Jai Mata Di
Jai Mata Di Feb 23, 2021

Jai Mata Di 🙏🙏🙏🙏 Parvachan 🥀🥀🥀🥀 Shubh Sandhya 9212899445 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

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कामेंट्स

Ansouya Feb 23, 2021
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹 शुभ संध्या भइया जी 🙏🌹 हरि जी और माता लक्ष्मी जी की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बना रहे भाई जी 🙏 धन्यवाद भईया जी 🙏

Asha-Bakshi Feb 23, 2021
🙏🙏SATNAM SHREE WAHEGURU JI 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

madan pal 🌷🙏🏼 Feb 23, 2021
जय श्री राधे राधे कृष्णा ज़ी शूभ रात्रि वंदन ज़ी आपका हर पल शूभ मंगल हों ज़ी 🌷🕉️🙏🏼🕉️🙏🏼🌹🌹🌹

💠Shuchi Singhal💠 Feb 23, 2021
Ram Ram Bhaiya ji .... please Meri Ram wali post pe aaw .... Jai Hind dekhoo kitna Ulta Sidha Bol rha ...dekhooo Aap...

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🔥Raju Rai.🔥 Feb 26, 2021

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Shweta Sharma Feb 26, 2021

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Sanjay Awasthi Feb 25, 2021

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Neha Sharma, Haryana Feb 25, 2021

