Vinay Mishra
Vinay Mishra Jan 21, 2021

jai shri radhe Krishna Subh Prabhat Vandan 🥀 ॐ 🙏

jai shri radhe Krishna Subh Prabhat Vandan 🥀 ॐ 🙏

+88 प्रतिक्रिया 11 कॉमेंट्स • 7 शेयर

कामेंट्स

Vinay Mishra Jan 21, 2021
jai shri radhe Krishna Subh Prabhat Vandan my friend 💥 ॐ 🙏

Brajesh Sharma Jan 21, 2021
जय जय श्री राधे ॐ नमो भगवते वासुदेवाय... जय श्री राधे कृष्णा जी... ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव ईश्वर आपकी समस्त कामनाओं की पूर्ति करें, आपका सदा कल्याण करें..

Mira nigam 7007454854 Jan 21, 2021
जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे जय जय श्री राधे कृष्णा जी की जय

Mamta Chauhan Jan 21, 2021
Jai shri krishna Radhe radhe ji🌷🙏 Shubh dophar vandan bhai ji aapka har pal khushion bhara ho radha rani ki kripa sda aap or aapke priwar pr bni rhe🌷🌷🙏🙏

sanjay choudhary Jan 21, 2021
।।।।जय श्री कृष्णा।।।। जय श्री राम 🙏🙏🙏 आपकी रात्रि शुभ रहे।।।

madan pal 🌷🙏🏼 Jan 21, 2021
जय श्री राधे राधे कृष्णा जी शुभ रात्रि वंदन जी आपका हर पल शुभ मंगल हो जी 🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷

🙋ANJALI 😊MISHRA🙏 Jan 21, 2021
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः🙏राधे राधे भाई जी शुभ रात्रि वंदन🙏भगवान् श्रीहरि एवं माता श्री महालक्ष्मी आप की मंगल मनोकामनाएं पूरी करें आप और आपका समस्त परिवार हमेशा खुश रहें ,सुखी और स्वस्थ रहें 🙌 आपका हर पल शुभ हो मंगलमय हो👌💐🌹🌹🙏🙏🍊🍊🍏🍏🍎🍎🍇🍇🍇🍇🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Seema soni Jan 21, 2021
good night ji Jai Shri Krishna ji 🙏🙏🌹🌹😊

+43 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 159 शेयर

+172 प्रतिक्रिया 70 कॉमेंट्स • 123 शेयर
RAJ RATHOD Feb 26, 2021

+303 प्रतिक्रिया 73 कॉमेंट्स • 243 शेयर
vineeta tripathi Feb 26, 2021

+122 प्रतिक्रिया 33 कॉमेंट्स • 86 शेयर
Neeta Trivedi Feb 26, 2021

+173 प्रतिक्रिया 39 कॉमेंट्स • 47 शेयर
SunitaSharma Feb 26, 2021

+52 प्रतिक्रिया 16 कॉमेंट्स • 8 शेयर

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐ध्यान के पंख💐💐* बहुत समय पहले की बात है,एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये,वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे,राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया। कुछ समय पश्चात राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे,और अब पहले से भी शानदार लग रहे हैं,राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे, आदमी से कहा, मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ, तुम इन्हें उड़ने का इशारा करो, आदमी ने ऐसा ही किया, इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था वहीँ दूसरा, कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था ,ये देख राजा को कुछ अजीब लगा, क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा..? राजा ने सवाल किया, सेवक बोला, जी हुजूर, इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है, वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं, राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे, और वो दूसरे बाज को भी उसी तरह उड़ता देखना चाहते थे, अगले दिन पूरे राज्य में ऐलान करा दिया गया, कि जो व्यक्ति इस बाज को ऊँचा उड़ाने में कामयाब होगा उसे ढेरों इनाम दिया जाएगा, फिर क्या था, एक से एक विद्वान् आये और बाज को उड़ाने का प्रयास करने लगे, पर हफ़्तों बीत जाने के बाद भी बाज का वही हाल था, वो थोडा सा उड़ता और वापस डाल पर आकर बैठ जाता, फिर एक दिन कुछ अनोखा हुआ,राजा ने देखा कि उसके दोनों बाज आसमान में उड़ रहे हैं, उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति का पता लगाने को कहा जिसने ये कारनामा कर दिखाया था, वह व्यक्ति एक किसान था, अगले दिन वह दरबार में हाजिर हुआ, उसे इनाम में स्वर्ण मुद्राएं भेंट करने के बाद राजा ने कहा, मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ, बस तुम इतना बताओ कि जो काम बड़े-बड़े विद्वान् नहीं कर पाये वो तुमने कैसे कर दिखाया, मालिक..! मैं तो एक साधारण सा किसान हूँ , मैं ज्ञान की ज्यादा बातें नहीं जानता , मैंने तो बस वो डाल काट दी,जिस पर बैठने का आदि हो चुका था, और जब वो डाल ही नहीं रही तो वो भी अपने साथी के साथ ऊपर उड़ने लगा । *हम सभी ऊँची उड़ान भरने के लिए ही बने हैं,लेकिन कई बार हम जो कर रहे होते है, उसके इतने आदि हो जाते हैं कि अपनी ऊँची उड़ान भरने की क्षमता को भूल जाते हैं,जन्म जन्म से हम वासनाओं की डाल पर बैठते आए हैं और अज्ञानवश ये भी हमें ज्ञात नहीं कि जो हम आज कर रहे हैं,वहीं हमने जन्मों जन्मों में किया है,और ये हम भूल ही गए हैं कि हम उड़ान भर सकते हैं,अतृप्त वासनाओं की डाल पर बैठे बैठे हमें विस्मृत हो गया है,कि ध्यानरूपी पंख भी हैं, हमारे पास जिससे हम उड़ान भर सकते हैं,पदार्थ से परमात्मा तक की, व्यर्थ से सार्थक की...* *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।* 🙏🙏🙏🙏🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

