भगवान सभी कि पुकार सुनता है.....

भगवान सभी कि पुकार सुनता है.....

एक आदमी ❄बर्फ बनाने वाली कम्पनी में काम करता था___
एक दिन कारखाना बन्द होने से पहले अकेला फ्रिज करने वाले कमरे का चक्कर लगाने गया तो गलती से दरवाजा बंद हो गया
और वह अंदर बर्फ वाले हिस्से में फंस गया छुट्टी का वक़्त था और सब काम करने वाले लोग घर जा रहे थे
किसी ने भी अधिक ध्यान नहीं दिया की कोई अंदर फंस गया है।
वह समझ गया की दो-तीन घंटे बाद उसका शरीर बर्फ बन जाएगा अब जब मौत सामने नजर आने लगी तो
भगवान को सच्चे मन से याद करने लगा।
अपने कर्मों की क्षमा मांगने लगा और भगवान से कहा कि प्रह्लाद को तुमने अग्नि से बचाया, अहिल्या को पत्थर से नारि बनाया, शबरी के जुठे बेर खाकर उसे स्वर्ग में स्थान दिया।
प्रभु अगर मैंने जिंदगी में कोई एक काम भी मानवता व धर्म का किया है तो तूम मुझे यहाँ से बाहर निकालो।
मेरे बीवी बच्चे मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे। उनका पेट पालने वाला इस दुनिया में सिर्फ मैं ही हूँ।
मैं पुरे जीवन आपके इस उपकार को याद रखूंगा और इतना कहते कहते उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे।
एक घंटे ही गुजरे थे कि अचानक फ़्रीजर रूम में खट खट की आवाज हुई।
दरवाजा खुला चौकीदार भागता हुआ आया।
उस आदमी को उठाकर बाहर निकाला और 🔥 गर्म हीटर के पास ले गया।
उसकी हालत कुछ देर बाद ठीक हुई तो उसने चौकीदार से पूछा, आप अंदर कैसे आए?
चौकीदार बोला कि साहब मैं 20 साल से यहां काम कर रहा हूं। इस कारखाने में काम करते हुए हर रोज सैकड़ों मजदूर और ऑफिसर कारखाने में आते जाते हैं।
मैं देखता हूं लेकिन आप उन कुछ लोगों में से हो, जो जब भी कारखाने में आते हो तो मुझसे हंस कर *राम राम* करते हो
और हालचाल पूछते हो और निकलते हुए आपका *राम राम काका* कहना मेरी सारे दिन की थकावट दूर कर देता है।
जबकि अक्सर लोग मेरे पास से यूं गुजर जाते हैं कि जैसे मैं हूं ही नहीं।
आज हर दिनों की तरह मैंने आपका आते हुए अभिवादन तो सुना लेकिन *राम राम काका* सुनने के लिए इंतज़ार करता रहा।
जब ज्यादा देर हो गई तो मैं आपको तलाश करने चल पड़ा कि कहीं आप किसी मुश्किल में ना फंसे हो।
वह आदमी हैरान हो गया कि किसी को हंसकर *राम राम* कहने जैसे छोटे काम की वजह से आज उसकी जान बच गई।
*राम कहने से तर जाओगे*
मीठे बोल बोलो, संवर जाओगे,
सब की अपनी जिंदगी है
यहाँ कोई किसी का नही खाता है।
जो दोगे औरों को,
वही वापस लौट कर आता है।
*बोलो सियावर राम चन्द्र जी की जय*
🙏🙏

+223 प्रतिक्रिया 17 कॉमेंट्स • 149 शेयर

कामेंट्स

dheeraj patel Sep 27, 2017
जय श्री कृष्ण 🌹🙏🙏🌹 🌹🌹🌹🌹

parmatma puri Sep 27, 2017
राधे राधे जैय माँ शेरा वाली

+662 प्रतिक्रिया 118 कॉमेंट्स • 377 शेयर

+62 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 52 शेयर

+582 प्रतिक्रिया 105 कॉमेंट्स • 1029 शेयर
Priti Agarwal May 23, 2019

+6 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 19 शेयर
Sunil upadhyaya May 23, 2019

