varsha sharad singh
varsha sharad singh Apr 19, 2019

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कामेंट्स

,OP JAIN (RAJ) Apr 19, 2019
जय श्री हनुमान जी जय श्री शनिदेव जी आपका हर एक पल शुभ और मंगलमय हो हैप्पी शनिवार दीदी

Jay Shree Krishna May 20, 2019

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🙏🏻Meena Sharma May 19, 2019

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*🙏🏻जानिए भगवान श्री कृष्ण की कालिया दमन(मर्दन) लीला के बारे में*🙏🏻 ➡ एक दिन यमुना के तट(Yamuna tat) पर ग्वाले और गइया(gaiyan) भी बेहोश हो गई और ग्वाल बाल(gawal baal) भी मूर्छित हो गए। क्योंकि यमुना का जल दुषैला हो गया था। उस यमुना में कालीया नाग(Kaliya naag)रहता था। भगवान ने कहा की मैं इस कालीया को नाथुंगा। और यमुना जी को बचाऊंगा। एक दिन बलराम जी का जन्मदिन था और अकेले ग्वाल बालों के साथ भगवान कृष्ण ही गऊ चराने आये हैं। श्रीदामा गेंद के साथ खेलने लगे। जब खेल रहे थे तो कृष्ण जी ने जान बुझ कर यमुना में गेंद फेंक दी है। श्रीदामा जी बोले कन्हैया मेरी गेंद मुझे लेकर दे। कृष्ण बोले की भैया घर चल में तुझे मैया से दूसरी गेंद बनवाकर दे दूंगा। लेकिन श्रीदामा जी मचल गए और रोने लगे की नही कन्हैया मुझे मेरी गेंद ही चाहिए। कृष्ण बोले ठीक है भैया तू रो मत अभी लेकर देता हूँ। भगवान श्री कृष्ण जी कदम्ब(kadamba tree) के पेड़ पर चढ़ गए। और यमुना में कूदने लगे तो सभी ग्वाल बाल हल्ला करने लगे की तू मत कूद कन्हैया इसमें बहुत बड़ा कालीया नाग रहता है। लेकिन भगवान ने छलांग लगा दी। और सीधे पहुंच गए जहाँ काली निवास करता है। उस समय काली नाग सो रहा है। और नागिन जाग रही थी। जब उन्होंने भगवान को देखा तो मन्त्र मुग्ध हो गई और नागिन कहती है- *🌹Krishna or Nagin Sanwad कृष्णा और नागिन संवाद*🌹 कौन दिशा ते आयो रे बालक कौन तुम्हारो नाम है ? कौन सखी के पुत्र जू कहिये कौन तुम्हारो गाम है? अर्थ: नागिन भगवान से पूछती है अरे लाला तू कौन है? कहाँ से आया है? और तेरे माता पिता कौन है? भगवान बोले की अरी नागिन – पूरब दिशा दे आयो रे नागिन कृष्ण हमारो नाम है। मात यशोदा और पिता नन्द जू गोकुल हमारो गाम है। अर्थ: भगवान कहते है नागिन में पूर्व दिशा से आया हूँ। कृष्ण मेरा नाम है। माँ यशोदा और पिता नन्द जी है। नागिन बोली की आप यमुना में क्यों कूदे? कह बालक तू डगर भूल्यो, बगड़ भूल्यो कह घर नार रिसाइयां? या तेरे मन में क्रोध उपज्यो ना बारें बैरिन भर बाइयां। अर्थ: क्या आप रास्ता भूल गए। क्या किसी बेरी ने तुम्हारे कान भर दिए और तुम्हे गुस्सा आ गया। या अपनी पत्नी से लड़ाई करके यमुना में कूदे हो? भगवान कहते है- ना नागिन में डगर भूल्यो बगड़ भूल्यो ना घर नार रिसाइयां। ना मेरे मन में क्रोध उपज्यो ना बेरिन भर बाइयां। अर्थ: भगवान बोले नागिन न तो मैं रास्ता भुला हूँ न ही डगर और न मेरी अपनी पत्नी से घर में लड़ाई हुई है। और मुझे गुस्सा भी नही है और किसी बेरी ने मेरी कान भी नही भरे हैं। नागिन कहती है फिर बालक तुम यमुना में क्यों कूदे? ले बालक गलहार माला सवा लाख की बोरियां इतने ले घर जाओ रे बालक नाग से दूँ में चोरियां अर्थ: नागिन कहती हैं हम चोरी से(अपने नाग से छिपकर) आपको गलहार माला और सवा लाख की बोरियां देती हूँ। आप अपने घर ले जाओ। भगवान बोले की हमें चोरी का माल नहीं चाहिए- ना चाहिए गलहार माला सवा लाख की बोरियां मात यशोदा दही बिलोवें तेरे नाग की करूँ में डोरियां। अर्थ: भगवान बोले की नागिन मुझे चोरी की चीज नही चाहिए। मालूम है मैं यहाँ क्यों आया हूँ? देख मेरी माँ यशोदा जब दधि मंथन करेगी तो मेरी माँ को डोरी की आवश्यकता पड़ेगी तो तेरे नाग की मैं डोरी बनाउंगा। जब मेरी प्यारी राधा रानी झूला झुलेंगी तो मुझे रस्सी की आवश्यकता होगी तो तेरे नाग की मैं डोरी बनाऊंगा। नागिन बोली की हम इसे कितने स्नेह कर रही है और ये हमारे पति अपमान कर रहा है। हम इसे कितना स्नेह दे रही हैं। लेकिन ये मान नही रहा और उन्हें क्रोध आ गया और अपने पति को जगाने लगी की पैर चुम्बे भुजा मरोरे नागिन नाग जगाईयां। उठो-उठो बलवंत योद्धा बालक नाथन आइयाँ। नागिन अपने पति को जगाने लगी और कालीया नाग एकदम फुंकार मार कर उठ गया और भगवान के चारों और लिपट गया। तब प्रभू ने अपने शरीर को फुलाना शुरू किया और काली की नस नस चटकने लगी। और कालीया नाग का बंधन ढीला हो गया। जब कालीया नाग का बंधन ढीला हुआ तो उसी समय भगवान उसके लपेटे से बाहर निकले और एक छोटी सी छलांग यमुना में लगाई और झट प्रभु कालीया नाग के फन पर चढ़ गए। जिस फन से कालीया नाग फुंकार मार रहे हैं। भगवान अपना चरण उठाकर कालीया नाग के मस्तक पर प्रहार कर रहे हैं। उसकी नाक से आँख से रक्त बहने लगा। रक्त की बून्द भगवान के चरणों में पड़ी हैं। *शुकदेव जी महाराज कहते हैं की परीक्षित ऐसा लग रहा हैं जैसे कोई भक्त नीले चरणों में लाल पुष्प चढ़ा रहा हैं। कितना सुंदर भगवान के चरण सुशोभित हो रहे हैं।* जब नागिनों ने देखा तो घबरा गई और अपने बच्चो को लेकर भगवान के चरणों में प्रणाम करने लगी। प्रभु आप क्षमा कीजिये हमें क्षमा कीजिये। और हम आज ये बात समझ गई हैं। आपकी दृष्टि में शत्रु और पुत्र में कोई भेद नही हैं। नागिन कहती हैं प्रभु आपकी दृष्टि में कोई भेद नहीं हैं। आपकी दृष्टि में क्षमता हैं। पर आप जानते हैं हमारा पति कालीया नाग हैं। बिना पति के पत्नी का जीवन बहुत कठिन हो जाता हैं। हम आपके चरणों में बार बार प्रणाम करती हैं। जब नागिन ने बार बार प्रार्थना की तो भगवान ने अपना लीला क्रोध कम किया और कालिया नाग भी बोलने लगा। जिसका पूरा मस्तक रक्त से भरा हुआ हैं। कालीया नाग कहता हैं प्रभु हम तो जाति से ही दुष्ट हैं खल हैं। कितना भी हमको दूध पिलाओ फिर भी विष ही उगलेंगे। लेकिन हमें भी तो आपने ही बनाया हैं ना । भगवान बोले ठीक हैं कालीया पर तुम वृन्दावन में नही रहोगे। कालीया नाग बोला की मैं कहाँ जाऊं। भगवान ने कहा की तुम रमनदीप चले जाओ। कालीया नाग बोला की मैं रमनदीप गया तो गरुड़ मेरा भक्षण कर लेगा। जबकि गरुड़ वृन्दावन में नहीं आ सकता था ये बात काली को मालूम थी। भगवान ने कहा की कालीया अब तुम्हारे मस्तक पर मेरे चरण चिन्ह हैं। गरुड़ तुम्हारा भक्षण नहीं करेगा। कालीया नाग प्रणाम करके चले गए रमनदीप। *भगवान श्रीकृष्ण* कालीया को नाथ कर और एक हाथ से बंसी बजाते हुए यमुना से प्रकट हो गए। अंत में भगवान ने उस कालीया नाग को ब्रज से निष्कासित कर दिया। 🕉 जय श्री कृष्ण 🕉 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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Vikash Srivastava May 19, 2019

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Jay Shree Krishna May 19, 2019

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