, लेकिन जो सबके हृदय की धड़कनें चलाता है, भक्तवत्सल है, वह अपने भक्त का वचन पूरा किये बिना शाँत नहीं रहता। उसने उन डकैतों को प्रेरित किया कि ...'ऊपर भी देखो। 'उन्होंने ऊपर देखा तो वृक्ष की डाल पर एक आदमी बैठा हुआ दिखा। डकैत चिल्लाये, अरे! नीचे उतर! सेठजी बोले, मैं नहीं उतरता। क्यों नहीं उतरता, यह भोजन तूने ही रखा होगा। सेठजी बोले, मैंने नहीं रखा। कोई यात्री अभी यहाँ आया था, वही इसे यहाँ भूलकर चला गया। नीचे उतर! तूने ही रखा होगा जहर मिलाकर! और अब बचने के लिए बहाने बना रहा है। तुझे ही यह भोजन खाना पड़ेगा। अब कौन-सा काम वह सर्वेश्वर किसके द्वारा, किस निमित्त से करवाये अथवा उसके लिए क्या रूप ले, यह उसकी मर्जी की बात है। बड़ी गजब की व्यवस्था है उस परमेश्वर की। सेठजी बोले :- मैं नीचे नहीं उतरूँगा और खाना तो मैं कतई नहीं खाऊँगा। पक्का तूने खाने में जहर मिलाया है। अरे! नीचे उतर अब तो तुझे खाना ही होगा। सेठजी बोले :- मैं नहीं खाऊँगा। नीचे भी नहीं उतरूँगा। अरे कैसे नहीं उतरेगा। सरदार ने एक आदमी को हुक्म दिया इसको जबरदस्ती नीचे उतारो! डकैत ने सेठ को पकड़कर नीचे उतारा। ले खाना खा! सेठजी बोले :- मैं नहीं खाऊँगा। उस्ताद ने धड़ाक से उनके मुँह पर तमाचा जड़ दिया। सेठ को पुजारीजी की बात याद आयी कि नहीं खाओगे तो, मारकर भी खिलायेगा। सेठ फिर बोला :- मैं नहीं खाऊँगा। अरे कैसे नहीं खायेगा! इसकी नाक दबाओ और मुँह खोलो। डकैतों ने सेठ की नाक दबायी, मुँह खुलवाया और जबरदस्ती खिलाने लगे। वे नहीं खा रहे थे, तो डकैत उन्हें पीटने लगे। तब सेठजी ने सोचा कि ये पाँच हैं और मैं अकेला हूँ। नहीं खाऊँगा तो ये मेरी हड्डी पसली एक कर देंगे ! इसलिए चुपचाप खाने लगे और मन-ही-मन कहा, मान गये मेरे बाप ! मारकर भी खिलाता है! डकैतों के रूप में आकर खिला, चाहे भक्तों के रूप में आकर खिला! लेकिन खिलाने वाला तो तू ही है। आपने पुजारी की बात सत्य साबित कर दिखायी ! सेठजी के मन में भक्ति की धारा फूट पड़ी। उनको मार-पीट कर डकैत वहाँ से चले गये, तो सेठजी भागे और पुजारी जी के पास आकर बोले, पुजारी जी! मान गये आपकी बात ! कि नहीं खायें तो वह मारकर भी खिलाता है !! भक्तों परमात्मा ने जिसे अपना रास्ता दिखाना हो। वो किसी के भी माध्यम से , किसी भी रूप में दिखा देता है। 🙏जय सियाराम जी 🙏

+218 प्रतिक्रिया 41 कॉमेंट्स • 339 शेयर

+119 प्रतिक्रिया 24 कॉमेंट्स • 182 शेयर
Neha Sharma, Haryana Feb 26, 2021

