Manoj Vaniya
Manoj Vaniya Apr 5, 2017

🚩ॐ🚩 बाबा बफाॅनी की अमरनाथ यात्रा 🚩ॐ🚩 Amarnath Yatra °°•••°°•••°°•••°°••

🚩ॐ🚩 बाबा बफाॅनी की अमरनाथ यात्रा 🚩ॐ🚩                         Amarnath Yatra  °°•••°°•••°°•••°°••
🚩ॐ🚩 बाबा बफाॅनी की अमरनाथ यात्रा 🚩ॐ🚩                         Amarnath Yatra  °°•••°°•••°°•••°°••
🚩ॐ🚩 बाबा बफाॅनी की अमरनाथ यात्रा 🚩ॐ🚩                         Amarnath Yatra  °°•••°°•••°°•••°°••
🚩ॐ🚩 बाबा बफाॅनी की अमरनाथ यात्रा 🚩ॐ🚩                         Amarnath Yatra  °°•••°°•••°°•••°°••

🚩ॐ🚩 बाबा बफाॅनी की अमरनाथ यात्रा 🚩ॐ🚩
Amarnath Yatra
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भारत मे अजूबो की कोइ कमी नहीं है यहा आज भी कई ऐसे रहस्य है जिनका आज तक कोई खुलासा नहीं हुआ जिनके होने का कारण आज तक कोई नहीं जान पाया। इन्ही मे से एक है अमरनाथ का शिवलिंग।
अमरनाथ भगवान शिव के प्रमुख स्थानो मे से एक है। यहा की प्रमुख बात यह है की यहा पर उपस्थित शिवलीग स्वयं निर्मित होता है।स्वयं निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग या बफाॅनी बाबा भी कहते है।
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---: अमरनाथ धाम :---
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अमरनाथ धाम कश्मीर में श्रीनगर से करीब 135 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।यह स्थान समुद्र तल से 13, 600 फुट की ऊँचाई पर है। यहां पर उपस्थित गुफा की लंबाई 19 मीटर, चौडाई 16 मीटर और ऊंचाई 11 मीटर है इस स्थान पर ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। प्रतिवर्ष अमरनाथ यात्रा के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
इस गुफा को सबसे पहले एक मुस्लिम गड़रिये ने देखा था आज भी अमरनाथ से प्राप्त चढ़ावे का एक चौथाई हिस्सा उस मुस्लिम गड़रिये के परिवार को दिया जाता है।इस अमरनाथ गुफा के रास्ते मे आनेवाली अमरावती नदी के तट पर आगे बढा जाए तो और भी कई गुफाये दिखती है परन्तु वे सभी गुफाये बर्फ से ढकी हुई है ।
यात्रा से पूर्व श्रद्धालु भक्तों को पंजीकरण करवाना होता है। पंजीकरण के लिए भक्तों को कुछ शुल्क जमा करना पड़ता है। सरकार एवं कुछ निजी संस्थाओं द्वारा यात्रियों को यात्रा सुविधाएं दी जाती हैं।यहां जाने के लिए दो रास्ते हैं एक पहलगांव होकर तथा दूसरा बालटाल से, इन स्थानों तक भक्तगण बस या टैक्सी से आते हैं इसके बाद का सफर पैदल तय करना होता है।
पहलगांव से होकर जाने वाला रास्ता बालटाल से सुगम है अत: सुरक्षा की दृष्टि से तीर्थ यात्री इसी रास्ते से अमरनाथ जाना अधिक पसंद करते हैं।
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---: अद्भुत है अमरनाथ शिवलिंग :---
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अमरनाथ शिवलिंग हिम से निर्मित होता है।यह शिवलिंग अन्य शिवलिंगों की भांति सालों भर नहीं रहता है।बल्कि वर्ष के कुछ महीनों में यहां हिम से स्वयं शिवलिंग का निर्माण होता है।स्वयं हिम से निर्मित शिवलिंग होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहा जाता है।
इस शिवलिंग के दर्शन आषाढ़ पुर्णिमा से लेकर रक्षा बंधन तक प्राप्त होते है। कहा जाता है की चंद्रमा के घटने बढ्ने के साथ साथ इस शिवलिंग का आकार भी घटता बढ़ता है।
