Sarla Rana
Sarla Rana Oct 15, 2021

. कल शनिवार दिनांक 16.10.2021 को आनेवाली है, संवत् २०७८ आश्विन मास के शुक्लपक्ष की 👇🏻 "पापांकुशा एकादशी" आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहते हैं। इस एकादशी पर मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, जो मनुष्य कठिन तपस्याओं के द्वारा फल प्राप्त करते हैं, वही फल इस एकादशी पर शेषनाग पर शयन करने वाले श्रीविष्णु को नमस्कार करने से ही मिल जाते हैं और मनुष्य को यमलोक के दु:ख नहीं भोगने पड़ते हैं। यह एकादशी उपवासक (व्रत करने वाले) के मातृपक्ष के दस और पितृपक्ष के दस पितरों को विष्णु लोक लेकर जाती है। पापाकुंशा एकादशी हजार अश्वमेघ और सौ सूर्ययज्ञ करने के समान फल प्रदान करने वाली होती है। इस एकादशी व्रत के समान अन्य कोई व्रत नहीं है। इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति इस एकादशी की रात्रि में जागरण करता है वह स्वर्ग का भागी बनता है। इस एकादशी के दिन दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु भक्तों के लिए एकादशी के दिन व्रत करना प्रभु भक्ति के मार्ग में प्रगति करने का माध्यम बनता है। "व्रत विधि" इस व्रत का पालन दशमी तिथि के दिन से ही करना चाहिए। दशमी तिथि पर सात धान्य अर्थात गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर की दाल नहीं खानी चाहिए, क्योंकि इन सातों धान्यों की पूजा एकादशी के दिन की जाती है। जहां तक संभव हो दशमी तिथि और एकादशी तिथि दोनों ही दिनों में कम से कम बोलना चाहिए। दशमी तिथि को भोजन में तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। एकादशी तिथि पर सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प अपनी शक्ति के अनुसार ही लेना चाहिए यानी एक समय फलाहार का या फिर बिना भोजन का। संकल्प लेने के बाद घट स्थापना की जाती है और उसके ऊपर श्रीविष्णुजी की मूर्ति रखी जाती है। इसके साथ भगवान विष्णु का स्मरण एवं उनकी कथा का श्रवण किया जाता है। इस व्रत को करने वाले को विष्णु के सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। इस व्रत का समापन एकादशी तिथि में नहीं होता है, बल्कि द्वादशी तिथि की प्रात: में ब्राह्माणों को अन्न का दान और दक्षिणा देने के बाद ही यह व्रत समाप्त होता है। "कथा" प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक बहेलिया रहता था। वह बड़ा क्रूर था। उसका सारा जीवन पाप कर्मों में बीता। जब उसका अंत समय आया तो वह मृत्यु के भय से कांपता हुआ महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुंचकर याचना करने लगा- हे ऋषिवर, मैंने जीवन भर पाप कर्म ही किए हैं। कृपा कर मुझे कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे मेरे सारे पाप मिट जाएं और मोक्ष की प्राप्ति हो जाए। उसके निवेदन पर महर्षि अंगिरा ने उसे पापांकुशा एकादशी का व्रत करके को कहा। महर्षि अंगिरा के कहे अनुसार उस बहेलिए ने पूर्ण श्रद्धा के साथ यह व्रत किया और किए गए सारे पापों से छुटकारा पा लिया। "महत्व" पापांकुशा एकादशी व्रत में यथासंभव दान व दक्षिणा देनी चाहिए। पूर्ण श्रद्धा के साथ यह व्रत करने से समस्त पापों से छुटकारा प्राप्त होता है। शास्त्रों में एकादशी के दिन की महत्ता को पूर्ण रुप से प्रतिपादित किया गया है। इस दिन उपवास रखने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। जो लोग पूर्ण रूप से उपवास नहीं कर सकते उनके लिए मध्याह्न या संध्या काल में एक समय भोजन करके एकादशी व्रत करने की बात कही गई है। एकादशी जीवों के परम लक्ष्य, भगवद भक्ति, को प्राप्त करने में सहायक होती है। यह दिन प्रभु की पूर्ण श्रद्धा से सेवा करने के लिए अति शुभकारी एवं फलदायक माना गया है। इस दिन व्यक्ति इच्छाओं से मुक्त हो कर यदि शुद्ध मन से भगवान की भक्तिमयी सेवा करता है तो वह अवश्य ही प्रभु की कृपापात्र बनता है। ----------:::×:::---------- "जय जय श्रीहरि" ******************************************* "श्रीजी की चरण सेवा" की सभी धार्मिक, आध्यात्मिक एवं धारावाहिक पोस्टों के लिये हमारे पेज से जुड़े रहें तथा अपने सभी भगवत्प्रेमी मित्रों को भी आमंत्रित करें👇 https://www.facebook.com/श्रीजी-की-चरण-सेवा-724535391217853/