*जय माता की*🚩🙏🌹 *शुभ रात्रि नमन*🙏🌹🌹 🌺 51 शक्तिपीठों का संक्षिप्त विवरण..... *हिंदू धर्म में पुराणों का विशेष महत्‍व है। इन्‍हीं पुराणों माता के शक्‍तिपीठों का वर्णन भी है। पुराणों की ही मानें तो जहाँ-जहाँ देवी सती के अंग के अवयव वस्‍त्र और गहने गिरे वहाँ-वहाँ माँ के शक्‍तिपीठ बन गए। ये शक्तिपीठ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हैं। *आइए जाने कहाँ-कहाँ हैं ये शक्तिपीठ...... 1. किरीट शक्तिपीठ : पश्चिम बंगाल के हुगली नदी के तट लालबाग कोट पर स्थित है किरीट शक्तिपीठ, जहाँ सती माता का किरीट यानी शिराभूषण या मुकुट गिरा था। यहाँ की शक्ति विमला अथवा भुवनेश्वरी तथा भैरव संवर्त हैं। इस स्थान पर सती के 'किरीट (शिरोभूषण या मुकुट)' का निपात हुआ था। कुछ विद्वान मुकुट का निपात कानपुर के मुक्तेश्वरी मंदिर में मानते हैं। 2. कात्यायनी पीठ : वृन्दावन मथुरा में स्थित है कात्यायनी वृन्दावन शक्तिपीठ जहाँ सती का केशपाश गिरा था। यहां की शक्ति देवी कात्यायनी हैं। यहाँ माता सती 'उमा' तथा भगवन शंकर 'भूतेश' के नाम से जाने जाते है। 3. करवीर शक्तिपीठ महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित 'महालक्ष्मी' अथवा 'अम्बाईका मंदिर' ही यह शक्तिपीठ है। यहाँ माता का त्रिनेत्र गिरा था। यहाँ की शक्ति 'महिषामर्दिनी' तथा भैरव क्रोधशिश हैं। यहाँ महालक्ष्मी का निज निवास माना जाता है। 4. श्री पर्वत शक्तिपीठ यहाँ की शक्ति श्री सुन्दरी एवं भैरव सुन्दरानन्द हैं। कुछ विद्वान इसे लद्दाख (कश्मीर) में मानते हैं, तो कुछ असम के सिलहट से 4 कि.मी. दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्यकोण) में जौनपुर में मानते हैं। यहाँ सती के 'दक्षिण तल्प' (कनपटी) का निपात हुआ था। 5. विशालाक्षी शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश, वाराणसी के मीरघाट पर स्थित है शक्तिपीठ जहाँ माता सती के दाहिने कान के मणि गिरे थे। यहाँ की शक्ति विशालाक्षी तथा भैरव काल भैरव हैं। यहाँ माता सती का 'कर्णमणि' गिरी थी। यहाँ माता सती को 'विशालाक्षी' तथा भगवान शिव को 'काल भैरव' कहते है। 6. गोदावरी तट शक्तिपीठ आंध्र प्रदेश के कब्बूर में गोदावरी तट पर स्थित है यह शक्तिपीठ, जहाँ माता का वामगण्ड यानी बायां कपोल गिरा था। यहाँ की शक्ति विश्वेश्वरी या रुक्मणी तथा भैरव दण्डपाणि हैं। गोदावरी तट शक्तिपीठ आन्ध्र प्रदेश देवालयों के लिए प्रख्यात है। वहाँ शिव, विष्णु, गणेश तथा कार्तिकेय (सुब्रह्मण्यम) आदि की उपासना होती है तथा अनेक पीठ यहाँ पर हैं। यहाँ पर सती के 'वामगण्ड' का निपात हुआ था। 7. शुचींद्रम शक्तिपीठ तमिलनाडु में कन्याकुमारी के त्रिसागर संगम स्थल पर स्थित है यह शुचींद्रम शक्तिपीठ, जहाँ सती के ऊर्ध्वदंत ( मतान्तर से पृष्ठ भागद्ध ) गिरे थे। यहां की शक्ति नारायणी तथा भैरव संहार या संकूर हैं। यहाँ माता सती को 'नारायणी' और भगवान शंकर को 'संहार' या 'संकूर' कहते है। तमिलनाडु में तीन महासागर के संगम-स्थल कन्याकुमारी से 13 किमी दूर 'शुचीन्द्रम' में स्याणु शिव का मंदिर है। उसी मंदिर में ये शक्तिपीठ है। 