jaikamal Tantuway
jaikamal Tantuway Sep 25, 2017

=== #शक्तिपीठ यात्रा === अर्बुदा देवी मंदिर

=== #शक्तिपीठ यात्रा === अर्बुदा देवी मंदिर

आइये आज चलते हैं राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित नीलगिरि की पहाड़ियों की सबसे ऊँची चोटी पर बसे माउंट आबू पर्वत पर स्थित अर्बुदा देवी के प्राचीन मंदिर की ओर. यह मंदिर माता के प्रमुख शक्ति स्थलों में गिना जाता है. समुद्र तल से साढ़े पांच हजार फीट ऊंचे अर्बुद पर्वत यानि अर्बुदांचल पर स्थित इस शक्तिपीठ की आराध्य देवी हैं मां अर्बुदा देवी. श्री अर्बुदा देवी ही दुर्गा मां का छठा रूप कात्यायनी देवी हैं। 
 देवी का शक्तिपीठ इस आबू पर्वत के एक विशाल पर्वत के शिखर पर स्थित एक कंदरा के भीतर है।  इस प्राकृतिक गुफा में देवी माता के दर्शन हेतु बहुत झुक कर प्रवेश करना पड़ता है।

अर्बुदा माँ को अधर देवी, अम्बिका देवी के नाम से भी पुकारा जाता है. इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. रास्ते में सुंदर नजारों की भरमार है। जिसकी वजह से सीढियाँ कब खत्म हो जाती हैं पता ही नहीं चलता।
अर्बुदा माता का यह मंदिर एक प्राकृतिक गुफा के रुप में निर्मित है, यहां माता की जोत निरंतर जलती रहती है जहां माता के दर्शन हो पाते हैं.
आबू पर्वत शाक्त धर्मका प्रमुख केन्द्र और अर्बुदेश्वरी का निवास माना जाता है.
इस धार्मिक स्थल के पास ही मन्दाकिनी नदी बहती है और अन्य तीर्थ भी हैं. मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का रास्ता है. इस मार्ग से गुजरते हुए अनेक मनोहर दृश्य दिखाई पड़ते हैं जो भक्तों एवं सैलानियों के हृदय पर एक अमिट छाप छोड़ते हैं. यहाँ के नयनाभिराम दृश्य और भक्ति का माहौल मन को मोह लेता है.
भगवान राम से जुड़े कई ऐतिहासिक प्रमाण यहां आज भी मौजूद है। माउंट आबू के घने जंगलों में बसा है महर्षि वशिष्ठ आश्रम। कहा जाता है यहीं भगवान राम ने अपने दोनों भाइयों समेत शिक्षा ली थी। इसकी ऊंचाई समुद्रतल से 1206 मीटर यानी 3970 फीट है और साढे पांच हजार साल पुराना यह ऐतिहासिक मंदिर है। इस आश्रम में जाने के लिए आपको 450 सीढ़ियों से नीचे उतरना होता है जहां भगवान राम के साक्ष्य कोने कोने में मौजूद हैं।

माता अर्बुदा देवी का यहां चरण पादुका मंदिर भी स्थित है जो श्रद्धालुओं की आकर्षण का केंद्र होता है। यहां माता अर्बुदा देवी की पादुका है जिसके नीचे उन्होने बासकली राक्षस का संहार किया था। मां कात्यायनी के बासकली वध की कथा पुराणों में भी मिलती है।
इस पादुका के पीछे पौराणिक कथा ये है कि दानव राजा कली जिसे बासकली के नाम से भी जाना जाता था,उसने जंगल में हजार सालों से तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न कर दिया। भगवान शिव ने उसे अजेय होने का वरदान दिया। बासकली इस वरदान को पाकर घमंड से चूर चूर हो गया। उसने वरदान हासिल करने के बाद देवलोक में इंद्र सहित कुछ देवताओँ को कब्जे में कर लिया। बचे हुए देवता उसके उत्पात से दुखी होकर जंगलों में छिप गए।
देवताओ ने कई सालों तक अर्बुदा देवी को प्रसन्न करने के लिए हजार सालों तक तपस्या की। उसके बाद अर्बुदा देवी तीन रूपों में प्रकट हुई और उन्होंने देवताओं से उन्हें प्रसन्न् करने का कारण पूछा। देवताओँ ने माता अर्बुदा से बासकली से मुक्ति का वर मांगा। माता ने देवताओं और ऋषियों से तथास्तु कहा। भगवान शंकर का वरदान पाकर शक्तिशाली हुए बासकली राक्षस को मां ने अपने चरण से दबा कर उसे मुक्ति दी। मां की जय-जयकार होने लगी और उसी के बाद से माता की चरण पादुका की यहां पूजा होने लगी।

