Good night sweet dreams 💐💐💐💐🙋🙋🙋🙋🙏🙏✍️✍️✍️😃😃😃🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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कामेंट्स

Davendra Verma (Soni Ji) May 3, 2021
super super disco dance 👌👌par hai kaha ka Preeti Ji🤔😂😂 Good Night Ji 🙏🚩😴🥛🥛🍫👈🙋

dhruv wadhwani May 3, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री राधे जय जय श्री राधे कृष्णा

Gajendrasingh kaviya May 3, 2021
Radhe Radhe good morning have a nice day my sweet sis 🌷🌷🌷🌷 aap sada khush raho my pyari bena 🌹🌹🌹🌹🌹🌹 Jai jinendra sa 🙏🙏🙏🙏🙏

madan pal 🌷🙏🏼 May 4, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जी शूभ प्रभात वंदन जी आपका हर पल शूभ मंगल हों जी ने 🙏🏼🙏🏼🙏🏼👌🏼👌🏼👌🏼👌🏼🌹🌹🌹🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

🍃🌹K. P Gupta 🌹🍃 May 4, 2021
👌👌😂😂Routine Se alag, aapki prayas Swagtyoga. old is gold. favorite song .jai jinendra. jai shri Krishna. always be happy $ healthy with your family. 🍫🍫⬅😊😊💐💐👏👏

EXICOM May 4, 2021
🌹🙏ऊँ🙏🌹 🌹🙏शाँतिं🙏🌹 🌹🙏दीदी🙏🌹 🌹🙏जी🙏🌹

EXICOM May 4, 2021
🌹🙏ऊँ🙏🌹 🌹🙏शाँतिं🙏🌹 🌹🙏दीदी🙏🌹 🌹🙏जी🙏🌹

A.K May 5, 2021
राम 🕉️राम राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌷राम‌ राम🌹राम

एक बहुत ही सुंदर दृष्टांत... एक बार की बात है वीणा बजाते हुए नारद मुनि भगवान श्रीराम के द्वार पर पहुँचे। नारायण नारायण !! नारदजी ने देखा कि द्वार पर हनुमान जी पहरा दे रहे है। हनुमान जी ने पूछा: नारद मुनि ! कहाँ जा रहे हो? नारदजी बोले: मैं प्रभु से मिलने आया हूँ। नारदजी ने हनुमानजी से पूछा प्रभु इस समय क्या कर रहे है? हनुमानजी बोले: पता नहीं पर कुछ बही खाते का काम कर रहे है, प्रभु बही खाते में कुछ लिख रहे है। नारदजी: अच्छा?? क्या लिखा पढ़ी कर रहे है? हनुमानजी बोले: मुझे पता नहीं मुनिवर आप खुद ही देख आना। नारद मुनि गए प्रभु के पास और देखा कि प्रभु कुछ लिख रहे है। नारद जी बोले: प्रभु आप बही खाते का काम कर रहे है? ये काम तो किसी मुनीम को दे दीजिए। प्रभु बोले: नहीं नारद, मेरा काम मुझे ही करना पड़ता है। ये काम मैं किसी और को नही सौंप सकता। नारद जी: अच्छा प्रभु ऐसा क्या काम है? ऐसा आप इस बही खाते में क्या लिख रहे हो? प्रभु बोले: तुम क्या करोगे देखकर, जाने दो। नारद जी बोले: नही प्रभु बताईये ऐसा आप इस बही खाते में क्या लिखते हैं? प्रभु बोले: नारद इस बही खाते में उन भक्तों के नाम है जो मुझे हर पल भजते हैं। मैं उनकी नित्य हाजिरी लगाता हूँ। नारद जी: अच्छा प्रभु जरा बताईये तो मेरा नाम कहाँ पर है? नारदमुनि ने बही खाते को खोल कर देखा तो उनका नाम सबसे ऊपर था। नारद जी को गर्व हो गया कि देखो मुझे मेरे प्रभु सबसे ज्यादा भक्त मानते है। पर नारद जी ने देखा कि हनुमान जी का नाम उस बही खाते में कहीं नही है? नारद जी सोचने लगे कि हनुमान जी तो प्रभु श्रीराम जी के खास भक्त है फिर उनका नाम, इस बही खाते में क्यों नही है? क्या प्रभु उनको भूल गए है? नारद मुनि आये हनुमान जी के पास बोले: हनुमान ! प्रभु के बही खाते में उन सब भक्तों के नाम हैं जो नित्य प्रभु को भजते हैं पर आप का नाम उस में कहीं नहीं है? हनुमानजी ने कहा कि: मुनिवर,! होगा, आप ने शायद ठीक से नहीं देखा होगा? नारदजी बोले: नहीं नहीं मैंने ध्यान से देखा पर आप का नाम कहीं नही था। हनुमानजी ने कहा: अच्छा कोई बात नहीं। शायद प्रभु ने मुझे इस लायक नही समझा होगा जो मेरा नाम उस बही खाते में लिखा जाये। पर नारद जी प्रभु एक अन्य दैनंदिनी भी रखते है उसमें भी वे नित्य कुछ लिखते हैं। नारदजी बोले:अच्छा? हनुमानजी ने कहा: हाँ! नारदमुनि फिर गये प्रभु श्रीराम के पास और बोले प्रभु ! सुना है कि आप अपनी अलग से दैनंदिनी भी रखते है! उसमें आप क्या लिखते हैं? प्रभु श्रीराम बोले: हाँ! पर वो तुम्हारे काम की नहीं है। नारदजी: ''प्रभु ! बताईये ना, मैं देखना चाहता हूँ कि आप उसमें क्या लिखते हैं? प्रभु मुस्कुराये और बोले मुनिवर मैं इनमें उन भक्तों के नाम लिखता हूँ जिन को मैं नित्य भजता हूँ। नारदजी ने डायरी खोल कर देखा तो उसमें सबसे ऊपर हनुमान जी का नाम था। ये देख कर नारदजी का अभिमान टूट गया। कहने का तात्पर्य यह है कि जो भगवान को सिर्फ जीव्हा से भजते है उनको प्रभु अपना भक्त मानते हैं और जो ह्रदय से भजते है उन भक्तों के वे स्वयं भक्त हो जाते हैं। ऐसे भक्तों को प्रभु अपनी हृदय रूपी विशेष सूची में रखते हैं। 🚩जय सियाराम🚩

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एक आदमी घोड़े पर कहीं जा रहा था, घोड़े को जोर की प्यास लगी थी।कुछ दूर कुएं पर एक किसान बैलों से "रहट" चलाकर खेतों में पानी लगा रहा था।मुसाफिर कुएं पर आया और घोड़े को "रहट" में से पानी पिलाने लगा।पर जैसे ही घोड़ा झुककर पानी पीने की कोशिश करता, "रहट" की ठक-ठक की आवाज से डर कर पीछे हट जाता।फिर आगे बढ़कर पानी पीने की कोशिश करता और फिर "रहट" की ठक-ठक से डरकर हट जाता।मुसाफिर कुछ क्षण तो यह देखता रहा, फिर उसने किसान से कहा कि थोड़ी देर के लिए अपने बैलों को रोक ले ताकि रहट की ठक-ठक बन्द हो और घोड़ा पानी पी सके। किसान ने कहा कि जैसे ही बैल रूकेंगे कुएँ में से पानी आना बन्द हो जायेगा, इसलिए पानी तो इसे ठक-ठक में ही पीना पड़ेगा। ठीक ऐसे ही यदि हम सोचें कि जीवन की ठक-ठक (हलचल) बन्द हो तभी हम भजन, सन्ध्या, वन्दना आदि करेंगे तो यह हमारी भूल है। हमें भी जीवन की इस ठक-ठक (हलचल) में से ही समय निकालना होगा, तभी हम अपने मन की तृप्ति कर सकेंगे, वरना उस घोड़े की तरह हमेशा प्यासा ही रहना होगा। सब काम करते हुए, सब दायित्व निभाते हुए प्रभु सुमिरन में भी लगे रहना होगा, जीवन में ठक-ठक तो चलती ही रहेगी।

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*उत्तम भक्त किसे कहते हैं.....?* *उत्तम भक्त वही है जो प्रशंसा को प्रभु चरणों में समर्पित कर दे और निंदा को अपनी गाँठ में इस प्रण के साथ रखले कि इस निंदा को प्रशंसा में अवश्य बदलूंगा और भगवान को भेंट चढ़ाऊंगा।* *भगवान श्रीराम ने भरतजी की प्रशंसा की तो भरत जी ने कहा :- "प्रशंसा तो आपकी क्योंकि मुझे आपकी छत्र-छाया मिली। आप स्वभाव से किसी में दोष देखते ही नहीं, इसलिए मेरे गुण आपको दीखते हैं।"* *श्रीरामजी ने कहा :- "चलो मान लिया कि मुझे दोष देखना नहीं आता, पर गुण देखना तो आता है, इसलिए कहता हूँ कि तुम गुणों का अक्षय कोष हो।"* *भरतजी बोले :- "प्रभु यदि तोता बहुत बढ़िया श्लोक पढ़ने लगे और बन्दर बहुत सुन्दर नाचने लगे तो इसमें बन्दर या तोते की क्या विशेषता है? विशेषता तो पढ़ाने और नचानेवाले की हैं।"* *भगवान ने कहा :- "पढ़ाने और नचानेवाले की।"* *भरतजी बोले :- "मैं उसी तोते और बन्दर की तरह हूँ। यदि मुझमें कोई विशेषता दिखाई देती है तो पढ़ाने और नचानेवाले तो आप ही हैं, इसलिए यह प्रशंसा आपको ही अर्पित है।"* भगवान ने कहा :- "भरत, तो प्रशंसा तुमने लौटा दी।" भरतजी बोले :- *"प्रभु, प्रशंसा पचा लेना सबके वश का नहीं। यह अजीर्ण पैदा कर देता है लेकिन आप इस प्रशंसा को पचाने में बड़े निपुण हैं। अनादिकाल से भक्त आपकी स्तुति कर रहे हैं, पर आपको तो कभी अहंकार हुआ ही नहीं, इसलिए यह प्रशंसा आपके चरण कमलों में अर्पित है। जय श्री राम

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"स्नेह भरी ममता....... घरसे बाहर निकलते ही सबसे पहले मे इधर उधर देखता था कहीं गली मे या अपने दरवाजे पर लक्ष्मी मौसी तो नहीं खडी .....लक्ष्मी मौसी....हमारे पास ही दो घर छोडकर रहती है...जब कभी मुझे बाहर निकलते देखती हैं उन्हें कुछ ना कुछ बाजार से मंगाना ही होता है.... कभी सब्जी तो कभी दवाई तो कभी दूध.... तंग आ गया हूं उनसे.....कभी कभी तो मन करता है जीभरकर सुना दूं..... खुद के बेटे को तो गांव से बाहर बडे शहर भेज दिया और मुझे यहां नौकर समझ रखा है.... पर अकेली रहती है अंकल भी शायद बीमार रहते है इसलिए चुप हो जाता हूं यही सोचकर.... अपनी बाइक मैं अब घर से दूर ले जाकर स्टार्ट करता हूं कि कहीं आवाज सुन कर आ ना जाएं.... आज बाइक लेकर अभी गांव की गली के मोड़ से मुड़ने ही वाला था कि सामने से लक्ष्मी मौसी दिख गई.... हाथों में बड़ा सा झोला लिए पैदल.... पसीने से तर बतर.... नाजाने क्या हुआ मुझे .... मैंने बाइक रोक दी.... राम राम मौसी.... पैदल....क्युं.....कोई रिक्शा नहीं था क्या.... सांसे काफी तेज चल रही थी उनकी....अपने पल्लू से पसीने को पोछ थोड़ा रुक कर बोली.... राम राम बेटा....राम राम....वो रिक्शावाला..... ज्यादा पैसे मांग रहे था झोले को किसी तरह बमुश्किल उठाकर वह फिर चलने को हुई.... उन्हें इस हाल में देख मैं पसीज गया....लाओ मौसी.... मैं ले चलता हूं.... उन्होंने एकटक मेरी और देखा फिर कुछ सोचने लगी... चलिए ना ....क्या सोचने लग गई आप.... उन्होंने कुछ बोला नही.... मैंने खुद उनके हाथों का सामान लिया और उन्हें पीछे बिठाकर उनके घर ले आया....अंकल मोबाइल फोन पर बातें कर रहे थे... बेटा.....मैं भी बहुत बीमार रहता हूं तेरी मां भी थक चुकी है ....अभी बाजार गई है सब्जियों को लाने.... फिर मेरी दवा लाने बडे बाजार जाएगी....गांव के बच्चे कितना करेंगे हमारे लिए....सच कहूं तो वो भी बचने लगे हैं हमसे..... अंकल की ये बात सुन मैं कहीं ना कहीं खुद से नज़रें चुराने लग गया था अंकल हाथ में दवा की पर्ची लिए फोन पर बातें किये जा रहे थे.... हमें अपने साथ ही रखता तो......ना जाने उधर से क्या बोला गया.... अंकल फोन रखकर रोने से लग गए.... लक्ष्मी मौसी उनको चुप कराते हुए बोली....आप क्यूं उससे रोज रोज ये विनती करते है मैं हूँ ना..... जबतक सांस है मैं खींच लुंगी अपनी गृहस्थी....मौसी ने उनके हाथ से दवा की पर्ची ले ली....उनके माथा अभी भी पसीने से भीगा हुआ था....उनकी ये परिस्थिति देख दिल में दर्द सा उठ आया.... अरे तुम.... तुम जाओ बेटा...तुम्हें देर हो रही होगी....मुझे छोडने के लिए साथ आ गए..... मौसी ने भरी हुई आवाज से मुझे जाने को कहा.... उन्हें देख मेरी आँखें भी भर आई... मुझे क्षमा कर दीजिएगा मौसी...मै पड़ोस में रहकर आपकी इन परिस्थितियों से अनजान था....आप मुझे पर्ची दीजिये मैं दवा लेकर आता हूं.... जब खुद का बेटा सब जानकर ही अनजान बना बैठा है तो तुम क्युं माफ़ी मांग रहे हो बेटा.... कयोंकि आप मुझे भी तो बेटा कहती है मौसी...... मैंने अपने इस हक से उनके हाथों से पर्ची ले ली....उन्होंने भी मेरे माथे को चूम अपना हक जता दिया..... दोस्तों..... बडे बुजुर्ग कहते थे मौसी अर्थात मां जैसी ..... जब मौसी आपको स्नेह और ममता देने मे मां बन जाती है तो आप किसी मौसी , चाची , आंटीजी के बेटे कयूं नहीं बन सकते .......जब कोई आपको बेटा कहता है ना तो आप के अंदर उन्हें वो आदर सम्मान और कुछ आशाएं दिखाई देती है .....आशा है एकदूसरे के प्यार सम्मान और स्नेह भरी ममता को समझते हुए आप भी इन सभी बने रिश्तों का सम्मान करेंगे एक सुंदर रचना... #दीप...🙏🙏🙏

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Jai Mata Di May 5, 2021

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