8. पंच सागर शक्तिपीठ इस शक्तिपीठ का कोई निश्चित स्थान ज्ञात नहीं है लेकिन यहाँ माता के नीचे के दांत गिरे थे। यहाँ की शक्ति वाराही तथा भैरव महारुद्र हैं। पंच सागर शक्तिपीठ में सती के 'अधोदन्त' गिरे थे। यहाँ सती 'वाराही' तथा शिव 'महारुद्र' हैं। 9. ज्वालामुखी शक्तिपीठ हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा में स्थित है यह शक्तिपीठ, जहाँ सती का जिह्वा गिरी थी। यहाँ की शक्ति सिद्धिदा व भैरव उन्मत्त हैं। यह ज्वालामुखी रोड रेलवे स्टेशन से लगभग 21 किमी दूर बस मार्ग पर स्थित है। यहाँ माता सती 'सिद्धिदा' अम्बिका तथा भगवान शिव 'उन्मत्त' रूप में विराजित है। मंदिर में आग के रूप में हर समय ज्वाला धधकती रहती है। 10. हरसिद्धि शक्तिपीठ (उज्जयिनी शक्तिपीठ) इस शक्तिपीठ की स्थिति को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं। कुछ उज्जैन के निकट शिप्रा नदी के तट पर स्थित भैरवपर्वत को, तो कुछ गुजरात के गिरनार पर्वत के सन्निकट भैरवपर्वत को वास्तविक शक्तिपीठ मानते हैं। अत: दोनों ही स्थानों पर शक्तिपीठ की मान्यता है। उज्जैन के इस स्थान पर सती की कोहनी का पतन हुआ था। अतः यहाँ कोहनी की पूजा होती है। 11. अट्टहास शक्तिपीठ अट्टाहास शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के लाबपुर (लामपुर) रेलवे स्टेशन वर्धमान से लगभग 95 किलोमीटर आगे कटवा-अहमदपुर रेलवे लाइन पर है, जहाँ सती का 'नीचे का होठ' गिरा था। इसे अट्टहास शक्तिपीठ कहा जाता है, जो लामपुर स्टेशन से नजदीक ही थोड़ी दूर पर है। 12. जनस्थान शक्तिपीठ महाराष्ट्र के नासिक में पंचवटी में स्थित है जनस्थान शक्तिपीठ जहाँ माता का ठुड्डी गिरी थी। यहाँ की शक्ति भ्रामरी तथा भैरव विकृताक्ष हैं। मध्य रेलवे के मुम्बई-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर नासिक रोड स्टेशन से लगभग 8 कि.मी. दूर पंचवटी नामक स्थान पर स्थित भद्रकाली मंदिर ही शक्तिपीठ है। यहाँ की शक्ति 'भ्रामरी' तथा भैरव 'विकृताक्ष' हैं- 'चिबुके भ्रामरी देवी विकृताक्ष जनस्थले'। अत: यहाँ चिबुक ही शक्तिरूप में प्रकट हुआ। इस मंदिर में शिखर नहीं है। सिंहासन पर नवदुर्गाओं की मूर्तियाँ हैं, जिसके बीच में भद्रकाली की ऊँची मूर्ति है। 13. कश्मीर शक्तिपीठ कश्मीर में अमरनाथ गुफ़ा के भीतर 'हिम' शक्तिपीठ है। यहाँ माता सती का 'कंठ' गिरा था। यहाँ सती 'महामाया' तथा शिव 'त्रिसंध्येश्वर' कहलाते है। श्रावण पूर्णिमा को अमरनाथ के दर्शन के साथ यह शक्तिपीठ भी दिखता है। 14. नन्दीपुर शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के बोलपुर (शांति निकेतन) से 33 किमी दूर सैन्थिया रेलवे जंक्शन से अग्निकोण में, थोड़ी दूर रेलवे लाइन के निकट ही एक वटवृक्ष के नीचे देवी मन्दिर है, यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ देवी के देह से 'कण्ठहार' गिरा था। 15. श्री शैल शक्तिपीठ आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद से 250 कि.मी. दूर कुर्नूल के पास 'श्री शैलम' है, जहाँ सती की 'ग्रीवा' का पतन हुआ था। यहाँ की सती 'महालक्ष्मी' तथा शिव 'संवरानंद' अथवा 'ईश्वरानंद' हैं। 16. नलहाटी शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के बोलपुर में है नलहरी शक्तिपीठ, जहाँ माता का उदरनली गिरी थी। यहाँ की शक्ति कालिका तथा भैरव योगीश हैं। यहाँ सती की 'उदर नली' का पतन हुआ था। यहाँ की सती 'कालिका' तथा भैरव 'योगीश' हैं। 17. मिथिला शक्तिपीठ यहाँ माता सती का 'वाम स्कन्ध' गिरा था। यहाँ सती 'उमा' या 'महादेवी' तथा शिव 'महोदर' कहलाते हैं। इस शक्तिपीठ का निश्चित स्थान बताना कुछ कठिन है। स्थान को लेकर कई मत-मतान्तर हैं। तीन स्थानों पर 'मिथिला शक्तिपीठ' को माना जाता है। एक जनकपुर (नेपाल) से 51 किमी दूर पूर्व दिशा में 'उच्चैठ' नामक स्थान पर 'वन दुर्गा' का मंदिर है। दूसरा बिहार के समस्तीपुर और सहरसा स्टेशन के पास 'उग्रतारा' का मंदिर है। तीसरा समस्तीपुर से पूर्व 61 किमी दूर सलौना रेलवे स्टेशन से 9 किमी दूर 'जयमंगला' देवी का मंदिर है। उक्त तीनों मंदिर को विद्वजन शक्तिपीठ मानते है। 18. रत्नावली शक्तिपीठ रत्नावली शक्तिपीठ का निश्चित्त स्थान अज्ञात है, किंतु बंगाल पंजिका के अनुसार यह तमिलनाडु के मद्रास में कहीं है। यहाँ सती का 'दायाँ कन्धा' गिरा था। यहाँ की शक्ति कुमारी तथा भैरव शिव हैं। 19. अम्बाजी शक्तिपीठ यहाँ माता सती का 'उदार' गिरा था। गुजरात, गुना गढ़ के गिरनार पर्वत के प्रथत शिखर पर माँ अम्बा जी का मंदिर ही शक्तिपीठ है। यहाँ माता सती को 'चंद्रभागा' और भगवान शिव को 'वक्रतुण्ड' के नाम से जाना जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि गिरिनार पर्वत के निकट ही सती का उर्द्धवोष्ठ गिरा था, जहाँ की शक्ति अवन्ती तथा भैरव लंबकर्ण है। 20. जालंधर शक्तिपीठ यहाँ माता सती का 'बायां स्तन' गिरा था। यहाँ सती को 'त्रिपुरमालिनी' और शिव को 'भीषण' के रूप में जाना जाता है। यह शक्तिपीठ पंजाब के जालंधर में स्थित है। इसे त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ भी कहते हैं। 21. रामगिरि शक्तिपीठ रामगिरि शक्तिपीठ की स्थिति को लेकर मतांतर है। कुछ मैहर, मध्य प्रदेश के 'शारदा मंदिर' को शक्तिपीठ मानते हैं, तो कुछ चित्रकूट के शारदा मंदिर को शक्तिपीठ मानते हैं। दोनों ही स्थान मध्य प्रदेश में हैं तथा तीर्थ हैं। रामगिरि पर्वत चित्रकूट में है। यहाँ देवी के 'दाएँ स्तन' का निपात हुआ था। 22. वैद्यनाथ का हार्द शक्तिपीठ शिव तथा सती के ऐक्य का प्रतीक झारखण्ड के गिरिडीह जनपद में स्थित वैद्यनाथ का 'हार्द' या 'हृदय पीठ' है और शिव का 'वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग' भी यहीं है। यह स्थान चिताभूमि में है। यहाँ सती का 'हृदय' गिरा था। यहाँ की शक्ति 'जयदुर्गा' तथा शिव 'वैद्यनाथ' हैं। 