🙏*जय श्री राधेकृष्णा*🙏*शुभ संध्या नमन*🙏 *इन कारणों से मंदिर जाना स्वास्थ्य के लिए होता है अच्छा* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ *प्राय: हिन्दू धर्म में मंदिर में जाना धर्मिक भावना से जोड़ा जाता है। लेकिन मंदिर जाने के कुछ वैज्ञानिक स्वास्थ्य लाभ भी हैं। अगर हम रोज मंदिर जाते हैं तो इससे कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या को नियंत्रित किया जा सकता हैं। ध्यान शक्ति के विकास के लिए ~~~~~~~~~~~~~~~~~ रोज़ मंदिर जाने और भौहों के बीच माथे पर तिलक लगाने से हमारे मस्तिष्क के विशेष भाग पर दवाब पड़ता है। इससे ध्यान और स्मृति की शक्ति बढ़ती है। उच्च रक्तचाप नियंत्रित करने के लिए ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मंदिर के अंदर नंगे पैर जाने से मंदिर में विराजमान सकारात्मक शक्ति (पॉजिटिव एनर्जी) पैरों के द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश करती है। नंगे पैर चलने के कारण पैरों में स्थित दाब बिन्दू (प्रेशर प्वाइंट्स) पर दवाब भी पड़ता है, जिससे उच्च रक्तचाप की समस्या नियंत्रित और समाप्त होती है। ऊर्जा स्तर को बढ़ाने के लिए ~~~~~~~~~~~~~~~~ प्राय: जब हम मंदिर का घंटा बजाते हैं, तो 7 पल तक हमारे कानों में उसकी प्रतिध्वनि गूंजती है। इस प्रतिकिया से शरीर के सूक्ष्म सेल जो कि हमारे शरीर को ऊर्जा और शान्ति प्रदान करते हैं वो जागृत हो जाते हैं । इससे शरीर की ऊर्जा शक्ति को बढ़ाने में सहायता मिलती है। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मंदिर में दोनों हाथ जोड़कर पूजा करने से हथेलियों और उंगलियों के उन सूक्ष्म बिंदूओं पर दवाब पड़ता है, जो शरीर के कई अन्य अंगों से सम्बन्धित और जुड़े होते हैं। इससे शरीर की कमियाँ सुधरती हैं और प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। बैक्टीरिया से रक्षा के लिए ~~~~~~~~~~~~~~ मंदिर में उपस्थित कपूर और हवन का धुआं एंटी ओक्सीडेंट होता है जो बैक्टीरिया का नाश करता है। इससे वायरल इंफेक्शन का खतरा टलता है। तनाव दूर करने के लिए ~~~~~~~~~~~~~ मंदिर का शांत माहौल और शंख की आवाज़ मानसिक रूप से शान्ति प्रदान करती है। इससे तनाव दूर होता है। डिप्रेशन दूर होता है ~~~~~~~~~~~ रोज़ मंदिर जाने और भगवान की आरती गाने से मानसिक रूप से शक्त बनते हैं, जिससे डिप्रेशन दूर होता है। ।। जय श्री कृष्ण ।। ~~~~~~~~~~ . 🌸🙏"कृष्ण नाम की महिमा"🙏🌸 *एक गाँव में एक गड़रिया के पास बहुत सारी बकरियाँ थी वह बकरियों का दूध बेचकर ही अपना गुजारा करता था। एक दिन उसके गाँव में बहुत से महात्मा आकर यज्ञ कर रहे थे और वह वृक्षों के पत्तों पर चन्दन से कृष्ण-कृष्ण का नाम लिखकर पूजा कर रहे थे। *वह जगह गाँव से बाहर थी। वह गड़रिया बकरियों को वही रोज घास चराने जाता था। साधु हवन यज्ञ करके वहाँ से जा चुके थे, लेकिन वह पत्ते वहीं पड़े रह गए तभी पास चरती बकरियों में से एक बकरी ने वो कृष्ण नाम रूपी पत्तों को खा लिया। *जब गड़रिया सभी बकरियों को घर लेकर गया तो सभी बकरियाँ अपने बाड़े में जाकर मैं-मैं करने लगी लेकिन वह बकरी जिसने कृष्ण नाम को अपने अन्दर ले लिया था वह मैं-मैं की जगह कृष्ण-कृष्ण करने लगी क्योंकि जिसके अन्दर कृष्ण वास करने लगें उसका मैं यानी अहम तो अपने आप ही दूर हो जाता है। *जब सब बकरियाँ उसको कृष्ण-कृष्ण कहते सुनती है तो वह कहती यह क्या कह रही हो अपनी भाषा छोड़ कर यह क्या बोले जा रही हो, मैं-मैं बोलो। तो वह कहती कृष्ण नाम रूपी पत्ता मेरे अन्दर चला गया। मेरा तो मैं भी चला गया। सभी बकरियाँ उसको अपनी भाषा में बहुत कुछ समझाती परन्तु वह टस से मस ना हुई और कृष्ण कृष्ण रटती रही। *सभी बकरियों ने यह निर्णय किया कि इसको अपनी टोली से बाहर ही कर देते हैं। वह सब उसको सीग और धक्के मार कर बाड़े से बाहर निकाल देती हैं। सुबह जब मालिक