जय गौमाता जय गोपाल गौसेवा ही गोबिन्द सेवा हैं।

जय गौमाता जय गोपाल  गौसेवा ही गोबिन्द सेवा हैं।

जय गौमाता जय गोपाल
गौसेवा ही गोबिन्द सेवा हैं।

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Dr.ratan Singh Aug 11, 2020

🎎इस बार दो दिन मनेगी जन्माष्टमी🎎 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 🌳🌹🦚जय श्री कृष्ण🦚🌹🌳 🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 💐🎂🌹शुभ जन्माष्टमी🌹🎂💐 🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂 🌷🌲🥀शुभ मंगलवार🥀🌲🌷 ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️ 🚩🌳💐जय श्री हनुमान💐🌳🚩 ☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️☸️ 🎳✍️🌹शुभ संध्या 🌹🪔🎳 🌌🌌🌌🌌🌌🌌🌌🌌🌌 🙏आपको सपरिवार भगवान श्रीकृष्ण प्राकट्योत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं एवं ढेर सारी बधाई 🙏 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 🎎इस बार दो दिन मनेगी जन्माष्टमी🎎 ******************************** 🦚भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्योत्सव यानी श्रीकृष्ण जन्माष्टी इस बार दो दिन मनाई जाएगी। लेकिन लोगों में पूजा मुहूर्त को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अष्टमी तिथि 11 अगस्त, मंगलवार को सुबह करीब 10 बजे लग जाएगी और 12 अगस्त को यह सुबह करीब 11 बजे तक रहेगी। ऐसे में कोई 11 को ही जन्माष्टमी व्रत कर रहा है तो कोई 12 अगस्त को। 🤹जानकारों के अनुसार, ग्रहस्थ लोगों के लिए 12 अगस्त को जन्माष्टमी का व्रत करना ज्यादा ठीक रहेगा। क्योंकि पूजन-विधान में उदया तिथि का महत्व होता है जो कि 12 अगस्त को पड़ रही है। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्योत्सव के संकेत स्वरूप 12 अगस्त की रात 12 बजे ही जन्माष्टी का पूजन होगा। हालांकि इस बार अष्टमी तिथि के दिन रोहणी नक्षत्र नहीं है ऐसे में भक्तों का पूजा मुहूर्त को लेकर असमंजस में होना स्वाभाविक बात है। 🎎हिंदू धर्म मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ही श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। जन्माष्टमी के दिन लोग भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उपवास रखने के साथ ही भजन-कीर्तन और विधि-विधान से पूजा करते हैं। भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय रात 12 बजे अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र था। ज्योतिषियों के अनुसार जन्माष्टमी का दान 11 अगस्त को और 12 अगस्त को पूजा और व्रत रखा जा सकता है। 🤹12 अगस्त को पूजा का शुभ समय रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक है। अर्थात पूजा की अवधि 43 मिनट तक रहेगी। 🔯अष्टमी तिथि- 11 अगस्त 2020, मंगलवार - अष्टमी तिथि शुरू - 09:06AM 12 अगस्त 2020, बुधवार - अष्टमी तिथि समाप्त - 11:16AM 🎎जन्माष्टमी पूजा मुहूर्त- 12 अगस्त 2020, बुधवार - रात 12:05 बजे से 12:47 बजे तक। 🦚जन्माष्टमी पूजा विधि : जन्माष्टमी के दिन पूजन सामग्री जैसे, पंचामृतम, भोग, हवन, पंजीरी, प्रसाद, आदि तैयार करके रखा जाता है। पूरे दिन व्रत रखने के बाद रात को 12:05 बजे (मुहूर्त) और चांद निकलने का इंतजार किया जाता है। माना जाता है कि जैसे चांद निकलता है वैसे भगवान श्रीकष्ण का प्राकट्योत्सव आरंभ होता है। पंडित के बताए मुहूर्त के समय या चंद्रमा निकलने के बाद भगवान श्रीकष्ण के विग्रह स्वरूप को गंगाजल, दूध, दही, पंचामृतम, घी आदि से स्नान कराना चाहिए। इसके बाद विधिवत पुष्प, अक्षत, चंदन आदि से पूजा करने साथ ही आरती करना चाहिए। फिर भोग लगाने के बाद प्रसाद बांटना चाहिए। कुछ देर तक चाहें तो भगवान के भजन या कीर्तन भी सुन/गा सकते हैं। इसके बाद भगवान को भोग लगने के बाद खुद प्रसाद लें और व्रत का पारण करें। 🦚🌹जय श्री कृष्ण 🌹🦚

