Neha Sharma, Haryana
Neha Sharma, Haryana Feb 22, 2021

💞🐚💞🐚💖"जय श्री राधे कृष्णा"💖🐚💞🐚💞 🌸🙏🌸🙏🌸🙏*शुभ रात्रि नमन*🙏🌸🙏🌸🙏🌸 *💐💐श्रीकृष्ण भक्त सूरदास जी का एक अद्भुत प्रेम से ओतप्रोत कथानक 💐💐* ------------------------------------------------- *"हाथ छुड़ाये जात हो, निर्बल जानि के मोय ।* *हृदय से जब जाओगे, तो सबल जानूँगा तोय ।।"* *संत सूरदास जी के जीवन का एक प्रसंग-* एक बार संत सूरदास जी को किसी ने भजन के लिए आमंत्रित किया.. भजन कार्यक्रम के बाद उस व्यक्ति को सूरदास जी को अपने घर तक पहुँचाने का ध्यान नही रहा और वह अन्य अतिथियों की सेवा में व्यस्त हो गया। सूरदास जी ने भी उसे कष्ट नहीं देना चाहा और खुद लाठी लेकर गोविंद–गोविंद करते हुये अंधेरी रात में पैदल घर की ओर निकल पड़े । रास्ते मे एक कुआं पड़ता था । वे लाठी से टटोलते–टटोलते भगवान श्रीकृष्ण का नाम लेते हुये बढ़ रहे थे और चलते चलते कुएं में गिर गये। तो उन्होंने श्रीकृष्ण को पुकारा। कोई बालक आकर बोला बाबा! आप मेरे हाथ पकड लो... मैं आपको निकाल दुंगा। तो सुरदास जी उस बालक का हाथ पकड लिए... जब वो पकडे उनके तन में बिजली सी दौड गई। शरीर रोमांचित होने लगा... बालक का हाथ कमल से भी कोमल है। ऐसा शरीर मैंने कभी छुआ ही नहीं... बालक की शरीर से महक आ रही थी... चंदन,कस्तूरी, तुलसी का भीनी भीनी सुगंध नाशा में प्रवेश कर रही है... दिव्य अनुभूति हो रहा है। अब उन्हें लगा कि उस बालक ने उनकी लाठी पकड़ ली है... मार्ग दिखाकर ले जाने लगा है। तब उन्होंने पूछा - तुम कौन हो ? उत्तर मिला – बाबा! मैं एक बालक हूँ । मैं भी आपका भजन सुन कर लौट रहा हूँ... आपके पिछे पिछे ही आ रहा था। देखा कि आप कुएं में गिर गये हैं...तो दौड कर इधर आ गया । चलिये, आपको आपके घर तक छोड़ दूँ। सूरदास जी ने पूछा- तुम्हारा नाम क्या है पुत्र ? "बाबा! अभी तक माँ ने मेरा नाम नहीं रखा है।‘ तब मैं तुम्हें किस नाम से पुकारूँ ? कोई भी नाम चलेगा बाबा... लोग मुझे तरह तरह के नाम से पुकारते हैं... कितना गिनाउं आपको ? सूरदास जी ने रास्ते में और कई सवाल पूछे। उन्हे लगा कि हो न हो, यह मेरे कन्हैया ही है। वे समझ गए कि आज गोपाल खुद मेरे पास आए हैं । क्यो नहीं मैं इनका हाथ पकड़ लूँ । यह सोंच उन्होने अपना हाथ उस लकड़ी पर श्रीकृष्ण की ओर बढ़ाने लगे । भगवान श्रीकृष्ण उनकी यह चाल समझ गए... वो तो अंतर्यामी हैं ही... उनसे क्या छुपा है । सूरदास जी का हाथ धीरे–धीरे आगे बढ़ रहा था । जब केवल चार अंगुल अंतर रह गया, तब श्रीकृष्ण लाठी को छोड़ दूर चले गए । जैसे उन्होने लाठी छोड़ी, सूरदास जी विह्वल हो गए... आंखो से अश्रुधारा बह निकली । बोले - "मैं अंधा हूँ ,ऐसे अंधे की लाठी छोड़ कर चले जाना क्या कन्हैया तुम्हारी बहादुरी है ? और.. उनके श्रीमुख से वेदना के यह स्वर निकल पड़े *“हाथ छुड़ाये जात हो, निर्बल जानि के मोय ।* *हृदय से जब जाओगे, तो सबल जानूँगा तोय ।।"* अर्थात् मुझे निर्बल जानकार मेरा हाथ छुड़ा कर जाते हो, पर मेरे हृदय से जाओ तो मैं तुम्हें बलवान कहूँ...पुरुष समझुं। भगवान तो सदैव भक्त के पिछे पिछे चलते हैं... आज भगवान भक्त सुरदास जी के पिछे पिछे चल रहे हैं... भगवान भक्त के हाथ कभी नहीं छोडते। आज भगवान ने सुरदास जी का हाथ पकड लिया। भगवान श्रीकृष्ण सुरदास जी के बात सुनकर बोले... "बाबा! अगर मैं ऐसे भक्तों के हृदय से चला जाऊं तो फिर मैं कहाँ रहूँ ?... आप ही बताओ। मैं ना वैकुंठ में हुं...ना यज्ञ स्थल पर जहां मंत्रों से आहुति दी जाती है। मैं तो भक्तों के हृदय में रहता हूँ... जब वो मुझको स्मरण करते हैं,मैं भी उनका स्मरण करता हूँ। मुझे मेरे पत्नी लक्ष्मी जी उतनी प्रिय नहीं हैं, मुझे दाउ भैया उतने प्रिय नहीं हैं... मेरे स्वांश भगवान शंकर जी उतने प्रिय नहीं हैं... और क्या कहुं मुझे मेरे प्राण जितने प्रिय नहीं हैं...