Rakesh Kumar Gupta
Rakesh Kumar Gupta Jun 4, 2018

Lession to learn to All Viewers ( God Creation - Animals is more sensitive than Human . Nature best Creations , Live jointly , Feed jointly

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Rakesh Kumar Gupta Jun 6, 2018
jyoti ji Apko meri post pasand uski leye Naman . alway keep Smiling & have a plesant day

*⛳सनातन-धर्म की जय,हिंदू ही सनातनी है✍🏻* *👉🏻लेख क्र.-सधस/२०७७/माघ/शु./१४-३२०६* 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ *⛳🕉️जय श्री बद्रीनाथ जी🕉️⛳* *⛳हिंदू ★रीति★रिवाज ~भाग~५६⛳* 💦🍃💦🍃💦🍃💦🍃💦🍃💦🍃 *⚜️ॐ माँ नर्मदा की महिमा ॐ🚩* *🕉️🚩"त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवी नर्मदे नर्मदा सरितां वरा नर्मदा को सरितां वरा"* क्यों माना जाता है? *🌸↪️नर्मदा माता की असंख्य विशेषताओ में श्री "नर्मदा की कृपा दृष्टि" से दिखे कुछ कारण यह है :-* *नर्मदा सरितां वरा -नर्मदा नदियों में सर्वश्रेष्ठ हैं !* *नर्मदा तट पर दाह संस्कार के बाद, गंगा तट पर इसलिए नहीं जाते हैं कि, नर्मदा जी से मिलने गंगा जी स्वयं आती है। नर्मदा नदी पर ही नर्मदा पुराण है ! अन्य नदियों का पुराण नहीं हैं ! नर्मदा अपने उदगम स्थान अमरकंटक में प्रकट होकर, नीचे से ऊपर की और प्रवाहित होती हैं, जबकि जल का स्वभाविक हैं ऊपर से नीचे बहना ।नर्मदा जल में प्रवाहित लकड़ी एवं अस्थियां कालांतर में पाषण रूप में परिवर्तित हो जाती हैं। नर्मदा अपने उदगम स्थान से लेकर समुद्र पर्यन्त उतर एवं दक्षिण दोनों तटों में,दोनों और सात मील तक पृथ्वी के अंदर ही अंदर प्रवाहित होती हैं , पृथ्वी के उपर तो वे मात्र दर्शनार्थ प्रवाहित होती हैं | (उलेखनीय है कि भूकंप मापक यंत्रों ने भी पृथ्वी की इस दरार को स्वीकृत किया हैं ) नर्मदा से अधिक तीव्र जल प्रवाह वेग विश्व की किसी अन्य नदी का नहीं है।नर्मदा से प्रवाहित जल घर में लाकर प्रतिदिन जल चढाने से बढ़ता है।* *नर्मदा तट में जीवाश्म प्राप्त होते हैं।* *(अनेक क्षेत्रों के वृक्ष आज भी पाषाण रूप में परिवर्तित देखे जा सकते हैं)।नर्मदा से प्राप्त शिवलिंग ही देश के समस्त शिव मंदिरों में स्थापित हैं क्योकि ,शिवलिंग केवल नर्मदा में ही प्राप्त होते हैं अन्यत्र नहीं।* 🍃🌺नर्मदा में ही बाणलिंग, शिव एवं नर्मदेश्वर (शिव ) प्राप्त होते है, अन्यत्र नहीं।नर्मदा के किनारे ही नागमणि वाले मणि नागेश्वर सर्प रहते हैं अन्यत्र नहीं। नर्मदा का हर कंकड़ शंकर होता है ,उसकी प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती क्योकि , वह स्वयं ही प्रतिष्ठित रहता है। नर्मदा में वर्ष में एक बार गंगा आदि समस्त नदियाँ स्वयं ही नर्मदा जी से मिलने आती हैं। नर्मदा राज राजेश्वरी हैं वे कहीं नहीं जाती हैं।