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🌺राजाधिराज महाराज भूत भावन अवन्तिका नाथ तीनों लोको के स्वामी भगवान महाकाल की आज भस्म आरती के दिव्य दर्शन स्वयं देखिये,22-04-19🌺 🚩🚩🔱जय श्री महाकाल मित्रों 🔱🚩🚩 🌀दर्शन श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर उज्जैन से🌀 📿आप का मित्र दीपक राव इन्दौर,22-04-19📿

🌺राजाधिराज महाराज भूत भावन अवन्तिका नाथ तीनों लोको के स्वामी भगवान महाकाल की आज भस्म आरती के दिव्य दर्शन स्वयं देखिये,22-04-19🌺
🚩🚩🔱जय श्री महाकाल मित्रों 🔱🚩🚩
🌀दर्शन श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर उज्जैन से🌀
📿आप का मित्र दीपक राव इन्दौर,22-04-19📿

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कामेंट्स

Deepak Rao Apr 22, 2019
@rajeshpathak6 जय श्री महाकाल मित्र पाठक जी सादर नमस्कार हर हर महादेव

Deepak Rao Apr 22, 2019
@chetram51 जय श्री महाकाल मित्र हर हर महादेव

deepak kumar Apr 22, 2019
HARI AUM NAMAHA SHIVAY AUM JAYANTI MANGLA KALI BHADRAKALI KAPALANI DURGA CHAMA SHIVA DHATRI SWAHA SAVDA NAMOUSTUTE AUM AIM HREEM KLEEM CHAMUDAYE VICHEY CMAHAKALI CMAHALAXMI CMAHASARASVATI NAMO NAMAHA SUPRABHAT

Os Pandey Apr 22, 2019
Har Har mahadev Good morning 🙏🙏🙏

Deepak Rao Apr 22, 2019
@ziddipandit जय श्री महाकाल मित्र हर हर महादेव

Deepak Rao Apr 22, 2019
@zalahanubha जय श्री महाकाल मित्र हर हर महादेव शुभ संध्या