23. वक्त्रेश्वर शक्तिपीठ माता का यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के सैन्थया में स्थित है जहाँ माता का मन गिरा था। यहाँ की शक्ति महिषासुरमदिनी तथा भैरव वक्त्रानाथ हैं। यहाँ का मुख्य मंदिर वक्त्रेश्वर शिव मंदिर है। 24. कन्याकुमारी शक्तिपीठ यहाँ माता सती की 'पीठ' गिरी थी। माता सती को यहाँ 'शर्वाणी या नारायणी' तथा भगवान शिव को 'निमिष या स्थाणु' कहा जाता है। तमिलनाडु में तीन सागरों हिन्द महासागर, अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी के संगम स्थल पर कन्याकुमारी का मंदिर है। उस मंदिर में ही भद्रकाली का मंदिर शक्तिपीठ है। 25. बहुला शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के हावड़ा से 145 किलोमीटर दूर पूर्वी रेलवे के नवद्वीप धाम से 41 कि.मी. दूर कटवा जंक्शन से पश्चिम की ओर केतुग्राम या केतु ब्रह्म गाँव में स्थित है-'बहुला शक्तिपीठ', जहाँ सती के 'वाम बाहु' का पतन हुआ था। यहाँ की सती 'बहुला' तथा शिव 'भीरुक' हैं। 26. भैरवपर्वत शक्तिपीठ यह शक्तिपीठ भी 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ माता सती के कुहनी की पूजा होती है। इस शक्तिपीठ की स्थिति को लेकर विद्वानों में मतभेद है। कुछ उज्जैन के निकट शिप्रा नदी तट स्थित भैरवपर्वत को, तो कुछ गुजरात के गिरनार पर्वत के सन्निकट भैरवपर्वत को वास्तविक शक्तिपीठ मानते हैं। 27. मणिवेदिका शक्तिपीठ राजस्थान में अजमेर से 11 किलोमीटर दूर पुष्कर एक महत्त्वपूर्ण तीर्थ स्थान है। पुष्कर सरोवर के एक ओर पर्वत की चोटी पर स्थित है- 'सावित्री मंदिर', जिसमें माँ की आभायुक्त, तेजस्वी प्रतिमा है तथा दूसरी ओर स्थित है 'गायत्री मंदिर' और यही शक्तिपीठ है। जहाँ सती के 'मणिबंध' का पतन हुआ था। 28. प्रयाग शक्तिपीठ तीर्थराज प्रयाग में माता सती के हाथ की 'अँगुली' गिरी थी। यहाँ तीनों शक्तिपीठ की माता सती 'ललिता देवी' एवं भगवान शिव को 'भव' कहा जाता है। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में स्थित है। लेकिन स्थानों को लेकर मतभेद इसे यहाँ अक्षयवट, मीरापुर और अलोपी स्थानों में गिरा माना जाता है। ललिता देवी के मंदिर को विद्वान शक्तिपीठ मानते है। शहर में एक और अलोपी माता ललिता देवी का मंदिर है। इसे भी शक्तिपीठ माना जाता है। निश्चित निष्कर्ष पर पहुँचना कठिन है। 29. विरजा शक्तिपीठ उत्कल (उड़ीसा) में माता सती की 'नाभि' गिरी थी। यहाँ माता सती को 'विमला' तथा भगवान शिव को 'जगत' के नाम से जाना जाता है। उत्कल शक्तिपीठ उड़ीसा के पुरी और याजपुर में माना जाता है। पुरी में जगन्नाथ जी के मंदिर के प्रांगण में ही विमला देवी का मंदिर है। यही मंदिर शक्तिपीठ है। 30. कांची शक्तिपीठ यहाँ माता सती का 'कंकाल' गिरा था। देवी यहाँ 'देवगर्मा' और भगवान शिव का 'रूद्र' रूप है। तमिलनाडु के कांचीपुरम में सप्तपुरियों में एक काशी है। वहाँ का काली मंदिर ही शक्तिपीठ है। 