महावीर
महावीर Aug 2, 2017

श्री राजगृही विपुलाचल पर्वत अभिषेक (महावीर)

#जयजिनेंद्र
श्री राजगृही विपुलाचल पर्वत अभिषेक (महावीर)

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एक डॉक्टर की सलाह है जरूर पढ़ें सोचने योग्य विषय धन्यवाद डॉक्टर साहब 🙏 ☺️1 दस रू किलो टमाटर लेकर ताजा चटनी खा सकते हैं है मगर हम डेढ़ सौ रू किलो टमाटो साॅस खाते हैं वो भी एक दो माह पहले बनी हुई बासी। 2 पहले हम एक दिन पुराना. घड़े का पानी नहीं पीते थे अब तीन माह पुराना बोतल का पानी बीस रू लीटर खरीद कर पी रहे हैं। 3 पचास रू लीटर का दूध हमे महंगा लगता हैं और सत्तर रू लीटर का दो महीने पहले बना हुआ कोल्ड ड्रिंक हम पी लेते हैं। 4 दो सौ रू पाव मिलने वाला शरीर को ताकत देने वाला ड्राई फ्रुट हमे महंगा लगता है मगर 400 रू का मैदे से बना पीज्जा शान से खा रहे हैं। 5 अपनी रसोई का सुबह का खाना हम शाम को खाना पसंद नहीं करते जब कि कंपनियों के छह छह माह पुराने सामान हम खा रहे हैं जबकि हम जानते है कि खाने को सुरक्षित रखने के लिए उसमें प्रिजर्वेटिव मिलाया जाता है। 6 डेढ़ माह के लाक डाऊन मे सबको समझ आ गया होगा कि बाहर के खाने के बिना भी हमारा जीवन चल सकता हैं बल्कि बेहतर चल सकता है।🙏🌹🙏

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RAMDEV RARHORIA Aug 3, 2020

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एक आदमी हमेशा की तरह अपने नाई की दूकान पर बाल कटवाने गया . बाल कटाते वक़्त अक्सर देश-दुनिया की बातें हुआ करती थीं ….आज भी वे सिनेमा , राजनीति , और खेल जगत , इत्यादि के बारे में बात कर रहे थे कि अचानक भगवान् के अस्तित्व को लेकर बात होने लगी . नाई ने कहा , “ देखिये भैया , आपकी तरह मैं भगवान् के अस्तित्व में यकीन नहीं रखता .” “ तुम ऐसा क्यों कहते हो ?”, आदमी ने पूछा . “अरे , ये समझना बहुत आसान है , बस गली में जाइए और आप समझ जायेंगे कि भगवान् नहीं है . आप ही बताइए कि अगर भगवान् होते तो क्या इतने लोग बीमार होते ?इतने बच्चे अनाथ होते ? अगर भगवान् होते तो किसी को कोई दर्द कोई तकलीफ नहीं होती ”, नाई ने बोलना जारी रखा , “ मैं ऐसे भगवान के बारे में नहीं सोच सकता जो इन सब चीजों को होने दे . आप ही बताइए कहाँ है भगवान ?” आदमी एक क्षण के लिए रुका , कुछ सोचा , पर बहस बढे ना इसलिए चुप ही रहा . नाई ने अपना काम ख़तम किया और आदमी कुछ सोचते हुए दुकान से बाहर निकला और कुछ दूर जाकर खड़ा हो गया. . कुछ देर इंतज़ार करने के बाद उसे एक लम्बी दाढ़ी – मूछ वाला अधेड़ व्यक्ति उस तरफ आता दिखाई पड़ा , उसे देखकर लगता था मानो वो कितने दिनों से नहाया-धोया ना हो . आदमी तुरंत नाई कि दुकान में वापस घुस गया और बोला , “ जानते हो इस दुनिया में नाई नहीं होते !” “भला कैसे नहीं होते हैं ?” , नाई ने सवाल किया , “ मैं साक्षात तुम्हारे सामने हूँ!! ” “नहीं ” आदमी ने कहा , “ वो नहीं होते हैं वरना किसी की भी लम्बी दाढ़ी – मूछ नहीं होती पर वो देखो सामने उस आदमी की कितनी लम्बी दाढ़ी-मूछ है !!” “ अरे नहीं भाईसाहब नाई होते हैं लेकिन बहुत से लोग हमारे पास नहीं आते .” नाई बोला “बिलकुल सही ” आदमी ने नाई को रोकते हुए कहा ,” यही तो बात है , भगवान भी होते हैं पर लोग उनके पास नहीं जात� 💦💦💦💦💦💦💦💦💦🙏🙏🌹✍️✍️✍️