Deepak Rao Apr 23, 2019
@drspanda जय श्री महाकाल मित्र हर हर महादेव

🙏🏻🌹जय श्री रामेश्वरम🙏🏻🌹 💥💥💥💥💥💥💥 * जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं॥ जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि॥ भावार्थ:- जो मनुष्य (मेरे स्थापित किए हुए इन) रामेश्वरजी का दर्शन करेंगे, वे शरीर छोड़कर मेरे लोक को जाएँगे और जो गंगाजल लाकर इन पर चढ़ावेगा, वह मनुष्य सायुज्य मुक्ति पावेगा (अर्थात्‌ मेरे साथ एक हो जाएगा)॥ 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 चार दिशाओं में स्थित चार धाम हिंदुओं की आस्था के केंद्र ही नहीं बल्कि पौराणिक इतिहास का आख्यान भी हैं। जिस प्रकार धातुओं में सोना, रत्नों में हीरा, प्राणियों में इंसान अद्भुत होते हैं उसी तरह समस्त तीर्थ स्थलों में इन चार धामों की अपनी महता है। 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 इन्हीं चार धामों में से एक है दक्षिण भारत का काशी माना जाने वाला रामेश्वरम। यह सिर्फ चार धामों में एक प्रमुख धाम ही नहीं है बल्कि यहां स्थापित शिवलिंग को 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। आइये जानते हैं तमिलनाडु प्रांत के रामनाथपुरम जिले में स्थित इस प्रसिद्ध मंदिर के बारे में। पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलते हैं कि जब भगवान श्री राम ने लंका पर चढ़ाई की तो विजय प्राप्त करने के लिये उन्होंनें समुद्र के किनारे शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा की थी। 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 इससे प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने श्री राम को विजयश्री का आशीर्वाद दिया था। आशीर्वाद मिलने के साथ ही श्री राम ने अनुरोध किया कि वे जनकल्याण के लिये सदैव इस ज्योतिर्लिंग रुप में यहां निवास करें उनकी इस प्रार्थना को भगवान शंकर ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 इसके अलावा ज्योतिर्लिंग के स्थापित होने की एक कहानी और है इसके अनुसार जब भगवान श्री राम लंका पर विजय प्राप्त कर लौट रहे थे तो उन्होंनें गंधमादन पर्वत पर विश्राम किया वहां पर ऋषि मुनियों ने श्री राम को बताया कि उन पर ब्रह्महत्या का दोष है जो शिवलिंग की पूजा करने से ही दूर हो सकता है। इसके लिये भगवान श्री राम ने हनुमान से शिवलिंग लेकर आने की कही। हनुमान तुरंत कैलाश पर पहुंचे लेकिन वहां उन्हें भगवान शिव नजर नहीं आये अब हनुमान भगवान शिव के लिये तप करने लगे उधर मुहूर्त का समय बीता जा रहा था। 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 अंतत: भगवान शिवशंकर ने हनुमान की पुकार को सुना और हनुमान ने भगवान शिव से आशीर्वाद सहित शिवलिंग प्राप्त किया लेकिन तब तक देर हो चुकी मुहूर्त निकल जाने के भय से माता सीता ने बालु से ही विधिवत रुप से शिवलिंग का निर्माण कर श्री राम को सौंप दिया जिसे उन्होंनें मुहूर्त के समय स्थापित किया। जब हनुमान वहां पहुंचे तो देखा कि शिवलिंग तो पहले ही स्थापित हो चुका है इससे उन्हें बहुत बुरा लगा। श्री राम हनुमान की भावनाओं को समझ रहे थे उन्होंनें हनुमान को समझाया भी लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए तब श्री राम ने कहा कि स्थापित शिवलिंग को उखाड़ दो तो मैं इस शिवलिंग की स्थापना कर देता हूं। लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी हनुमान ऐसा न कर सके और अंतत: मूर्छित होकर गंधमादन पर्वत पर जा गिरे होश में आने पर उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ तो श्री राम ने हनुमान द्वारा लाये शिवलिंग को भी नजदीक ही स्थापित किया और उसका नाम हनुमदीश्वर रखा। 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 रामेश्वर मंदिर – रामेश्वरम का मंदिर भी अपने आप में एक आकर्षण हैं यहां का गलियारा विश्व का सबसे बड़ा गलियारा माना जाता है। गोपुरम, मंदिर के द्वार से लेकर मंदिर का हर स्तंभ, हर दिवार वास्तुकला की दृष्टि से भी बहुत अद्भुत है। रामसेतु * होइ अकाम जो छल तजि सेइहि। भगति मोरि तेहि संकर देइहि॥ मम कृत सेतु जो दरसनु करिही। सो बिनु श्रम भवसागर तरिही॥ जो छल छोड़कर और निष्काम होकर श्री रामेश्वरजी की सेवा करेंगे, उन्हें शंकरजी मेरी भक्ति देंगे और जो मेरे बनाए सेतु का दर्शन करेगा, वह बिना ही परिश्रम संसार रूपी समुद्र से तर जाएगा॥ रामेश्वरम मंदिर के पास ही सागर में आज भी आदि-सेतु के अवशेष दिखाई देते हैं। कहा जाता है कि लंका पर चढ़ाई करने से पहले वानर सेना की मदद से इस सेतु का निर्माण किया गया था लेकिन लंकाविजय के बाद जब विभीषण को सिंहासन सौंप दिया गया तो विभिषण के अनुरोध पर धनुषकोटि नामक स्थान पर इस सेतु को तोड़ दिया गया था। आज भी लगभग 48 किलोमीटर लंबे इस सेतु के अवशेष मिलते हैं। 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 24 कुएं – मंदिर के अंदर ही 24 कुएं हैं जिन्हें तीर्थ कहा जाता है। इनके बारे में मान्यता है कि इन्हें प्रभु श्री राम ने अपने अमोघ बाण से बनाकर उनमें तीर्थस्थलों से पवित्र जल मंगवाया था। यही कारण है कि इन कुओं का जल मीठा है। कुछ कुएं मंदिर के बाहर भी हैं लेकिन उनका जल खारा है। इन चौबीस कुओं अर्थात तीर्थों का नाम भी देश भर के प्रसिद्ध तीर्थों व देवी देवताओं के नाम पर रखा गया है। इसके अलावा मंदिर के आस-पास और भी बहुत सारे तीर्थ हैं जिन्हें देखा जा सकता है। रामेश्वरम मंदिर में पवित्र गंगा जल से ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक करने का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। मान्यता तो यह भी है कि रामेश्वरम में भगवान शिव की विधिवत पूजा करने पर ब्रह्महत्या जैसे दोष से भी मुक्ति मिल जाती है। रामेश्वरम को दक्षिण भारत का काशी माना जाता है क्योंकि यह स्थान भी भगवान शिव और प्रभु श्री राम की कृपा से मोक्षदायी है। 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 देश-दुनिया के किसी भी कौने से किसी भी माध्यम से रामेश्वरम पंहुचना बिल्कुल आसान है। इसके लिये पहले चेन्नई फिर त्रिचिनापल्ली होते हुए रामेश्वरम तक पहुंचा जाता है। रामेश्वरम रेल यातायात के माध्यम से चेन्नई सहित दक्षिण भारत के अन्य प्रसिद्ध शहरों के साथ भी सीधा जुड़ा हुआ है। #हर__हर___महादेव

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Neha Kaushik Jun 24, 2019

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