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sudanm Sep 16, 2017

👉 श्री राम की महिमा:

👉 श्री राम की महिमा:

स्वामी विवेकानंद एक बार एक रेलवे स्टेशन पर बैठे थे उनका अयाचक (ऐसा व्रत जिसमें किसी से मांग कर भोजन नहीं किया जाता) व्रत था। वह व्रत में किसी से कुछ मांग भी नहीं सकते थे। एक व्यक्ति उन्हें चिढ़ाने के लहजे से उनके सामने खाना खा रहा था।

स्वामी जी दो दिन से भूखे थे और वह व्यक्ति कई तरह के पकवान खा रहा था और बोलता जा रहा था कि बहुत बढ़िया मिठाई है। विवेकानंद ध्यान की स्थिति में थें और अपने गुरुदेव को याद कर रहे थे।

वह मन ही मन में बोल रहे थे कि गुरुदेव आपने जो सीख दी है उससे अभी भी मेरे मन में कोई दुख नहीं है। ऐसा कहते विवेकानंद शांत बैठे थे। दोपहर का समय था। उसी नगर में एक सेठ को भगवान श्रीराम ने दर्शन दिए और कहा कि रेलवे स्टेशन पर मेरा भक्त एक संत आया है उसे भोजन करा कर आओ उसका अयाचक व्रत है जिसमें किसी से कुछ मांग कर खाना नहीं खाया जाता है तो आप जाओ और भोजन करा कर आओ ।

सेठ ने सोचा यह महज कल्पना है । दोपहर का समय था सेठ फिर से करवट बदल कर सो गया । भगवान ने दोबारा दर्शन दिए और सेठ से कहा कि तुम मेरा व्रत रखते हो और तुम मेरा इतना सा भी काम नहीं करोगे । जाओ और संत को भोजन करा कर आओ ।

तब सेठ सीधा विवेकानंद के पास पहुंच गया और वह उनसे बोला कि मैं आपके लिए भोजन लाया हूं। सेठ बोला में आपको प्रणाम करना चाहता हूं कि ईश्वर ने मुझे सपने में कभी दर्शन नहीं दिए आपके कारण मुझे-श्रीरामजी के दर्शन सपने में हो गए इसलिए में आपको प्रणाम कर रहा हूं ।

विवेकानंद की आंखों में आंसू आ गए । वो सोचने लगे कि मैनें याद तो मैरे गुरुदेव को किया था। गुरुदेव और ईश्वर की कैसी महिमा है। स्वामी विवेकानंद की आंखों के आंसू रुक नहीं रहे थे, तब उन्हें लगा कि गुरु ही ईश्वर हैं |,

संक्षेप में :-

🏻गुरु का स्थान ईश्वर से बड़ा होता है क्यों कि ईश्वर भी भगवान राम और कृष्ण अवतार में गुरु की शरण में गए हैं।
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जय श्री हरि

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कामेंट्स

sudanm Sep 16, 2017
सभी मित्रों का बहुत बहुत आभार जो आप लोगों ने इस पोस्ट को पसंद किया

jitendra upadhyay Sep 16, 2017
सद्गुरु ही साक्षात परमेश्वर हैं

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