+10 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 24 शेयर
Swami Lokeshanand May 23, 2019

पंचवटी में सूर्पनखा का बड़ा प्रकोप है। सूर्पनखा वासना है, वही इस जगत के दुखों का एकमात्र कारण है। जो भी दुखी है, समझ लो उससे सूर्पनखा चिपटी है। जो इस देह रूपी पंचवटी में आया, सूर्पनखा ने सब पर डोरे डाले। जो इसकी चिकनी चुपड़ी बातों में आ गया, उसकी नाक कटी, वह मारा गया। वही बचा जिसने सत्संग किया और इसकी ओर झांका तक नहीं। उसने नाक कटवाई नहीं, बल्कि इसी की नाक काट दी। जैसे पढ़ाई पूरी होते ही परीक्षा आती है, रामजी का सत्संग पूरा होते ही सूर्पनखा आ गई। अब कच्चे और सच्चे का भेद मालूम पड़ेगा। सूर्पनखा भेष बदलकर आई है, बहुत बनावट के साथ आई है, क्योंकि भेष बदलना तो लंकावालों की परंपरा ही है, मारीच ने बदला, रावण ने बदला। इससे बचने का उपाय देखें, यह आँख से मन में घुसती है, इसीलिए सच्चे सत्संगी लक्षमणजी तुरंत भगवान की ओर देखने लगे। सीता जी ने भी उसे नहीं देखा, वे रामजी के चरणों की ओर देखने लगीं। रामजी सीताजी को ही देखते रहे, उन्होंने भी सूर्पनखा को दृष्टि नहीं दी। माने वासना आक्रमण करे तो भगवान के रूप का चिंतन करें, भगवान के चरणों का आश्रय लें, तब वासना भीतर प्रवेश नहीं कर पाएगी। साधक कभी भी अपने आचरण के बल पर निश्चिंत न रहे, भगवान के चरण के बल पर निश्चिंत रहे। सूर्पनखा की बात नहीं बनी, बने भी कैसे? जहाँ ज्ञानदेव रामजी हों, भक्तिदेवी सीताजी विराजमान हों, वैराग्यदेव लक्षमणजी हों, माने ज्ञान भक्ति और वैराग्य तीनों हों, वहाँ वासना की दाल कैसे गले? अब विशेष ध्यान दें, वासना में बाधा पड़ी तो क्रोध उत्पन्न हुआ, क्रोध हुआ तो भक्ति पर प्रहार का प्रयास हुआ। भगवान कुछ भी सह लेते हैं, भक्ति पर चोट कैसे सहन हो? भगवान ने तुरंत संकेत किया, सावधान जीव ने वासना को नाक कान विहीन कर दिया, वासना का विरूपीकरण कर दिया, कि भविष्य में कभी छल न पाए। देखो, जहाँ वासना घुस जाए वहाँ न ज्ञान बचता, न मान। तो जहाँ ज्ञान नहीं, वहाँ कान किस काम के, और जहाँ मान नहीं, वहाँ नाक कैसी? यों परीक्षा उतीर्ण हुई। भक्ति की रक्षा हुई।

+4 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 9 शेयर
RenuSuresh May 22, 2019