उतने प्रिय मेरे भक्तजन हैं... उनके लिए मैं स्वयं उपस्थित हुं बाबा!... जो मेरा निंदा करता है मैं उसे क्षमा कर सकता हूँ... पर जो मेरे भक्तों की निंदा, अपमान करता है मैं उसको कभी क्षमा नहीं करता... जब वो भक्त क्षमा करेगा तब मैं क्षमा करुंगा। ऋषि दुर्वासा जी ने महाराज अंबरीष जी का अपमान कर दिया... तो भगवान का सुदर्शन चक्र चल पडा... जब ऋषि दुर्वासा ने महाराज अंबरीष से क्षमा मांगे,तब सुदर्शन चक्र अलक्षित हो गया... ऐसो है हमारा कन्हैया... *राधे राधे*🙏🚩 *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸 🥀"कभी सूरदास ने एक स्वप्न देखा था, कि रुक्मणि और राधिका मिली हैं और एक दूजे पर निछावर हुई जा रही हैं! """सोचता हूँ, कैसा होगा वह क्षण जब दोनों ठकुरानियाँ मिली होंगी,, ""दोनों ने प्रेम किया था,,एक ने बालक कन्हैया से, दूसरे ने राजनीतिज्ञ कृष्ण से,, एक को अपनी मनमोहक बातों के जाल में फँसा लेने वाला कन्हैया मिला था, और दूसरे को मिले थे सुदर्शन चक्र धारी, महायोद्धा कृष्ण! 🥀""कृष्ण राधिका के बाल सखा थे, पर राधिका का दुर्भाग्य था कि उन्होंने कृष्ण को तात्कालिक विश्व की महाशक्ति बनते नहीं देखा,,राधिका को ना महाभारत के कुचक्र जाल को सुलझाते चतुर कृष्ण मिले, न पौंड्रक-शिशुपाल का वध करते बाहुबली कृष्ण मिले! ✨"रुक्मणि कृष्ण की पत्नी थीं, महारानी थीं, पर उन्होंने कृष्ण की वह लीला नहीं देखी जिसके लिए विश्व कृष्ण को स्मरण रखता है,,उन्होंने न माखन चोर को देखा, न गौ-चरवाहे को,, उनके हिस्से में न बाँसुरी आयी, न माखन ? ⚜️"कितनी अद्भुत लीला है, राधिका के लिए कृष्ण कन्हैया था, रुक्मणि के लिए कन्हैया कृष्ण थे! ""पत्नी होने के बाद भी रुक्मणि को कृष्ण उतने नहीं मिले कि वे उन्हें "तुम" कह पातीं,,आप से तुम तक की इस यात्रा को पूरा कर लेना ही प्रेम का चरम पा लेना है,,रुक्मणि कभी यह यात्रा पूरी नहीं कर सकीं! 🥀"राधिका की यात्रा प्रारम्भ ही 'तुम' से हुई थीं। उन्होंने प्रारम्भ ही "चरम" से किया था!""शायद तभी उन्हें कृष्ण नहीं मिले! ✨""कितना अजीब है न! कृष्ण जिसे नहीं मिले, युगों युगों से आज तक उसी के हैं, और जिसे मिले उसे मिले ही नहीं,,तभी कहता हूँ, कृष्ण को पाने का प्रयास मत कीजिये,, पाने का प्रयास कीजियेगा तो कभी नहीं मिलेंगे,, बस प्रेम कर के छोड़ दीजिए, जीवन भर साथ निभाएंगे कृष्ण! ""कृष्ण इस सृष्टि के सबसे अच्छे मित्र हैं। राधिका हों या सुदामा, कृष्ण ने मित्रता निभाई तो ऐसी निभाई कि इतिहास बन गया! 🌷"राधा और रुक्मणि जब मिली होंगी तो, रुक्मणि राधा के वस्त्रों में माखन की गंध ढूंढती होंगी, और राधा ने रुक्मणि के आभूषणों में कृष्ण का बैभव तलाशा होगा!"" कौन जाने मिला भी या नहीं ?"" सबकुछ कहाँ मिलता है सभी को... कुछ न कुछ तो छूटता ही रहता है! 💥"जितनी चीज़ें कृष्ण से छूटीं उतनी तो किसी से नहीं छूटीं!"" कृष्ण से उनकी माँ छूटी, पिता छूटे, फिर जो नंद-यशोदा मिले वे भी छूटे,, संगी-साथी छूटे,,राधा छूटीं,, गोकुल छूटा, फिर मथुरा छूटी! "" कृष्ण से जीवन भर कुछ न कुछ छूटता ही रहा,, कृष्ण जीवन भर त्याग करते रहे,, हमारी आज की पीढ़ी जो कुछ भी छूटने पर टूटने लगती है, उसे कृष्ण को गुरु बना लेना चाहिए,,जो कृष्ण को समझ लेगा वह कभी अवसाद में नहीं जाएगा! 🔥"कृष्ण आनंद के देवता है। कुछ छूटने पर भी कैसे खुश रहा जा सकता है, यह कृष्ण से अच्छा कोई सिखा ही नहीं सकता! "" महागुरु थे मेरे कृष्ण कन्हैया... *जय-जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸

💞🐚💞🐚💖"जय श्री राधे कृष्णा"💖🐚💞🐚💞
🌸🙏🌸🙏🌸🙏*शुभ रात्रि नमन*🙏🌸🙏🌸🙏🌸

*💐💐श्रीकृष्ण भक्त सूरदास जी का एक अद्भुत प्रेम से ओतप्रोत कथानक 💐💐*
-------------------------------------------------
*"हाथ छुड़ाये जात  हो, निर्बल  जानि  के मोय ।*
*हृदय से जब जाओगे, तो सबल जानूँगा तोय ।।"*

*संत सूरदास जी के जीवन का एक प्रसंग-*
एक बार संत सूरदास जी को किसी ने भजन के लिए आमंत्रित किया.. 
भजन कार्यक्रम के बाद उस व्यक्ति को सूरदास जी को अपने घर तक पहुँचाने का ध्यान नही रहा और वह अन्य अतिथियों की सेवा में व्यस्त हो गया।

सूरदास जी ने भी उसे कष्ट नहीं देना चाहा और खुद लाठी लेकर गोविंद–गोविंद करते हुये अंधेरी रात में पैदल घर की ओर  निकल पड़े ।
रास्ते मे एक कुआं पड़ता था । 
वे लाठी से टटोलते–टटोलते भगवान श्रीकृष्ण का नाम लेते हुये बढ़ रहे थे  और चलते चलते कुएं में गिर गये। तो उन्होंने श्रीकृष्ण को पुकारा। कोई बालक आकर बोला बाबा! आप मेरे हाथ पकड लो... मैं आपको निकाल दुंगा। तो सुरदास जी उस बालक का हाथ पकड लिए... जब वो पकडे उनके तन में बिजली सी दौड गई। शरीर रोमांचित होने लगा... बालक का हाथ कमल से भी कोमल है। ऐसा शरीर मैंने कभी छुआ ही नहीं... बालक की शरीर से महक आ रही थी... चंदन,कस्तूरी, तुलसी का भीनी भीनी सुगंध नाशा में प्रवेश कर रही है... दिव्य अनुभूति हो रहा है।
अब उन्हें लगा कि उस बालक ने उनकी  लाठी पकड़ ली है... मार्ग दिखाकर ले जाने लगा है।

तब उन्होंने पूछा - तुम कौन हो ? उत्तर मिला – बाबा! मैं एक  बालक हूँ । मैं भी आपका भजन  सुन कर लौट रहा हूँ... आपके पिछे पिछे ही आ रहा था। देखा कि आप कुएं में गिर गये हैं...तो दौड कर इधर आ गया । चलिये, आपको आपके घर तक छोड़ दूँ।
सूरदास जी ने पूछा- तुम्हारा नाम क्या है पुत्र  ?
"बाबा! अभी तक माँ ने मेरा नाम नहीं रखा है।‘
तब मैं तुम्हें किस नाम से पुकारूँ ?
कोई भी नाम चलेगा बाबा... लोग मुझे तरह तरह के नाम से पुकारते हैं... कितना गिनाउं आपको ?

सूरदास जी ने रास्ते में और कई सवाल पूछे। 
उन्हे लगा कि हो न हो, यह मेरे कन्हैया ही है।
वे समझ गए कि आज गोपाल खुद मेरे पास आए हैं । क्यो नहीं मैं इनका हाथ पकड़ लूँ ।
यह सोंच उन्होने अपना हाथ उस लकड़ी पर श्रीकृष्ण की ओर बढ़ाने  लगे ।
भगवान श्रीकृष्ण उनकी यह चाल समझ गए... वो तो अंतर्यामी हैं ही... उनसे क्या छुपा है ।
सूरदास जी का हाथ धीरे–धीरे आगे बढ़ रहा था । जब केवल चार  अंगुल अंतर रह गया,  तब श्रीकृष्ण लाठी को छोड़ दूर चले गए । जैसे उन्होने लाठी छोड़ी, सूरदास जी विह्वल हो गए... आंखो से अश्रुधारा बह निकली । बोले - "मैं अंधा हूँ ,ऐसे अंधे की लाठी छोड़ कर चले जाना क्या कन्हैया तुम्हारी बहादुरी है ?

और.. 
उनके श्रीमुख से वेदना के यह स्वर निकल पड़े

*“हाथ छुड़ाये जात हो, निर्बल जानि के मोय ।*
*हृदय से जब जाओगे, तो सबल जानूँगा तोय ।।"*
अर्थात् मुझे निर्बल जानकार मेरा हाथ छुड़ा कर जाते हो, पर मेरे हृदय से जाओ तो मैं तुम्हें बलवान कहूँ...पुरुष समझुं। 

