murlidhargoyal39
murlidhargoyal39 Aug 12, 2017

श्रीराधाजी की अष्ट-सखियाँ

श्रीराधाजी की अष्ट-सखियाँ

जिस प्रकार मानवशरीर में हृदय से जुड़ी धमनियां शुद्ध रक्त लेकर सम्पूर्ण शरीर में फैलाती हैं, उसी प्रकार ये अष्टसखियां श्रीराधा के हृदयसरोवर से प्रेमरस लेकर सर्वत्र प्रेम का विस्तार करती हैं।श्रीराधामाधव को सुख पहुंचाना ही इनके जीवन का आधार है।

निकुंजलीला की संयोजिका हैं अष्टसखियां

निकुंजलीला में श्रीराधामाधव के मधुरमिलन का आयोजन करने वाली अष्टसखियां ही हैं। इनके वाद्यों में वही गीत बजता है, जो युगलस्वरूप श्रीराधाकृष्ण के हृदयतन्त्र में ध्वनित होता है और श्रीराधामाधव के हृदय में गूंजने वाले राग के स्वर ही इनके वाद्यों से निकलते हैं अर्थात् निकुंजलीला में ये अष्टसखियां श्रीराधामाधव की इच्छाशक्ति हैं।

‘अष्टसखियों को श्रीराधा की अपने प्रिय श्रीकृष्ण की सेवा के लिए प्रकट होने वाली अगणित इच्छाओं का स्वरूप भी कहा जा सकता है।’

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Dr. Seema Soni Mar 29, 2020

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Bhanwarlal Jangid Mar 29, 2020

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kailash bharti Mar 29, 2020

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Meena dhiman Mar 29, 2020

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Archana Singh Mar 29, 2020

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ashok singh sikarwar Mar 29, 2020

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Meena dhiman Mar 29, 2020

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