जय श्री राधे कृष्ण

जय श्री राधे कृष्ण

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Indu Bhatia Sep 7, 2017
JAI SHREE RADHE KRISHNA 👏 🌹🌺🍒🍓 Good Morning Friends

XYZ Mar 4, 2018
जय श्री राधे कृष्णा जी 💕💕🙏

priyanshi Feb 27, 2021

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sonaji.u.waghode Feb 27, 2021

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. श्री श्रीचैतन्य चरित्रावली पोस्ट - 111 नीलाचल में प्रभु का प्रत्यागमन उद्दामदामनकदामगणाभिराम मारामरामविररामगृहीतनाम। कारुण्यधाम कनकोज्ज्वलगौरधाम चैतन्यनाम परमं कलयाम धाम॥ बड़ौदा से चलकर महाप्रभु अहमदाबाद आये, वहाँ पर दो बंगाली वैष्णवों से प्रभु की भेंट हुई। उनसे नवद्वीप का समाचार पाकर प्रभु की पूर्वस्मृति पुन: जागृत हो उठी। उनसे कुशलक्षेम पूछकर प्रभु ने द्वारका के लिये प्रस्थान किया। द्वारका जी के मन्दिर में जाकर प्रभु आनन्द में मग्न होकर नृत्य कीर्तन करने लगे। वहाँ से समुद्र किनारे होते हुए सोमनाथ शिव जी के दर्शनों के लिये प्रभासक्षेत्र में आये, जहाँ पर प्राची सरस्वती हैं। इस प्रकार समस्त तीर्थों में भ्रमण करके अब प्रभु की इच्छा पुन: नीलाचल लौटने की हुई। इसलिये गोदावरी नदी के किनारे किनारे होते हुए पुन: विद्यानगर में पहुँच गये। महाप्रभु के आने का समाचार पाते ही राय रामानन्द जी उसी समय प्रभु के दर्शनों के निमित्त दौड़े आये। प्रभु ने उनका गाढ़ालिंगन किया। राय ने विनीतभाव से कहा- ‘प्रभो ! इस अधम को आप भूले नहीं हैं और इसकी स्मृति अभी तक आपके हृदय में बनी हुई है, इस बात को स्मरण करके मैं प्रसन्नता के कारण अपने अंगों में फूला नहीं समाता। आज अपने पुन: दर्शन देकर मुझे अपनी परम कृपा का यथार्थ में ही पात्र बना लिया।’ प्रभु ने कहा- ‘राय महाशय, यथार्थ में तो आपके ही दर्शन से मेरे सब तीर्थ सफल हो गये थे। फिर भी मैं और तीर्थों में वैसे ही चला गया। जितना सुख मुझे यहाँ आपके साथ मिला था, उतना अन्यत्र कहीं भी नहीं मिला। अब फिर मैं उस आनन्द को प्राप्त करने आपके पास आया हूँ। कहावत है- ‘लाभाल्लोभ: प्रजायते।’ अर्थात जितना भी लाभ होता है, उतना ही अधिक लोभ बढ़ता जाता है। इसलिये अब तो यही सोचकर आया हूँ कि आपके ही साथ निरन्तर वास करके उस आनन्द रस का आस्वादन करता रहूँ।’ रामानन्द जी ने अत्यन्त ही संकोच के साथ कहा- ‘प्रभो! मैंने आपकी आज्ञा शिरोधार्य करके महाराज को राज काज से अवकाश देने की प्रार्थना की थी। उन्होंने मेरी प्रार्थना को स्वीकार करके बुलाया है। अब तो आपके चरणों में रहने का सम्भवतया सौभाग्य प्राप्त हो सके।’ प्रभु ने कहा- ‘इसीलिये तो मैं ही हूँ, अब आपको साथ लेकर ही पुरी चलूँगा।’ राय महाशय ने कुछ विवशता सी दिखाते हुए कहा- ‘प्रभो! मेरे साथ चलने में आपको कष्ट होगा। अभी मुझे बहुत से राज काज करने शेष हैं, फिर मेरे साथ हाथी घोड़े, नौकर, चाकर बहुतसे चलेंगे। उन सबके साथ आपको कष्ट होगा। इसलिये आप पहले अकेले ही पुरी पधारें, फिर मैं भी पीछे से आ जाऊँगा।’ प्रभु ने राय रामानन्दजी की इस बात को स्वीकार किया और ये तीन चार दिन विद्यानगर में रहकर जिस रास्ते से आये थे, उसी से अलालनाथ पहुँच गये। अलालनाथ पहुँचने पर प्रभु ने कृष्णदास के द्वारा नित्यानन्द आदि के समीप अपने आने का समाचार भेजा। ये लोग प्रभु की प्रतीक्षा में उसी प्रकार बैठे हुए थे जिस प्रकार अंगदादि वानर समुन्द्र को पार करके सीता जी की खोज के लिये हुए श्रीहनुमान जी की प्रतीक्षा में समुद्र के किनारे बैठे थे। प्रभु का समाचार पाते ही नित्यानन्दादि सभी भक्त प्रभु से मिलने के लिये दौड़े आये। रास्ते में दूर से ही आते हुए उन्होंने प्रभु को देखा। प्रभु को देखते ही सभी ने भूमि पर लोटकर प्रभु के चरणों में साष्टांग प्रणाम किया। प्रभु ने उन सबको प्रभु क्रमश: अपने हाथों से उठा उठाकर प्रेमालिंगन दान दिया। आज दो वर्षों के पश्चात प्रभु का प्रेमालिंगन पाकर सभी प्रेम में बेसुध हो गये और प्रेम के अश्रु बहाते हुए प्रभु के पीछे पीछे चले। इतने में सामने से सार्वभौम भट्टाचार्य तथा गोपीनाथाचार्य प्रभु को आते हुए दिखायी दिये। प्रभु ने अस्त व्यस्त भाव से दौड़कर उनका जल्दी से आलिंगन करना चाहा, किन्तु वे इससे पहले ही प्रभु के चरणों में गिर पड़े। प्रभु ने उनको स्वयं उठाया, उनका आलिंगन किया और उनके वस्त्रों में लगी हुई धूलि को अपने हाथों से पोंछा। सभी लोग प्रभु के पीछे पीछे चले। सबसे पहले महाप्रभु जगन्नाथ जी के दर्शन के लिये गये। वहाँ के कर्मचारी प्रभु की प्रतीक्षा में सदा चिन्तित से बने रहते थे। सहसा प्रभु के आगमन का समाचार सुनकर सभी आनन्द के सहित नृत्य करने लगे। प्रभु ने भगवान को साष्टांग प्रणाम किया और भाँति-भाँति से स्तुति करने लगे। पुजारी ने आकर माला और प्रसाद प्रभु को भेंट किया। बहुत दिनों के पश्चात पुरुषोत्तमभगवान का महाप्रसाद पाकर प्रभु परम प्रसन्न हुए और प्रसाद को उसी समय उन्होंने पा लिया। फिर भक्तों के सहित मन्दिर की प्रदक्षिणा करते हुए प्रभु भट्टाचार्य सार्वभौम के घर आये। सार्वभौम ने प्रभु को भिक्षा के लिये निमन्त्रित किया और सभी भक्तों के सहित उन्होंने प्रभु को भिक्षा करायी। प्रभु के रहने के लिये भट्टाचार्य ने महाराज प्रतापरुद्र जी को परामर्श करके महाराज के पुरोहित काशी मिश्र के एकान्त-निर्जन स्थान में पहले से ही प्रबन्ध कर रखा था। प्रभु को वह स्थान बहुत पसन्द आया और प्रभु उसी में रहने लगे। श्रीकृष्ण! गोविन्द! हरे मुरारे! हे नाथ! नारायण! वासुदेव! ----------:::×:::---------- 🕉️ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌺🙏🙏🌺🌺🌺

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Radha Bansal Feb 26, 2021

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...... Feb 26, 2021

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अगर आप #भगवान के प्रति थोड़ी- सी भी आस्था रखते हो तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ें और विचार करें 👇👇 वेदों में लिखा हुआ है कि परमात्मा हमारी आयु भी बढ़ा सकता है, सभी रोगों से मुक्त कर सकता है तथा दुख कष्ट संकटो को काट सकता है... फिर हमारी अकाल मृत्यु क्यों होती है ?? वह पूर्ण परमात्मा कौन है? क्या नाम है? कहां रहता है? किसने देखा है? किस-किस को मिले हैं? अब वर्तमान में किस-किस ने सतलोक और पूर्ण परमात्मा को आंखों देखकर आए हैं? उसकी पूजा की विधि क्या है? सृष्टि की रचना कैसे हुई है? ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी काल जाल में जन्म मृत्यु में 84 लाख योनियों के चक्र में महा कष्ट झेलते हैं | ब्रह्मा, विष्णु, महेश, की स्थिति क्या है? तथा पूर्ण मोक्ष कैसे मिलेगा ? पूर्ण परमात्मा हमें इस काल के लोक से निकाल कर अपने लोक (सतलोक) में ले जाने के लिए चारों युगों में आते हैं और सद् भक्ति प्रदान करके सतलोक में ले जाते हैं, जहां पर जाने के बाद हमारी कभी मृत्यु नहीं होती, वृद्धावस्था (बुढ़ापा) नहीं आता, हमेशा युवा बने रहते हैं , वहां पर भी ऐसी ही सृष्टि है वहां हमारा आलीशान मकान परमात्मा द्वारा उपलब्ध है ऐसे ही परिवार बनेगा , वहां पर बाग-बगीचे, सेब-संतरे, काजू-किशमिश और दूधों की नदियां बहती है, स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ उपलब्ध है, वहां पर हमें परमात्मा की भक्ति व सुमिरन के अलावा कोई काम नहीं करना पड़ता, परमात्मा द्वारा सब निशुल्क उपलब्ध होता है। जानिए पूरी जानकारी आध्यात्मिक पुस्तक "ज्ञान गंगा".....बिल्कुल निशुल्क मंगाने के लिए अपना नाम :- ........ पूरा पता :- ........ फोन नम्बर :- …....... Comment box में दे! यह पुस्तक सभी धर्मों के #शास्त्रों 📚 पर आधारित है। पुस्तक #ज्ञान_गंगा 100% निशुल्क है, होम डिलीवरी भी निशुल्क है। 30 दिन के अंदर #पुस्तक आपके घर पहुंच जाएगी। #संत_रामपाल_जी_महाराज की इस पुस्तक को पढ़िए कोई चार्ज नहीं है, बिल्कुल फ्री पुस्तक प्राप्त करें फ्री फ्री फ्री फ्री फ्री फ्री फ्री फ्री

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radhe radhe Feb 26, 2021

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. ⭕️'कहानी - एक कौवा और गरुड़'⭕️ ___________________________________ एक बार एक कौआ,मांस के एक टुकड़े को पकड़कर बैठने और खाने के लिए उड़ रहा था। हालाँकि, गिद्धों का एक झुंड उसका पीछा कर रहा था। कौवा चिन्तित था और ऊँची और ऊँची उड़ान भर रहा था, फिर भी गिद्ध गरीब कौवे के पीछे थी। तभी "गरुड़" ने कौवे की आंखों में दुर्दशा और पीड़ा देखी। कौवे के करीब आकर उसने पूछा: "क्या बात है? आप बहुत" परेशान "और" तनाव "में हैं?" .. कौवा रोया "इन गिद्धों को देखो !! वे मुझे मारने के लिए मेरे पीछे हैं"। गरुड़ ज्ञान का पक्षी होने के कारण बोला "ओह माई फ्रेंड !! वे तुम्हें मारने के लिए तुम्हारे पीछे नहीं हैं !! वे मांस के उस टुकड़े के पीछे हैं जिसे आप अपनी चोंच में पकड़े हुए हैं"। बस इसे गिराएं और देखें कि क्या होगा। कौवा ने गरुड़ के निर्देशों का पालन किया और मांस का टुकड़ा गिरा दिया।टुकड़ा गिराते ही सभी गिद्धों गिरते हुए मांस की ओर उड़ गए। गरुड़ ने मुस्कुराते हुए कहा "दर्द केवल तब तक है जब तक आप इसे पकड़ते हैं" जस्ट ड्राप "। कौवा बस झुका और बोला "मैंने मांस का यह टुकड़ा गिरा दिया, अब, मैं और भी ऊंची उड़ान भर सकता हूँ .."। 👉🏻'शिक्षा'- 1.लोग "अहंकार" नामक विशाल बोझ को ढोते हैं, जो हमारे बारे में एक झूठी पहचान बनाता है, कि हम अपने लिए यह कहते हुए पैदा करते हैं कि "मुझे प्यार की ज़रूरत है, मुझे आमंत्रित करने की आवश्यकता है, मैं ऐसा हूं और इसलिए .." आदि ..."बस गिरा दो…। 2.लोग "अन्य कार्यों" से तेजी से चिढ़ जाते हैं, यह मेरा दोस्त, मेरे माता-पिता, मेरे बच्चे, मेरा सहयोगी, मेरा जीवन साथी हो सकता है और मुझे "क्रोध" "जस्ट ड्राप.. 3.लोग खुद की तुलना दूसरों से करते हैं.सुंदरता, धन, जीवन शैली, अंक, प्रतिभा और मूल्यांकन में और परेशान महसूस करते हैं,हमारे पास जो कुछ भी है उसके प्रति आभारी होना चाहिए. तुलना, नकारात्मक भावनाएं ."बस ड्रॉप" बस बोझ गिरा दो।

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