Bablu Shandilya
Bablu Shandilya Jan 5, 2017

श्री श्री 1008 श्री बाबा बासुकीनाथ दुमका झारखंड हर हर महादेव

श्री श्री 1008 श्री बाबा बासुकीनाथ  दुमका  झारखंड  हर हर महादेव
श्री श्री 1008 श्री बाबा बासुकीनाथ  दुमका  झारखंड  हर हर महादेव
श्री श्री 1008 श्री बाबा बासुकीनाथ  दुमका  झारखंड  हर हर महादेव
श्री श्री 1008 श्री बाबा बासुकीनाथ  दुमका  झारखंड  हर हर महादेव

श्री श्री 1008 श्री बाबा बासुकीनाथ
दुमका
झारखंड
हर हर महादेव

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कामेंट्स

Radheyshyam Soni Jan 5, 2017
जय जय श्री बाबा बासुकीनाथ जी जय जय श्री पार्वतीनाथ जी हर हर महादेव जी

Saroj Thakur Jan 7, 2017
जय बाबा बासुकीनाथ।

simran Oct 25, 2020

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Neha Sharma, Haryana Oct 25, 2020

*जय माता की*🌸🙏🌸*शुभ प्रभात् नमन* *नवरात्री के नवें दिन आदि शक्ति माँ दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की उपासना विधि..... 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ *माँ सिद्धिदात्री का स्वरूप...... 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ *नवरात्र-पूजन के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवमी के दिन सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। सिद्धियां हासिल करने के उद्देश्य से जो साधक भगवती सिद्धिदात्री की पूजा कर रहे हैं उन्हें नवमी के दिन इनका पूजन अवश्य करना चाहिए। सिद्धि और मोक्ष देने वाली दुर्गा को सिद्धिदात्री कहा जाता है। नवरात्र के नौवें दिन जीवन में यश बल और धन की प्राप्ति हेतु इनकी पूजा की जाती है। तथा नवरात्रों का की नौ रात्रियों का समापन होता है। माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति सिद्धिदात्री हैं, इन रूपों में अंतिम रूप है देवी सिद्धिदात्री का होता है। देवी सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत सौम्य है, देवी की चार भुजाएं हैं दायीं भुजा में माता ने चक्र और गदा धारण किया है, मां बांयी भुजा में शंख और कमल का फूल है। प्रसन्न होने पर माँ सिद्धिदात्री सम्पूर्ण जगत की रिद्धि सिद्धि अपने भक्तों को प्रदान करती हैं। माँ की सिद्धियां 〰️〰️〰️〰️〰️ मां दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। वे सिद्धिदात्री, सिंह वाहिनी, चतुर्भुजा तथा प्रसन्नवदना हैं। मार्कंडेय पुराण में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्व- ये आठ सिद्धियां बतलाई गई हैं। इन सभी सिद्धियों को देने वाली सिद्धिदात्री मां हैं। मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान हमें अज्ञान, तमस, असंतोष आदि से निकालकर स्वाध्याय, उद्यम, उत्साह, क‌र्त्तव्यनिष्ठा की ओर ले जाता है और नैतिक व चारित्रिक रूप से सबल बनाता है। हमारी तृष्णाओं व वासनाओं को नियंत्रित करके हमारी अंतरात्मा को दिव्य पवित्रता से परिपूर्ण करते हुए हमें स्वयं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति देता है। देवी पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने इन्हीं शक्तिस्वरूपा देवी जी की उपासना करके सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं, जिसके प्रभाव से शिव जी का स्वरूप अ‌र्द्धनारीश्वर का हो गया था। इसके अलावा ब्रह्ववैवर्त पुराण में अनेक सिद्धियों का वर्णन है जैसे 1. सर्वकामावसायिता 2. सर्वज्ञत्व 3. दूरश्रवण 4. परकायप्रवेशन 5. वाक्‌सिद्धि 6. कल्पवृक्षत्व 7. सृष्टि 8. संहारकरणसामर्थ्य 9. अमरत्व 10 सर्वन्यायकत्व। कुल मिलाकर 18 प्रकार की सिद्धियों का हमारे शास्त्रों में वर्णन मिलता है। यह देवी इन सभी सिद्धियों की स्वामिनी हैं। इनकी पूजा से भक्तों को ये सिद्धियां प्राप्त होती हैं। माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ सिद्धियां हासिल करने के उद्देश्य से जो साधक भगवती सिद्धिदात्री की पूजा कर रहे हैं। उन्हें नवमी के दिन निर्वाण चक्र का भेदन करना चाहिए। दुर्गा पूजा में इस तिथि को विशेष हवन किया जाता है। हवन से पूर्व सभी देवी दवाताओं एवं माता की पूजा कर लेनी चाहिए। हवन करते वक्त सभी देवी दवताओं के नाम से हवि यानी अहुति देनी चाहिए. बाद में माता के नाम से अहुति देनी चाहिए। दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोक मंत्र रूप हैं अत:सप्तशती के सभी श्लोक के साथ आहुति दी जा सकती है। देवी के बीज मंत्र “ऊँ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नम:” से कम से कम 108 बार अहुति दें। माँ सिद्धिदात्री का ध्यान मंत्र 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्। कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥ स्वर्णावर्णा निर्वाणचक्रस्थितां नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्। शख, चक्र, गदा, पदम, धरां सिद्धीदात्री भजेम्॥ पटाम्बर, परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्। मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥ प्रफुल्ल वदना पल्लवाधरां कातं कपोला पीनपयोधराम्। कमनीयां लावण्यां श्रीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ माँ सिद्धिदात्री का स्तोत्र पाठ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ कंचनाभा शखचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो। स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥ पटाम्बर परिधानां नानालंकारं भूषिता। नलिस्थितां नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोअस्तुते॥ परमानंदमयी देवी परब्रह्म परमात्मा। परमशक्ति, परमभक्ति, सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥ विश्वकर्ती, विश्वभती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता। विश्व वार्चिता विश्वातीता सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥ भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी। भव सागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥ धर्मार्थकाम प्रदायिनी महामोह विनाशिनी। मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥ माँ सिद्धिदात्री कवच 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ओंकारपातु शीर्षो मां ऐं बीजं मां हृदयो। हीं बीजं सदापातु नभो, गुहो च पादयो॥ ललाट कर्णो श्रीं बीजपातु क्लीं बीजं मां नेत्र घ्राणो। कपोल चिबुको हसौ पातु जगत्प्रसूत्यै मां सर्व वदनो॥ माँ सिद्धिदात्री जी की आरती 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ जै सिद्धि दात्री मां तूं है सिद्धि की दाता| तूं भक्तों की रक्षक तूं दासों की माता|| तेरा नाम लेटे ही मिलती है सिद्धि| तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि|| कठिन काम सिद्ध करती हो तुम| जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम|| तेरी पूजा में तो न कोई विधि है| तूं जगदम्बे दाती तूं सर्व सिद्धि है|| रविवार को तेरा सुमिरन करे जो| तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो|| तूं सब काज उसके करती हो पूरे| कभी काम उसके रहे न अधूरे|| तुम्हारी दया और तुम्हारी है माया| रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया|| सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्य शाली| जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली|| हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा| महा नन्दा मंदिर में है वास तेरा|| मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता| चमन है सवाली तूं जिसकी दाता|| माँ दुर्गा की आरती 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय… मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय… कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै । रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय… केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी । सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय… कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय… शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय… चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय… ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी । आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय… चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू । बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय… तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय… भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी । मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय… कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय… श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय… 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ *नवरात्र का नोवां दिन, माँ दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा *माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है। *देवी सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है। वह कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं विधि-विधान से नौंवे दिन इस देवी की उपासना करने से सिद्धियां प्राप्त होती हैं। यह अंतिम देवी हैं। इनकी साधना करने से लौकिक और परलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है।

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Raj Kumar Sharma Oct 25, 2020

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💐💐जय जय बिहारी जु की।।💐💐 💐श्री कुन्ज बिहारी श्री हरिदास💐 ९ – सिध्दिदात्री --- :: x :: --- माँ दुर्गाजी की नवीं शक्ति का नाम सिध्दिदात्री है | ये सभी प्रकार की सिध्दियों को देने वाली है | मार्कन्डेयपुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व – ये आठ सिध्दियाँ होती हैं | ब्रह्मवैवर्तपुराण के श्रीकृष्ण – जन्मखण्ड में यह संख्या अट्ठारह बतायी गयी हैं | इनके नाम इस प्रकार हैं – १. अणिमा ७.सर्वकामावसायिता १३. सृष्टि २. लघिमा ८. सर्वज्ञत्व १४. संहारकरणसामर्थ्य ३. प्राप्ति ९. दूरश्रवण १५. अमरत्व ४. प्राकाम्य १०.परकायप्रवेशन १६. सर्वन्यायकत्व ५. महिमा ११.वाक्सिध्दि १७. भावना ६. ईशित्व, वाशित्व १२.कल्पवृक्षत्व १८. सिध्दि माँ सिध्दिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिध्दियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं | देवीपुराण के अनुसार भगवान् शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिध्दियों को प्राप्त किया था | इनकी अनुकम्पा से ही भगवान् शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था | इसी कारण वह लोक में ‘अर्ध्दनारीश्वर’ नाम से प्रसिध्द हुए | माँ सिध्दिदात्री चार भुजाओं वाली हैं | इनका वाहन सिंह है | ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं | इनकी दाहिनी तरफ के नीचेवाले हाथ में चक्र, उपरवाले हाथ में गदा तथा बायीं तरफ के नीचेवाले हाथ में शंख और उपरवाले हाथ में कमलपुष्प है | नवरात्र-पूजन के नवें दिन इनकी उपासना की जाती है | इसदिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिध्दियों की प्राप्ति हो जाती है | सृष्टि में कुछ भी उसके लिये अगम्य नहीं रह जाता | ब्रह्माण्ड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमे आ जाती है | प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि माँ सिध्दिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरन्तर प्रयत्न करे | उनकी आराधना की ओर अग्रसर हो | इनकी कृपा से अनन्त दु:खरूप संसार से निर्लिप्त रहकर सारे सुखों का भोग करता हुआ वह मोक्ष को प्राप्त कर सकता है | नवदुर्गाओं में माँ सिध्दिदात्री अन्तिम हैं | अन्य आठ दुर्गाओं की पूजा-उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा-पूजा के नवें दिन इनकी उपासना में प्रवृत होते हैं | इन सिध्दिदात्री माँ की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक-पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है | लेकिन सिध्दिदात्री माँ के कृपापात्र भक्त के भीतर कोई ऐसी कामना शेष बचती ही नहीं है, जिसे वह पूर्ण करना चाहे | वह सभी सांसारिक इच्छाओं, आवश्यकताओं और स्प्रिहाओं स्पृहाओं से ऊपर उठकर मानसिकरूप से माँ भगवती के दिव्य लोकों में विचरण करता हुआ उनके कृपा-रस-पीयूष का निरंतर पान करता हुआ, विषय-भोग-शून्य हो जाता है | माँ भगवती का परम सानिध्य ही उसका सर्वस्व हो जाता है | इस परम पद को पाने के बाद उसे अन्य किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं रह जाती | माँ के चरणों का यह सानिध्य प्राप्त करने के लिये हमें निरन्तर नियमनिष्ठ रहकर उनकी उपासना करनी चाहिये | माँ भगवती का स्मरण, ध्यान, पूजन हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हुए वास्तविक परमशान्तिदायक अमृत पद की ओर ले जाने वाला है | --- :: x :: --- --- :: x :: ---

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RAJEEV KUMAR Oct 25, 2020

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