Swamini
Swamini Jul 15, 2018

*सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस*

*सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस*

*स्पर्श हेल्थ केअर*
*आयुर्वेदिक एक्युप्रेशर उपचार।*

सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस कारण और लक्षण।

सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस एक तरह का पीठ के ऊपरी हिस्से, गर्दन के जोड़ों, कंधों, मांसपेशियों पर होने वाला असहनीय दर्द सुन्न-सूजन, नसों का दबना, झुनझुनाहट जैसे मिलते जुलते लक्षण हैं।
अकसर सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस समस्या गलत जीवन शैली, दिनचर्या, शरीर अंगों का गलत क्रियाकलापों और आयु बढ़ने के साथ-साथ शरीर में कैल्शियम – आयरन – विटामिन बी कम्पलैक्स, मैग्नीशियम की कमी की वजह से गर्दन और रीढ़ हड्डी – स्पाइन पर सीधे दुष्प्रभाव करती है। जिससे व्यक्ति सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस से ग्रसित हो जाता है। सर्वाइकल दर्द आरम्भ गर्दन और स्पाइन के आसपास जौड़ नसों से ही आरम्भ होती है। समय पर इलाज नहीं होने पर धीरे-धीरे सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस के दुष्प्रभाव दर्द-सुन्न-सूजन शरीर में फैलने लगते हैं। सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस लक्षण महसूस होने पर तुरन्त Cervical Test करवायें। सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस समस्या से बचने के लिए खास बातों जानना और उनपर अमल करना जरूरी हो जाता है।
सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस के बारे में विस्तार से इस प्रकार से है:

सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस के लक्षण और प्रकार
*गर्दन दर्द*
गलत तरीके से सोने से गर्दन नसें दब जाना, अचानक तीब्र झींक- खांसी आने से, गर्दन पर अतिरिक्त दवाब भार पड़ने से, खड़े और झुकते वक्त अचानक गर्दन मुड़ने से और पुरानी गर्दन चोट से सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस समस्या हो सकती है।
*गला गर्दन जकड़न*
अचानक उठते वक्त गर्दन मुड़ना, सुबह हड़बड़ाहट में उठते समय गर्दन कंधें जोड़ से खिसक जाना, मोबाईल, कम्प्यूटर, टीबी के आगे गर्दन झुकाकर, ज्यादा ऊपर कर व्यस्त रहने से गला गर्दन जकड़न सर्वाइकल की समस्या अकसर होती है।
*सर्वाइकल सरदर्द*
गर्दन के ठीक निचले हिस्से का तीब्र सर्वाइकल दर्द भी अकसर एक तरह से सरदर्द बन जाता है। कई बार सर्वाकल दर्द गर्दन से सिर तक फैल जाता है।
*माइलोपैथी सर्वाइकल*
सर्वाइकल माइलोपैथी गर्दन से लेकर रीढ़ की हड्डी तक को प्रभावित कर देता है। जिसमें मांसपेशियां ऐठन-जकड़न, हाथ, पैरों, एड़ियों, शरीर में झुनझुननाहट (झुनझुनी) होने लगती है। माइलोपैथी सर्वाइकल नाजुक स्थिति में मांसपेशियों, पाचन तंत्र, शरीर जोड़ों को प्रभावित करता है। माइलोपैथी सर्वाइकल एक नाजुक स्थिति मानी जाती है।
*रेडीकुलोपैथी सर्वाइकल*
रेडीकुलोपैथी सर्वाइकल स्थिति में गर्दन दर्द के साथ हाथों की हथेली, पांवों के नीचे दर्द, सुन्न होना पाया जाता है। रेडीकुलोपैथी सर्वाइकल व्यक्ति को रात और सुबह के समय में ज्यादा महसूस होती है। कई बार व्यक्ति गहरी नींद से जाग उठता है।
*सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस*
गर्दन दर्द के साथ पीठ, कंधें, पसलियों, उगलियों में झनझनाहट होना एक तरह से स्पाॅन्डिलाइटिस सर्वाइकल का लक्षण है। धीरे-धीरे गर्दन से शरीर अंगों में ेचपदंस बवतक दर्द सुन्न समस्या फैलने लगती है। यह नाजुक स्थिति होती है। और स्पाॅन्डिलाइटिस सर्वाइकल में व्यक्ति शरीर अंगों में अचानक होने वाली बदलाव से काफी परेशान अनजान रहता है।

*सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस के कारण*
गर्दन मांसपेशियों में मोच आने से।
गर्दन नसों के दबने पर।
कठोर और ज्यादा ऊंचे तकिए का इस्तेमाल करना।
सोने की गलत पाॅजिशन से।
गर्दन जोड़ों की विकसित होने से।
शरीर में कैल्शियम, आयरन, विटामिन बी कम्पलैक्स, मैग्नीशियम की कमी होना।
भारी वस्तु उठाने से।
गर्दन झुकाकर पढ़ने, मोबाईल, टीबी, कम्प्यूटर पर ज्यादा देर व्यस्त रहने से।
गर्दन हडिडयों में पुरानी चोट के कारण।
सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस कुछ निवारण उपाय
*गाय के घी से मालिश*
सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस दर्द समस्या में दिन में 2 बार ग्रसित जोड़ों पर देशी घी से मालिश करना फायदेमंद है। गाय के घी सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस दर्द लुब्रिकेट करने में सहायक है।
*खान-पान परहेज*
सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस दर्द समस्या में खट्टा, नमकीन, तली भुली चीजें, जंकफूड, दालें, सूजी, चावल, आलू खाने से परहेज करें। फाइबर, कैल्शियम, आयरन युक्त हरी सब्जियां, आटा, कम मीठे फल डाईट में शामिल करना फायदेमंद है। तीखे मीठे रसेले फलों के सेवन से बचें।
*करेला, अदरक और नीम फूल पेय*
करेला रस, अदरक रस और नीम फूलों का रस सुबह-शाम 2-2 चम्मच सादे पानी के साथ सेवन करने से सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस दर्द समस्या से आराम मिलता है।
*योगा, व्यायाम*
सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस दर्द से आराम के लिए ताड़ासन, पदमासन, सिद्धासन करना फायदेमंद है। सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस दर्द निवारण योगा-आसन नियमित करें। रोज सुबह शाम सैर करें। वजन पर नियंत्रण रखें।
*शरीर मुद्रा पर ध्यान*
गर्दन झुकाकर, गलत तरह से सोने, बैठने, अचानक गर्दन मुड़ाने से बचें। सोते समय आरामदायक कम ऊचें तकिए का इस्तेमाल करें। ऊचें तकिए इस्तेमाल से बचें।
*तकिए का इस्तेमाल*
सोने समय आरामदायक और समान्तर तकिए का इस्तेमाल करें। ऊंचे और कठोर तकिए इस्तेमाल करने से बचें। सही पाॅजिशन में सायें। गलत तकिया, सोने के गलत तरीके भी एक तरह से सर्वाइकल स्पाॅडिलोसिस समस्या होती है।

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Mrs. Seema Valluvar May 10, 2021

