Gauri Singh Rathoud
Gauri Singh Rathoud Jul 2, 2022

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Sudha Mishra Jul 30, 2022

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शुक्रवार के दिन करें मां लक्ष्मी की पूजा, घर की दरिद्रता होगी दूर हर कोई घर में सुख-समृद्धि और धन की वृद्धि के लिए मां लक्ष्मी की उपासना करता है। धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार के दिन पूजा करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। मान्यताओं के मुताबिक, शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा और आरती करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और आर्थिक तंगी से भी मुक्ति मिलती है। धन की देवी मां लक्ष्मी भक्तों की पूजा से प्रसन्न होकर उन्हें सुख-सौभाग्य और धन लाभ का आशीर्वाद देती हैं। कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है तो वह शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा और आरती जरूर करे। करें ये काम बनी रहेगी मां लक्ष्मी की कृपा शुक्रवार के दिन नारायण पाठ करें और मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं। मां लक्ष्मी को लाल बिंदी, सिंदूर, लाल चुनरी और लाल चूड़ियां अर्पित करें। शुक्रवार के दिन लाल रंग के कपड़े पहनें, लाल रंग शुभ माना जाता है। चावल की पोटली बनाकर हाथ में लें और “ॐ श्रीं श्रीये नम:” का पांच माला जाप करें। फिर इस पोटली को तिजोरी में रख दें। ऐसा करने से मां की कृपा प्राप्त हो सकती है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए हाथ में पांच लाल रंग के फूल लेकर माता का ध्यान लगाना चाहिए। मां लक्ष्मी का आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहेगा।

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शिव पुराण के अनुसार भगवती श्री दुर्गा के आविर्भाव की कथा इस प्रकार है- मां दुर्गा की उत्पत्ति........ प्राचीन काल में दुर्गम नामक एक महाबली दैत्य उत्पन्न हुआ। उसने ब्रह्मा जी के वरदान से चारों वेदों को लुप्त कर दिया। वेदों के अदृश्य हो जाने से सारी वैदिक क्रिया बंद हो गई। उस समय ब्राह्मण और देवता भी दुराचारी हो गए। न कहीं दान होता था, न तप किया जाता था। न यज्ञ होता था, न होम ही किया जाता था। इसका परिणाम यह हुआ कि पृथ्वी पर सौ वर्षों तक वर्षा बंद हो गई। तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। सब लोग अत्यंत दु:खी हो गए। कुआं, बावड़ी, सरोवर, सरिता और समुद्र सभी सूख गए। सभी लोग भूख-प्यास से संतप्त होकर मरने लगे। प्रजा के महान दु:ख को देखकर सभी देवता महेश्वरी योग माया की शरण में गए। देवताओं ने भगवती से कहा, ‘‘महामाये! अपनी सारी प्रजा की रक्षा करो। सभी लोग अकाल पडऩे से भोजन और पानी के अभाव में चेतनाहीन हो रहे हैं। तीनों लोकों में त्राहि-त्राहि मची है। मां! जैसे आपने शुम्भ-निशुम्भ, चंड-मुंड, रक्तबीज, मधु-कैटभ तथा महिष आदि असुरों का वध करके हमारी रक्षा की थी, वैसे ही दुर्गमासुर के अत्याचार से हमारी रक्षा कीजिए।’’ देवताओं की प्रार्थना सुनकर कृपामयी देवी ने उन्हें अपने अनंत नेत्रों से युक्त स्वरूप का दर्शन कराया! तदनंतर पराम्बा भगवती ने अपने अनंत नेत्रों से अश्रुजल की सहस्रों धाराएं प्रवाहित कीं। उन धाराओं से सब लोग तृप्त हो गए और समस्त औषधियां भी सिंच गईं। सरिताओं और समुद्रों में अगाध जल भर गया। पृथ्वी पर शाक और फल-मूल के अंकुर उत्पन्न होने लगे। देवी की इस कृपा से देवता और मनुष्यों सहित सभी प्राणी तृप्त हो गए।उसके बाद देवी ने देवताओं से पूछा, ‘‘अब मैं तुम लोगों का और कौन-सा कार्य सिद्ध करूं?’’ देवताओं ने कहा, ‘‘मां! जैसे आपने समस्त विश्व पर आए अनावृष्टि के संकट को हटाकर सब के प्राणों की रक्षा की है, वैसे ही दुष्ट दुर्गमासुर को मारकर और उसके द्वारा अपहृत वेदों को लाकर धर्म की रक्षा कीजिए।’’ देवी ने ‘एवमस्तु’ कहकर देवताओं को संतुष्ट कर दिया। देवता उन्हें प्रणाम करके अपने स्थान को लौट गए। तीनों लोकों में आनंद छा गया। जब दुर्गमासुर को इस रहस्य का ज्ञान हुआ, तब उसने अपनी आसुरी सेना को लेकर देवलोक को घेर लिया। करुणामयी मां ने देवताओं को बचाने के लिए देवलोक के चारों ओर अपने तेजोमंडल की एक चारदीवारी खड़ी कर दी और स्वयं घेरे के बाहर आ डटीं। देवी को देखते ही दैत्यों ने उन पर आक्रमण कर दिया। इसी बीच देवी के दिव्य शरीर से काली, तारा, छिन्नमस्ता, श्रीविद्या, भुवनेश्वरी, भैरवी, बगलामुखी, धूमावती, त्रिपुरसुंदरी और मातंगी ये दस महाविद्याएं अस्त्र-शस्त्र लिए निकलीं तथा असंख्य मातृकाएं भी प्रकट हुईं। उन सबने अपने मस्तक पर चंद्रमा का मुकुट धारण कर रखा था। इन शक्तियों ने देखते ही देखते दुर्गमासुर की सौ अक्षौहिणी सेना को काट डाला। इसके बाद देवी ने दुर्गमासुर का अपने तीखे त्रिशूल से वध कर डाला और वेदों का उद्धार कर उन्हें देवताओं को दे दिया। दुर्गमासुर को मारने के कारण उनका दुर्गा नाम प्रसिद्ध हुआ। शताक्षी और शाकम्भरी भी उन्हीं के नाम हैं। दुर्गतिनाशिनी होने के कारण भी वे दुर्गा कहलाती हैं। !! जय माता दी !! जगत पालन हार है माँ मुक्ति का धाम है माँ! हमारी भक्ति के आधार है माँ, हम सब की रक्षा की अवतार है माँ… !! जय माता दी !!

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Sudha Mishra Jul 29, 2022

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Sudha Mishra Jul 29, 2022

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Anup Kumar Sinha Jul 28, 2022

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Bindu Singh Jul 29, 2022

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