स्कंद पुराण में माता की चरण पादुका की महिमा खूब गायी गई है। पादुका के दर्शन मात्र से ही मोक्ष यानि सदगति मिलने की बात भी कही गई है।

एक अन्य कथा के अनुसार अर्बुद नामक सांप के नाम पर इसका नाम पडा़. जिसने एक गहरी खाई में गिरने से भगवान शिव के पवित्र वाहन नंदी बैल की जान बचाई थी।

ऋषि वशिष्ठ ने अर्बुद को वरदान दिया था कि तुम सभी देवी देवताओं के साथ यहां निवास करोगे. मान्यता है कि माता दुर्गा यहां अर्बुदा देवी के रूप में प्रकट हुई, इसलिये इसका नाम अर्बुदा पड गया.

देवी अर्बुदा को परमार वंश की कुल देवी कहा जाता है. देवी की इस पावन भूमि में आकर सभी मनुष्य माता का सानिध्य प्राप्त करते हैं. यह एक ऐसा पवित्र स्थल है जहाँ देवी की अद्भुत महिमा देखने को मिलती है. यहाँ का पौराणिक इतिहास धार्मिक संदर्भ में बहुमूल्य है क्योंकि यह ऐसा स्थान है जहाँ के विभिन्न धार्मिक उल्लेख प्राप्त होते हैं. यहाँ आकर भक्त सुखद अनुभूति को प्राप्त करता है. ये ऐसा पवित्र धाम है जो देवी के प्रमुख मंदिरों में अपना विशेष स्थान रखता है.

अर्बुदा देवी का यह मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठ में से एक है जहां आकर हर श्रद्धालु अपनी समस्त चिंताओं से मुक्त होकर माँ की शरण प्राप्त करता है. माता पार्वती का अधर यही गिरा था। मंदिर में देवी की एक झलक पाने के लिए भारी भीड़ जमा होती है. माँ के दर्शनों को पाकर भक्त कृतार्थ हो जाता है तथा माँ के आशीर्वाद को ग्रहण करता है जिससे उसके सभी दुख व चिंताएं दूर हो जाती हैं.

यह मंदिर मांउट आबू के प्रमुख पवित्र दर्शनीय स्थलों में से एक है. यहां का सौंदर्य इस बात से और भी निखर जाता है और बरबस ही लोग यहाँ खिंचे चले आते हैं. मंदिर का अनुपम सौंदर्य सभी को अपनी ओर आकर्षित करता है जिस कारण हर व्यक्ति एक न एक बार तो इस मंदिर में आने की इच्छा रखता ही है. अर्बुदा माँ के दर्शनों को पाकर श्रद्धालु अपनी सभी कष्टों को भूल जाते हैं व हर चिंता तथा संकट से मुक्त हो जाते हैं .

यहाँ चैत्र पूर्णिमा, नवरात्र तथा विजयादशमी के अवसरों पर धार्मिक मेलों का आयोजन होता है जिसमें देश विदेश के अनेक लोग भाग लेने के लिए आते हैं. नवरात्रों में यहां निरंतर दिन-रात अखंड सप्तशती पाठ होता है। अर्बुदा माँ के दरबार में हर समय प्रज्ज्वलित रहने वाली माता की ज्योत भक्तों में एक नयी ऊर्जा शक्ति का संचार करती है जिससे भक्तों में धार्मिक अनुभूति जागृत होती है तथा जीवन की कठिनाइयों से पार पाने की क्षमता आती है. भक्त इस ज्योत को शक्ति का दर्शन कहते हैं. यहां आने वाला भक्त जीवन के इन सबसे सुखद पलों को कभी भी नहीं भूल पाता और उसके मन में इस स्थान की सुखद अनुभूति हमेशा के लिए अपनी अमिट छाप छोड़ जाती है.
===कैसे पहुंचें===
रेल मार्ग से : आबू रोड पर बने रेलवे स्टेशन से माउंट आबू तक आने तक 2 घंटे का समय लगता है। पश्चिम और उत्तर रेलवे की लंबी दूरीवाली महत्वपूर्ण गाड़ियां यहां अवश्य ठहरती हैं। यह अहमदाबाद, दिल्ली, जयपुर और जोधपुर से जुड़ा है

हवाई मार्ग से : उदरपुर हवाई अड्डा इसके सबसे नजदीक है। यह माउंट आबू से 185 किकिलोमीटर दूर है। यहां से पर्यटक सड़क मार्ग से माउंट आबू तक जा सकते हैं। 

सड़क मार्ग से : माउंट आबू सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। यह नेशनल हाइवे नंबर 8 और 14 के नजदीक है। एक छोटी सड़क इस शहर को नेशनल हाइवे नंबर 8 से जोड़ती है। दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे से माउंट आबू के लिए सीधी बस सेवा है। राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें दिल्ली के अलावा अनेक शहरों से माउंट आबू के लिए अपनी सेवाएं मुहैया कराती हैं। अच्छी सड़कें होने के कारण टैक्सी से भी जा सकते हैं।

बोलिये अर्बुदा माता की जय.