इस शिवलिंग की खास बात यह है की यह शिवलिंग ठोस बर्फ का बना होता है जबकि जिस गुफा मे यह शिवलिंग स्थित है वहां उपस्थित अन्य बर्फ हिमकण के रूप मे होती है। जिस प्रकार भगवान शिव का शिवलिंग है ठीक उसी प्रकार उसी गुफा मे कुछ दूरी पर भगवान गणेश, पार्वती जी तथा भैरव बाबा के भी ठोस लिंग बनते है।
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---: अमरनाथ धाम की पौराणिक कथा :---
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माता पार्वती शिव के समान ही आदि शक्ति हैं. सृष्टि के आरम्भ से लेकर अंत तक की सभी कथाएं इन्हें ज्ञात है। एक समय की बात है देवी पार्वती के मन में अमर होने की कथा जानने की जिज्ञासा हुई। पार्वती ने भगवान शंकर से अमर होने की कथा सुनाने के लिए कहा।भगवान शंकर पार्वती की बात सुनकर चौंक उठे और इस बात को टालने की कोशिश करने लगे। देवी पार्वती जब हठ करने लगीं तब शिव जी ने उन्हें समझाया कि यह गुप्त रहस्य है जिसे त्रिदेवों के अतिरिक्त कोई नहीं जानता।
यह ऐसी गुप्त कथा है जिसे कभी किसी ने अन्य किसी से नहीं कहा है।इस कथा को जो भी सुन लेगा वह अमर हो जाएगा। देवतागण भी इस कथा को नहीं जानते हैं अत: पुण्य क्षीण होने के बाद उन्हें अपना पद रिक्त कर देना पड़ता है और उन्हें पुन: जन्म लेकर पुण्य संचित करना पड़ता है। ऐसे में तुमसे इस कथा को कहने में मै असमर्थ हूं।
जब देवी पार्वती भगवान शिव के समझाने के बावजूद भी नहीं मानी तब शिव जी ने पार्वती से अमर होने की कथा सुनाने का आश्वासन दिया।और अमर कथा सुनाने के लिए शिव ऐसे स्थान को ढूंढने लगे जहां कोई जीव-जन्तु न हो। इसके लिए उन्हें श्रीनगर स्थित अमरनाथ की गुफा उपयुक्त लगी।
भगवान शिव पार्वती जी को कथा सुनाने के लिए इस गुफा में लाते समय शिव जी ने छोटे छोटे नागो को अनंत नाग मे, कपाल के चन्दन को चंदनबाड़ी मे, पिस्सुओ को पिस्सू टॉप नामक स्थान पर तथा शेषनाग नामक स्थान पर को शेषनाग को ठहरने के लिए कहा। यह स्थल आज भी अमरनाथ यात्रा के दौरान मार्ग मे आते है।
इसके बाद शिव और पार्वती अमरनाथ की गुफा में प्रवेश कर गये। इस गुफा में भगवान शिव माता पार्वती को अमर होने की कथा सुनाने लगे। कथा सुनते-सुनते देवी पार्वती को नींद आ गई और वह सो गईं जिसका शिव जी को पता नहीं चला।शिव अमर होने की कथा सुनाते रहे। इस समय दो सफेद कबूतर और शिव की कथा सुन रहे थे और बीच-बीच में गूं-गूं की आवाज निकाल रहे थे। शिव को लग रहा था कि पार्वती कथा सुन रही हैं और बीच-बीच में हुंकार भर रहीं हैं। इस तरह दोनों कबूतरों ने अमर होने की पूरी कथा सुन ली।
कथा समाप्त होने पर शिव का ध्यान पार्वती की ओर गया जो सो रही थीं। शिव जी ने सोचा कि पार्वती सो रही हैं तब इसे सुन कौन रहा था। शिव की दृष्टि तब कबूतरों के ऊपर गिरी और शिव कबूतरों पर क्रोधित हुए और उन्हें मारने के लिए तत्पर हुए। इस पर कबूतरों ने शिव जी कहा कि हे प्रभु हमने आपसे अमर होने की कथा सुनी है यदि आप हमें मार देंगे तो अमर होने की यह कथा झूठी हो जाएगी। इस पर शिव जी ने कबूतरों को जीवित छोड़ दिया और उन्हें आशीर्वाद दिया कि तुम सदैव इस स्थान पर शिव पार्वती के प्रतीक चिन्ह के रूप निवास करोगे माना जाता है कि आज भी इन दोनों कबूतरों का दर्शन भक्तों को यहां प्राप्त होता है।आज भी कुछ भाग्यवान श्रधालुओ को इस कबूतर के जोडे का दशॅन होता है
