saidas
saidas Mar 27, 2020

वास्तव में इस संसार - रूपी सागर के ख़ौलते हुए पानी में कौन सुखी रह सकता है, ज़ब सागर अधिदैविक अध्यात्मिक व अधिभौतिक ( संसार के तीन प्रकार के दुःख ) वड़वानल की ज्वाला में तप रहा हो? इन सब से पूर्णतः मुक्त होने के लिए... साईं प्रसाद से संपन्न हो जाओ ( यानि साईं की कृपा प्राप्त करो )... आदर पूर्वक उनके चरित्र का श्रवण, मनन, और पाठ करो !"

वास्तव में इस संसार - रूपी सागर के ख़ौलते हुए पानी में कौन सुखी रह सकता है, ज़ब सागर अधिदैविक अध्यात्मिक व अधिभौतिक ( संसार के तीन प्रकार के दुःख ) वड़वानल की ज्वाला में तप रहा हो? 
इन सब से पूर्णतः मुक्त होने के लिए... 
साईं प्रसाद से संपन्न हो जाओ ( यानि साईं की कृपा प्राप्त करो )... 
आदर पूर्वक उनके चरित्र का श्रवण, मनन, और पाठ करो !"

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Alka Devgan May 10, 2020

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Aakash Kumar May 10, 2020

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Vicky Babbar May 10, 2020

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Rajeev Thapar May 10, 2020

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🕉sai shyam May 9, 2020

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Rajeev Thapar May 9, 2020

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