गिलोय एक ही ऐसी बेल है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं। इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है कहते हैं कि देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला और इस अमृत की बूंदें जहां-जहां छलकीं, वहां-वहां गिलोय की उत्पत्ति हुई। इसका वानस्पिक नाम( Botanical name) टीनोस्पोरा कॉर्डीफोलिया (tinospora cordifolia है। इसके पत्ते पान के पत्ते जैसे दिखाई देते हैं और जिस पौधे पर यह चढ़ जाती है, उसे मरने नहीं देती। इसके बहुत सारे लाभ आयुर्वेद में बताए गए हैं, जो न केवल आपको सेहतमंद रखते हैं, बल्कि आपकी सुंदरता को भी निखारते हैं। आइए_जानते_हैं_गिलोय_के_फायदे गिलोय बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। यह खून को साफ करती है, बैक्टीरिया से लड़ती है। लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल भी गिलोय के बहुत सारे कामों में से एक है। ये दोनों ही अंग खून को साफ करने का काम करते हैं। ठीक करती है बुखार अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो उसे गिलोय का सेवन करना चाहिए। गिलोय हर तरह के बुखार से लडऩे में मदद करती है। इसलिए डेंगू के मरीजों को भी गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है। डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आने वाले बुखार से भी गिलोय छुटकारा दिलाती है। गिलोय के फायदे – डायबिटीज के रोगियों के लिए गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है। इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिसका फायदा टाइप टू डायबिटीज के मरीजों को होता है। पाचन शक्ति बढ़ाती है यह बेल पाचन तंत्र के सारे कामों को भली-भांति संचालित करती है और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद कती है। इससे व्यक्ति कब्ज और पेट की दूसरी गड़बडिय़ों से बचा रहता है। कम करती है स्ट्रेस गलाकाट प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तनाव या स्ट्रेस एक बड़ी समस्या बन चुका है। गिलोय एडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता (एंजायटी) के स्तर को कम करती है। इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरूस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है। बढ़ाती है आंखों की रोशनी गिलोय को पलकों के ऊपर लगाने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाएं। अस्थमा में भी फायदेमंद मौसम के परिवर्तन पर खासकर सर्दियों में अस्थमा को मरीजों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से गिलोय की मोटी डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए। इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा। गठिया में मिलेगा आराम गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुंचाती है। अगर हो गया हो एनीमिया, तो करिए गिलोय का सेवन भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीडि़त रहती हैं। इससे उन्हें हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होती है। गिलोय के सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है। बाहर निकलेगा कान का मैल कान का जिद्दी मैल बाहर नहीं आ रहा है तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीस कर उबाल लें। ठंडा करके छान के कुछ बूंदें कान में डालें। एक-दो दिन में सारा मैल अपने आप बाहर जाएगा। कम होगी पेट की चर्बी गिलोय शरीर के उपापचय (मेटाबॉलिजम) को ठीक करती है, सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है। ऐसा होने से पेट के आस-पास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वजन कम होता है। खूबसूरती बढ़ाती है गिलोय गिलोय न केवल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालों पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है…. जवां रखती है गिलोय गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं, जिसकी कामना हर किसी को होती है। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं तो घाव बहुत जल्दी भरते हैं। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाएं। अब एक बरतन में थोड़ा सा नीम या अरंडी का तेल उबालें। गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाएं। ठंडा करके घाव पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है। बालों की समस्या भी होगी दूर अगर आप बालों में ड्रेंडफ, बाल झडऩे या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं तो गिलोय के सेवन से आपकी ये समस्याएं भी दूर हो जाएंगी। गिलोय का प्रयोग ऐसे करें :-- अब आपने गिलोय के फायदे जान लिए हैं, तो यह भी जानिए कि गिलोय को इस्तेमाल कैसे करना है… गिलोय जूस गिलोय की डंडियों को छील लें और इसमें पानी मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें। छान कर सुबह-सुबह खाली पेट पीएं। अलग-अलग ब्रांड का गिलोय जूस भी बाजार में उपलब्ध है। काढ़ा चार इंच लंबी गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट लें। इन्हें कूट कर एक कप पानी में उबाल लें। पानी आधा होने पर इसे छान कर पीएं। अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग, अदरक, तुलसी भी डाल सकते हैं। पाउडर यूं तो गिलोय पाउडर बाजार में उपलब्ध है। आप इसे घर पर भी बना सकते हैं। इसके लिए गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सुखा लें। सूख जाने पर मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाकर रख लें। गिलोय वटी बाजार में गिलोय की गोलियां यानी टेबलेट्स भी आती हैं। अगर आपके घर पर या आस-पास ताजा गिलोय उपलब्ध नहीं है तो आप इनका सेवन करें। साथ में अलग-अलग बीमारियों में आएगी काम अरंडी यानी कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउट(जोड़ों का गठिया) की समस्या में आराम मिलता है।इसे अदरक के साथ मिला कर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है।खांड के साथ इसे लेने से त्वचा और लिवर संबंधी बीमारियां दूर होती हैं।आर्थराइटिस से आराम के लिए इसे घी के साथ इस्तेमाल करें।कब्ज होने पर गिलोय में गुड़ मिलाकर खाएं। साइड इफेक्ट्स का रखें ध्यान वैसे तो गिलोय को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के कोई गंभीर दुष्परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं लेकिन चूंकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है। इसलिए इस बात पर नजर रखें कि ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम न हो जाए। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय के सेवन से बचना चाहिए। पांच साल से छोटे बच्चों को गिलोय न दें। एक निवेदन :-- अपने घर में बड़े गमले या आंगन में जंहा भी उचित स्थान हो गिलोय की बेल अवश्य लगायें यह बहु उपयोगी वनस्पति ही नही बल्कि आयुर्वेद का अमृत और ईश्वरीय वरदान है।