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कामेंट्स

ramesh patel Sep 25, 2017
अर्बुजा माँ अंजना पटेल की भी कुल देवी

white beauty Mar 27, 2020

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🎎🌲🐯 शुभ नवरात्रि 🐯🌲🎎 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 🎎🌺नवरात्रि का तीसरा दिन🌺🎎 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲 🔔🚩👣ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः 👣🚩🔔 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣 🌋🌻🌺 सुप्रभात 🌺🌻🌋 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🏵 🌿🌹शुभ शुक्रवार 🌹🌿 🏵 ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️ 🚩या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघंटा रूपेण संस्थिता।🚩 🚩नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।🚩 🏖मंगलमय सुबह की शुरुआत माँ चन्द्रघंटा देवी के चरण कमलों के दर्शन के साथ।🙏 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣 3. 🔔 चंद्रघंटा 🔔 🎎पिंडज प्रवरारूढ चंडकोपास्त्रक औरुता। 🎎 🦁प्रसाद तनुते महे चंद्रघण्टेति विश्रुता ।।🦁 👣 माता शक्ति के तीसरे स्वरुप के माथे पर आधा चन्द्रमा है जो की एक घंटे (बेल) की तरह नजर आता है इसीलिए इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा है | 🚩माता का चंद्रघंटा स्वरुप सुहागन स्त्री की स्वरुप है |🌹 🐯माता का स्वरूप। :-- 🔔 माँ दुर्गा के तीसरे स्वरुप चंद्रघंटा की सवारी शेर | उनके माथे पर आधा चन्द्रमा सुशोभित है | उनके 10 हाथ हैं | 🌷उनके बाएं हाथ में त्रिशूल, गदा, तलवार और कमंडल हैं | और पांचवा हत वरदमुद्रा में है | 🌺उनके दाहिने हाथों में कमल का फूल, धनुष बाण, और जप माला है और पाँचवा हत अभय मुद्रा में है | 👣माता का स्वरूप🌹 माता का यह स्वरुप स्पष्ट का नाश करने वाला है | स्पष्ट के दोहराए जाने से हमेशा लड़ने के लिए तैयार रहता है | 💐 माता के इस स्वरुप की पूजा करने से शत्रुओं का नाश होता है और जीवन में शांति और खुशहाली आती है | 🎎 मंत्र: ऊँ देवी कैंड्रघैयै नमो न्द्र देवी चन्द्रघंटायै नम:🌷 🌹ध्यान :- वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्। सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम् चंद्र मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्। खंग, गदा, त्रिशूल, चापर, पदम कमण्डलु माला व्रहीतकराम्। पटाम्बर परिधान मृदुहास्या नानालंकार भूशिताम्। मंजीर हार केयूर, कि बुटी, रत्नकुंडल मण्डिताम य प्रफुल्ल वंदना बिबाइड कांत कपोलां तुगं कुचाम्। कमनीयां लावाण्या क्षीणकट्टी नितम्बनीम् ण 🦁स्तोत्र पाठ। :-- आपदुधर्नि त्व त्वहि आद्या शक्तिः शुभपराम्। अनिमादि सिद्धिदात्री चंद्रघटा प्रणमभ्यम् सि चन्द्रमुखी पदार्थ दात्री वं मन्त्र स्वरूपणीम्। धनदात्री, आनंददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यम् आनन्द नानारूपधारिणी अर्थानाय ऐश्वर्यदायनीम्। सौभाग्यरोग्यिनी चंद्रघंट्रपन्ममाभ्यम् दाय 🏵कवच :-- रहस्यं श्रुणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने। श्री चन्द्रघंटास्य कवचं सर्वसिद्धिप्रदम् न्ट बिना नापसँ बिना विनियोगं बिना शापोध्दा बिना होमं। स्नानं शुचादि नस्ति श्रध्दामत्रयेण सिद्धिधामम् ि कुशीश्याम कुटिलाय वंचित नाट्यशास्त्रीय च न दतिव्यं न दात्यं न दातव्यं न संचितम् ट 🎭भगवती चन्द्रघनता का ध्यान, स्तोत्र और कवच का पाठ करने से मणिपुर चक्र जाग्रत हो जाता है और सांसारिक परेशानियों से मुक्ति मिल जाता है। 🔔🚩👣 जय माता दी 👣🚩🔔 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔

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white beauty Mar 27, 2020

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