31. कालमाधव शक्तिपीठ कालमाधव में सती के 'वाम नितम्ब' का निपात हुआ था। इस शक्तिपीठ के बारे कोई निश्चित स्थान ज्ञात नहीं है। परन्तु, यहाँ माता का 'वाम नितम्ब' का निपात हुआ था।यहाँ की सति 'काली' तथा शिव 'असितांग' हैं। 32. शोण शक्तिपीठ मध्य प्रदेश के अमरकण्टक के नर्मदा मंदिर में सती के 'दक्षिणी नितम्ब' का निपात हुआ था और वहाँ के इसी मंदिर को शक्तिपीठ कहा जाता है। यहाँ माता सती 'नर्मदा' या 'शोणाक्षी' और भगवान शिव 'भद्रसेन' कहलाते हैं। 33. कामाख्या शक्तिपीठ यहाँ माता सती की 'योनी' गिरी थी। असम के कामरूप जनपद में असम के प्रमुख नगर गुवाहाटी (गौहाटी) के पश्चिम भाग में नीलाचल पर्वत/कामगिरि पर्वत पर यह शक्तिपीठ 'कामाख्या' के नाम से सुविख्यात है। यहाँ माता सती को 'कामाख्या' और भगवान शिव को 'उमानंद' कहते है। जिनका मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी के मध्य उमानंद द्वीप पर स्थित है। 34. जयंती शक्तिपीठ भारत के पूर्वीय भाग में स्थित मेघालय एक पर्वतीय राज्य है और गारी, खासी, जयंतिया यहाँ की मुख्य पहाड़ियाँ हैं। सम्पूर्ण मेघालय पर्वतों का प्रान्त है। यहाँ की जयंतिया पहाड़ी पर ही 'जयंती शक्तिपीठ' है, जहाँ सती के 'वाम जंघ' का निपात हुआ था। 35. मगध शक्तिपीठ बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटनेश्वरी देवी को ही शक्तिपीठ माना जाता है जहाँ माता का दाहिना जंघा गिरा था। यहाँ की शक्ति सर्वानन्दकरी तथा भैरव व्योमकेश हैं। यह मंदिर पटना सिटी चौक से लगभग 5 कि.मी. पश्चिम में महाराज गंज (देवघर) में स्थित है। 36. त्रिस्तोता शक्तिपीठ यहाँ के बोदा इलाके के शालवाड़ी गाँव में तिस्ता नदी के तट पर 'त्रिस्तोता शक्तिपीठ' है, जहाँ सती के 'वाम-चरण' का पतन हुआ था। यहाँ की सती 'भ्रामरी' तथा शिव 'ईश्वर' हैं। 37. त्रिपुर सुन्दरी शक्तिपीठ त्रिपुरा में माता सती का 'दक्षिण पद' गिरा था। यहाँ माता सती 'त्रिपुरासुन्दरी' तथा भगवन शिव 'त्रिपुरेश' कहे जाते हैं। त्रिपुरा राज्य के राधा किशोरपुर ग्राम से 2 किमी दूर दक्षिण-पूर्व के कोण पर, पर्वत के ऊपर यह शक्तिपीठ स्थित है। 38. विभाष शक्तिपीठ यहाँ माता सती का 'बायाँ टखना' गिरा था। यहाँ माता सती 'कपालिनी' अर्थात 'भीमरूपा' और भगवन शिव 'सर्वानन्द' कपाली है। पश्चिम बंगाल के पासकुडा स्टेशन से 24 किमी दूर मिदनापुर में तमलूक स्टेशन है। वहाँ का काली मंदिर ही यह शक्तिपीठ है। 39. देवीकूप शक्तिपीठ यहाँ माता सती का 'दाहिना टखना' गिरा था। यहाँ माता सती को 'सावित्री' तथा भगवन शिव को 'स्याणु महादेव' कहा जाता है। हरियाणा राज्य के कुरुक्षेत्र नगर में 'द्वैपायन सरोवर' के पास कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ स्थित है, जिसे 'श्रीदेवीकूप भद्रकाली पीठ' के नाम से जाना जाता है। 