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शास्त्रों में स्वच्छता के सूत्र हमारे पूर्वज अत्यंत दूरदर्शी थे। उन्होंने हजारों वर्षों पूर्व वेदों व पुराणों में महामारी की रोकथाम के लिए परिपूर्ण स्वच्छता रखने के लिए स्पष्ट निर्देश दे कर रखें हैं- 1. लवणं व्यञ्जनं चैव घृतं तैलं तथैव च । लेह्यं पेयं च विविधं हस्तदत्तं न भक्षयेत् ।। - धर्मसिन्धू ३पू. आह्निक नामक, घी, तेल, चावल, एवं अन्य खाद्य पदार्थ चम्मच से परोसना चाहिए हाथों से नही। 2. अनातुरः स्वानि खानि न स्पृशेदनिमित्ततः ।। - मनुस्मृति ४/१४४ अपने शरीर के अंगों जैसे आँख, नाक, कान आदि को बिना किसी कारण के छूना नही चाहिए। 3. अपमृज्यान्न च स्न्नातो गात्राण्यम्बरपाणिभिः ।। - मार्कण्डेय पुराण ३४/५२ एक बार पहने हुए वस्त्र धोने के बाद ही पहनना चाहिए। स्नान के बाद अपने शरीर को शीघ्र सुखाना चाहिए। 4. हस्तपादे मुखे चैव पञ्चाद्रे भोजनं चरेत् ।। पद्म०सृष्टि.५१/८८ नाप्रक्षालितपाणिपादो भुञ्जीत ।। - सुश्रुतसंहिता चिकित्सा २४/९८ अपने हाथ, मुहँ व पैर स्वच्छ करने के बाद ही भोजन करना चाहिए। 5. स्न्नानाचारविहीनस्य सर्वाः स्युः निष्फलाः क्रियाः ।। - वाघलस्मृति ६९ बिना स्नान व शुद्धि के यदि कोई कर्म किये जाते है तो वो निष्फल रहते हैं। 6. न धारयेत् परस्यैवं स्न्नानवस्त्रं कदाचन ।I - पद्म० सृष्टि.५१/८६ स्नान के बाद अपना शरीर पोंछने के लिए किसी अन्य द्वारा उपयोग किया गया वस्त्र(टॉवेल) उपयोग में नही लाना चाहिये। 7. अन्यदेव भवद्वासः शयनीये नरोत्तम । अन्यद् रथ्यासु देवानाम अर्चायाम् अन्यदेव हि ।। - महाभारत अनु १०४/८६ पूजन, शयन एवं घर के बाहर जाते समय अलग- अलग वस्त्रों का उपयोग करना चाहिए। 8. तथा न अन्यधृतं (वस्त्रं धार्यम् ।। - महाभारत अनु १०४/८६ दूसरे द्वारा पहने गए वस्त्रों को नही पहनना चाहिए। 9. न अप्रक्षालितं पूर्वधृतं वसनं बिभृयाद् ।। - विष्णुस्मृति ६४ एक बार पहने हुए वस्त्रों को स्वच्छ करने के बाद ही दूसरी बार पहनना चाहिए। 10. न आद्रं परिदधीत ।। - गोभिसगृह्यसूत्र ३/५/२४ गीले वस्त्र न पहनें। सनातन धर्म ग्रंथो के माध्यम से ये सभी सावधानियां समस्त भारतवासियों को हजारों वर्षों पूर्व से सिखाई जाती रही है। इस पद्धति से हमें अपनी व्यग्तिगत स्वच्छता को बनाये रखने के लिए सावधानियां बरतने के निर्देश तब दिए गए थे जब आज के जमाने के माइक्रोस्कोप नही थे। लेकिन हमारे पूर्वजों ने वैदिक ज्ञान का उपयोग कर धार्मिकता व सदाचरण का अभ्यास दैनिक जीवन में स्थापित किया था। आज भी ये सावधानियां अत्यन्त प्रासंगिक है। यदि हमें ये उपयोगी लगती हो तो इनका पालन कर सकते हैं। सनातन संस्कृति 🚩

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pavitra yadav May 9, 2021

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prakash patel May 10, 2021

🏡 आंख के रोग, पेट में कृमि, दाद होने पर गोमूत्र का प्रयोग... 💎 🏡 आंख के रोग आंख के धुंधलेपन एवं रतौंधी में काली बछिया के मूत्र को तांबे के बर्तन में गर्म करें। चौथाई भाग बचने पर छान लें और उसे कांच की शीशी में भर लें। उससे सुबह-शाम आंख धोएं। 🏡 पेट में कृमि आधा चम्मच अजवाइन के चूर्ण के साथ 4 चम्मच गोमूत्र 1 सप्ताह सेवन करें और कब्ज की समस्या होने पर हरड़ के चूर्ण के साथ गोमूत्र सेवन करें। 🏡 दाद होने पर गोबर और गोमूत्र का उपयोग दोनों आन्तरिक और बाहरी तरह से अच्छा होता है। बाहरी स्थिति में दाद, खाज, खुजली, दाग, धब्बे आदि में, गोमूत्र लगाने के बाद, 10 से 15 मिनट सूर्य की रोशनी दिखाकर धो देना चाहिए इससे सभी तरह के चर्म रोग दूर होते हैं। शरीर में ज्यादा खुजली होने पर गाय माता के मूत्र की मालिश करें| दाद होने पर, गोमूत्र में धतूरे के पत्तों को पीसकर उबालें और गाढ़ा होने पर लगाने से दाद को दूर किया जा सकता है। ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/

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sn.vyas May 9, 2021

*सूंघने की शक्ति खत्म होने पर* मैथी की चाय बनाकर उचित समय तक प्रयोग करने से खोई हुई गन्ध शक्ति धीरे धीरे सुधर कर पूर्ववत हो जाती है । स्वाद व गन्ध का लोप होने पर मैथी में उन्हें पुनः स्थापन करने का गुण है । लम्बे समय तक म्युकस या किसी तरह की गंदगी भर जाने के कारण गन्ध की सम्वेदन शीलता उत्तपन्न करने वाले ज्ञान तंतु वाले भाग में सम्वेदन तंतु अकार्यक्षम हो जाते है और उस भाग में म्युकसजमा हो जाने से नाक की गंध शक्ति लुप्त हो जाती है । मैथी की चाय के नित्य प्रयोग से म्युकस निकल जाने से वह ठीक हो जाती है। चाय बनाने की विधि - इसके लिए 5 gm (एक चम्मच) मैथी दाना दरदरा कूटा हुआ । 200 gm एक गिलास पानी मे डाल कर धीमी आंच पर उबलने रख दे । जब पानी 150 gm बचे बर्तन को आग से उतार कर छान लें और चाय की तरह घूंट घूंट कर गर्म गर्म पिये इसमे अन्य कुछ न मिलाये दिन में तीन बार सेवन करे सुबह दोपहर रात को खाना से आधा घण्टा पहले ले कुछ दिनों के निरंतर प्रयोग से समस्या ठीक हो जाएगी । अगर कोई ऐसे न ले सके तो थोड़ा गर्म दूध व देशी खांड या शहद मिला कर पिये ।परन्तु शहद मिलाते समय काढ़ा गर्म न हो गुनगुना हो केवल। Note- इस प्रयोग को गर्म तासीर , पित्त प्रकति , रक्त पित्त, खूनी बबासीर, नकसीर, मूत्र में रक्त, शरीर से कही से खून आता हो , कमजोर दुबले, low शुगर वाले रोगी चिकित्सक की देख रेख में ही प्रयोग करें। वैद्य गुरुवेंद्र सिंह संजीवनी आयुर्वेदिक उपचार केंद्र ललितपुर 9466623519 7985817113

