Surykant Nagpure
Surykant Nagpure May 16, 2017

Surykant Nagpure ने यह पोस्ट की।

#धार्मिक_गीत #फ़िल्मी_तर्ज #श्रीकृष्ण #वीडियो

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🌹🙏❤️ मातृ दिवस ❤️🙏🌹 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 😃🌺🌲⛲शुभ रविवार⛲🌲🌺 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ 🌞🌲🚩ॐ सूर्य देवता नमः 🌞🌲🚩 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 🌅🌀🌻सुप्रभात🌻🌀🌅 🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼 🙏आपको सपरिवार मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं🙏 🌹आप और आपके पूरे परिवार पर ममता मयी मां और भगवान सूर्यदेव की आशीर्वाद हमेशा बनी रहे 🙏 🌀आपका दिन शुभ और मंगलमय हो 🌀 ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ 💮वेदों में मिलती है मां की महिमा💮 ***************************** ❤️वेदों में'मां'कोअंबा','अम्बिका','दुर्गा','देवी','सरस्वती',' शक्ति','ज्योति','पृथ्वी' आदि नामों से संबोधित किया गया है। इसके अलावा 'मां' को 'माता', 'मात', 'मातृ', 'अम्मा', 'अम्मी', 'जननी', 'जन्मदात्री', 'जीवनदायिनी', 'जनयत्री', 'धात्री', 'प्रसू' आदि अनेक नामों से पुकारा जाता है। """"""""''""""""""""""""""""""""""""""""""""""""''''"""""""""""""""""""""""""""""" 🌹रामायण में श्रीराम अपने श्रीमुख से 'मां' को स्वर्ग से भी बढ़कर मानते हैं। वे कहते हैं- 🌹'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसी।' अर्थात, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। 🔯महाभारत में जब यक्ष धर्मराज युधिष्ठर से सवाल करते हैं कि 'भूमि से भारी कौन?' तब युधिष्ठर जवाब देते हैं- 'माता गुरुतरा भूमेरू।' अर्थात, माता इस भूमि से कहीं अधिक भारी होती हैं। 🎎इसके साथ ही महाभारत महाकाव्य के रचियता महर्षि वेदव्यास ने 'मां' के बारे में लिखा है- 'नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राण, नास्ति मातृसमा प्रिया।।' अर्थात, माता के समान कोई छाया नहीं है, माता के समान कोई सहारा नहीं है। माता के समान कोई रक्षक नहीं है और माता के समान कोई प्रिय चीज नहीं है तैतरीय उपनिषद में 'मां' के बारे में इस प्रकार उल्लेख मिलता है- ❤️'मातृ देवो भवः।' अर्थात, माता देवताओं से भी बढ़कर होती है। 'शतपथ ब्राह्मण' की सूक्ति कुछ इस प्रकार है- 🌹अथ शिक्षा प्रवक्ष्यामः मातृमान् पितृमानाचार्यवान पुरूषो वेदः।' अर्थात, जब तीन उत्तम शिक्षक अर्थात एक माता, दूसरा पिता और तीसरा आचार्य हो तो तभी मनुष्य ज्ञानवान होगा। 'मां' के गुणों का उल्लेख करते हुए आगे कहा गया है- 'प्रशस्ता धार्मिकी विदुषी माता विद्यते यस्य स मातृमान।' अर्थात, धन्य वह माता है जो गर्भावान से लेकर, जब तक पूरी विद्या न हो, तब तक सुशीलता का उपदेश करे। 🏵️ हितोपदेश- आपदामापन्तीनां हितोऽप्यायाति हेतुताम् । मातृजङ्घा हि वत्सस्य स्तम्भीभवति बन्धने ॥ 🥀 जब विपत्तियां आने को होती हैं, तो हितकारी भी उनमें कारण बन जाता है। बछड़े को बांधने में मां की जांघ ही खम्भे का काम करती है। 🏵️स्कन्द पुराण- नास्ति मातृसमा छाया नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राण, नास्ति मातृसमा प्रिया।।' महर्षि वेदव्यास ❤️ माता के समान कोई छाया नहीं, कोई आश्रय नहीं, कोई सुरक्षा नहीं। माता के समान इस दुनिया में कोई जीवनदाता नहीं❤️ 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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Sharma May 10, 2020

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Krishna Kumar May 10, 2020

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Savita Vaidwan May 10, 2020

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Sunita Pawar May 10, 2020

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Sunita Pawar May 10, 2020

*“कैसे किया माता-पिता ने अपने पुत्रो का मार्गदर्शन?”* 🙏🏻🚩🌹 👁❗👁 🌹🚩🙏🏻 एक राजा और रानी थे, जिनकी प्रजा बहुत खुश थी, राजा-रानी ने सदैव प्रजा के हीत में कार्य किये | उनके दो पुत्र थे लव एवम कुश | दोनों के विचारों में बहुत मतभेद था जिस कारण वे दोनों सदा ही लड़ते रहते थे, दोनों बहुत बलवान एवम गुणी थे, लेकिन उनकी आपसी लड़ाई, राजा रानी के लिए चिंता का विषय था | दोनों पुत्रो को राज काज सम्भालना था ऐसे में उनके बीच मतभेद उनका ही शत्रु था | एक दिन, राजा-रानी ने दोनों को एक दुसरे के दृष्टिकोण को समझाने की योजना बनाई| लव और कुश को एक बाग़ में बुलवाया गया और उनकी आँख में पट्टी बाँधकर उन्हें बाग़ में बनी एक दीवार के पास ले जाया गया | उस दीवार की एक तरफ सूर्य की किरणे पढ़ने से वह गरम थी और दूसरी तरफ छाया होने से उस ओर ठंडक थी | लव और कुश को दीवार के विपरीत और खड़ा किया गया और पूछा गया कि उन्हें क्या अहसास हैं ठंडक या गरम | दोनों ने विपरीत जवाब दिए| अब उनकी जगह बदल कर उनसे वही सवाल किया गया फिर दोनों ने एक दुसरे के पूर्व दिए जवाब को दौहराया | अब उनकी पट्टी खोल कर उन्हें राजा ने समझाया हर परिस्थिती में हमारी व्यक्तिगत सोच भिन्न होती हैं पर एक दुसरे की स्थति को समझकर और अपने आप को उनकी जगह पर रख कर सोचे तब पता चलता हैं कि सामने वाले का कथन भी अनुचित नहीं था | उस दिन से लव और कुश ने एक दुसरे कि सोच को सम्मान दिया और राज्य के उत्तरदायित्व का सहकुशल वहन किया | मित्रों, कभी-कभी जीवन में सही निर्णय लेने के लिए अपने आपको को दुसरे कि जगह पर रखकर सोचना चाहिये | हमेशा खुद को सच मानना गलत हैं |जीवन एक दृष्टिकोण पर नहीं चलता भिन्न भिन्न परिवेश में भिन्न भिन्न लोगो का समावेश हैं अत: सबके विचारों का सम्मान करना ही सही जीवन हैं | विचार भिन्न होने के कारण शत्रुता बढ़ाना गलत हैं | 🌹🙏🏻🚩 *जय सियाराम* 🚩🙏🏻🌹 🚩🙏🏻 *जय श्री महाकाल* 🙏🏻🚩 🌹🙏🏻 *जय श्री पेड़ा हनुमान* 🙏🏻🌹 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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