40. युगाद्या शक्तिपीठ 'युगाद्या शक्तिपीठ' बंगाल के पूर्वी रेलवे के वर्धमान जंक्शन से 39 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में तथा कटवा से 21 किमी. दक्षिण-पश्चिम में महाकुमार-मंगलकोट थानांतर्गत क्षीरग्राम में स्थित है- युगाद्या शक्तिपीठ, जहाँ की अधिष्ठात्री देवी हैं- 'युगाद्या' तथा 'भैरव' हैं- क्षीर कण्टक। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार यहाँ माता सती के 'दाहिने चरण का अँगूठा' गिरा था। 41. विराट शक्तिपीठ यह शक्तिपीठ राजस्थान की राजधानी गुलाबी नगरी जयपुर से उत्तर में महाभारतकालीन विराट नगर के प्राचीन ध्वंसावशेष के निकट एक गुफा है, जिसे 'भीम की गुफा' कहते हैं। यहीं के वैराट गाँव में शक्तिपीठ स्थित है, जहाँ सती के 'दायें पाँव की उँगलियाँ' गिरी थीं। 42. कालीघाट काली मंदिर यहाँ माता सती की 'शेष उँगलियाँ' गिरी थी। यहाँ माता सती को 'कलिका' तथा भगवान शिव को 'नकुलेश' कहा जाता है। पश्चिम बंगाल, कलकत्ता के कालीघाट में काली माता का सुविख्यात मंदिर ही यह शक्तिपीठ है। 43. मानस शक्तिपीठ यहाँ माता सती की 'दाहिनी हथेली' गिरी थी। यहाँ माता सती को 'दाक्षायणी' तथा भगवान शिव को 'अमर' कहा जाता है। यह शक्तिपीठ तिब्बत में मानसरोवर के तट पर स्थित है। 44. लंका शक्तिपीठ श्रीलंका में, जहाँ सती का 'नूपुर' गिरा था। यहाँ की शक्ति इन्द्राक्षी तथा भैरव राक्षसेश्वर हैं। लेकिन, उस स्थान ज्ञात नहीं है कि श्रीलंका के किस स्थान पर गिरे थे। 45. गण्डकी शक्तिपीठ नेपाल में गण्डकी नदी के उद्गमस्थल पर 'गण्डकी शक्तिपीठ' में सती के 'दक्षिणगण्ड' का पतन हुआ था। यहाँ शक्ति `गण्डकी´ तथा भैरव `चक्रपाणि´ हैं। 46. गुह्येश्वरी शक्तिपीठ नेपाल में 'पशुपतिनाथ मंदिर' से थोड़ी दूर बागमती नदी की दूसरी ओर 'गुह्येश्वरी शक्तिपीठ' है। यह नेपाल की अधिष्ठात्री देवी हैं। मंदिर में एक छिद्र से निरंतर जल बहता रहता है। यहाँ की शक्ति 'महामाया' और शिव 'कपाल' हैं। 47. हिंगलाज शक्तिपीठ यहाँ माता सती का 'ब्रह्मरंध्र' गिरा था। यहाँ माता सती को 'भैरवी/कोटटरी' तथा भगवन शिव को 'भीमलोचन' कहा जाता है। यहाँ शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त के हिंगलाज में है। हिंगलाज कराची से 144 किमी दूर उत्तर-पश्चिम दिशा में हिंगोस नदी के तट पर है। यही एक गुफा के भीतर जाने पर माँ आदिशक्ति के ज्योति रूप के दर्शन होते है। 48. सुंगधा शक्तिपीठ बांग्लादेश के बरीसाल से 21 किलोमीटर उत्तर में शिकारपुर ग्राम में 'सुंगधा' नदी के तट पर स्थित 'उग्रतारा देवी' का मंदिर ही शक्तिपीठ माना जाता है। इस स्थान पर सती की 'नासिका' का निपात हुआ था। 49. करतोयाघाट शक्तिपीठ यहाँ माता सती का 'वाम तल्प' गिरा था। यहाँ माता 'अपर्णा' तथा भगवन शिव 'वामन' रूप में स्थापित है। यह स्थल बांग्लादेश में है। बोगडा स्टेशन से 32 किमी दूर दक्षिण-पश्चिम कोण में भवानीपुर ग्राम के बेगड़ा में करतोया नदी के तट पर यह शक्तिपीठ स्थित है। 