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prakash patel May 10, 2021

💎 अर्जुन के फायदे.... . पौधे का परिचय श्रेणी : औषधीय समूह : कृषि योग्य वनस्पति का प्रकार : वृक्ष वैज्ञानिक नाम : अर्जुन तेर्मिनालिया सामान्य नाम : अर्जुन पौधे की जानकारी उपयोग : इसे हद्य रोग के उपचार के लिए एक पारंपरिक आयुर्वेदिक दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। घाव, रक्त स्त्राव और अल्सर के उपचार में इसका उपयोग किया जाता है। इसकी पत्ती का रस पेचिश और कान के दर्द का इलाज करने के लिए उपयोग किया जाता है।🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट अपनाये और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ यह औषधि हद्य की मांसपेशिया को ताकत देती है और हद्य की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित रखती है। इसे अस्थमा के उपचार के लिए लाभदायक माना जाता है। यह औषधि हद्य संबधी कार्य को बढ़ावा देती है और रक्त चाप को समान्य रखती है। उपयोगी भाग : छाल उत्पादन क्षमता : 45 कि.ग्रा./हेक्टेयर/3 वर्ष सूखी छाल उत्पति और वितरण : यह वृक्ष संपूर्ण भारत वर्ष में मुख्यत: उप हिमालयी इलाकों और पूर्वी भारत में पाया जाता है। यह आमतौर पर पश्चिम बंगाल, दक्षिण और मध्य भारत में नदी के किनारे या नदी के किनारों की सूखी मेढ़ो में मिलता है। इसे बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, पेंच टाइगर रिर्जव और कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में व्यापक रूप से उगाया जाता है। वितरण : प्राचीन काल से यह एक परंपरागत आयुर्वेदिक औषधि है। भाव प्रकाश (आयुर्वेदिक पाठ) के अनुसार यह औषधि मधुर, शीतलता प्रदान करने वाली, पित्त को कम करने वाली और उत्तेजक के रुप में उपयोग की जाने वाली है। वर्गीकरण विज्ञान, वर्गीकृत कुल : काम्ब्रेऐसी आर्डर : म्यर्तलेस प्रजातियां : टी. अर्जुन वितरण : प्राचीन काल से यह एक परंपरागत आयुर्वेदिक औषधि है। भाव प्रकाश (आयुर्वेदिक पाठ) के अनुसार यह औषधि मधुर, शीतलता प्रदान करने वाली, पित्त को कम करने वाली और उत्तेजक के रुप में उपयोग की जाने वाली है। आकृति विज्ञान, बाह्रय स्वरूप स्वरूप : यह बड़े आकार का सदाबहार पर्णपाती वृक्ष है। छाल चिकनी भूरे रंग की मोटी, कोमल और अंदर लाल रंग की होती है।💎 खूबसूरत त्वचा, वजन कम करने के & हर गंभीर बिमारी के एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। ✅और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ इसका तना मजबूत होता है जिस पर झूलती हुई शाखायें होती है जो एक मुकुट की तरह छत्र बनाती है। पत्तिंया : पत्तियां आयताकार और शक्वाकार, 4-6 इंट लंबी, 2-3 इंच चौड़ी, शीर्ष पर हरी और नीचे भूरी होती है। फूल : इसके फूल हल्के पीले रंग के होते है जो मार्च से जून माह के दौरान आते है। फल : फल अरोमिल, 2.5 से 5 से.मी. के रेशेदार काष्टीय होते है। फल सितम्बर से नवंबर माह के बीच आते है जो 5 भागों मे विभाजित रहते है। परिपक्व ऊँचाई : इसकी ऊँचाई 60-85 फीट तक पहुँचती है। ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट की जानकारी के लिए 📞👉 +91 9974592157 🌀 MSG 👉 +91 7016609049 हमारा संपर्क करें। और हर गंभीर बिमारी मिटाये।