भगवान तो सदैव भक्त के पिछे पिछे चलते हैं... आज भगवान भक्त सुरदास जी के पिछे पिछे चल रहे हैं... भगवान भक्त के हाथ कभी नहीं छोडते। आज भगवान ने सुरदास जी का हाथ पकड लिया। भगवान श्रीकृष्ण सुरदास जी के बात सुनकर बोले...
"बाबा! अगर मैं ऐसे भक्तों के हृदय से चला जाऊं तो फिर मैं कहाँ रहूँ ?... आप ही बताओ। मैं ना वैकुंठ में हुं...ना यज्ञ स्थल पर जहां मंत्रों से आहुति दी जाती है। मैं तो भक्तों के हृदय में रहता हूँ... जब वो मुझको स्मरण करते हैं,मैं भी उनका स्मरण करता हूँ। मुझे मेरे पत्नी लक्ष्मी जी उतनी प्रिय नहीं हैं, मुझे दाउ भैया उतने प्रिय नहीं हैं... मेरे स्वांश भगवान शंकर जी उतने प्रिय नहीं हैं... और क्या कहुं मुझे मेरे प्राण जितने प्रिय नहीं हैं...उतने प्रिय मेरे भक्तजन हैं... उनके लिए मैं स्वयं उपस्थित हुं बाबा!... जो मेरा निंदा करता है मैं उसे क्षमा कर सकता हूँ... पर जो मेरे भक्तों की निंदा, अपमान करता है मैं उसको कभी क्षमा नहीं करता... जब वो भक्त क्षमा करेगा तब मैं क्षमा करुंगा। ऋषि दुर्वासा जी ने महाराज अंबरीष जी का अपमान कर दिया... तो भगवान का सुदर्शन चक्र चल पडा... जब ऋषि दुर्वासा ने महाराज अंबरीष से क्षमा मांगे,तब सुदर्शन चक्र अलक्षित हो गया... ऐसो है हमारा कन्हैया... *राधे राधे*🙏🚩
*जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸

🥀"कभी सूरदास ने एक स्वप्न देखा था, कि रुक्मणि और राधिका मिली हैं और एक दूजे पर निछावर हुई जा रही हैं!
"""सोचता हूँ, कैसा होगा वह क्षण जब दोनों ठकुरानियाँ मिली होंगी,, 
""दोनों ने प्रेम किया था,,एक ने बालक कन्हैया से, दूसरे ने राजनीतिज्ञ कृष्ण से,, एक को अपनी मनमोहक बातों के जाल में फँसा लेने वाला कन्हैया मिला था, और दूसरे को मिले थे सुदर्शन चक्र धारी, महायोद्धा कृष्ण!

🥀""कृष्ण राधिका के बाल सखा थे, पर राधिका का दुर्भाग्य था कि उन्होंने कृष्ण को तात्कालिक विश्व की महाशक्ति बनते नहीं देखा,,राधिका को ना महाभारत के कुचक्र जाल को सुलझाते चतुर कृष्ण मिले, न पौंड्रक-शिशुपाल का वध करते बाहुबली कृष्ण मिले!

✨"रुक्मणि कृष्ण की पत्नी थीं, महारानी थीं, पर उन्होंने कृष्ण की वह लीला नहीं देखी जिसके लिए विश्व कृष्ण को स्मरण रखता है,,उन्होंने न माखन चोर को देखा, न गौ-चरवाहे को,, उनके हिस्से में न बाँसुरी आयी, न माखन ?

⚜️"कितनी अद्भुत लीला है, राधिका के लिए कृष्ण कन्हैया था, रुक्मणि के लिए कन्हैया कृष्ण थे!
""पत्नी होने के बाद भी रुक्मणि को कृष्ण उतने नहीं मिले कि वे उन्हें "तुम" कह पातीं,,आप से तुम तक की इस यात्रा को पूरा कर लेना ही प्रेम का चरम पा लेना है,,रुक्मणि कभी यह यात्रा पूरी नहीं कर सकीं!

🥀"राधिका की यात्रा प्रारम्भ ही 'तुम' से हुई थीं। उन्होंने प्रारम्भ ही "चरम" से किया था!""शायद तभी उन्हें कृष्ण नहीं मिले!

✨""कितना अजीब है न! कृष्ण जिसे नहीं मिले, युगों युगों से आज तक उसी के हैं, और जिसे मिले उसे मिले ही नहीं,,तभी कहता हूँ, कृष्ण को पाने का प्रयास मत कीजिये,, पाने का प्रयास कीजियेगा तो कभी नहीं मिलेंगे,, बस प्रेम कर के छोड़ दीजिए, जीवन भर साथ निभाएंगे कृष्ण!
""कृष्ण इस सृष्टि के सबसे अच्छे मित्र हैं। राधिका हों या सुदामा, कृष्ण ने मित्रता निभाई तो ऐसी निभाई कि इतिहास बन गया!

🌷"राधा और रुक्मणि जब मिली होंगी तो, रुक्मणि राधा के वस्त्रों में माखन की गंध ढूंढती होंगी, और राधा ने रुक्मणि के आभूषणों में कृष्ण का बैभव तलाशा होगा!"" कौन जाने मिला भी या नहीं ?"" सबकुछ कहाँ मिलता है सभी को... कुछ न कुछ तो छूटता ही रहता है!

💥"जितनी चीज़ें कृष्ण से छूटीं उतनी तो किसी से नहीं छूटीं!"" कृष्ण से उनकी माँ छूटी, पिता छूटे, फिर जो नंद-यशोदा मिले वे भी छूटे,, संगी-साथी छूटे,,राधा छूटीं,, गोकुल छूटा, फिर मथुरा छूटी!
"" कृष्ण से जीवन भर कुछ न कुछ छूटता ही रहा,, कृष्ण जीवन भर त्याग करते रहे,, हमारी आज की पीढ़ी जो कुछ भी छूटने पर टूटने लगती है, उसे कृष्ण को गुरु बना लेना चाहिए,,जो कृष्ण को समझ लेगा वह कभी अवसाद में नहीं जाएगा! 