.        कल शनिवार दिनांक 16.10.2021 को आनेवाली है, संवत् २०७८ आश्विन मास के शुक्लपक्ष की 👇🏻

                       "पापांकुशा एकादशी"

          आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहते हैं। इस एकादशी पर मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, जो मनुष्य कठिन तपस्याओं के द्वारा फल प्राप्त करते हैं, वही फल इस एकादशी पर शेषनाग पर शयन करने वाले श्रीविष्णु को नमस्कार करने से ही मिल जाते हैं और मनुष्य को यमलोक के दु:ख नहीं भोगने पड़ते हैं। यह एकादशी उपवासक (व्रत करने वाले) के मातृपक्ष के दस और पितृपक्ष के दस पितरों को विष्णु लोक लेकर जाती है।
          पापाकुंशा एकादशी हजार अश्वमेघ और सौ सूर्ययज्ञ करने के समान फल प्रदान करने वाली होती है। इस एकादशी व्रत के समान अन्य कोई व्रत नहीं है। इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति इस एकादशी की रात्रि में जागरण करता है वह स्वर्ग का भागी बनता है। इस एकादशी के दिन दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु भक्तों के लिए एकादशी के दिन व्रत करना प्रभु भक्ति के मार्ग में प्रगति करने का माध्यम बनता है।

                               "व्रत विधि"

          इस व्रत का पालन दशमी तिथि के दिन से ही करना चाहिए। दशमी तिथि पर सात धान्य अर्थात गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर की दाल नहीं खानी चाहिए, क्योंकि इन सातों धान्यों की पूजा एकादशी के दिन की जाती है। जहां तक संभव हो दशमी तिथि और एकादशी तिथि दोनों ही दिनों में कम से कम बोलना चाहिए। दशमी तिथि को भोजन में तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
          एकादशी तिथि पर सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प अपनी शक्ति के अनुसार ही लेना चाहिए यानी एक समय फलाहार का या फिर बिना भोजन का। संकल्प लेने के बाद घट स्थापना की जाती है और उसके ऊपर श्रीविष्णुजी की मूर्ति रखी जाती है। इसके साथ भगवान विष्णु का स्मरण एवं उनकी कथा का श्रवण किया जाता है। इस व्रत को करने वाले को विष्णु के सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। इस व्रत का समापन एकादशी तिथि में नहीं होता है, बल्कि द्वादशी तिथि की प्रात: में ब्राह्माणों को अन्न का दान और दक्षिणा देने के बाद ही यह व्रत समाप्त होता है।

                                  "कथा"

          प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक बहेलिया रहता था। वह बड़ा क्रूर था। उसका सारा जीवन पाप कर्मों में बीता। जब उसका अंत समय आया तो वह मृत्यु के भय से कांपता हुआ महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुंचकर याचना करने लगा- हे ऋषिवर, मैंने जीवन भर पाप कर्म ही किए हैं। कृपा कर मुझे कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे मेरे सारे पाप मिट जाएं और मोक्ष की प्राप्ति हो जाए। उसके निवेदन पर महर्षि अंगिरा ने उसे पापांकुशा एकादशी का व्रत करके को कहा। महर्षि अंगिरा के कहे अनुसार उस बहेलिए ने पूर्ण श्रद्धा के साथ यह व्रत किया और किए गए सारे पापों से छुटकारा पा लिया।

                                  "महत्व"

          पापांकुशा एकादशी व्रत में यथासंभव दान व दक्षिणा देनी चाहिए। पूर्ण श्रद्धा के साथ यह व्रत करने से समस्त पापों से छुटकारा प्राप्त होता है। शास्त्रों में एकादशी के दिन की महत्ता को पूर्ण रुप से प्रतिपादित किया गया है। इस दिन उपवास रखने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। जो लोग पूर्ण रूप से उपवास नहीं कर सकते उनके लिए मध्याह्न या संध्या काल में एक समय भोजन करके एकादशी व्रत करने की बात कही गई है।
          एकादशी जीवों के परम लक्ष्य, भगवद भक्ति, को प्राप्त करने में सहायक होती है। यह दिन प्रभु की पूर्ण श्रद्धा से सेवा करने के लिए अति शुभकारी एवं फलदायक माना गया है। इस दिन व्यक्ति इच्छाओं से मुक्त हो कर यदि शुद्ध मन से भगवान की भक्तिमयी सेवा करता है तो वह अवश्य ही प्रभु की कृपापात्र बनता है।
                        ----------:::×:::----------

                          "जय जय श्रीहरि"
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Shuchi Singhal Dec 5, 2021

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Krishna Mishra Dec 5, 2021

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Rama Devi Sahu Dec 7, 2021

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💥꧁🔥🔥🔥🔥🔥🔥 ꧂💥 🌷☘🌹🍂🍃💐🌻🌸🌺💐. ꧁श्रीसिद्धिविनायक पंचांग꧂ 🍃🌷☘🌹🌻☘️🌸🌺💐 ┈━❀꧁🐀🐁🐀 ꧂❀┅┉ 🔔°•🔔•°🔔°•🌄•°🔔°•🔔•°🔔 🦚🦚🦚🦚 ॐ श्री गणेशाय नमः वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ ॐ ऐं श्रीं श्रीं बुधायः नमः। ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः । एकदंष्ट्रोत्कटो देवो गजवक्त्रो महाबल:। नागयज्ञोपवीतेन नानाभरण भूषित:॥ सवार्थसम्पद् उध्दारो गणाध्यक्षो वरप्रद:। भीमस्य तनयो देवो नायकोsथ विनायक:॥ करोतु मे महाशांति भास्करार्चनतत्पर:॥ सुप्रभातम् अथ् पंचांगम् दिनाँक 08-12- 2021 बुधवार अक्षांश- 30°:36", रेखांश 76°:80" अम्बाला शहर, हरियाणा, पिन कोड- 134 007 🙏🙏🙏 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 --- समाप्तिकाल--- 📒 तिथि पंचमी 21:27:54 ☄️ नक्षत्र श्रवण 22:40:04 🛑 करण : 💥 बव 10:30:21 💥 बालव 21:27:54 🔓 पक्ष शुक्ल 🛑 योग घ्रुव 13:07:52 🗝️ वार बुधवार 🌄 सूर्योदय 07:06:35 🌃 चन्द्रोदय 11:07:59 🌜 चन्द्र राशि मकर 🐊 🌌 सूर्यास्त 17:22:02 🌑 चन्द्रास्त 21:42:59 ☃️ ऋतु हेमंत 🛑 शक सम्वत 1943 प्लव 🛑 कलि सम्वत 5123 🛑 दिन काल 10:15:27 🛑 विक्रम सम्वत 2078 🛑 मास अमांत मार्गशीर्ष 🛑 मास पूर्णिमांत मार्गशीर्ष ⚫ दुष्टमुहूर्त 11:53:48 - 12:34:49 ⚫ कंटक 15:59:59 - 16:41:01 ⚫ यमघण्ट 09:09:40 - 09:50:42 👿 राहु काल 12:14:18 - 13:31:14 ⚫ कुलिक 11:53:48 - 12:34:49 ⚫ कालवेला 07:47:36 - 08:28:38 ⚫ यमगण्ड 08:23:30 - 09:40:26 ⚫ गुलिक 10:57:22 - 12:14:18 🛑 दिशा शूल उत्तर 🔥🔥🔥🔥 होरा 🛑बुध 07:06:35 - 07:57:52 🛑चन्द्रमा 07:57:52 - 08:49:09 🛑शनि 08:49:09 - 09:40:26 🛑बृहस्पति 09:40:26 - 10:31:44 🛑मंगल 10:31:44 - 11:23:01 🛑सूर्य 11:23:01 - 12:14:18 🛑शुक्र 12:14:18 - 13:05:36 🛑बुध 13:05:36 - 13:56:53 🛑चन्द्रमा 13:56:53 - 14:48:10 🛑शनि 14:48:10 - 15:39:28 🛑बृहस्पति 15:39:28 - 16:30:45 🛑मंगल 16:30:45 - 17:22:02 🛑सूर्य 17:22:02 - 18:30:49 🛑शुक्र 18:30:49 - 19:39:35 🛑बुध 19:39:35 - 20:48:22 🔥🔥🔥🔥 चोघडिया ⛩️लाभ 07:06:35 - 08:23:30 ⛩️अमृत 08:23:30 - 09:40:26 ⚫काल 09:40:26 - 10:57:22 ⛩️शुभ 10:57:22 - 12:14:18 👿रोग 12:14:18 - 13:31:14 ⚫उद्वेग 13:31:14 - 14:48:10 🛑चल 14:48:10 - 16:05:06 ⛩️लाभ 16:05:06 - 17:22:02 ⚫उद्वेग 17:22:02 - 19:05:12 ⛩️शुभ 19:05:12 - 20:48:22 💥💥💥किस चौघड़िया में क्या करें 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 ┉━❀꧁🐀🐁🐀꧂❀━┅ दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। शास्त्रानुसार प्रत्येक चौघड़िया में निम्नानुसार कार्य किये जाने प्रस्तावित होते हैं:- 👉🏿🛑 चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । 👉🏿⚫उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । 👉🏿⛩️शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । 👉🏿⛩️लाभ में व्यापार करें । 👉🏿☘️रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । 👉🏿⚫काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । 👉🏿⛩️अमृत में सभी शुभ कार्य । 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 ꧁ दैनिक ग्रह गोचर ꧂ 🌞 सूर्य - वृश्चिक 🦂 🌙 चन्द्र - मकर 🐊 ⚫ मंगल - वृश्चिक 🦂 ⚫ बुध - वृश्चिक 🦂 ⚫ बृहस्पति - कुम्भ 🏺 ⚫ शुक्र - मकर 🐊 14:03 से ⚫ शनि - मकर 🐊 😈 राहु - वृष 🐂 👖 केतु - वृश्चिक 🦂 ------------------------------------ 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 व्रत एवम् त्योहार 15 दिसम्बर तक ┉┅━❀꧁🐀🐁🐀꧂❀━┅ दिसंबर (मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी से पोष कृष्ण त्रयोदशी तक) सन् 2021 ईसवीं, विक्रमी संवत 2078, शाका 1943, हिजरी 1443 । सूर्य दक्षिणायन- उत्तरायण, दक्षिण गोल, हेमंत -शिशिर ऋतु:, ग्रह दर्शन- प्रातः मंगल पूर्व क्षितिज में दिखेगा, सायं शुक्र पश्चिम में, उससे ऊपर शनि होगा। गुरु पश्चिम कपाल में दिखेगा ।बुध अस्त है। व्रत त्योहार 15 दिसंबर तक ☘️☘️☘️ 🛑8 दिसंबर बुधवार 👉शुक्र मकर में 14:03 👉श्री पंचमी 👉श्री राम विवाह उत्सव 👉नाग पंचमी 🛑 9 दिसंबर गुरुवार पंचक प्रारंभ 10:10 स्कंद (गुह)षष्टि, मंगल अनुराधा में 25:05 👉बुध मूल 1 🏹धनु में 30:05 चंपा षष्टि 🛑शुक्रवार 10 दिसंबर भद्रा 19:10 से 31:12 तक मित्र विष्णु सप्तमी 🛑 शनिवार 11 दिसंबर दुर्गा अष्टमी 🛑रविवार 12 दिसंबर नंदा नवमी, गण्ड मूल 24:00 🛑सोमवार 13 दिसंबर पंचक समाप्त 26:05 🛑 मंगलवार 14 दिसंबर भद्रा 10:35 से 23:36 तक मोक्षदा एकादशी व्रत श्री गीता जयंती गण्ड मूल 28:40 तक 🛑बुधवार 15 दिसंबर 👉💥सूर्य मूल 1 धनु🏹 में 27:42 👉पौष सक्रांति प्रातः 10:06 तक गुरु धनिष्ठा 4 में 8:14 अखंड द्वादशी 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 ┉┅━❀꧁🐀🐁🐀꧂❀━┅ दैनिक भविष्यफल 👩‍❤️‍👨🦀🦁👩🏻‍🦱⚖️🏹🐬 ✒️ नोटः प्रस्तुत भविष्यफल में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ भिन्नता हो सकती है । पूरी जानकारी के लिए किसी देवेज्ञ या भविष्यवक्ता से मिल सकते हैं। 🤷🏻‍♀ आज जिन भाई-बहनों /मित्रों का 🎂जन्मदिन या विवाह की वर्षगांठ 🥁📯 है , उन सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ तथा शुभ आशीर्वाद । प्रभु आपकी जीवन यात्रा सफल करें । 🐐मेष भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। साझेदारी में नवीन प्रस्ताव प्राप्त हो सकेंगे। शत्रु सक्रिय रहेंगे। गर्व-अहंकार को दूर करें। राजनीतिक व्यक्तियों से लाभकारी योग बनेंगे। मनोबल बढ़ने से तनाव कम होगा। 🐂वृष बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा सफल रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। जोखिम न लें। अपने व्यसनों पर नियंत्रण रखें। पत्नी के बतलाए रास्ते पर चलने से लाभ की संभावना बनती है। यात्रा से लाभ। वाहन-मशीनरी खरीदी के योग हैं। व्यवसाय में अड़चनें आएंगी। 👩‍❤️‍👨मिथुन फालतू खर्च होगा। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। विवाद को बढ़ावा न दें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। व्यावसायिक योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पाएगा। परिवार की चिंता रहेगी। आय से व्यय अधिक होंगे। अजनबियों पर विश्वास से हानि हो सकती है। 🦀कर्क धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। कोर्ट व कचहरी के कार्य बनेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। चोट व रोग से बचें। कार्य-व्यवसाय में लाभ होने की संभावना है। दांपत्य जीवन में अनुकूलता रहेगी। सामाजिक समारोहों में भाग लेंगे। सुकर्मों के लाभकारी परिणाम मिलेंगे। 🦁सिंह प्रतिष्ठा बढ़ेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। यात्रा का शुभ योग होने के साथ ही कठिन कार्य में भी सफलता मिल सकेगी। रिश्तेदारों से संपत्ति संबंधी विवाद हो सकता है। व्यापार-नौकरी में लाभ होगा। पुराना रोग उभर सकता है। प्रयास सफल रहेंगे। 👩🏻‍🦱कन्या पुराने मित्र व संबंधियों से मुलाकात होगी। शुभ समाचार मिलेंगे। मान बढ़ेगा। प्रसन्नता रहेगी। मन में उत्साह रहेगा, जिससे कार्य की गति बढ़ेगी। आपके कार्यों को समाज में प्रशंसा मिलेगी। भागीदारी में आपके द्वारा लिए गए निर्णयों से लाभ होगा। ⚖️तुला प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। कानूनी अड़चन दूर होगी। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य संबंधी समस्या हल हो सकेगी। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। अपनी वस्तुएँ संभालकर रखें। रुका धन मिलेगा। भ्रम की स्थिति बन सकती है। 🦂वृश्चिक जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। विवाद को बढ़ावा न दें। मितव्ययिता को ध्यान में रखें। कुटुंबियों से संबंध सुधरेंगे। शत्रुओं से सावधान रहें। व्यापार लाभप्रद रहेगा। खर्चों में कमी करें। सश्रम किए गए कार्य पूर्ण होंगे। 🏹धनु स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। अच्छे लोगों से भेंट होगी जो आपके हितचिंतक रहेंगे। योजनाएं फलीभूत होंगी। नौकरी में पदोन्नाति के योग हैं। आलस्य से बचकर रहें। परिवार की मदद मिलेगी। 🐊मकर रोजगार में वृद्धि होगी। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। अर्थ संबंधी कार्यों में सफलता से हर्ष होगा। सुखद भविष्य का स्वप्न साकार होगा। विचारों से सकारात्मकता बढ़ेगी। दुस्साहस न करें। व्यापार में इच्छित लाभ होगा। 🏺कुंभ नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। मान-सम्मान मिलेगा। नेत्र पीड़ा हो सकती है। अधिकारी वर्ग विशेष सहयोग नहीं करेंगे। ऋण लेना पड़ सकता है। यात्रा आज नहीं करें। परिवार के कार्यों को प्राथमिकता दें। आपकी बुद्धिमत्ता सामाजिक सम्मान दिलाएगी। 🦈मीन किसी के भरोसे न रहकर अपना कार्य स्वयं करें। महत्वपूर्ण कार्यों में हस्तक्षेप से नुकसान की आशंका है। परिवार में तनाव रहेगा। व्यापार-व्यवसाय मध्यम रहेगा। कष्ट, भय, चिंता व बेचैनी का माहौल बन सकता है। दु:खद समाचार मिल सकता है, धैर्य रखें। आपका दिन शुभ हो । ACHARYA ANIL PARASHAR VADIC,KP ASTROLOGER .

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R S Sharma Dec 8, 2021

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