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prakash patel May 9, 2021

ગોખરુ ઓસ્ટિઓ આથ્રાઈટીસમાં સારું પરિણામ આપતું ઔષધ : કુપોષણ, કમરનો દુ:ખાવો, ઓસ્ટિઓ આથ્રાઈટીસ વગેરેમાં સારું પરિણામ આપે છે શહેરીજનો ગોખરુથી અજાણ છે, પણ ગામડામાં સીમમાં જે લોકો ફરતાં હોય છે, તેઓ ગોખરુથી અજાણ નથી. એમાંના ઘણાંને ગોખરુના કાંટા વાગ્યા હોય, તેઓને તો ખાસ ગોખરૂ યાદ રહી જાય છે. આમ, પીડા આપતું આ ગોખરુ ઘણા લોકોની પીડા, દર્દ, વ્યાધિને દૂર કરનારું એક ઔષધ પુરવાર થયું છે. 💎 खूबसूरत त्वचा, वजन कम करने के & हर गंभीर बिमारी के एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। ✅और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ ગોખરુ: પ્રકૃતિમાં ગોખરુ ઠંડુ છે. શરીરની ઉષ્મા - ગરમીને તત્કાળ દૂર કરનારું છે. જેમનું શરીર તપેલું રહેતું હોય તેમને માટે તો ગોખરુ ઉનાળામાં પણ હેમાળા (હિમાલય) જેવું લાગે છે ગુણમાં ઠંડુ હોવા છતાં બળકારક એટલે કે શરીરમાં શક્તિ - સ્ફુર્તિનો સંચાર કરે છે. વિના કારણે કે કારણસર લાગતો થાક દૂર કરે છે ગોખરું પૌષ્ટિક છે. કુપોષણ: આજે કુપોષણ શબ્દો મીડિયામાં ખૂબ સાંભળવા મળે છે. કારણ કે સમગ્ર ભારતમાં કુપોષણથી પીડાતા લોકોની સંખ્યા વધારે છે. એમાં પણ બાળકો અને સ્ત્રીઓ આ કુપોષણની સમસ્યાનું નિવારણ ઝડપથી કરવું હોય તો ગોખરુ, અશ્વગંધા, શતાવરી જેવી ઔષધિઓના પાક બનાવી આપવા જોઈએ. કમરનો દુ:ખાવો: કમરના દુ:ખાવાનાં અનેક કારણો હોય છે. જેમ કે યુ.ટી.આઈ. (Urinary track Inmdection) સ્ત્રીઓમાં સફેદ પાણી પડવું, સ્ત્રીઓની માસિકની અનિયમિતતા, ખોરાકનું બરાબર પાચન ન થવાને કારણે પેદા થતો આમ Undihested Food Particles જે કમરના સાંધામાં પહોંચીને દુ:ખાવો પેદા કરે છે, પથરી થવી. આ બધા કારણોને લીધે થતા કરના દુ:ખાવામાં ગોખરુ ખૂબ ઉપયોગી છે. આર્યભિષકમાં કમરના દુ:ખાવા માટે ગોખરુ અને સૂંઠના ઉકાળાને સફળ ઔષધ ગણ્યું છે. રીત: ગોખરુ પાંચ ગ્રામ, સૂંઠ ૧ ગ્રામ, એક કપ દૂધ, એક કપ પાણીને ધીમા તાપે ઉકાળવા મૂકવું. પાણી બળી જાય ત્યારે તેમાં થોડી સાકર નાખીને પીવું. પ્રોસ્ટેટ એન્લાર્જમેન્ટ: પ્રોસ્ટેટ એન્લાર્જમેન્ટની સમસ્યા ખાસ કરીને ૪૦-૪૫ વર્ષ પછીથી થતી પુરુષોની સમસ્યા છે. આધુનિક તબીબી શાસ્ત્ર આ સમસ્યાના ઉકેલ માટે સર્જરી કરાવવાનું સૂચન કરે છે. સર્જરી કરાવ્યા પછી ઘણી એવી વ્યક્તિઓ જોવા મળી છે કે તેમને યુરિન પર કોઈ કન્ટ્રોલ રહેતો નથી. જેમ નાનાં બાળકોને ડાયપર પહેરાવવામાં આવે છે એ પ્રમાણે મોટી ઉંમરની વ્યક્તિઓને ડાયપર પહેરવું પડતું હોય છે. ગોખરુ સાથેની કેટલીક ઔષધિઓના સમન્વયથી પ્રોસ્ટેટ એન્લાર્જમેન્ટની સમસ્યાનું નિવારણ થઈ શકે છે. રસાયણપૂર્ણ + હળદર: જેમાં ગળો, ગોખર, આમળા અને હળદરને સરખાભાગે લઈ તેમાંથી 3-3 ગ્રામ પાવડર જમ્યા પહેલાં પાણી સાથે ફાકી જવો. આનાથી પ્રોસ્ટેટનો સોજો દૂર થાય છે અને PSA રિપોર્ટ પણ નોર્મલ થઈ જાય છે. રાસાયણિક વિશ્લેષણ: ગોખરું નું રાસાયણિક વિશ્લેષણ કરતાં તેમાં ગ્લુકોઝ, એમિનો એસિડ્સ, ક્લોરોજેનીન, એસ્ટ્રાગેલીન, સ્ટીગ્માસ્ટેરોલ, ફ્યુરોગ્લુકોસાઈડ જેવા તત્ત્વો છે. તાજેતરમાં થયેલાં સંશોધન અનુસાર ગોખરુ ઓસ્ટિઓ આથ્રાઈટીસમાં સારું પરિણામ આપતું ઔષધ પુરવાર થયું છે. પેશાબમાં લોહી પડવું: શરદઋતુ કે ગરમીની ઋતુમાં અથવા તો જેમની પ્રકૃતિ પિતની હોય, ગરમી ખોરાક વધારે ખાતા હોય. જેમને પથરી થયેલી હોય કે જેમનાં રક્તમાં પિત્તની માત્ર વધી જતાં અધોગામી રક્તપિત્તની સમસ્યા થઈ હોય તેમને માટે ગોખરુ અને શતાવરીનો ક્ષીરપાક ખૂબ ઉપયોગી છે. 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट अपनाये और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ બનાવવાની રીત: ગોખરું ત્રણ ગ્રામ, શતાવરી ત્રણ ગ્રામ, સાકર, દસ ગ્રામ, એક કપ દૂધ અને એક પાણી.ઉપર્યુક્ત તમામ ઔષધિઓને ધીમા તાપે ઉકાળવા મૂકવી, પાણી બળી જાય ત્યારે ગાળીને ઠંડુ પાડી દિવસમાં બે વાર પીવું. આ ક્ષીરપાકથી પેશાબ માર્ગે આવતું લોહી બંધ થાય છે. પથરી પણ ધીમે ધીમે તૂટીને બહાર નીકળવા માંડે છે. ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट की जानकारी के लिए 📞👉 +91 9974592157 🌀 MSG 👉 +91 7016609049 हमारा संपर्क करें। और हर गंभीर बिमारी मिटाये।

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