नर्मदा में समस्त तीर्थ वर्ष में एक बार नर्मदा के दर्शनार्थ स्वयं आते हैं। नर्मदा के किनारे तटों पर ,वे समस्त तीर्थ अदृश्य रूप में स्थापित है जिनका वर्णन किसी भी पुराण, धर्मशास्त्र या कथाओं में आया हैं | नर्मदा का प्रादुर्भाव स्रष्टि के प्रारम्भ में सोमप नामक पितरों ने श्राद्ध के लिए किया था। नर्मदा में ही श्राद्ध की उत्पति एवं पितरो द्वारा ब्रह्माण्ड का प्रथम श्राद्ध हुआ था अतः नर्मदा श्राद्ध जननी हैं | नर्मदा पुराण के अनुसार नर्मदा ही एक मात्र ऐसी देवी (नदी )हैं ,जो सदा हास्य मुद्रा में रहती है |नर्मदा तट पर ही सिद्धि प्राप्त होती है। ⚜️🌸ब्रम्हाण्ड के समस्त देव, ऋषि, मुनि, मानव (भले ही उनकी तपस्या का क्षेत्र कही भी रहा हो) सिद्धि प्राप्त करने के लिए नर्मदा तट पर अवश्य आये है। नर्मदा तट पर सिद्धि पाकर ही वे विश्व प्रसिद्ध हुए। नर्मदा (प्रवाहित ) जल में नियमित स्नान करने से असाध्य चर्मरोग मिट जाता है। नर्मदा (प्रवाहित ) जल में तीन वर्षों तक ,प्रत्येक रविवार को नियमित स्नान करने से श्वेत कुष्ठ रोग मिट जाता हैं। किन्तु ,कोई भी रविवार खंडित नहीं होना चाहिए। नर्मदा स्नान से समस्त क्रूर ग्रहों की शांति हो जाती है। नर्मदा तट पर ग्रहों की शांति हेतु किया गया जप पूजन, हवन,तत्काल फलदायी होता है। *🕉️⚜️नर्मदा अपने भक्तों को जीवन काल में दर्शन अवश्य देती हैं ,भले ही उस रूप में हम माता को पहचान न सके।माँ नर्मदा की कृपा से मानव अपने कार्य क्षेत्र में ,एक बार उन्नति के शिखर पर अवश्य जाता है।* *नर्मदा कभी भी मर्यादा भंग नहीं करती है ,वे वर्षा काल में पूर्व दिशा से प्रवाहित होकर , पश्चिम दिशा के ओर ही जाती हैं। अन्य नदियाँ ,वर्षा काल में अपने तट बंध तोडकर ,अन्य दिशा में भी प्रवाहित होने लगती हैं।नर्मदा पर्वतो का मान मर्दन करती हुई पर्वतीय क्षेत्रमें प्रवाहित होकर जन ,धन हानि नहीं करती हैं (मानव निर्मित बांधों को छोडकर )अन्य नदियाँ मैदानी , रितीले भूभाग में प्रवाहित होकर बाढ़ रूपी विनाशकारी तांडव करती हैं।नर्मदा ने प्रकट होते ही अपने अद्भुत आलौकिक सौन्दार्य से समस्त सुरों ,देवो को चमत्कृत करके खूब छकाया था। नर्मदा की चमत्कारी लीला को देखकर शिव पर्वती हसते -हसते हाफने लगे थे।नेत्रों से अविरल आनंदाश्रु प्रवाहित हो रहे थे। उन्होंने नर्मदा का वरदान पूर्वक नामकरण करते हुए कहा - देवी तुमने हमारे ह्रदय को अत्यंत हर्षित कर दिया, अब पृथ्वी पर इसी प्रकार नर्म (हास्य ,हर्ष ) दा(देती रहो ) अतः आज से तुम्हारा नाम नर्मदा होगा।नर्मदा के किनारे ही देश की प्राचीनतम -कोल ,किरात ,व्याध ,गौण ,भील, म्लेच आदि जन जातियों के लोग रहा करते थे ,वे बड़े शिव भक्त थे।* 🍁🌹नर्मदा ही विश्व में एक मात्र ऐसी नदी हैं जिनकी परिक्रमा का विधान हैं, अन्य नदियों की परिक्रमा नहीं होती हैं।नर्मदा का एक नाम दचिन गंगा है।नर्मदा मनुष्यों को देवत्व प्रदान कर अजर अमर बनाती हैं। नर्मदा में ६० करोड़, ६०हजार तीर्थ है, (कलियुग में यह प्रत्यक्ष द्रष्टिगोचर नहीं होते ) नर्मदा चाहे ग्राम हो या वन, सभी स्थानों में पवित्र हैं जबकि गंगा कनखल में एवं सरस्वती कुरुक्षेत्र में ही ,अधिक पवित्र मानी गई हैं।