अमरनाथ गुफा मे शिव जी ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बता रहे थे तब इसी कथा को सुनकर शुक शिशु संघोजात शुकदेव ऋषि के रूप मे अमर हो गए थे।इसी गुफा मे शिव जी ने माता पार्वती को कथा मे अमरनाथ यात्रा मे आने वाले समस्त स्थलो का वर्णन किया था यही कथा वर्तमान मे अमर कथा नाम से प्रचलित है ।
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---: अमरनाथ धाम का महात्म्य एवं यात्रा का फल :---
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कहते हैं जिस पर भोले बाबा की कृपा होती है वही अमरनाथ धाम पहुंचता है। यहां पहुंचना ही सबसे बड़ा पुण्य है। जो भक्त बाबा हिमानी का दर्शन करता है उसे इस संसार में सर्व सुख की प्राप्ति होती है।व्यक्ति के कई जन्मों के पाप कट जाते हैं और शरीर त्याग करने के पश्चात उत्तम लोक में स्थान प्राप्त होता है।
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---: अमरनाथ यात्रा की शुरवात :---
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अमरनाथ यात्रा करने वालो के लिए दो विकल्प मौजूद है पहला रास्ता पहलगाम से जाता है और दूसरा सोनमर्ग बलटाल से। पहलगाम का रास्ता बालटाल की अपेक्षा सरल है इसलिए सरकार भी दर्शनार्थियों को इसी रास्ते से जाने का सुझाव देती है।क्योकि बलटाल से जानेवाला रास्ता बहुत कठिन है यहा से जाने वालो को कई परेशानीया उठानी पड़ती है तथा इस रास्ते मे जोखिम भी बहुत है इसलिए प्रशासन भी इस रास्ते से न जाने की नसीहत देता है।
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---: पहलगाम से अमरनाथ यात्रा :---
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पहलगाम जम्मू से 315 किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ है । जम्मू तक यात्री बस ट्रेन या रोड किसी भी रास्ते से पहुच सकते है तथा जम्मू से पहलगाम तक के लिए सरकारी पर्यटन की बसे उपलब्ध रहती है।पहलगाम ही वह जगह है जहा से यात्री अपनी यात्रा की शुरवात करते है।
पहलगाम से यात्री वहां पर मौजूद टैक्सी जरिए 16 किलोमीटर की यात्रा करके चंदनबाड़ी पहुचते है।चंदनबाड़ी चेकपोस्ट पर अपनी यात्रा परमीट चेक करवाके गेट से एन्ट्री लेकर अमरनाथ यात्रा के लिए पैदल प्रस्थान करते हैं।अन्य तीर्थ स्थानो की तरह पैदल चलने वालो के लिए यहाँ भी घोड़े, पालकी की सुविधाएं उपलब्ध हैं।चंदनबाड़ी से अमरनाथ गुफा की यात्रा पैदल यात्रा तीन चरणों में की जाती है
1) चंदनबाड़ी से शेषनाग तक
2) शेषनाग से पंचतरणी तक
3) पंचतरणी से अमरनाथ गुफा तक
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---: चंदनबाड़ी से शेषनाग :---
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चंदनबाड़ी से यात्री पिस्सू घाटी की पैदल चड़ाई शुरू करते है वैसे तो प्रथम चरण की यह चड़ाई ज्यादा कठिन नहीं है। परंतु पिस्सू घाटी पर दूसरा पड़ाव शुरू करते ही जोखिम भरा रास्ता शुरू हो जाता है।कहा जाता है की यही पिस्सूघाटी पर देवता और राक्षसो के बीच युद्ध हुआ था जिसमे राक्षसो की हार हुई थी । इसी पिस्सू घाटी से होते हुये यात्री 14 किलोमीटर चलने पर शेषनाग पर पहुचते है। यहाँ का नजारा बहुत ही मनमोहक है।