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Manoj manu Aug 11, 2020

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Vandana Singh Aug 11, 2020

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Praveen sharma Aug 11, 2020

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💐💐💐💐💐💐 *पत्थर* पत्थर मतलब भगवान होता है क्योंकि वो हमारे आजू बाजू सब तरफ होता है। जहाँ भी देखो नजर आता है। अपरिचित गलियों में वो हमें कुत्तों से बचाता है। हाईवे पर गाँव कितनी दूर है, ये बताता है। घर की बाउंड्रीवाल में लगकर हमारी रक्षा करता है। रसोई में सिलबट्टा बनकर माँ के काम आता है। बच्चों को पेड़ से आम, जामुन, बेर आदि तोड़कर देता है। कभी कभी हमारे ही सिर पर लगकर खून निकाल देता है और इस प्रकार हमें शत्रु की पहचान कराता है। जिन युवाओं का माथा फिरा हो तब उनके हाँथ लगकर खिड़कियों के काँच तोड़कर उनका क्रोध शांत करता है। रास्ते पर मजदूरों का पेट भरने के लिए खुद को ही तुड़वाता है। शिल्पकार के मन के सौंदर्य को साकार करने के लिए छैनियों के घाव सहन करता है। किसान को पेड़ के नीचे आराम देने के लिए तकिया बन जाता है। बचपन में स्टंप तो कभी लघोरी आदि बनकर हमारे साथ खेलता है। हमारी सहायता के लिए भगवान की तरह तुरंत उपलब्ध होता है। मुझे बताइए, कि, " भगवान के अलावा और कौन करता है हमारे लिए इतना ?? " माँ कहती है, " पत्थर पर सिन्दूर लगाकर उसपर विश्वास करो तो वो भगवान बन जाता है। " मतलब, पत्थर ही भगवान होता है। *Moral :- Be positive. Every one is god.* 💐💐💐💐💐💐आज का भगवद चिन्तन, भगवान को सदा ही अपने साथ समझो अपने लिए नहीं। भगवान मेरे साथ हैं यह भाव अच्छा है मगर भगवान् मेरे लिए है यह भाव कच्चा है। भगवान् मेरे साथ है इस भाव में जीने वाला व्यक्ति परमात्मा के प्रति हर स्थिति-परिस्थिति में संतोष व्यक्त करता है। भगवान् मेरे लिए हैं इस भाव में जीने वाला व्यक्ति परमात्मा के प्रति हर स्थिति -परिस्थिति में रोष व्यक्त करता है। भगवान् को अपने साथ समझने का अर्थ है जो भी मिला उसे प्रभु प्रसाद समझ ग्रहण करना क्योंकि हे ईश्वर तेरे होते मुझे चिंता की क्या आवश्यकता है ? और भगवान् को अपने लिए समझने का अर्थ है, हे ईश्वर तुम सब कुछ कर सकते हो तो फिर मुझे दुःख क्यों देते हो ? स्मरण रहे - भाव भक्तों का है। 🌹जय श्री राम भगत हनुमान की 🌹 राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम रा👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🗯️🍅✴☀❣जय मां अंबे भवानी ❣☀✴🍅❣ 🍂🐚 गंगा गीता गायत्री 🍂🐚 (¯`•.•´¯) *`•.¸(¯`•.•´¯)¸.•´ `•.¸.•´ ჱܓ*“ 🍅✴☀✴☀✴☀✴☀✴☀✴☀✴🍅 ☆*´¨`☽  ¸.★* ´¸.★*´¸.★*´☽ (  ☆** Ψ त्रिवेणी घाट हरिद्वार .Ψ `★.¸¸¸. ★• ° 🙏सेवक भरत व्यास बांगा हिसार चंडी घाट हरिद्वार

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vinod Kumar yadav Aug 11, 2020

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