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ruby Aug 3, 2020

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~~🏵️~~ मर्यादाओं के बंधन में जो सुरक्षा समाई है उसे हम रक्षाबंधन कहते हैं जब परमात्मा इस सृष्टि पर अवतरित होते हैं तो वो हमें ज्ञान, प्यार और शक्ति देते हैं। परमात्मा से ज्ञान लेकर आत्मा को प्रतिज्ञा करनी होती है कि उस ज्ञान का जीवन में इस्तेमाल करना है। उस प्रतिज्ञा से हम बंधे हुए हैं। इस प्रतिज्ञा को जो आत्मा पूरा करेगी वह स्वयं की रक्षा होते हुए देख सकती है। जीवन की इस यात्रा पर इतने सारे लोग मिलते हैं जो कहते हैं कि वो डिप्रेशन से बाहर आ गए, कोई कहता है हम डिवोर्स के लिए सोच रहे थे लेकिन आज हम दोनों साथ-साथ रह रहे हैं। आज हमारा रिश्ता पहले से अच्छा हो गया। कुछ तो ऐसे भी भाई-बहन मिलते हैं जो कहते हैं कि हम सुसाइड तक पहुंच गए थे, लेकिन हम बच गए। किससे बच गए, हम अपनी ही सोच से बच गए ना। अधिकांश लोग यह कहते हैं कि हमारा सोचने का तरीका बदल गया। इसका मतलब है कि वे पहले से कहीं ज्यादा पावरफुल हो गए। यह एम्पावरमेंट कैसे हुआ? परमात्मा से हमने जो ज्ञान लिया था उसको इस्तेमाल करने की प्रतिज्ञा की। इतनी सारी हमारी आदतें हैं जिनको हम छोड़ नहीं पा रहे हैं, जैसे-खाने की, पीने की, टीवी देखने की, कम्प्यूटर पर कितनी देर बैठना है, ये आदतें हम छोड़ नहीं पाते क्योंकि हम अपने आपको बंधन में नहीं बांधते हैं। बंधन यानी अनुशासन। मर्यादाओं का भी बंधन होता है, जो बड़ा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सिर्फ सुरक्षा समाई हुई है। यह एक ऐसा बंधन है जो बड़ा प्यारा लगता है, जिसे रक्षाबंधन कहते हैं। अब आज के वक्त में त्यौहार की संभावनाएं बदल गई हैं। इनके पहलुओं में बहुत अंतर आ गया है। आज अपने आपको इतना शक्तिशाली बनाना है कि वो आत्मा अपनी रक्षा खुद कर सके। यह रक्षा हमारी अपने आपसे है। जैसे कहते हैं न मन ही हमारा मित्र है तो मन ही हमारा शत्रु भी है। नकारात्मक विचार हमारे दुश्मन हैं, जैसे दुखी होने का संस्कार भी हमारा कितना बड़ा दुश्मन है। परमात्मा आकर हमें ये जो धागा बांधते हैं वो है ज्ञान का धागा। जो आत्मा, परमात्मा के ज्ञान और प्यार के धागे में बंध जाती है उस आत्मा की रक्षा हो जाती है। अब हम सोचते हैं कि परमात्मा कैसे हमारी रक्षा करेगा? परमात्मा ने जो ज्ञान दिया उससे हमारी रक्षा हुई तो हम यही कहते हैं कि परमात्मा ने हमारी रक्षा की। जितना हम मर्यादा में चलेंगे, सत्य ज्ञान का चिंतन करेंगे, मेडिटेशन करेंगे उससे आत्मा की शक्ति बढ़ेगी। फिर हर परिस्थिति को सहजता से पार कर लेंगे। जब हम पूजा करने बैठते हैं तो हम देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं। मतलब आत्मा के अंदर जो दिव्यता है उसका आह्वान करते हैं। ग्रह, नक्षत्र भी हमारे संस्कारों को दर्शाते हैं। पंडित जी कहते हैं कि नक्षत्र और देवी-देवता हमारी रक्षा करेंगे मतलब हमारी दिव्यता ही रक्षाकवच है। अगर हमने परमात्मा को, देवी-देवताओं को, नक्षत्रों को बांध लिया अपनी रक्षा के लिए बांध लिया तो हमें अगले दिन न तो गुस्सा करना है न ही टेंशन बढ़ानी है। हमारी रक्षा तभी होगी जब अंदर से आह्वान करेंगे। अगर हमने अपनी दिव्यता का आह्वान किया है तब ही हमारा दिन अच्छा बीतेगा। .... ✍️BY - बी के शिवानी दीदी जी ।💦💦💦💦💦💦💦✍️✍️

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