नर्मदा दर्शन मात्र से ही प्राणी को पवित्र कर देती हैं जबकि ,सरस्वती तीन दिनों तक स्नान से, यमुना सात दिनों तक स्नान से गंगा एक दिन के स्नान से प्राणी को पवित्र करती हैं। 🌺🥀नर्मदा पितरों की भी पुत्री हैं अतः नर्मदा में किया हुआ श्राद्ध अक्षय होता है।नर्मदा शिव की इला नामक शक्ति हैं।नर्मदा को नमस्कार कर नर्मदा का नामोच्चारण करने से सर्प दंश का भय नहीं रहता है।नर्मदा के इस मंत्र का जप करने से विषधर सर्प का जहर उतर जाता है.। *नर्मदाये नमः प्रातः, नर्मदाये नमो निशि।* *नमोस्तु नर्मदे तुम्यम, त्राहि माम विष सर्पतह ।।* (प्रातः काल नर्मदा को नमस्कार, रात्रि में नर्मदा को नमस्कार, हे नर्मदा तुम्हे नमस्कार है, मुझे विषधर सापों से बचाओं (साप के विष से मेरी रक्षा करो ) नर्मदा आनंद तत्व ,ज्ञान तत्व सिद्धि तत्व ,मोक्ष तत्व प्रदान कर , शास्वत सुख शांति प्रदान करती हैं। नर्मदा का रहस्य कोई भी ज्ञानी विज्ञानी नहीं जान सकता है। नर्मदा अपने भक्तो पर कृपा कर स्वयं ही दिव्य दृष्टि प्रदान करती है। नर्मदा का कोई भी दर्शन नहीं कर सकता है नर्मदा स्वयं भक्तों पर कृपा करके उन्हें बुलाती है। 🌷💐नर्मदा के दर्शन हेतु समस्त अवतारों में भगवान् स्वयं ही उनके निकट गए थे | नर्मदा सुख ,शांति , समृद्धि प्रदायनी देवी हैं। नर्मदा वह अम्र तत्व हैं ,जिसे पाकर मनुष्य पूर्ण तृप्त हो जाता है। नर्मदा देव एवं पितृ दोनो कार्यों के लिए अत्यंत पवित्र मानी गई हैं।नर्मदा का सारे देश में श्री सत्यनारायण व्रत कथा के रूप में इति श्री रेवा खंडे कहा जाता है।श्री सत्यनारायण की कथा अर्थात घर बैठे नर्मदा का स्मरण। नर्मदा में सदाशिव, शांति से वास करते हैं क्योंकि जहाँ नर्मदा हैं और जहां शिव हैं वहां नर्मदा हैं। ⚜️🌻नर्मदा शिव के साथ ही यदि अमरकंटक की युति भी हो तो साधक को लक्ष की प्राप्ति होती हैं। नर्मदा के किनारे सरसती के समस्त खनिज पदार्थ हैं नर्मदा तट पर ही भगवान धन्वन्तरी की समस्त औषधियाँ प्राप्त होती हैं। नर्मदा तट पर ही त्रेता युग में भगवान् श्री राम द्वारा प्रथम वार कुम्वेश्व तीर्थ की स्थापना हुई थी जिसमें सह्र्स्ती के समस्त तीर्थों का जल , ऋषि मुनियों द्वारा कुम्भो ,घंटों में लाया गया था। नर्मदा के त्रिपुरी तीर्थ देश का केंद्र बिंदु भी था नर्मदा नदी ब्रम्हांड के मध्य भाग में प्रवाहित होती हैं नर्मदा हमारे शरीर रूपी ब्रह्माण्ड के मध्य भाग (ह्रदय ) को पवित्र करें तो , अष्टदल कमल पर कल्याणकारी सदा शिव स्वयमेव आसीन हो जावेगें। 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ *जनजागृति हेतु लेख प्रसारण अवश्य करें*🙏🏻 ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय।। *माता लक्ष्मी की जय🙏🏻🚩* समिति के सामाजिक माध्यमों से जुड़े👇🏻 :- https://bit.ly/3qKE1OS https://t.me/JagratiManch http://bit.ly/सनातनधर्मरक्षकसमिति _*⛳⚜️सनातन धर्मरक्षक समिति*_⚜⛳

