Usha Rajput
Usha Rajput Aug 27, 2017

जय माँ गायत्री शुभ प्रभात भक्तों जय श्रीकृष्ण

https://youtu.be/BhMQw5QCnm4

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Raj Kumar Sharma Apr 4, 2020

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mrs kapoor Apr 4, 2020

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Raj Kumar Sharma Apr 4, 2020

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Babita Sharma Apr 4, 2020

श्री राधे" नाम अनंत हैं "श्री राधे" नाम अनमोल... जीवन सफल हो जायेगा बन्दे, जय श्री राधे राधे बोल...| *जय जय श्री राधे 🙏🏼🌷🙏🏻* कामदा एकादशी की हार्दिक शुभेच्छा 🙏 सांसारिक कामनाओं की पूर्ति करता है कामदा एकादशी का व्रत: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। सभी सांसारिक कामनाओं की पूर्ति हेतु कामदा एकादशी का व्रत किया जाता है। कामदा एकादशी को फलदा एकादशी भी कहा जाता है। कामदा एकादशी वर्ष भर में आने वाली सभी एकादशियों में सबसे खास है। नवसंवस्तर में आने के कारण खास है कामदा एकादशी। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति कामदा एकादशी का उपवास करता है उसे प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है। साथ ही कामदा एकादशी को भलीभांति करने से वाजपेयी यज्ञ के समान फल मिलता है।कहा गया है कि ‘कामदा एकादशी’ ब्रह्महत्या आदि पापों तथा पिशाचत्व आदि दोषों का नाश करनेवाली है। इसके पढ़ने और सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। कामदा एकादशी से जुड़ी कथा एक राजा युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से कामदा एकादशी के बारे में जानने की इच्छा व्यक्त की। तब राजा की बात सुनकर श्रीकृष्ण ने उन्हें विधिवत कथा सुनायी। प्राचीन काल में एक नगर था उसका नाम रत्नपुर था। वहां के राजा बहुत प्रतापी और दयालु थे जो पुण्डरीक के नाम से जाने जाते थे। पुण्डरीक के राज्य में कई अप्सराएं और गंधर्व निवास करते थे। इन्हीं गंधर्वों में एक जोड़ा ललित और ललिता का भी था। ललित तथा ललिता में अपार स्नेह था। एक बार राजा पुण्डरीक की सभा में नृत्य का आयोजन किया गया जिसमें अप्सराएं नृत्य कर रही थीं और गंधर्व गीत गा रहे थे। उन्हीं गंधर्वों में ललित भी था जो अपनी कला का प्रदर्शन कर रहा था। गाना गाते समय वह अपनी पत्नी को याद करने लगा जिससे उसका एक पद खराब गया। कर्कट नाम का नाग भी उस समय सभा में ही बैठा था। उसने ललित की इस गलती को पकड़ लिया और राजा पुण्डरीक को बता दिया। कर्कट की शिकायत पर राजा ललित पर बहुत क्रुद्ध हुए और उन्होंने उसे राक्षस बनने का श्राप दे दिया। राक्षस बनकर ललित जंगल में घूमने लगा। इस पर ललिता बहुत दुखी हुयी और वह ललित के पीछ जंगलों में विचरण करने लगी। जंगल में भटकते हुए ललिता श्रृंगी ऋषि के आश्रम में पहुंची। तब ऋषि ने उससे पूछा तुम इस वीरान जंगल में क्यों परेशान हो रही हो। इस पर ललिता ने अपने अपनी व्यथा सुनायी। श्रृंगी ऋषि ने उसे कामदा एकादशी का व्रत करने को कहा। कामदा एकादशी के व्रत से ललिता का पति ललित वापस गंधर्व रूप में आ गया। इस तरह दोनों पति-पत्नी स्वर्ग लोक जाकर वहां खुशी-खुशी रहने लगे। कामदा एकादशी का शुभ मुहूर्त  चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 03 अप्रैल को रात्रि 12 बजकर 58 मिनट पर हो रहा है तथा एकादशी की समाप्ति 04 अप्रैल को रात्रि 10 बजकर 30 मिनट पर होगा। तत्पश्चात द्वादशी ति​थि का प्रारंभ हो जाएगा। कामदा एकादशी का महत्‍व हिन्‍दू धर्म में कामदा एकादशी का विशेष महत्‍व है. कहते हैं कि इस व्रत को करने से राक्षस योनि से तो छुटकारा मिलता ही है साथ ही व्‍यक्ति को सभी संकटों और पापों से मुक्ति मिल जाती है. यही नहीं यह एकादशी सर्वकार्य सिद्धि और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती है. मान्‍यता है कि सुहागिन महिलाएं अगर इस एकादशी का व्रत रखें तो उन्‍हें अखंड सौभाग्‍य का वरदान मिलता है. कुंवारी कन्‍याओं की विवाह में आ रही बाधा दूर होती है. घर में अगर उपद्रव और कलेश है तो वो भी इस एकादशी के व्रतं के प्रभाव से दूर हो जाता है. इस व्रत को करने से घर में सुख-संपन्नता और प्रसन्‍नता आती है. हरि ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏

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