AARYAM
AARYAM Nov 10, 2017

साधक जीवन की कीमिया :आर्यम

https://youtu.be/fZhI5-y5m8w

*आर्यम-सूत्र*

*Secrets of Sadhak with Special reference of Durga Darshati and Bajrang Ban?*
*साधना के क्षेत्र में विशेष सावधानियां-संदर्भ श्री दुर्गा सप्तशती और बजरंग बाण*

प्रश्न- नवीन देव (गाजियाबाद)

बाज़ार में आमतौर पर उपलब्ध पूजा-पाठ संबंधी पुस्तकें जो बड़ी आसानी से बहुत कम दामों में सामान्यजन को उपलब्ध हो जाती हैं और बिना किसी गुरु के निर्देशन के हम उनका पाठन-वाचन करते हैं, भाव हमारा बहुत पवित्र होता है बावजूद उसके हम अक्सर प्रभु कृपा से च्युत होतें हैं! हर कार्य को सही ढंग से करने से ही परिणाम प्राप्त किया जा सकता है।उदाहरण के तौर पर इस बात को हम इस तरह समझ सकते हैं कि- एक व्यक्ति जब वह सैनिक बनता है तो उसे ट्रेंनिग दी जाती है जिसके तहत उसे सुरक्षा के कई गुण सिखलाए जाते हैं और अस्त्र-शस्त्र चलाने की विधियां सिखलाई जाती है और वह जिनसे ट्रेनिंग लेता है वह उसके गुरु ही होते हैं। बड़ी सी बड़ी बातों में प्रशिक्षण एक महत्वपूर्ण व आवश्यक कड़ी के रूप काम आता है। ठीक उसी प्रकार का नियम भक्ति व आध्यात्म जगत में भी एक कार्य करता है।श्री दुर्गा-सप्तशती में पूरे 700 मंत्र है जिन्हें पूरा किया गया है लेकिन इसमें कुछ ऐसे मंत्र भी हैं जो सर्वमान्य तरीके से कोई भी व्यक्ति उनका परायण कर सकता है जिससे उसे कोई हानि भी न हो और वह अपना मनवांछित प्राप्त कर सके किन्तु यदि कोई इन मंत्रों के माध्यम से किसी की हानि या अहित करना चाहता हो तो उसे इससे बचाया जा सके। उसी तरह बजरंग-बाण में जो मंत्र निकाले गए हैं वे तंत्रोक्त हैं, तंत्र के प्रयोग में हैं इसलिए जिन चीजों की हमें आवश्यकता या उनका उपयोग ही नही तो फिर उनका प्रयोग करना उचित नही है। औषधि का महत्व तो अस्वस्थता की स्थिति में ही होता है यदि स्वस्थ होते हुए भी दवाई ली जाती रहे तो भी व्यक्ति के बीमार होने की आशंका बनी रहती है। प्रकृति की व्यवस्था भी उसी तरह है कि जिनको आवश्यकता है उनके पास तक वह चीज पहुंच जाती है और जिन्हें उसकी जरूरत नही वे उस चीज से दूर रहते हैं। इस पूरे परिप्रेक्ष्य में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि मंत्र व तंत्र किसी मनोरंजन व खेल का हिस्सा नही हैं और न ही प्रयोग करने का विषय। मनुष्य की दैनिक दिनचर्या के प्रयोजन का हिस्सा भी नही हैं।इसलिए ही सुपात्र तक इन मंत्रों को पहुंचाना और इनके प्रयोग की सही विधियों को उन पर उजागर करने के ध्येय से ही बाज़ार में आमतौर पर उपलब्ध इन पुस्तिकाओं में सम्पूर्ण मंत्र नही दिए गए होते हैं क्योंकि उतने की आवश्यकता व उनके पास उसकी महत्ता ही नही होती किन्तु सच्चे साधकों के पास सबकुछ पूर्ण उपलब्ध है! साथ ही साथ यही अपूर्णता ही सच्चे ज्ञान पिपासु को सच्चे साधक के पास भी पहुंचाने का हेतु भी है। अधूरापन ही पूर्णता के मार्ग का सेतु बनता है जिन्हें वैज्ञानिक बनना है उन्हें गैलीलियो को, अरस्तु को, प्लूटो को, आर्कमिडीज को, आइंस्टीन को सभी को पढ़ना ही होगा तभी वह आविष्कारक बन सकता है जिन्हें नही बनना उन्हें पढ़ने की भी आवश्यकता ही क्या...।
जारी...

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AARYAM Apr 5, 2020

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Umesh Kumar Gupta Apr 5, 2020

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Sadhna Pandey Apr 5, 2020

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Bhamsa Banna Apr 5, 2020

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Sadhna Pandey Apr 5, 2020

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Nimeshsharma Apr 5, 2020

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Arun Vishwakarma Apr 5, 2020

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Pawan Saini Apr 5, 2020

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baldev viskrma Apr 5, 2020

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