🔥"कृष्ण आनंद के देवता है। कुछ छूटने पर भी कैसे खुश रहा जा सकता है, यह कृष्ण से अच्छा कोई सिखा ही नहीं सकता!
"" महागुरु थे मेरे कृष्ण कन्हैया...
*जय-जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸

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कामेंट्स

🌻🌹 Preeti Jain 🌹🌻 Feb 22, 2021
*यदि हर कोई आप से खुश है*🌿🙏🌹 *तो ये निश्चित है कि आपने जीवन* *में बहुत से समझौते किये हैं...* *और* *यदि आप सबसे खुश हैं* *तो ये निश्चित है कि आपने लोगों* *की बहुत सी ग़लतियों* *को नज़रअंदाज़ किया है।* *जिंदगी आसान नहीं होती,* *इसे आसान बनाना पड़ता* *है.....* *..कुछ 'अंदाज' से,* *कुछ* *'नजर अंदाज 'से!!* Good night sweet dreams radhe radhe ji 😊😊🙏🙏🌹🍧🍧

Shivsanker Shukla Feb 22, 2021
शुभ रात्रि आदरणीय बहन राधे-राधे

Rajpal singh Feb 22, 2021
jai shree krishna Radhey Radhey ji good night ji 🙏🙏

Ranveer Soni Feb 22, 2021
🌹🌹जय श्री कृष्णा🌹🌹

pramod singh Feb 23, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जी शुभ प्रभात जी

Rajesh Lakhani Feb 23, 2021
JAI SHREE RAM JAI SHREE HANUMAN SHUBH PRABHAT BEHENA AAP KA DIN SHUBH OR MANGALMAYE HO AAP KO OR AAP KE PARIVAR KO JAYA EKADSHI KI HARDIK SUBKAMNAYE BEHENA PRANAM

dinesh patidar Feb 23, 2021
Jay shree ram🌷 Jay shree hanuman ji 🌷 suprabhat vandan Ji🙏

dayaram birla Feb 23, 2021
Jay shri ram Jay bala g maharaj ki shubh prabhat g shubh mangalwar 🌹

Ravi Kumar Taneja Feb 23, 2021
जय श्री राम जी 🌹🙏🌹जय श्री हनुमानजी🙏⚘🙏आपका दिन आपका हर पल शुभ हो जी 🙏🌟🙏सुप्रभात वन्दन जी 🙏🌸🙏

Brajesh Sharma Feb 23, 2021
जय जय श्री राधे कृष्णा जी

kamala Maheshwari Feb 23, 2021
जयश्री राम,, ,, जय हनुमान जी,,,💠🔥 जयबाकैविहारीकीकानहाकीकृपाआप ओर आपके परिवार पर संदैवबनीरहे आपके जीवन मेखुशियोकी झोलीहमैसाभरीरहेजय श्री कृष्णाजी राधे-राधे कहो हर हाल में खुश रहो 💠🔥💠🔥 🔥💠🔥💠🔥💠🔥💠🔥💠🔥💠🔥💠🔥

Rajesh Kumar Feb 23, 2021
jai shri Krishna Neha ji Gbu and your family always be Happy . 🌹🌹🙏🌺🌺

sonu pathak ( jai mata di ) Feb 23, 2021
🙏🚩जय श्री राम 🚩🙏 जय माता रानी दी 🌹🙏 प्रभु श्री राम की कृपा आप व आपके परिवार पर सदैव बनी रहे आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो बहना जी 🌹🙏🌹 नमस्कार मंगलमय सुप्रभात वंदन जी 🌷🙏🌷

ललन कुमार-8696612797 Feb 23, 2021
सफलता उन्ही को हासिल होता है जो अपने कार्य के प्रति समर्पण का भाव रखता है जी। जय श्री राम जी।शुभ मंगलवार जी।

Kamala Sevakoti Feb 23, 2021
Jai shree Radhey jai shree Radhey jai shree 🌹🌺🌹🌺Radhey jai shree Radhey jai shree 🌷🏵🌷🏵🏵🏵Radhey jai shree Radhey good night ji 🙏🙏🙏🙏

