🌹🌹Shri Chintamani Parasnath Jain Mandir, Guron Ka Talab Road, Jodhpur🌹🌹

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हमारे तेइसवे तीर्थंकर पार्श्वनाथ स्वामी क्षमा, समता, दया, सहिस्नुता, धेर्य. जैसे महान गुणों से जिनशाशन पर सूर्य के सामान आलोकित हैं, जहाँ उनका जीवन चरित्र सबके लिए प्रेरणादायी हैं, वही वे जिन्धर्मा की परम्परा प्रवाह के आधार स्तब्ध भी हैं, वर्तमान परिवेश में जब समस्त विश्व में हिंसा, आतंकवाद, क्रोध और प्रतिशोध की दावाग्नि धधक रही हैं, वहां भगवन पार्श्वनाथ की उत्तम क्षमाशीलता ही विश्व को महाविनाश से बचा सकती हैं.

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ओम शांति आत्मा एक चेतन वस्तु है।आत्मा को चेतन इसी कारण कहा जाता है कि वह सोच-विचार कर सकती है, दुख- सुख का अनुभव कर सकती है, अच्छा- बुरा करने का पुरूषार्थ (कर्म) कर सकती है। बल्कि मन स्वयं आत्मा के ही संकल्पों का या दुख-सुख के अनुभव का या इच्छा का नाम है।बुद्धि स्वयं आत्मा के ही निर्णय, विचार, विवेक- शक्ति का नाम है। और संस्कार भी स्वयं आत्मा द्वारा किये हुए अच्छे या बुरे कर्मों के आत्मा पर पडे प्रभाव का नाम है। या इसे ऐसे भी कह सकते हैं, अच्छे या बुरे कर्म करने के बाद आत्मा की जो वृत्ति (व्यवहार) बनती है, उसका नाम संस्कार या स्वभाव है। अतः आत्मा को मन, बुद्धि एवं संस्कारों से अलग मानना तो गोया आत्मा को चेतन न मानना अर्थात उसे जड मानना होगा।चेतन आत्मा में और जड प्रकृति में तो यही अन्तर है कि प्रकृति इच्छा, विचार, प्रयत्न, और अनुभव आदि लक्षण नहीं हैं, पर आत्मा में यह सभी लक्षण है।जब प्रकृति भले-बुरे, सुख- शान्ति आदि का अनुभव नहीं कर सकती, तो उससे निर्मित यह सूक्ष्म शरीर भला कैसे हो सकता है।

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लीलाधर की लीला न्यारी — लीलाधर की लीला न्यारी, मानव रूप धरे कंसारी । ( कंस के शत्रु) जन्म लिया माँ देवकी कोख से, खुल गये जेल के सारे ताले। सो गये प्रहरी सारे योग से, पहुँच गये गोकुल बन ग्वाले ।। माँ यशोदा को धन्य-धन्य कर, गौओं के बन गये रखवारे । गोपी, ग्वाल-बाल संग मिलकर, सबहि नचावें नचावनहारे ।। मामा कंस की महिमा न्यारी, प्रतिदिन भेजें मारनहार । मार सके उसको क्या कोई, वही है सबका तारनहार ।। बाल-रूप धर, कृष्ण वर्ण ले, आ गये जग में साँवरिया । नंद-यशोदा भागे पीछे , पागल बनके बावरिया ।। मेरे हृदय में भी बस जाओ, हे! मथुरा के प्रतिपालक। अवगुण सारे गुण बन जायें, हे मधुसूदन ! जनतारक ।। हाथ जोड़कर विनती करूँ मैं, सबका जीवन बने मधुवन। तुम रक्षक बन जाओ सबके, हे करुनामय ! नंदनंदन। ।। 🍃🌺⚜️जय श्री कृष्ण 🌺🍃 🍃🌺⚜️ राधे राधे 🌺🍃

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💓 #जिन्दगी_वही_है_जो_हम_आज_जी_ले... आज के इस कोरोना काल में, सब कुछ अनिश्चित है. कब क्या हो जाए, कुछ मालूम नहीं है. कौन बीमार हो जाए, कौन दुनिया से चला जाए, कुछ पता नहीं है... कुछ बातों का ध्यान रखें, जिससे बाद में पछ्ताना न पड़े... 1. ☝️परमात्मा की याद के बिना, एक पल भी व्यर्थ न गवाएं... 2. घर, परिवार, मित्रों को समय दें. जिससे बाद में मलाल न रहे, कि फलाँ व्यक्ति चला गया, मैं बात भी न कर पाया... 3. तन से, मन से जिसकी जितनी सेवा कर सकें, ज़रूर करें। न कर सकें, तो 'मौन रह कर', घर की शान्ति में योगदान दें... 4. कुछ बात बुरी भी लगे किसी की, तो जल्दी खत्म करके, प्रेम से बात कर लें. मालूम नहीं, ये बातचीत ही 'आखिरी' हो जाए... 5. किसी का परचिंतन, मन में बुरा भाव, टिकने न दें. जल्दी से मन को शांत कर, चेक करते रहें कि 'मेरा ध्यान' किधर है.. ? 6. सारी दुनिया कष्ट में है, दुख में है, उदास है. भगवान से सबके लिए, कृपा मांगें, दया मांगें. सबको शान्ति मिले, कष्टों से मुक्ति मिले... 7. दिल ही दिल में, सबको क्षमा कर दें. सब से क्षमा माँग लें, कहीं किसी से खाता, जुड़ा न रह जाए..* 8. जिसने जब, जितना सहयोग दिया, उसका शुक्राना मन ही मन करें। यदि किसी ने हमारी परेशानी को समझा नहीं, सहयोग नहीं दिया, तो भी शुक्राना करें। मन को समझाए, कि इसमें कोई भलाई होगी... 9. स्वयं को Negativity से दूर रख कर, Positive विचार, सब के लिए Blessings, सुमिरन व कृपाओं की तरफ ध्यान दें. स्वयं को, शांत रखें।परमात्मा सब, अच्छा करेगा... 🤗 ओम शांति!!

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