आता है तो उसको बाड़े से बाहर देखता है। वह उसको पकड़ कर फिर अन्दर कर देता है परन्तु बकरियाँ उसको फिर सींग मार कर बाहर कर देती हैं। मालिक को कुछ समझ नहीं आता यह सब इसकी दुश्मन क्यों हो गई हैं। मालिक सोचता है कि जरूर इसको कोई बीमारी होगी जो सब बकरियाँ इसको अपने पास भी आने नहीं दे रही, कहीं ऐसा ना हो कि एक बकरी के कारण सभी बीमार पड़ जाय। *वह रात को उस बकरी को जंगल में छोड़ देता है सुबह जब जंगल में अकेली खड़ी बकरी को एक व्यक्ति जो की चोर होता है देखता है तो वह उस बकरी को लेकर जल्दी से भाग जाता है और दूर गाँव जाकर उसे किसी एक किसान को बेच देता है। *किसान जो कि बहुत ही भोला भाला और भला मानस होता है उसको कोई फर्क नहीं पड़ता की बकरी मै-मैं कर रही है या कृष्ण-कृष्ण। वह बकरी सारा दिन कृष्ण कृष्ण जपती रहती। अब वह किसान उस बकरी का दूध बेच कर अपना गुजारा करता है। *कृष्ण नाम के प्रभाव से बकरी बहुत ही ज्यादा और मीठा दूध देती है । दूर-दूर से लोग उसका दूध उस किसान से लेने आते हैं। किसान जो की बहुत ही गरीब था बकरी के आने और उसके दूध की बिक्री होने से उसके घर की दशा अब सुधरने लगी। *एक दिन राजा के मंत्री और कुछ सैनिक उस गाँव से होकर गुजर रहे थे उसको बहुत भूख लगी तभी उन्हें किसान का घर दिखाई दिया किसान ने उसको बकरी का दूध पिलाया इतना मीठा और अच्छा दूध पीकर मंत्री और सैनिक बहुत खुश हुए। उन्होंने किसान को कहा कि हमने इससे पहले ऐसा दूध कभी नहीं पिया। किसान ने कहा यह तो इस बकरी का दूध है जो सारा दिन कृष्ण-कृष्ण करती रहती है। मंत्री उस बकरी को कृष्ण नाम जपते देखकर हैरान हो गया। वो किसान का धन्यवाद करके वापस नगर में राज महल चले गए। *उन दिनों राजमाता जो कि काफी बीमार थी कई वैद्य के उपचार के बाद भी वह ठीक ना हुई। राजगुरु ने कहा माताजी का स्वस्थ होना मुश्किल है, अब तो भगवान इनको बचा सकते हैं। राजगुरु ने कहा कि अब आप माता जी को पास बैठकर ज्यादा से ज्यादा ठाकुर जी का नाम लो। राजा काफी व्यस्त रहता था वह सारा दिन राजपाट संभाल ले या माताजी के पास बैठे। *नगर में किसी के पास भी इतना समय नहीं था की राजमाता के पास बैठकर भगवान का नाम ले सके, तभी मंत्री को वह बकरी याद आई जो कि हमेशा कृष्ण-कृष्ण का जाप करती थी। *मंत्री ने राजा को इसके बारे में बताया। पहले तो राजा को विश्वास ना हुआ परन्तु मंत्री जब राजा को अपने साथ उस किसान के घर ले गया तो राजा ने बकरी को कृष्ण नाम का जाप करते हुए सुना तो वह हैरान हो गया। राजा किसान से बोला कि आप यह बकरी मुझे दे दो। किसान बड़ी विनम्रता से हाथ जोड़कर राजा से बोला कि इसके कारण ही तो मेरे घर के हालात ठीक हुए हैं, अगर मैं यह आपको दे दूँगा तो मैं फिर से भूखा मरूँगा। राजा ने कहा कि आप फिकर ना करो, मैं आपको इतना धन दे दूँगा कि आप की गरीबी दूर हो जाएगी। *किसान खुशी-खुशी बकरी को राजा को दे दिया। वह बकरी राजमहल में राजमाता के पास बैठकर निरन्तर कृष्ण-कृष्ण का जाप करती। कृष्ण नाम के कानों में पढ़ने से और बकरी का मीठा और स्वच्छ दूध पीने से राजमाता की सेहत में सुधार होने लगा और धीरे-धीरे वह बिल्कुल ठीक हो गयीं। *तब से बकरी राजमहल में राजा के पास ही रहने लगी तभी उसकी संगत से पूरा राजमहल कृष्ण-कृष्ण का जाप करने लगा। अब पूरे राजमहल और नगर में कृष्ण रूपी माहौल हो गया। *यदि एक बकरी जो कि एक पशु है कृष्ण नाम के प्रभाव से उसकी मैं (अहम) खत्म हो गया और वह सीधे राजमहल में पहुँच गई तो क्या हम इंसान निरन्तर कृष्ण का जाप करने से हम भव से पार नहीं हो जायेंगे ? ----------:::×:::---------- 🌸🌸🙏*जय-जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸 ***********************************************

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Nirankar Feb 26, 2021

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