50. चट्टल शक्तिपीठ चट्टल में माता सती की 'दक्षिण बाहु' गिरी थी। यहाँ माता सती को 'भवानी' तथा भगवन शिव को 'चंद्रशेखर' कहा जाता है। बंग्लादेश में चटगाँव से 38 किमी दूर सीताकुंड स्टेशन के पास चंद्रशेखर पर्वत पर भवानी मंदिर है। यही 'भवानी मंदिर' शक्तिपीठ है। 51. यशोर शक्तिपीठ यह शक्तिपीठ वर्तमान बांग्लादेश में खुलना ज़िले के जैसोर नामक नगर में स्थित है। यहाँ सती की 'वाम' (जांघ के नीचे और पैर के ऊपर का हिस्सा) का निपात हुआ था। *जय माता की*🚩🙏🌹

+266 प्रतिक्रिया 62 कॉमेंट्स • 226 शेयर

🌷🌹🌷🙏🌷🌹🌷 🎁 *क्या सत्य नही* 📝 *एक बूढ़ी हर दिन मंदिर के सामने भीख मांगती थी। एक बार मंदिर से किसी साधु ने उस बुढिया को देखकर इस प्रकार पूछा- “आप अच्छे घर से आई हुई लगती है। आपका बेटा अच्छा लड़का है ना? फिर यहां हर दिन क्यों खड़ी होती है?”* *उस बुढ़िया ने कहा- “बाबा, आप तो जानते हैं, मेरा एक ही पुत्र है। बहुत साल पहले ही मेरे पति का स्वर्गवास हो गया। मेरा बेटा आठ महीने पहले मुझे छोड़कर नौकरी के लिए चला गया। जाते समय वह मेरे खर्चे के लिए कुछ रुपए देकर गया। वह सब मेरी आवश्यकता के लिए खर्च हो गया। मैं भी बूढ़ी हो चली हूँ। परिश्रम करके धन नहीं कमा सकती। इसीलिए देव मंदिर के सामने भीख मांग रही हूँ।* *साधु ने कहा- “क्या तुम्हारा बेटा अब पैसे नहीं भेजता?* *बुढिया ने कहा- “मेरा बेटा हर महीने एक एक रंगबिरंगा कागज भेजता है। ‌ मैं उसको चूम कर अपने बेटे के स्मरण में उसे दीवार पर चिपकाती हूं।* *साधु ने उसके घर जाकर देखने को निश्चय किया। अगले दिन वह उसके घर में दीवार को देख कर आश्चर्यचकित हो गया। उस दीवार पर आठ धनादेश पत्र चिपका के रखे थे। एक एक चेक् 50000 रुपये राशि का था।* *वह बुढिया पढ़ी लिखी नहीं थी। इसीलिए वह नहीं जानती थी कि उसके पास कितनी संपत्ति है। वह साधु उस विषय को जानकर उस बुढ़िया को उन धनादेशों का मूल्य समझाया।* *हम भी उसी बुढ़ीया की तरह हैं। हमारे पास जो धर्म के ग्रंथ है, उसका मूल्य नहीं जानकर उसे माथे से लगाकर अपने घर में सुरक्षित रखते हैं । उसकी उपयोगिता को समझ नही पाते ।* *अंधकार है वहां जहां आदित्य नही* *शमशान है वह देश जहां साहित्य नही ।* ।। महादेव ।।

+314 प्रतिक्रिया 72 कॉमेंट्स • 205 शेयर

+172 प्रतिक्रिया 70 कॉमेंट्स • 123 शेयर
Archana Singh Feb 26, 2021

+164 प्रतिक्रिया 69 कॉमेंट्स • 153 शेयर
Archana Singh Feb 26, 2021

+146 प्रतिक्रिया 42 कॉमेंट्स • 100 शेयर
RAJ RATHOD Feb 26, 2021

+303 प्रतिक्रिया 73 कॉमेंट्स • 243 शेयर
Mamta Chauhan Feb 26, 2021

+270 प्रतिक्रिया 77 कॉमेंट्स • 81 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB