पूजा करने का नियम

#ज्ञानवर्षा
आज हम आपको घर पर पूजा करने से संबंधित तीस नियम बतायेगे? अगर आप इनका अनुसरण करेंगे तो आपकी पूजा विशिष्ट फलदायी होगी।

अपने परिवार में सुख और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी-देवताओ की पूजा करने की परम्परा अनेको वर्षो से निरंतर चली आ रही है तथा आज भी हम इस परम्परा को निभाते आ रहे है। भगवान की पूजा द्वारा हमारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

परन्तु हम सभी को पूजा करने से पूर्व कुछ ख़ास नियमों का पालन करना चाहिए तभी हमे पूजा का शुभ फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो पायेगा।

हम आज आपको यहाँ ऐसे तीस नियम बताने जा रहे जो समान्य पूजन में भी आवश्यक है, तथा इन्हे अपनाकर आप पूजा से होने वाले शुभ फल पूर्ण रूप से प्राप्त कर सकते हो।

1 . शिव, दुर्गा, विष्णु, गणेश और सूर्यदेव ये पंचदेव कहलाते है इनकी पूजा हर कार्यो में अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। प्रतिदिन पूजा करते समय इन पांच देवो का ध्यान करना चाहिए। ऐसा करने से घर में लक्ष्मी का वास होता यही तथा समृद्धि आती है।

2 .प्लास्टिक की बोतल में या किसी अन्य धातु के अपवित्र बर्तन में गंगा जल नहीं रखना चाहिए, लोहे अथवा एल्युमिनियम के बर्तन अपवित्र धातु की श्रेणियों में आती है। गंगाजल को रखने के लिए ताम्बे का बर्तन उत्तम तथा पवित्र माना जाता है।

3 . यदि घर में भगवान शिव, गणेश और भैरव जी की मूर्ति हो या आप मंदिर में इन तीनो देवताओ की पूजा करते हो तो ध्यान रहे की इन तीनो देवो पर तुलसी ना चढ़ाए अन्यथा पूजा का उल्टा प्रभाव पड़ता है।

4 . माँ दुर्गा की पूजा के समय उन्हें दुर्वा (एक प्रकार की घास) ना चढ़ाए क्योकि यह भगवान गणेश को विशेष प्रकार से चढ़ाई जाती है।

5 . सूर्य देव को शंख से अर्घ्य नहीं देना चाहिए।

6 .तुलसी का पत्ता बिना स्नान किये नहीं तोड़ना चाहिए क्योकि शास्त्रों में बताया गया है की यदि कोई व्यक्ति बिना नहाए ही तुलसी के पत्तो को तोड़ता है तो पूजा के समय तुलसी के ऐसे पत्ते भगवान द्वारा स्वीकार नहीं किये जाते।

7 . शास्त्रों के अनुसार दिन में 5 बार देवी-देवताओ के पूजन का विधान है। सुबह पांच बजे से छः बजे तक के बर्ह्म मुहूर्त में पूजन और आरती होनी चाहिए। इसके बाद प्रातः 9 बजे से 10 बजे तक दूसरे समय का पूजन तथा दिन में तीसरे समय का पूजन होना चाहिए। इस पूजन के बाद भगवान को विश्राम करवाना चाहिए।

इसके बाद शाम 4 - 5 बजे पुनः पूजन और आरती होनी चाहिए। रात को 8 - 9 बजे शयन आरती करनी चाहिए। जिन घरों में नियमित रूप से पांच बार पूजन होता है वहां देवी-देवताओ का निवास माना जाता है तथा ऐसे घरों में धन-धान्य की कोई भी कमी नहीं होती।

8 . स्त्रियों व पुरुषों द्वारा अपवित्र अवस्था में शंख नहीं बजाना चाहिए। यदि इस नियम का पालन नहीं किया जाए तो घर में बसी लक्ष्मी रूठ जाती है तथा उस घर से चली जाती है।

9 .देवी देवताओ की मूर्ति के सामने कभी भी पीठ करके नहीं बैठना चाहिए।

10 .केतकी का पुष्प शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए।

11 . भगवान से कोई भी मनोकामना मांगने के बाद उसकी सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए. तथा दक्षिणा चढ़ाते समय अपने दोषो को छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए।

जितने शीघ्र आप अपने उन दोषो को छोड़ोगे आपकी मनोकामनाएं उतनी शीघ्र ही पूरी होगी।

12 . विशेष शुभ कार्यो में भगवान गणेश को चढ़ने वाला दूर्वा ( एक प्रकार की घास ) को कभी भी रविवार को नहीं तोड़ना चाहिए।

13 . यदि आप माँ लक्ष्मी को शीघ्र प्रसन्न करना चाहते हो तो उन्हें रोज कमल का पुष्प अर्पित करें। कमल के फूल को पांच दिनों तक लगातार जल छिड़कर पुनः अर्पित कर सकते है।

14 . शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव के शिवलिंग पर चढ़ने वाला बिल्व-पात्र को 6 महीने तक बासी नहीं माना जाता अतः हम इन बिल्लव पत्रों पर जल छिड़कर उन्हें पुनः शिवलिंग में चढ़ा सकते है।

15 . तुलसी के वृक्ष से टूटे हुए तुलसी के पत्तो को 11 दिन तक बासी नहीं माना जाता अतः 11 दिन तक हम इनमे जल छिड़कर पुनः प्रयोग में ला सकते है।

16 . आमतौर पर फूलों को हाथों में रखकर हाथों से भगवान को अर्पित किया जाता है। ऐसा नहीं करना चाहिए। फूल चढ़ाने के लिए फूलों को किसी पवित्र पात्र में रखना चाहिए और इसी पात्र में से लेकर देवी-देवताओं को अर्पित करना चाहिए।

17 .ताम्बे के बर्तन में चंदन, घिसा हुआ चंदन या चंदन का पानी नहीं रखना चाहिए, ऐसा करना शास्त्रों के अनुसार अपवित्र माना गया है।

18 .कभी भी दीपक से दीपक को ना जलाए क्योकि शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने वाला व्यक्ति रोग से ग्रसित हो जाता है।

19 .रविवार और बुधवार को पीपल के वृक्ष में जल अर्पित नहीं करना चाहिए।

20 . पूजा हमेशा पूर्व की ओर या उत्तर की ओर मुख करके की जानी चाहिए. तथा पूजा करने का उत्तम समय प्रातः काल छः बजे से आठ बजे तक का होता है।

21 . पूजा करते समय आसन के लिए ध्यान रखें कि बैठने का आसन ऊनी होगा तो श्रेष्ठ रहेगा।

22 . घर में मंदिर में सुबह और शाम दीपक अवश्य जलाए। एक दीपक घी का और एक दीपक तेल का जलाना चाहिए।

23 . भगवान की पूजन का कार्य और आरती पूर्ण होने के पश्चात उसी स्थान पर 3 परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए।

24 . रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए।

25 . भगवान की आरती करते समय निम्न बाते ध्यान रखनी चाहिए। भगवान के चरणों की आरती चार बार करनी चाहिए इसके बाद क्रमश उनके नाभि की आरती दो बार तथा उनके मुख की आरती एक या तीन बार करनी चाहिए. इस प्रकार भगवान के समस्त अंगो की सात बार आरती होनी चाहिए।

26 . पूजाघर में मूर्तियाँ 1 ,3 , 5 , 7 , 9 ,11 इंच तक की होनी चाहिए, इससे बड़ी नहीं तथा खड़े हुए गणेश जी,सरस्वतीजी, लक्ष्मीजी, की मूर्तियाँ घर में नहीं होनी चाहिए।

27 . घर में कभी भी गणेश या देवी की प्रतिमा तीन तीन, शिवलिंग दो,शालिग्राम दो,सूर्य प्रतिमा दो,गोमती चक्र दो की संख्या में कदापि न रखें।

28 .अपने मंदिर में सिर्फ प्रतिष्ठित मूर्ति ही रखें उपहार,काँच, लकड़ी एवं फायबर की मूर्तियां न रखें एवं खण्डित, जलीकटी फोटो और टूटा काँच तुरंत हटा दें। शास्त्रों के अनुसार खंडित मूर्तियों की पूजा वर्जित की गई है। जो भी मूर्ति खंडित हो जाती है, उसे पूजा के स्थल से हटा देना चाहिए और किसी पवित्र बहती नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए । खंडित मूर्तियों की पूजा अशुभ मानी गई है ।इस संबंध में यह बात ध्यान रखने योग्य है कि सिर्फ शिवलिंग कभी भी, किसी भी अवस्था में खंडित नहीं माना जाता है।

29 . घर में मंदिर के ऊपर भगवान की पुस्तकें, वस्त्र एवं आभूषण न रखे मंदिर में पर्दा रखना आवश्यक है अपने स्वर्गीय पितरो आदि की तस्वीरें भी मंदिर में ना रखे उन्हें घर के नैऋत्य कोण में स्थापित करना चाहिए।

30 . हमेशा भगवान की परिक्रमा इस अनुसार करें :- विष्णु की चार , गणेश की तीन, सूर्य देव की सात, दुर्गा की एक एवं शिव की आधी परिक्रमा कर सकते है।

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Neha Sharma, Haryana Jan 27, 2020

*जय श्री राधेकृष्णा*🥀🥀🙏 *शुभ प्रभात् वंदन*🥀🥀🙏 *स्नान कब और कैसे करें घर की समृद्धि बढ़ाना हमारे हाथ में है। सुबह के स्नान को धर्म शास्त्र में चार उपनाम दिए हैं। *1* *मुनि स्नान।* जो सुबह 4 से 5 के बीच किया जाता है। . *2* *देव स्नान।* जो सुबह 5 से 6 के बीच किया जाता है। . *3* *मानव स्नान।* जो सुबह 6 से 8 के बीच किया जाता है। . *4* *राक्षसी स्नान।* जो सुबह 8 के बाद किया जाता है। ▶मुनि स्नान सर्वोत्तम है। ▶देव स्नान उत्तम है। ▶मानव स्नान सामान्य है। ▶राक्षसी स्नान धर्म में निषेध है। . किसी भी मानव को 8 बजे के बाद स्नान नहीं करना चाहिए। . *मुनि स्नान .......* 👉घर में सुख ,शांति ,समृद्धि, विद्या , बल , आरोग्य , चेतना , प्रदान करता है। . *देव स्नान ......* 👉 आप के जीवन में यश , कीर्ती , धन, वैभव, सुख ,शान्ति, संतोष , प्रदान करता है। . *मानव स्नान.....* 👉काम में सफलता ,भाग्य, अच्छे कर्मों की सूझ, परिवार में एकता, मंगलमय , प्रदान करता है। . *राक्षसी स्नान.....* 👉 दरिद्रता , हानि , क्लेश ,धन हानि, परेशानी, प्रदान करता है । . किसी भी मनुष्य को 8 के बाद स्नान नहीं करना चाहिए। . पुराने जमाने में इसी लिए सभी सूरज निकलने से पहले स्नान करते थे। *खास कर जो घर की स्त्री होती थी।* चाहे वो स्त्री माँ के रूप में हो, पत्नी के रूप में हो, बहन के रूप में हो। . घर के बड़े बुजुर्ग यही समझाते सूरज के निकलने से पहले ही स्नान हो जाना चाहिए। . *ऐसा करने से धन, वैभव लक्ष्मी, आप के घर में सदैव वास करती है।* . उस समय...... एक मात्र व्यक्ति की कमाई से पूरा हरा भरा परिवार पल जाता था, और आज मात्र पारिवार में चार सदस्य भी कमाते हैं तो भी पूरा नहीं होता। . उस की वजह हम खुद ही हैं। पुराने नियमों को तोड़ कर अपनी सुख सुविधा के लिए हमने नए नियम बनाए हैं। . प्रकृति ......का नियम है, जो भी उस के नियमों का पालन नहीं करता, उस का दुष्परिणाम सब को मिलता है। . इसलिए अपने जीवन में कुछ नियमों को अपनायें और उन का पालन भी करें । . आप का भला हो, आपके अपनों का भला हो। . मनुष्य अवतार बार बार नहीं मिलता। . अपने जीवन को सुखमय बनायें। जीवन जीने के कुछ जरूरी नियम बनायें। ☝ *याद रखियेगा !* 👇 *संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है।* *सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोएं।* *पर संस्कार नहीं दिए तो वे जिंदगी भर रोएंगे।* मृत्यु उपरांत एक सवाल ये भी पूछा जायेगा कि अपनी अँगुलियों के नाम बताओ । जवाब:- अपने हाथ की छोटी उँगली से शुरू करें :- (1)जल (2) पथ्वी (3)आकाश (4)वायु (5) अग्नि ये वो बातें हैं जो बहुत कम लोगों को मालूम होंगी । 5 जगह हँसना करोड़ों पाप के बराबर है 1. श्मशान में 2. अर्थी के पीछे 3. शोक में 4. मन्दिर में 5. कथा में सिर्फ 1 बार ये message भेजो बहुत लोग इन पापों से बचेंगे ।। अकेले हो? परमात्मा को याद करो । परेशान हो? ग्रँथ पढ़ो । उदास हो? कथाएं पढ़ो। टेन्शन में हो? भगवत् गीता पढ़ो । फ्री हो? अच्छी चीजें करो हे परमात्मा हम पर और समस्त प्राणियों पर कृपा करो...... *सूचना* क्या आप जानते हैं ? हिन्दू ग्रंथ रामायण, गीता, आदि को सुनने,पढ़ने से कैन्सर नहीं होता है बल्कि कैन्सर अगर हो तो वो भी खत्म हो जाता है। व्रत,उपवास करने से तेज बढ़ता है, सरदर्द और बाल गिरने से बचाव होता है । आरती----के दौरान ताली बजाने से दिल मजबूत होता है । ये मैसेज असुर भेजने से रोकेगा मगर आप ऐसा नहीं होने दें और मैसेज सब नम्बरों को भेजें । श्रीमद् भगवद्गीता, भागवत्पुराण और रामायण का नित्य पाठ करें। . ''कैन्सर" एक खतरनाक बीमारी है... बहुत से लोग इसको खुद दावत देते हैं ... बहुत मामूली इलाज करके इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है ... अक्सर लोग खाना खाने के बाद "पानी" पी लेते हैं ... खाना खाने के बाद "पानी" ख़ून में मौजूद "कैन्सर "का अणु बनाने वाले '''सैल्स'''को '''आक्सीजन''' पैदा करता है... ''हिन्दु ग्रंथों में बताया गया है कि... खाने से पहले 'पानी' पीना अमृत" है... खाने के बीच मे 'पानी' पीना शरीर की 'पूजा' है ... खाना खत्म होने से पहले 'पानी' पीना "औषधि'' है... खाने के बाद 'पानी' पीना बीमारियों का घर है... बेहतर है खाना खत्म होने के कुछ देर बाद 'पानी' पीयें ... ये बात उनको भी बतायें जो आपको 'जान' से भी ज्यादा प्यारे हैं ... हरि हरि जय जय श्री हरि !!! रोज एक सेब नो डाक्टर । रोज पांच बादाम, नो कैन्सर । रोज एक निंबू, नो पेट बढ़ना । रोज एक गिलास दूध, नो बौना (कद का छोटा)। रोज 12 गिलास पानी, नो चेहरे की समस्या । रोज चार काजू, नो भूख । रोज मन्दिर जाओ, नो टेन्शन । रोज कथा सुनो मन को शान्ति मिलेगी । "चेहरे के लिए ताजा पानी"। "मन के लिए गीता की बातें"। "सेहत के लिए योग"। और खुश रहने के लिए परमात्मा को याद किया करो । अच्छी बातें फैलाना पुण्य का कार्य है....किस्मत में करोड़ों खुशियाँ लिख दी जाती हैं । जीवन के अंतिम दिनों में इन्सान एक एक पुण्य के लिए तरसेगा ।

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Mahesh Bhargava Jan 26, 2020

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एक भक्त था वह परमात्मा को बहुत मानता था, बड़े प्रेम और भाव से उनकी सेवा किया करता था । एक दिन भगवान से कहने लगा – मैं आपकी इतनी भक्ति करता हूँ पर आज तक मुझे आपकी अनुभूति नहीं हुई । मैं चाहता हूँ कि आप भले ही मुझे दर्शन ना दे पर ऐसा कुछ कीजिये की मुझे ये अनुभव हो की आप हो। भगवान ने कहा ठीक है, तुम रोज सुबह समुद्र के किनारे सैर पर जाते हो, जब तुम रेत पर चलोगे तो तुम्हे दो पैरो की जगह चार पैर दिखाई देंगे । दो तुम्हारे पैर होंगे और दो पैरो के निशान मेरे होंगे । इस तरह तुम्हे मेरी अनुभूति होगी । अगले दिन वह सैर पर गया, जब वह रेत पर चलने लगा तो उसे अपने पैरों के साथ-साथ दो पैर और भी दिखाई दिये वह बड़ा खुश हुआ । अब रोज ऐसा होने लगा । एक बार उसे व्यापार में घाटा हुआ सब कुछ चला गया, वह रोड़ पर आ गया उसके अपनो ने उसका साथ छोड दिया । देखो यही इस दुनिया की प्रॉब्लम है, मुसीबत में सब साथ छोड़ देते है । अब वह सैर पर गया तो उसे चार पैरों की जगह दो पैर दिखाई दिये । उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि बुरे वक्त में भगवान ने भी साथ छोड दिया। धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होने लगा फिर सब लोग उसके पास वापस आने लगे । एक दिन जब वह सैर पर गया तो उसने देखा कि चार पैर वापस दिखाई देने लगे । उससे अब रहा नही गया, वह बोला- भगवान जब मेरा बुरा वक्त था तो सब ने मेरा साथ छोड़ दिया था पर मुझे इस बात का गम नहीं था क्योकि इस दुनिया में ऐसा ही होता है, पर आप ने भी उस समय मेरा साथ छोड़ दिया था, ऐसा क्यों किया? भगवान ने कहा – तुमने ये कैसे सोच लिया कि मैं तुम्हारा साथ छोड़ दूँगा, तुम्हारे बुरे वक्त में जो रेत पर तुमने दो पैर के निशान देखे वे तुम्हारे पैरों के नहीं मेरे पैरों के थे, उस समय में तुम्हे अपनी गोद में उठाकर चलता था और आज जब तुम्हारा बुरा वक्त खत्म हो गया तो मैंने तुम्हे नीचे उतार दिया है । इसलिए तुम्हे फिर से चार पैर दिखाई दे रहे । So moral is never loose faith on God. U believe in him, he will look after u forever. ✔जब भी बड़ो के साथ बैठो तो परमात्मा का धन्यवाद , क्योंकि कुछ लोग इन लम्हों को तरसते हैं । ✔जब भी अपने काम पर जाओ तो परमात्मा का धन्यवाद , क्योंकि बहुत से लोग बेरोजगार हैं । ✔परमात्मा का धन्यवाद कहो कि तुम तन्दुरुस्त हो , क्योंकि बीमार किसी भी कीमत पर सेहत खरीदने की ख्वाहिश रखते हैं । ✔ परमात्मा का धन्यवाद कहो कि तुम जिन्दा हो , क्योंकि मरे हुए लोगों से पूछो जिंदगी की कीमत । दोस्तों की ख़ुशी के लिए तो कई मैसेज भेजते हैं । देखते हैं परमात्मा के धन्यवाद का ये मैसेज कितने लोग शेयर करते हैं । किसी पर कोई दबाव नही है ।

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Krishna Singh Jan 25, 2020

महाभारत के युद्ध के दौरान लाखों लोगों का भोजन कौन बनाता था? और उन भोजन बनाने वाले को भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध के बाद क्या आशीर्वाद दिया था। आज से करीब 5000 साल पहले कुरुक्षेत्र के मैदान में महाभारत की लड़ाई लड़ी गई। इस सेना में कौरव पक्ष की 11 लाख और पांडव पक्ष की 7 लाख की सेना करीब 18 दिन तक युद्ध लड़ी थी। और करीब 50 लाख योद्धा रणभूमि पर गए थे और 1 लाख के आसपास दूसरे लोग भी यहां जुटे थे। लेकिन आप सबके मन में एक यक्ष प्रश्न यह होगा कितने लोगों को उस वक्त खाना कौन खिलाता होगा?? और उनके खाने की क्या व्यवस्था होती होगी? युद्ध के शुरुआत में सैनिकों का आंकड़ा 50 लाख था लेकिन हर दिन तमाम सैनिक युद्ध में मारे जाते थे इसलिए हर रोज जीवित रहे सैनिकों के संख्या के अनुसार भोजन की मात्रा में भी फेरफार करनी पड़ती थी। आप यह जानकर आश्चर्य में पड़ जाएंगे भारत में सैनिकों के भोजन की सारी व्यवस्था महाराजा उदुपी की सेना ने संभाली थी। उडुपी जो आज कर्नाटक में है और आज यही कारण है कि उडुपी में बेहद पौराणिक श्री कृष्ण मठ है। महाभारत युद्ध में 3 व्यक्तियों ने प्रत्यक्ष रूप से युद्ध में भाग नहीं लिया था और तठस्थ रहे एक थे बलराम और दूसरे थे भगवान श्री कृष्ण की पत्नी रुक्मणी के भाई रुकमी और इसके अलावा इस युद्ध में एक तीसरे भी व्यक्ति थे जो निष्पक्ष थे और वह थे महाराजा उडुपी। महाभारत के युद्ध में लड़ने के लिए उडुपी के महाराजा को कौरव और पांडव दोनों ने आमंत्रित किया था और युद्ध का आमंत्रण स्वीकार कर उडुपी के महाराजा सेना लेकर तो आए थे फिर यहां आकर उडुपी के महाराजा ने देखा कौरव और पांडवों में दूसरे राजाओं को अपने पक्ष में रखने के लिए काफी खींचतान चल रही है तब उडुपी के महाराजा ने सोचा कि वह युद्ध में भाग नहीं लेंगे फिर उडुपी के महाराजा भगवान श्री कृष्ण को मिले और उनसे कहा कि वासुदेव यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं कुरुक्षेत्र में इकट्ठी हुई सेना के लिए अपने सैनिकों से भोजन प्रबंध की व्यवस्था करवाउँ भगवान श्री कृष्ण उडुपी महाराजा के विचार से बहुत प्रभावित हुए और भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें युद्ध में भोजन व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दे दी। लेकिन एक बात और आश्चर्य है कि महाभारत के युद्ध में जहां लाखों सैनिक थे और हर रोज हजारों सैनिक मरते भी थे लेकिन कभी ना भोजन की कमी हुई ना कभी भोजन को फेंकना पड़ा। 18 दिवस चलने के बाद महाभारत का युद्ध खत्म हो गया पांडवो की विजय हुई और हस्तिनापुर की गद्दी पर महाराजा युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ फिर यही प्रश्न महाराजा युधिष्ठिर के मन में भी था कि आखिर महाभारत की युद्ध के दौरान भोजन का कभी घट बढ़ क्यों नहीं हुआ ? उसके बाद महाराजा युधिष्ठिर ने दरबार में हाजिर उडुपी राज से यही सवाल पूछा फिर महाराजा उडुपी ने उल्टे युधिष्ठिर से सवाल किया कि धर्मराज आपके पास सात लाख सेना थी और कौरव के पास ग्यारह अक्षौहिणी यानी लाख सेना थी, संख्या बल में दुर्योधन की सेना आपसे सवा गुना ज्यादा ताकतवर थी उसके बावजूद भी आप जीते तो उसका श्रेय किसे जाता है? तब युधिष्ठिर ने जवाब दिया भगवान श्री कृष्ण को तब महाराजा उडुपी ने कहा तो जो मैंने भोजन का इतना शानदार प्रबंध किया उसका श्रेय भी भगवान श्री कृष्ण को जाता है... युद्ध के दरमियान मैं रात को शिविर में भगवान श्री कृष्ण के पास गिन कर मूंगफली लेकर जाता था। मेरी दी हुई मूंगफली भगवान श्री कृष्ण खाते थे और जितनी मूंगफली वह खा लेते थे उसका हजार गुना सैनिकों का खाना अगले दिन नहीं बनाना होता था मैं यह समझ लेता था। यानी कि अगर वासुदेव श्री कृष्ण दस मूंगफली खाएं तो इसका मतलब यह है कि अगले दिन मुझे 10,000 सैनिकों का खाना नहीं बनाना है यानी 10000 सैनिक वीरगति को प्राप्त होंगे । कहते हैं इस युद्ध के बाद भगवान श्री कृष्ण ने उडुपी के सभी सैनिकों को यह आशीर्वाद दिया की जाओ पीढ़ी दर पीढ़ी तुम्हारे हाथ में इतनी शानदार पाक कला और इतना शानदार भोजन प्रबंधन होगा कि तुम पूरे विश्व में पाक कला में राज करोगे और आज यही कारण है कि हमें पूरे विश्व के कोनों में उडुपी रेस्टोरेंट और उडुपी के आसपास के रहने वाले रसोइए ही मिलते है।

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My Mandir Jan 25, 2020

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