यही शेषनाग पर नीले पानी की खूबसूरत झील है इस झील मे देखने पर यात्रियो को बादल होने का भ्रम होता है इसकी लंबाई करीब 1.5 किलोमीटर है। कहते है की आज भी इस झील मे शेषनाग रहता है तथा 24 घंटे मे एक बार यह नाग बाहर आता है तथा खुशनसीबों को इसके दर्शन प्राप्त होते है। यह वही पड़ाव है जहा यात्री अपनि पहली रात्रि बिताते है।
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---: शेषनाग से पंचतरणी :---
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दूसरे दिन की यात्रा यही से शुरू होती है करीब 16 किलोमीटर चलने के बाद पंचतरणी आता है इसी रास्ते मे बैववैल टॉप तथा महागुणास दर्रे को पार करना पड़ता है। महागुणास टोप पर पहुचने के बाद सारा रास्ता उतराई का है यहा पर 5 जलधाराए बहती है इसी कारण इसका नाम पंचतरणी पड़ा। यहा का मौसम अपेक्षाकृत ज्यादा ठंडा होता है तथा यहा पर यात्रियो को ऑक्सीजन की कमी महसूस होती है।यही पंचतरणी पडाव पर पहुंच कर यात्री अपनी यात्रा की दूसरी रात बिताते हैं।
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---: पंचतरणी से अमरनाथ गुफा :---
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यहा से अमरनाथ की गुफा केवल 6 किलोमीटर रह जाती है परंतु यहा से आगे के सारे रास्ते मे बर्फ जमी रहती है यहा से यात्रा शुरू करके यात्री अमरनाथ गुफा पहुंच कर यात्री बाबा बफाॅनी के दशॅन करते है, या तो रात्री विश्राम करके अगले दिन नहा कर शिवलिंग के दर्शन कर सकता है।वैसे तो यह यात्रा बहुत कठिन है परन्तु शिवजी के दर्शन होते ही सारी थकान मीट जाती है । तथा दर्शन के बाद यात्री वापसी के लिए अपनी यात्रा शुरू कर देते है वापसी मे पहले दिन ही यात्री शेषनाग तक का सफर कर सकते है।इसी प्रकार यात्री अपनी यात्रा आसानी के पूरी कर पाते है।
इस स्थान पर आकर ईश्वर के प्रति आस्था मजबूत हो जाती है। इस तरह शिवलिंग का निर्माण सदियों से होता चला आ रहा है। यह भगवान के भक्तों को यह विश्ववास दिलाता है कि उनकी श्रद्धा सच्ची है। ईश्वर है तभी यह संसार है।
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pooja kumari Mar 31, 2020

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anurag malik Mar 31, 2020

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Neha Sharma, Haryana Mar 31, 2020

🚩🏵🚩🏵🚩🏵🚩🏵🚩 🌹🙏*जय मां कालरात्रि*🙏🌹 🌹🙏*जय वीर बजरंग बली की*🙏🌹 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚 *या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता! *नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः!! 🌴🌾🌴🌾🌴🌾🌴🌾🌴 *लाल चुनरियां लेके मैया सारी संगत आई है *है दाती हमने तेरे , दर पे झोली फैलाई है *तेरे द्वार सवाली आ गए …….. *माँ खाली झोली भर दो , माँ इच्छा पूरी कर दो 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 *दुनियां के सब छोड़ सहारे , तुझसे लगन लगाई माँ *जग जननी शेरावाली , अब तेरी जोत जगाई माँ *तेरा दर्शन दाती पा गए………. *माँ खाली झोली भर दो , माँ इच्छा पूरी कर दो 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 *है मन्दिरवाली जगदम्बे , अब नजर महर की कर दी ज्यों *हम सारे तेरे बालक है , माँ हाथ शीश पे धर दीजे *जो आये खाली ना गए ………. *माँ खाली झोली भर दो , माँ इच्छा पूरी कर दो 🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼 *तेरी महिमा बहुत सुनी हमने , दाती ना हमको ठुकराना *है करुणा माई थोड़ी करुणा , हम सभी पे माँ बरसाना *भूलन भी शीश झुका गया …….. *माँ खाली झोली भर दो , माँ इच्छा पूरी कर दो 🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵 *माँ खाली झोली भर दो , माँ इच्छा पूरी कर दो 🌸🥀🌸🥀🌸🥀🌸🥀🌸 *नवरात्र का सातवां दिन है। देवी भागवत पुराण के अनुसार, नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि सदैव अपने भक्‍तों पर कृपा करती हैं और शुभ फल देती है। इसलिए मां का एक नाम ‘शुभंकरी’ भी पड़ा। मां अपने भक्‍तों के सभी तरह के भय को दूर करती हैं। मां की कृपा पाने के लिए भक्‍तों को गंगा जल, पंचामृत, पुष्‍प, गंध, अक्षत से मां की पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा मां को गुड़ का भोग लगाएं। देवी कालरात्रि का शरीर रात के अंधकार की तरह काला है। इनकी श्‍वास से अग्नि निकलती है। मां के बाल बिखरे हुए हैं इनके गले में दिखाई देने वाली माला बिजली की भांति चमकती है। इन्हें तमाम आसरिक शक्तियां का विनाश करने वाला बताया गया है। जानिए मां दुर्गा के नौ रूप और उनके मंत्रों के बारे में, इसलिए लिए थे अवतार देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां के तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह विशाल व गोल हैं, जिनमें से बिजली की भांति किरणें निकलती रहती हैं और चार हाथ हैं, जिनमें एक में खडग् अर्थात तलवार है तो दूसरे में लौह अस्त्र है, तीसरा हाथ अभयमुद्रा में है और चौथा वरमुद्रा में मां का वाहन गर्दभ अर्थात गधा है, जो समस्त जीव-जन्तुओं में सबसे ज्यादा परिश्रमी और निर्भय होकर अपनी अधिष्ठात्री देवी कालराात्रि को लेकर इस संसार में विचरण करा रहा है। देवी का यह रूप ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करने वाला है। भद्रकाली शक्तिपीठ जहां हुआ था भगवान कृष्ण का मुंडन, ऐसा है मां का दरबार नवरात्र के सातवें दिन पूजा करने से मां कालरात्रि अपने भक्तों को काल से बचाती हैं अर्थात उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती है। पुराणों में इन्हें सभी सिद्धियों की भी देवी कहा गया है, इसीलिये तंत्र-मंत्र के साधक इस दिन देवी की विशेष रूप से पूजा-अर्चना करते हैं। मां कालरात्रि की पूजा करके आप अपने क्रोध पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। कालरात्रि माता को काली का रूप भी माना जाता है। इनकी उत्पत्ति देवी पार्वती से हुई है। सप्तमी की पूजा सुबह में अन्य दिनों की तरह ही होती है परंतु रात्रि में विशेष विधान के साथ देवी की पूजा की जाती है। देवी भागवत पुराण के अनुसार माता कालरात्रि की पूजा करने वालों के लिए इस जगत में मौजूद कोई भी चीज दुर्लभ नहीं है। माता अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं। आदिशक्ति मां अपने भक्‍तों के कष्‍ट का अतिशीघ्र निवारण कर देती हैं। नवरात्र में बने ये 8 संयोग, बना रहे दुर्गा पूजा को बेहद खास कालरात्रि देवी का सिद्ध मंत्र मां दुर्गा के इस स्वरूप की साधना करते समय इस मंत्र का जप करना चाहिए। *कालरात्रि देवी का सिद्ध मंत्र… *‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:।’ कालरात्रि माताः ध्यान मंत्र यह है… एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी। वामपादोल्ल सल्लोहलता कण्टक भूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥ मां दुर्गा किस वाहन से आएंगी और जाएंगी अबकी बार दुर्गा पूजा का सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले के लिए विशेष महत्वपूर्ण होता है। तंत्र साधना करने वाले इस दिन मध्य रात्रि में देवी की तांत्रिक विधि से पूजा करते हैं। बताया जाता है कि इस दिन मां की आंखें खुलती हैं और भक्तों के लिए देवी मां का दरवाजा खुल जाता है। 🌹🌹*जय माता दी*🌹🌹 🌳💮🍀💐🍁🌳💮🍀💐🍁🌳 *चलो सकारात्मक सोचते है*😀 इस वातावरण में नकारत्मकता कूट कूट कर भर गई है। पर हर निगेटिव घटना के गर्भ में पॉजिटिव भी होता है: 🤔 सोचिए सड़को पर दुर्घटना में होने वाली मृत्यु कम हुई या नही?? 🤔 क्राइम रेट गिरा या नही? 🤔 मोदी जी की स्वच्छता अभियान की कीमत समझ आयी या नही? 🤔 घर पर वैल्यू टाइम बीत रहा या नही?? 🤔 जीवन स्तर और लाइफ स्टाइल के साथ वर्क कल्चर में बदलाव हो रहा या नही?? 🤔 डॉक्टर्स के प्रति रवैया बदल रहा या नही? 🤔 पुरानी भारतीय जीवन शैली के वैज्ञानिक पक्ष समझ आ रहे या नही?? 🤔*मनुष्य *ही सर्वशक्तिमान *है ये भ्रम टूट रहा या नही?* 🤔 प्रदूषण कम हो रहा या नही? 🤔 आध्यत्मिकता बढ़ी या नही? 🤔 सामाजिक होने का महत्व और कमियाँ समझ आ रही या नही?? 🤔 एक दूसरे के प्रति प्यार बढ़ा या नही?? 🙏🙏 *सावधान रहिये। पर पॉजिटिव भी*। 🙏🙏🙏 विश्वास रखें ।। सिकंदर भी भारत में ही हारा था..!!🙏 ⭐💫⭐💫⭐💫⭐💫⭐💫 *”कोशिश करे कि जिँदगी का हर लम्हा* *अपनी तरफ से हर किसी के साथ* *अच्छे से गुजरे,* *…..क्योकि, जिन्दगी नहीं रहती पर अच्छी यादें हमेशा जिन्दा रहती हैं……* 😊 *आप सभी भाई-बहन सदा मुस्कुराते रहिये 😊* 🍃🌹🙏*जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌹🍃 ☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️ *"सेवक बन जाओ"* 🙏🏻🚩🌹*बहुत ही सुंदर संदेश*🌹🚩🙏🏻 *काशी के एक संत उज्जैन पहुंचे उनकी प्रशंसा सुन उज्जैन के राजा उनका आशीर्वाद लेने आए संत ने आशीर्वाद देते हुए कहा - 'सिपाही बन जाओ ।' यह बात राजा को अच्छी नहीं लगी । दूसरे दिन राज्य के प्रधान पंडित संत के पास पहुंचे । संत ने कहा -'अज्ञानी बन जाओ ।' पंडित नाराज होकर लौट आए इसी तरह जब नगर सेठ आया तो संत ने आशीर्वाद दिया -'सेवक बन जाओ ।' *संत के आशीर्वाद की चर्चा राज दरबार में हुई । सभी ने कहा कि यह संत नहीं, कोई धूर्त है । राजा ने संत को पकड़ कर लाने का आदेश दिया संत को पकड़कर दरबार में लाया गया । राजा ने कहा तुमने आशीर्वाद के बहाने सभी लोगों का अपमान किया है, इसलिए तुम्हें दंड दिया जाएगा । यह सुनकर संत हंस पड़े । राजा ने इसका कारण पूछा तो संत ने कहा - इस राज दरबार में क्या सभी मूर्ख हैं ? ऐसे मूर्खों से राज्य को कौन बचाएगा ।' राजा ने कहा' क्या बकते हो ?' *संत ने कहा 'जिन कारणों से आप मुझे दंड दे रहे हैं, उन्हें किसी ने समझा ही नहीं । राजा का कर्म है, राज्य की सुरक्षा करना । जनता के सुख दुख की हर वक्त चौकसी करना । सिपाही का काम भी रक्षा करना है, इसलिए मैंने आपको कहा था कि सिपाही बन जाओ । प्रधान पंडित ज्ञानी होता है । जिस व्यक्ति के पास ज्ञान हो, सब उसका सम्मान करते हैं जिससे वह अहंकारी हो जाता है । यदि वह ज्ञानी होने के अहसास से बचा रहे तो अहंकार से भी बचा रह सकता है । इसलिए मैंने पंडित को अज्ञानी बनने को कहा था । नगर सेठ धनवान होता है । उसका कर्म है गरीबों की सेवा, इसलिए मैंने उसे सेवक बनने का आशीर्वाद दिया था । संत की बातें सुन राजदरबार में मौजूद सभी लोगों की आंखें खुल गयीं । 🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀 *सिर्फ रामायण देखने से कुछ नहीं होगा। *इस वक्त रामायण के 1 पात्र से हमें कुछ सीखना होगा *और उस पात्र का नाम है * कुंभकर्ण *वही एक पात्र है जो हमें कोरोना से बचा सकता है 😀😀😀😂😂😂😀😀😛 *सब लोग पॉजिटिव सोचो *हँसी मजाक करो, चुटकुले भेजो,समाचार ज्यादा मत देखो *आप खुश रहो, दूसरों को भी खुश रखो *इतनी लम्बी छुट्टियां शायद जिंदगी में कभी न आएगी *इसलिये परिवार के साथ भरपूर आनंद लो *हालात ऐसे हैं कि हम आप चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करना हमारा परम कर्तव्य होना चाहिए *इसलिए घर में ही खेलों कूदो मौज मस्ती करो *घर में रहे सुरक्षित रहें,दूसरों को भी सुरक्षित रखें 🇮🇳🙏😷जय हिंद जय भारत🇮🇳😷🙏 *सभी परिवार के सदस्य कृपया ध्यान दें।* 1.कोई भी खाली पेट न रहे 2.उपवास न करें 3.रोज एक घंटे धूप लें 4.AC का प्रयोग न करें 5.गरम पानी पिएं, गले को गीला रखें 6.घर में कपूर वह गूगल जलाएं 7.आप सुरक्षित रहे । घर पर रहे i 8.आधा चम्मच सोंठ हर सब्जी में पकते हुए डालें.. 9.रात को दही ना खायें 10.बच्चों को और खुद भी रात को एक एक कप हल्दी डाल कर दूध पिएं 11. हो सके तो एक चम्मच चवनप्राश खाएं 12.घर में कपूर और लौंग डाल कर धूनी दें 13 सुबह की चाय में एक लौंग डाल कर पिएं 14 फल में सिर्फ संतरा ज्यादा से ज्यादा खाएं 15.आंवला किसी भी रूप में चाहे अचार , मुरब्बा,चूर्ण इत्यादि खाएं। *यदि आप Corona को हराना चाहते हो तो कृप्या करके ये सब अपनाइए। *हाथ जोड़ कर प्रार्थना है आप सबसे, आगे अपने जानने वालों को भी यह जानकारी भेजें। दूध में हल्दी आपके शरीर में इम्यूनिटी को बढ़ाएगा।🙏🏻 *🙏🌹*जय माता की*🌹🙏* *”कष्ट” और “विपत्ति”* *मनुष्य को शिक्षा देने वाले* *श्रेष्ठ गुण हैं* *जो व्यक्ति साहस के साथ* *उनका सामना करते हैं* *वे सदैव सफल* *होते हैं* 👌 🙏*जय श्री राधेकृष्णा*🙏 🥀 *बड़े दौर गुजरे हैं जिंदगी के* *यह दौर भी गुजर जायेगा,* 🥀 *थाम लो पैरों को घरों में* *कोरोना भी थम जाएगा!!* ♻️💨♻️💨♻️💨♻️💨♻️💨♻️ 🍃 *कोरोना के प्रसार को रोकें,* 🍃 *घर पर रहें, सुरक्षित रहें !* ♻️💨♻️💨♻️💨♻️💨♻️💨♻️ 🌺💞*आप सभी भाई-बहन सदैव स्वस्थ, प्रसन्न रहें*💞🌺 🌹🙏*जय मां कालरात्रि*🙏🌹 ☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️ 🌹🙏*शुभ प्रभात् नमन*🙏🌹 *आप सभी भाई-बहनों का हर पल शुभ व मंगलमय हो* ☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️ 🌹🙏*जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌹 ☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️

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Mukesh Kumar Talwar Mar 31, 2020

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🔔 VEERUDA 🔔 Mar 31, 2020

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