+48 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 282 शेयर

. इंसान की असलियत की पहचान उसके व्यवहार और उसकी नियत से होती है..!! ✍️✍️ एक राजा के दरबार मे एक अजनबी इंसान नौकरी मांगने के लिए आया। उससे उसकी क़ाबलियत पूछी गई तो वो बोला, "मैं आदमी हो चाहे जानवर शक्ल देख कर उसके बारे में बता सकता हूँ। राजा ने उसे अपने खास "घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज" बना दिया। चंद दिनों बाद राजा ने उससे अपने सब से महंगे और मनपसन्द घोड़े के बारे में पूछा। उसने कहा, "नस्ली नही हैं। राजा को हैरानी हुई। उसने जंगल से घोड़े वाले को बुला कर पूछा। उसने बताया घोड़ा नस्ली तो है पर इसकी पैदायश पर इसकी मां मर गई थी। ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला है. राजा ने पूछा तुम को कैसे पता चला कि घोड़ा नस्ली नहीं है? उसने कहा , जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सर नीचे करके खाता है जबकि नस्ली घोड़ा घास मुह में लेकर सर उठा लेता है। राजा उसकी काबलियत से बहुत खुश हुआ उसने उसके घर अनाज , घी और काफी सामान बतौर इनाम भिजवा दिए और उसे रानी के महल में तैनात कर दिया। चंद दिनो बाद राजा ने उससे रानी के बारे में राय मांगी। उसने कहा , तौर तरीके तो रानी जैसे हैं लेकिन पैदाइशी नहीं हैं। राजा के पैरों तले जमीन निकल गई। उसने अपनी सास को बुलाया। मामला उसको बताया। सास ने कहा "हक़ीक़त ये है कि आपके पिताजी ने मेरे पति से हमारी बेटी की पैदाइश पर ही रिश्ता मांग लिया था लेकिन हमारी बेटी 6 माह में ही मर गई थी , लिहाज़ा हम ने आपके रजवाड़े से करीबी रखने के लिए किसी और की बच्ची को अपनी बेटी बना लिया। राजा ने फिर अपने नौकर से पूछा "तुम को कैसे पता चला ? उसने कहा,"रानी साहिबा का नौकरो के साथ सुलूक गंवारों से भी बुरा हैं । एक खानदानी इंसान का दूसरों से व्यवहार करने का एक तरीका होता है जो रानी साहिबा में बिल्कुल नही। राजा फिर उसकी पारखी नज़रों से खुश हुआ और बहुत से अनाज , भेड़ बकरियां बतौर इनाम दीं। साथ ही उसे अपने दरबार मे तैनात कर दिया। कुछ वक्त गुज़रा , राजा ने फिर नौकर को बुलाया और अपने बारे में पूछा। नौकर ने कहा "जान की सलामती हो तो कहूँ। राजा ने वादा किया। उसने कहा , न तो आप राजा के बेटे हो और न ही आपका चलन राजाओं वाला है। राजा को बहुत गुस्सा आया। मगर जान की सलामती का वचन दे चुका था। राजा सीधा अपनी मां के महल पहुंचा। मां ने कहा, "ये सच है, तुम एक चरवाहे के बेटे हो। हमारी औलाद नहीं थी तो तुम्हे गोद लेकर हमने पाला है। राजा ने नौकर को बुलाया और पूछा , बता "तुझे कैसे पता चला? उसने कहा " जब राजा किसी को "इनाम" दिया करते हैं तो हीरे मोती और जवाहरात की शक्ल में देते हैं लेकिन आप भेड़ , बकरियां,खाने पीने की चीजें दिया करते हैं। ये रवैया किसी राजाओं का नही किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है। दोस्तों यदि किसी इंसान के पास कितनी धन दौलत , सुख समृद्धि , रुतबा , इल्म , बाहुबल है तो ये सब बाहरी दिखावा है।इंसान की असलियत की पहचान उसके व्यवहार और उसकी नियत से होती है।।

+2 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 14 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB