Jagruti patel
Jagruti patel Jan 16, 2021

Jai shree radhe krishna

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कामेंट्स

zala. Hanubha Jan 16, 2021
jay shree radhe krishna ji good night vandan bahenaji🙏🕉️🙏

GOVIND CHOUHAN Jan 16, 2021
JAI SHREE RADHEY RADHEY JIII 🌺 JAI SHREE RADHEY KRISHNA JII 🌺 SUBH RATRI JII 🌹🌹🙏🙏 VERY NICE POST JII 👌👌👌👌

Rajpal singh Jan 17, 2021
jai shree krishna Radhe Radhe ji good night ji 🙏🙏🙏🙏🌷🌷🙏🙏🙏🙏

Anita Sharna Feb 27, 2021

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🙏🌹Vanita Kale Feb 27, 2021

1🙏🚩!!जय शनि देव!! 🚩🚩🚩🚩!!जय हनुमान जी!! 🚩माघ पाेणिैमा की हार्दिक शुभकामनाएं.... !!हरहर महादेव! .•*""*•.¸ ¸.•*""*•.¸ ¸.•*""*•.¸ 🌴सुभप्रभात 🌴 👌“‪👌  बिना सम्पत्ती की कभी 👌Will नही होती, बिना संस्कारों की कभी🌿 Goodwill नही होती,🌻 हमे अपने प्रत्येक कर्म का🌴 फल मिलता जरूर है,🌺 वरना पाप और पुण्य की कोई Deal नहीं होती.. जिस प्रकार घिसने, काटने, आग में तापने-पीटने, इन चार उपायो से सोने की परख की जाती है, वैसे ही त्याग, शील, गुण और कर्म, इन चारों से मनुष्य की पहचान होती है। - ¸.•*""*•.¸ 🌹🎁🌹🎁🌹 ""सदा मुस्कुराते रहिये"" 😊🍀🙏शुभ प्रभात🙏🍀😊 🌹┣━┫α ρ ρ у 🌹 🌹 *ℳỖŘŇĮŇĞ*🌹 ┈┉┅━❀꧁ω❍ω꧂❀━┅┉┈ *आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो* शुभ शनिवार 🌞 Good Morning🌞

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Ravi Kumar Taneja Feb 27, 2021

ॐ श्री शनैश्वराय नमः 🙏🌸🙏 ॐ श्री हनुमंते नमः 🙏🌸🙏 🙏🌹🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏🌹🙏 🌹🌹🌹सुप्रभात स्नेहवंदन जी 🌹🌹🌹 सभी को माघी पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं🌻🌲🌻🌲🌻🌲🌻🌲🌻 ✡प्रभु *बजरंग बली*और न्याय के देवता *शनिदेव* की कृपा आप सभी के ऊपर हमेशा बनी रहे 🙏🌸🙏🌸🙏 🕉सभी का सम्मान करना बहुत अच्छी बात है,🕉 🕉*पर*🕉 🕉आत्मसम्मान के साथ जीना, खुद की पहचान है...!!!🕉 ✡🦚🦢🙏🌹🙏🌹🙏🦢🦚✡ 🕉**तुलसी साथी विपत्ति के* *विद्या विनय विवेक |* *साहस सुकृति सुसत्यव्रत* *राम भरोसे एक ।।* 🕉 🌹अर्थ:- तुलसीदास जी कहते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में ये सात सद्गुण आपकी सहायता/रक्षा करते हैं :-- 🌹आपका ज्ञान 🕉 🌹आपकी विनम्रता🕉 🌹आपकी बुद्धि🕉 🌹आपका साहस🕉 🌹आपके अच्छे कर्म🕉 🌹सच बोलने की आदत🕉 🌹और...🌹 🌹ईश्वर में विश्वास..!!🕉 🔯🏹🦚🦢🙏🌼🙏🌼🙏🦢🦚🏹🔯

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Kp Gupta Feb 27, 2021

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Ratna Nankani Feb 27, 2021

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Ram Ram ji 🙋‍♀️🌹🌹🌹🌹🌹✍️✍️🙏 *पानि जोरी आगे भइ ठाढी,* *प्रभुहि बिलोकि प्रीति अति बाढी।* *केहि बिधी अस्तुति करौ तुम्हारी*, *अधम जाति मैं जड़मति भारी।।* एकटक देर तक उस सुपुरुष को निहारते रहने के बाद बुजुर्ग भीलनी के मुंह से बोल फूटे: "कहो राम! सबरी की डीह ढूंढ़ने में अधिक कष्ट तो नहीं हुआ?" राम मुस्कुराए: "यहां तो आना ही था मां, कष्ट का क्या मूल्य...?" *"जानते हो राम! तुम्हारी प्रतीक्षा तब से कर रही हूँ जब तुम जन्में भी नहीं थे।* यह भी नहीं जानती थी कि तुम कौन हो? कैसे दिखते हो? क्यों आओगे मेरे पास..? *बस इतना ज्ञात था कि कोई पुरुषोत्तम आएगा जो मेरी प्रतीक्षा का अंत करेगा..."* राम ने कहा: *"तभी तो मेरे जन्म के पूर्व ही तय हो चुका था कि राम को सबरी के आश्रम में जाना है।"* "एक बात बताऊँ प्रभु! *भक्ति के दो भाव होते हैं। पहला मर्कट भाव, और दूसरा मार्जार भाव। बन्दर का बच्चा अपनी पूरी शक्ति लगाकर अपनी माँ का पेट पकड़े रहता है ताकि गिरे न... उसे सबसे अधिक भरोसा माँ पर ही होता है और वह उसे पूरी शक्ति से पकड़े रहता है। यही भक्ति का भी एक भाव है, जिसमें भक्त अपने ईश्वर को पूरी शक्ति से पकड़े रहता है। दिन रात उसकी आराधना करता है........* ".....पर मैंने यह भाव नहीं अपनाया। *मैं तो उस बिल्ली के बच्चे की भाँति थी जो अपनी माँ को पकड़ता ही नहीं, बल्कि निश्चिन्त बैठा रहता है कि माँ है न, वह स्वयं ही मेरी रक्षा करेगी, और माँ सचमुच उसे अपने मुँह में टांग कर घूमती है... मैं भी निश्चिन्त थी कि तुम आओगे ही, तुम्हे क्या पकड़ना...।"* *राम मुस्कुरा कर रह गए।* भीलनी ने पुनः कहा: *"सोच रही हूँ बुराई में भी तनिक अच्छाई छिपी होती है न... कहाँ सुदूर उत्तर के तुम, कहाँ घोर दक्षिण में मैं। तुम प्रतिष्ठित रघुकुल के भविष्य, मैं वन की भीलनी... यदि रावण का अंत नहीं करना होता तो तुम कहाँ से आते?"* राम गम्भीर हुए। कहा: *"भ्रम में न पड़ो मां! राम क्या रावण का वध करने आया है?* ......... *अरे रावण का वध तो लक्ष्मण अपने पैर से बाण चला कर कर सकता है।* ......... *राम हजारों कोस चल कर इस गहन वन में आया है तो केवल तुमसे मिलने आया है मां, ताकि हजारों वर्षों बाद जब कोई पाखण्डी भारत के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा करे तो इतिहास चिल्ला कर उत्तर दे कि इस राष्ट्र को क्षत्रिय राम और उसकी भीलनी माँ ने मिल कर गढ़ा था।* ............ *जब कोई कपटी भारत की परम्पराओं पर उँगली उठाये तो काल उसका गला पकड़ कर कहे कि नहीं! यह एकमात्र ऐसी सभ्यता है जहाँ...... एक राजपुत्र वन में प्रतीक्षा करती एक दरिद्र वनवासिनी से भेंट करने के लिए चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करता है।* .......... *राम वन में बस इसलिए आया है ताकि जब युगों का इतिहास लिखा जाय तो उसमें अंकित हो कि सत्ता जब पैदल चल कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे तभी वह रामराज्य है।* ............ *राम वन में इसलिए आया है ताकि भविष्य स्मरण रखे कि प्रतीक्षाएँ अवश्य पूरी होती हैं। राम रावण को मारने भर के लिए नहीं आया मां...!"* सबरी एकटक राम को निहारती रहीं। राम ने फिर कहा: *"राम की वन यात्रा रावण युद्ध के लिए नहीं है माता! राम की यात्रा प्रारंभ हुई है भविष्य के लिए आदर्श की स्थापना के लिए।* ........... *राम निकला है ताकि विश्व को बता सके माँ ,की अवांछनीय इच्छओं को भी पूरा करना ही 'राम' होना है।* .............. *राम निकला है कि ताकि भारत को सीख दे सके कि किसी सीता के अपमान का दण्ड असभ्य रावण के पूरे साम्राज्य के विध्वंस से पूरा होता है।* .............. *राम आया है ताकि भारत को बता सके कि अन्याय का अंत करना ही धर्म है,* ............ *राम आया है ताकि युगों को सीख दे सके कि विदेश में बैठे शत्रु की समाप्ति के लिए आवश्यक है कि पहले देश में बैठी उसकी समर्थक सूर्पणखाओं की नाक काटी जाय, और खर-दूषणों का घमंड तोड़ा जाय।* ......और, .............. *राम आया है ताकि युगों को बता सके कि रावणों से युद्ध केवल राम की शक्ति से नहीं बल्कि वन में बैठी सबरी के आशीर्वाद से जीते जाते हैं।"* सबरी की आँखों में जल भर आया था। उसने बात बदलकर कहा: "बेर खाओगे राम? राम मुस्कुराए, "बिना खाये जाऊंगा भी नहीं मां..." सबरी अपनी कुटिया से झपोली में बेर ले कर आई और राम के समक्ष रख दिया। राम और लक्ष्मण खाने लगे तो कहा: "मीठे हैं न प्रभु?" *"यहाँ आ कर मीठे और खट्टे का भेद भूल गया हूँ मां! बस इतना समझ रहा हूँ कि यही अमृत है...।"* सबरी मुस्कुराईं, बोलीं: *"सचमुच तुम मर्यादा पुरुषोत्तम हो, राम!"* *संकलित*

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