Archana Singh Mar 4, 2021

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वात रोग का उपचार 〰️〰️🔸🔸〰️〰️ वात, पित्त और कफ तीनों में से वात सबसे प्रमुख होता है क्योंकि पित्त और कफ भी वात के साथ सक्रिय होते हैं। शरीर में वायु का प्रमुख स्थान पक्वाशय में होता है और वायु का शरीर में फैल जाना ही वात रोग कहलाता है। हमारे शरीर में वात रोग 5 भागों में हो सकता है जो 5 नामों से जाना जाता है। वात के पांच भाग निम्नलिखित हैं- 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ • उदान वायु - यह कण्ठ में होती है। • अपान वायु - यह बड़ी आंत से मलाशय तक होती है। • प्राण वायु - यह हृदय या इससे ऊपरी भाग में होती है। • व्यान वायु - यह पूरे शरीर में होती है। • समान वायु - यह आमाशय और बड़ी आंत में होती है। वात रोग के प्रकार :- 〰️〰️〰️〰️〰️ आमवात के रोग में रोगी को बुखार होना शुरू हो जाता है तथा इसके साथ-साथ उसके जोड़ों में दर्द तथा सूजन भी हो जाती है। इस रोग से पीड़ित रोगियों की हडि्डयों के जोड़ों में पानी भर जाता है। जब रोगी व्यक्ति सुबह के समय में उठता है तो उसके हाथ-पैरों में अकड़न महसूस होती है और जोड़ों में तेज दर्द होने लगता है। जोड़ों के टेढ़े-मेढ़े होने से रोगी के शरीर के अंगों की आकृति बिगड़ जाती है। सन्धिवात :- 👉 जब आंतों में दूषित द्रव्य जमा हो जाता है तो शरीर की हडि्डयों के जोड़ों में दर्द तथा अकड़न होने लगती है। गाउट :-👉 गाउट रोग बहुत अधिक कष्टदायक होता है। यह रोग रक्त के यूरिक एसिड में वृद्धि होकर जोड़ों में जमा होने के कारण होता है। शरीर में यूरिया प्रोटीन से उत्पन्न होता है, लेकिन किसी कारण से जब यूरिया शरीर के अंदर जल नहीं पाता है तो वह जोड़ों में जमा होने लगता है और बाद में यह पथरी रोग का कारण बन जाता है। मांसपेशियों में दर्द:-👉 मांस रोग के कारण रोगी की गर्दन, कमर, आंख के पास की मांस-पेशियां, हृदय, बगल तथा शरीर के अन्य भागों की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं जिसके कारण रोगी के शरीर के इन भागों में दर्द होने लगता है। जब इन भागों को दबाया जाता है तो इन भागों में तेज दर्द होने लगता है। गठिया :-👉 इस रोग के कारण हडि्डयों को जोड़ने वाली तथा जोड़ों को ढकने वाली लचीली हडि्डयां घिस जाती हैं तथा हडि्डयों के पास से ही एक नई हड्डी निकलनी शुरू हो जाती है। जांघों और घुटनों के जोड़ों पर इस रोग का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है और जिसके कारण इन भागों में बहुत तेज दर्द होता है। वात रोग के लक्षण :- 〰️〰️〰️〰️〰️ • वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर में खुश्की तथा रूखापन होने लगता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर की त्वचा का रंग मैला सा होने लगता है। • रोगी व्यक्ति को अपने शरीर में जकड़न तथा दर्द महसूस होता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी के सिर में भारीपन होने लगता है तथा उसके सिर में दर्द होने लगता है। • रोगी व्यक्ति का पेट फूलने लगता है तथा उसका पेट भारी-भारी सा लगने लगता है। • रोगी व्यक्ति के शरीर में दर्द रहता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी के जोड़ों में दर्द होने लगता है। • रोगी व्यक्ति का मुंह सूखने लगता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी को डकारें या हिचकी आने लगती है। वात रोग होने का कारण :- 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ • वात रोग होने का सबसे प्रमुख कारण पक्वाशय, आमाशय तथा मलाशय में वायु का भर जाना है। • भोजन करने के बाद भोजन के ठीक तरह से न पचने के कारण भी वात रोग हो सकता है। • जब अपच के कारण अजीर्ण रोग हो जाता है और अजीर्ण के कारण कब्ज होता है तथा इन सबके कारण गैस बनती है तो वात रोग पैदा हो जाता है। • पेट में गैस बनना वात रोग होने का कारण होता है। • जिन व्यक्तियों को अधिक कब्ज की शिकायत होती है उन व्यक्तियों को वात रोग अधिक होता है। • जिन व्यक्तियों के खान-पान का तरीका गलत तथा सही समय पर नहीं होता है उन व्यक्तियों को वात रोग हो जाता है। • ठीक समय पर शौच तथा मूत्र त्याग न करने के कारण भी वात रोग हो सकता है। वात रोग होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :- 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ • वात रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को अपने हडि्डयों के जोड़ में रक्त के संचालन को बढ़ाना चाहिए। इसके लिए रोगी व्यक्ति को एक टब में गरम पानी लेकर उसमें आधा चम्मच नमक डाल लेना चाहिए। इसके बाद जब टब का पानी गुनगुना हो जाए तब रोगी को टब के पास एक कुर्सी लगाकर बैठ जाना चाहिए। इसके बाद रोगी व्यक्ति को अपने पैरों को गरम पानी के टब में डालना चाहिए और सिर पर एक तौलिये को पानी में गीला करके रखना चाहिए। रोगी व्यक्ति को अपनी गर्दन के चारों ओर कंबल लपेटना चाहिए। इस प्रकार से इलाज करते समय रोगी व्यक्ति को बीच-बीच में पानी पीना चाहिए तथा सिर पर ठंडा पानी डालना चाहिए। इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने से रोगी को कम से कम 20 मिनट में ही शरीर से पसीना निकलने लगता है जिसके फलस्वरूप दूषित द्रव्य शरीर से बाहर निकल जाते हैं और वात रोग ठीक होने लगता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए 2 बर्तन लें। एक बर्तन में ठंडा पानी लें तथा दूसरे में गरम पानी लें और दोनों में 1-1 तौलिया डाल दें। 5 मिनट बाद तौलिये को निचोड़कर गर्म सिंकाई करें। इसके बाद ठंडे तौलिये से सिंकाई करें। इस उपचार क्रिया को कम से कम रोजाना 3 बार दोहराने से यह रोग ठीक होने लगता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को लगभग 4 दिनों तक फलों का रस (मौसमी, अंगूर, संतरा, नीबू) पीना चाहिए। इसके साथ-साथ रोगी को दिन में कम से कम 4 बार 1 चम्मच शहद चाटना चाहिए। इसके बाद रोगी को कुछ दिनों तक फलों को खाना चाहिए। • कैल्शियम तथा फास्फोरस की कमी के कारण रोगी की हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं इसलिए रोगी को भोजन में पालक, दूध, टमाटर तथा गाजर का अधिक उपयोग करना चाहिए। • कच्चा लहसुन वात रोग को ठीक करने में रामबाण औषधि का काम करती है इसलिए वात रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कच्चे लहसुन की 4-5 कलियां खानी चाहिए। • वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को भोजन में प्रतिदिन चोकर युक्त रोटी, अंकुरित हरे मूंग तथा सलाद का अधिक उपयोग करना चाहिए। • रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम आधा चम्मच मेथीदाना तथा थोड़ी सी अजवायन का सेवन करना चाहिए। इनका सेवन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में खुली हवा में गहरी सांस लेनी चाहिए। इससे रोगी को अधिक आक्सीजन मिलती है और उसका रोग ठीक होने लगता है। • शरीर पर प्रतिदिन तिल के तेलों से मालिश करने से वात रोग ठीक होने लगता है। • रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय में धूप में बैठकर शरीर की मालिश करनी चाहिए। धूप वात रोग से पीड़ित रोगियों के लिए बहुत ही लाभदायक होती है। • वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए तिल के तेल में कम से कम 4-5 लहसुन तथा थोड़ी सी अजवाइन डालकर गर्म करना चाहिए तथा इसके बाद इसे ठंडा करके छान लेना चाहिए। फिर इसके बाद इस तेल से प्रतिदिन हडि्डयों के जोड़ पर मालिश करें। इससे वात रोग जल्दी ही ठीक हो जायेगा। *जय-जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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"दिखावटी से हकीकत की जमीन... आज फिर सुधा की दीदी मीना चमचमाती गाड़ी से आई थी.... जिसे देखकर सुधा की आँखे एकबारगी फिर से चुधिंया गई... अनेको गहनों से लदी दीदी उसे दुनिया की सबसे सौभाग्यशाली दुल्हन लग रही थी... मीना दीदी की शादी को दो साल हो चुके थे मगर जीजाजी अपनी आँखों से उन्हे एक पल के लिए भी दूर नहीं करते थे सबसे मिलवाकर साथ ही वापिस ले जाते थे.... सुधा की पढ़ाई अब खत्म हो चुकी थी उसने मां से कह दिया था कि उसे भी जीजाजी जैसा ही दूल्हा चाहिए.....अब यह कोई वस्तु तो थी नही जो मां बाजार से खरीदकर ला देती... ऐसे में जो भी रिश्ता आता सुधा को उनके सामने तुच्छ लगता.... मोहन कालेज से ही उसे पसंद करता था और उससे शादी करना चाहता था ....ये बात सुधा बखूबी जानती भी थी मगर वह उसे टरकाती जा रही थी... कयोंकि वह उनके जीजाजी जितना अमीर जो नही था... आज जब मोहन सुधा से मिलने घर आया तो मीनाक्षी दीदी की अनुभवी आंँखो से सुधा के प्रति उसका प्रेम छिप ना सका और ना ही सुधा का रूखापन.... वह तो अभी भी किसी अमीर शहजादे की इंतजार मे थी जो बड़ी सी गाड़ी में उसे ब्याहने आएगा... वह अब छब्बीसवे वर्ष की दहलीज पर थी... मां बाप की चिंता भी उसकी उम्र की तरह बढ़ने लगी थी... मोहन घर में सबको पसंद था...मां ने सुधा को मनाने की जिम्मेदारी मीना को सौंप दी... मोहन के जाते ही मीना दीदी सुधा को अकेले कमरे मे ले आई और समझाते हुए बोली... "सुधा ....जब मोहन इतना प्यार करता है, तो हां क्यो नही कर देती.... मीना दीदी .....सिर्फ़ प्यार के सहारे जिंदगी नही कटती... कहते हुए वह दीदी की सोने की चूड़ियो और कंगनों की चमक में खो सी गई फिर उनकी तरफ़ इशारा करते हुए अचानक वह पूछ बैठी... क्या मोहन मुझे यह सब दे पाएगा .... दीदी कांपती आवाज़ में बोली.... सुधा....जो ऊपर से दिखता है वह होता नही है... कहते-कहते अचानक दीदी ने चूड़ियां और कंगन ऊपर कर दिए.... कलाई पर सिगरेट से जले निशान उनकी साफ चुगली कर रहे थे.... उफ्फ...... ये कया है दीदी......उसकी फटी फटी आंँखो से अविश्वास के अश्रु भरभराकर बह चले..... तुम ....कभी कुछ बताती कयो नही दीदी.... पगली ....मे भी इस दौलत की चंकाचौध मे पागल थी ...मगर भूल गई थी सबसे बडी दौलत प्यार की होती है जो नसीबवालो को मिलता है.... तुझे मिल रहा है इसे मत खोना मेरी लाडो ...कहकर सुधा से लिपट गई .... तभी मीना के पति यानी सुधा के जीजाजी ने वापसी चलने के लिए आवाज लगाई ..... दीदी तो वापस जा रही थी मगर सुधा दिखावटी दुनिया से सच्चाई की जमीन पर वापस लौट चुकी थी उसने फैसला कर लिया था वो अब जीवन की सबसे अनमोल दौलत मोहन के प्यार को नही खोएगी .... अब वो मोहन से शादी को तैयार थी... *एक बहुत ही सुंदर रचना.....👍🌸 *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸

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*जय श्री राधे कृष्णा* *शुभरात्रि वंदन* जय श्री कृष्णा " " "🌹बहूत सुंदर कथा🌹" " " एक राजा ने भगवान कृष्ण का एक मंदिर बनवाया और पूजा के लिए एक पुजारी को लगा दिया. पुजारी बड़े भाव से बिहारीजी की सेवा करने लगे. भगवान की पूजा-अर्चना और सेवा-टहल करते पुजारी की उम्र बीत गई. राजा रोज एक फूलों की माला सेवक के हाथ से भेजा करता था.पुजारी वह माला बिहारीजी को पहना देते थे. जब राजा दर्शन करने आता तो पुजारी वह माला बिहारीजी के गले से उतारकर राजा को पहना देते थे. यह रोज का नियम था. एक दिन राजा किसी वजह से मंदिर नहीं जा सका. उसने एक सेवक से कहा- माला लेकर मंदिर जाओ. पुजारी से कहना आज मैं नहीं आ पाउंगा. सेवक ने जाकर माला पुजारी को दे दी और बता दिया कि आज महाराज का इंतजार न करें. सेवक वापस आ गया. पुजारी ने माला बिहारीजी को पहना दी. फिर उन्हें विचार आया कि आज तक मैं अपने बिहारीजी की चढ़ी माला राजा को ही पहनाता रहा. कभी ये सौभाग्य मुझे नहीं मिला.जीवन का कोई भरोसा नहीं कब रूठ जाए. आज मेरे प्रभु ने मुझ पर बड़ी कृपा की है. राजा आज आएंगे नहीं, तो क्यों न माला मैं पहन लूं. यह सोचकर पुजारी ने बिहारीजी के गले से माला उतारकर स्वयं पहन ली. इतने में सेवक आया और उसने बताया कि राजा की सवारी बस मंदिर में पहुंचने ही वाली है.यह सुनकर पुजारी कांप गए. उन्होंने सोचा अगर राजा ने माला मेरे गले में देख ली तो मुझ पर क्रोधित होंगे. इस भय से उन्होंने अपने गले से माला उतारकर बिहारीजी को फिर से पहना दी. जैसे ही राजा दर्शन को आया तो पुजारी ने नियमनुसार फिर से वह माला उतार कर राजा के गले में पहना दी. माला पहना रहे थे तभी राजा को माला में एक सफ़ेद बाल दिखा.राजा को सारा माजरा समझ गया कि पुजारी ने माला स्वयं पहन ली थी और फिर निकालकर वापस डाल दी होगी. पुजारी ऐसाछल करता है, यह सोचकर राजा को बहुत गुस्सा आया. उसने पुजारी जी से पूछा- पुजारीजी यह सफ़ेद बाल किसका है.? पुजारी को लगा कि अगर सच बोलता हूं तो राजा दंड दे देंगे इसलिए जान छुड़ाने के लिए पुजारी ने कहा-महाराज यहसफ़ेद बाल तो बिहारीजी का है. अब तो राजा गुस्से से आग- बबूला हो गया कि ये पुजारी झूठ पर झूठ बोले जा रहा है.भला बिहारीजी के बाल भी कहीं सफ़ेद होते हैं. राजा ने कहा- पुजारी अगर यह सफेद बाल बिहारीजी का है तो सुबह शृंगार के समय मैं आउंगा और देखूंगा कि बिहारीजी के बाल सफ़ेद है या काले. अगर बिहारीजी के बाल काले निकले तो आपको फांसी हो जाएगी. राजा हुक्म सुनाकर चला गया. अब पुजारी रोकर बिहारीजी से विनती करने लगे- प्रभु मैं जानता हूं आपके सम्मुख मैंने झूठ बोलने का अपराध किया. अपने गले में डाली माला पुनः आपको पहना दी. आपकी सेवा करते-करते वृद्ध हो गया. यह लालसा ही रही कि कभी आपको चढ़ी माला पहनने का सौभाग्य मिले. इसी लोभ में यह सब अपराध हुआ. मेरे ठाकुरजी पहली बार यह लोभ हुआ और ऐसी विपत्ति आ पड़ी है. मेरे नाथ अब नहींहोगा ऐसा अपराध. अब आप ही बचाइए नहीं तो कल सुबह मुझे फाँसी पर चढा दिया जाएगा. पुजारी सारी रात रोते रहे. सुबह होते ही राजा मंदिर में आ गया. उसने कहा कि आज प्रभु का शृंगार वह स्वयं करेगा. इतना कहकर राजा ने जैसे ही मुकुट हटाया तो हैरान रह गया. बिहारीजी के सारे बाल सफ़ेद थे. राजा को लगा, पुजारी ने जान बचाने के लिए बिहारीजी के बाल रंग दिए होंगे. गुस्से से तमतमाते हुए उसने बाल की जांच करनी चाही. बाल असली हैं या नकली यब समझने के लिए उसने जैसे ही बिहारी जी के बाल तोडे, बिहारीजी के सिर से खून कीधार बहने लगी. राजा ने प्रभु के चरण पकड़ लिए और क्षमा मांगने लगा. बिहारीजी की मूर्ति से आवाज आई- राजा तुमने आज तक मुझे केवल मूर्ति ही समझा इसलिए आज से मैं तुम्हारे लिए मूर्ति ही हूँ. पुजारीजी मुझे साक्षात भगवान् समझते हैं. उनकी श्रद्धा की लाज रखने के लिए आज मुझे अपने बाल सफेद करने पड़े व रक्त की धार भी बहानी पड़ी तुझे समझाने के लिए. यह कहानी किसी पुराण से तो नहीं है लेकिन इसका मर्म किसी पुराण की कथा से कम भी नहीं है. कहते हैं- समझो तो देव नहीं तो पत्थर.श्रद्धा हो तो उन्हीं पत्थरों में भगवान सप्राण होकर भक्त से मिलने आ जाएंगे...... JAI Shri Krishna.......

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Archana Singh Mar 3, 2021

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