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M.S.Chauhan Feb 26, 2021

*शुभ रात्रि वंदन* *जय श्रीकृष्ण गोविंद* *जय श्री राधे राधे* *आपका हर पल शुभ हो* *बहुत सुन्दर पोस्ट है* *एक बार जरूर पढ़ें जी* *भागवत रहस्य- गोपी* *गोपियों के दो मुख्य भेद बताये हैं* - *(१) नित्यसिध्धा गोपियाँ और (२) साधनसिध्धा गोपियाँ।* 👉 *(१) नित्यसिध्धा गोपियाँ* वह हैं, जो श्रीकृष्ण के साथ गोलोक से आईं हैं... ललिता, विशाखा,चंपकलता,चित्रा,रंगदेवी, सुदेवी, इंदुलेखा, तुंगविद्या इत्यादि... 👉 *(२) साधनसिध्धा गोपियाँ* के कई भेद हैं - 💞 *(१) श्रुतिरूपा गोपियाँ -* वेद के मन्त्र गोपी बनकर आये हैं। वेदों ने ईश्वर का वर्णन तो बहुत किया है फिर भी उन्हें अनुभव नहीं हो पाया। ईश्वर केवल वाणी का नहीं... स्मरण,चिंतन का विषय है... संसार का विस्मरण हुए बिना ईश्वर से साक्षात्कार नहीं हो पाता । तभी तो वेदभिमानी रुचायें गोकुल में गोपी बनकर आईं हैं। 💞 *(२)ऋषिरूपा गोपियाँ -* जीव का सबसे बड़ा शत्रु काम है। काम से लोभ या क्रोध उत्पन्न होता है। ऋषियों ने वर्षो तक तपश्चर्या की - फिर भी मन में से काम नहीं गया। इस काम को श्रीकृष्ण को अर्पण करने के पश्चात गोपियों का रूप लेकर आये हैं। दंडकारण्य के ऋषियों ने गोपी बनकर आये... भगवान श्रीराम जी ने दंडकारण्य के ऋषियों को ये वरदान दिया था कि- त्रेतायुग में मैं एक पत्नीव्रत धारी हुं...द्वापर युग में हम सब मिलेंगें... तब मैं सबको प्रेमदान दुंगा... 💞 *(३)संकीर्णरूपा गोपियाँ -* ईश्वर के मनोहर स्वरुप को निहारने और उन्हें पाने की इच्छा वाली स्त्रियाँ गोपियाँ बनकर आई हैं। ये भी बहुत बडे भक्त हैं...जनकपुर के नारीयां जो श्रीराम जी को देखते ही सुधबुध खो बैठे...मन ही मन पाने की इच्छा रखने वाली नारीयां गोपी बनकर आयीं...कुछ देवकन्याएं भी गोपी बन कर आयीं... जो श्रीकृष्ण भक्ति किये थे... 💞 *(४)अन्यपूर्वा गोपियाँ -* संसार के सुख भुगतने के बाद जब संसार सुख से विरक्त हो गये और प्रभु को पाने की इच्छा जाग्रत हुआ,और श्रीकृष्ण का भक्ति निष्काम भाव से करने वाले भक्तगण गोपियाँ बनकर आई हैं। 💞 *(५) अनन्यपूर्वा गोपियाँ -* जन्म से ही प्रभु से प्रेम,पूर्ण वैरागी भक्त गोपियाँ बनकर आये हैं। अनेक भोग भुगतने के पश्चात भी श्रीकृष्ण निष्काम हैं - उन्हें भोगो में तनिक भी आसक्ति नहीं है। वो तो आसक्ति मिटाने वाले हैं। श्रीकृष्ण का ध्यान करने वाला व्यक्ति स्वयं निष्काम हो जाता है। कामभाव से भी जो श्रीकृष्ण का चिंतन करता है... भक्ति करता है... परिणाम स्वरूप वह भी निष्कामी बनता है। *चीरहरण लीला के समय श्रीकृष्ण ने गोपियों से प्रतिज्ञा किया था कि योग्य समय आने पर वे रासलीला में मिलेंगे*। *जिसे भगवान अपनाते हैं, अंगीकार करते हैं उसे ही रासलीला में प्रवेश मिलता है*। *गोकुल की सभी गोपियाँ रासलीला में गई नहीं हैं। जो अधिकारी थे, उनको रासलीला में प्रवेश मिला... शरदपूर्णिमा ही वो रात्रि थी,जब गोपीयों को महारास रस मिला...प्रेमदान मिला... इसमें भगवान शंकर जी... माता पार्वती जी भी गोपी बनकर महारास रस प्राप्त किये..*. *राधे राधे*🙏🚩 🌷💐🌿🙏🌿💐🌷

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Ravi Kumar Taneja Feb 26, 2021

🕉🙏🌹🙏🌹🙏🕉 सर्व मंगल मागल्ये शिवे सर्वाथ साघिके शरणये त्रयमबके गौरी नारायणी नमोस्तुते 🕉🙏🌹🙏🌹🙏🕉 🕉श्री अम्बे देवी नमो नम:🕉 माता रानी की कृपा आप पर हमेशा बनी रहे✡🦋🙏🌹🙏🌹🙏🦋✡ माँ जगदम्बे का आशीर्वाद सपरिवार आपको मिले 🙏🌻🙏 🌹🌹🌹आपकी सब मनोकामना माता रानी पूरी करे 🌹🌹🌹 🌷आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो 🌷 🕉🦚🦢🙏🏵🙏🏵🙏🦢🦚🕉 *"भाग्य बारिश का पानी है* *और..* *परिश्रम कुंए का जल*... *बारिश में नहाना आसान तो है*, *लेकिन...* *रोज नहाने के लिए हम बारिश* *के सहारे नहीं रह सकते...!!* *इसी प्रकार भाग्य से कभी-कभी* *चीजे आसानी से मिल जाती है,* *किन्तु हमेशा भाग्य के भरोसे नहीं जी* *सकते...!!* 🔯*कर्म*🔯 ही असली भाग्य है🕉🦚🦢🙏💐🙏💐🙏🦢🦚🕉 शुभ प्रभात वंदन🔯🙏🌺🙏🌺🙏🔯

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🔥Raju Rai.🔥 Feb 26, 2021

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Ravi Kumar Taneja Feb 25, 2021

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Braj Kishor Dwivedi Feb 26, 2021

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