+97 प्रतिक्रिया 30 कॉमेंट्स • 39 शेयर
Anju Mishra May 22, 2019

विचित्र पेड़ों के बारे में जानकारी जय श्री राधे कृष्णा 🙏🌹 चमत्कारिक बरगद : यह वृक्ष आंध्रप्रदेश के नालगोंडा में स्थित है। इसकी खासियत यह है कि इस पर विभिन्न जंगली जानवरों की आकृतियां बनी हुई है। सांप, बिच्छु, मगरमच्छ, शेर, अजगर आदि खतरनाक पशु और पक्षियों की आकृतियां संपूर्ण वृक्ष पर बनी हुई है। कहते हैं कि यह बाओबाज़ ट्री है और इसका तना दुनिया में किसी भी वृक्ष से बड़ा है।  लोगों का मानना है कि इस पेड़ के तनों पर किसी ने इन कलाकृतियों को गढ़ा है। उनका मानना है कि यह कोई चमत्कार नहीं है। दरअसल आंध्रप्रदेश के नलगोंडा में ऐसा कोई पेड़ नहीं है। ये तो डिज़्नी लैंड में कला का एक नमूना है। हालांकि वहीं बहुतयात लोगों का मानना है कि यह अनोखी प्रजाति का पेड़ है जोकि पूरी दुनिया में इकलौता है। नालगोंडा आंध्रप्रदेश का एक महत्‍वपूर्ण जिला है इस जिले का पहले नाम नीलगिरी था। नालगोंडा को पुरातत्‍वशास्त्रियों का स्‍वर्ग कहा जाता क्योंकि यहां पाषाणयुग और पूर्वपाषाण युग के अवशेष पाए गए हैं। ता फ्रोम ट्री ऑफ कंबोडिया :कंबोडिया के अंगारकोट में स्थित इस वृक्ष को देखने के लिए विश्‍व के कोने-कोने से लोग आते हैं। अंगारकोट में विश्‍व प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर भी है। यहां का जंगली क्षेत्र सिल्क कॉटन के वृक्षों के लिए भी प्रसिद्ध है।  यहां का 'ता फ्रोम बौ‍द्ध मंदिर' 12वीं शताब्दी में बनाया गया था हालांकि अब तो यह खंडहर में बदल चुका है। सैकड़ों साल पुराने मंदिर और इन पेड़ों को विश्‍व धरोहर घोषित कर दिया गया है। यहां के विशालकाय मंदिरों को इन वृक्षों ने ढंक कर रखा है। मंदिर और वृक्ष का यह अद्भुत मिलन देखना किसी आश्चर्य से कम नहीं। कैलीफोर्निया का ग्रेट सिकुआ : अमेरिका के कैलीफोर्निया राज्य के सियेरा नेवादा ढलानों के सबसे बड़े पेड़ के लिए प्रसिद्ध है। ग्रेट सिकुआ नामक यह पेड़ 'सिकुआ डेन्ड्रान' वंश का है और इसका जातिगत नाम 'जाइगे स्टिअम' है। इस पेड़ का व्यास 12 मीटर तथा कुल ऊंचाई 82 मीटर है। भूमि से 54 मीटर की ऊंचाई पर इसका तना 4 मीटर मोटा है और इसकी सबसे लंबी शाखा की लंबाई 42.3 मीटर तथा व्यास 1.8 मीटर है। इसके तने का कुल आयतन 1401.84 घनमीटर है। अमेरिका के सिकुआ राष्ट्रीय पार्क में इस प्रकार के 300 से अधिक पेड़ हैं। इनमें से कुछ का नाम अमेरिका के प्रसिद्ध व्यक्तियों के नाम पर रखा गया है। ड्रैगन ट्री, कैनरी द्वीप : ड्रैगन वृक्ष को जीवित जीवाश्म इसीलिए माना जाता है, क्योंकि जब इसे काटा जाता है तो इसमें से खून की तरह लाल रंग का रस निकलता है। इस वृक्ष का आधार चौड़ा, मध्य भाग संकरा और ऊपर का भाग किसी छतरी की तरह तना हुआ है। इसी कारण यह भाग ऐसा लगता है कि सैंकड़ों पेड़ उगकर एकसाथ बंध गए हो। अफ्रीका के उत्तरी पश्‍चिमी तट पर कैनरी आयलैंड स्थित है, इस वृक्ष को देखने के लिए विश्वभर से लोग आते हैं। लेकिन इसे ड्रैगन ट्री क्यों कहा जाता है यह समझ से परे है।

+114 प्रतिक्रिया 19 कॉमेंट्स • 12 शेयर

+50 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 136 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB